The Billionaire Werewolf's Obsession - 3 Sipra Mohanty द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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The Billionaire Werewolf's Obsession - 3

स्वागत है दोस्तों एपिसोड 3 में! पिछले एपिसोड में हमने देखा कि आन्या ने मजबूरी में आकर विक्रांत सहगल के उस अजीबोगरीब तीन साल के कॉन्ट्रैक्ट पर साइन तो कर दिए हैं। लेकिन केबिन से बाहर निकलते ही विक्रांत ने उसे आज रात की तेज़ बारिश से बचने की एक रहस्यमयी सलाह दी है। अब देखते हैं कि इस तूफानी रात में आन्या के साथ क्या होने वाला है... दिल थाम कर बैठिए!

​एपिसोड 3: पहली रात का इम्तिहान


सहगल इंडस्ट्रीज की उस बड़ी और ठंडी बिल्डिंग से बाहर आते ही आन्या के पैर काँपने लगे। उसने दीवार का सहारा लिया। उसका दिल बहुत तेज़ी से धड़क रहा था। उसने अपने हाथों को देखा, जिनसे उसने अभी-अभी उस अजीब कॉन्ट्रैक्ट (Contract) पर साइन (Sign) किए थे।


"तीन साल..." उसने धीरे से खुद से कहा, "तीन साल तक मैं यह जॉब (Job) छोड़ भी नहीं सकती। आखिर वह बॉस (Boss)मुझे इस तरह क्यों देख रहा था? जैसे वह मुझे पहले से जानता हो।"


​तभी उसके बैग (Bag) में रखे phone की घंटी बजी। स्क्रीन पर उसकी माँ का नाम था। आन्या ने एक गहरी साँस ली और phone उठाया, "हाँ माँ?"

​"आन्या! कैसा रहा इंटरव्यू (Interview)? नौकरी मिली या नहीं बेटा?" दूसरी तरफ से माँ ने पूछा।

​माँ की आवाज़ सुनकर आन्या की आँखों में आँसू आ गए। वह अपनी माँ को डराना नहीं चाहती थी, इसलिए उसने झूठ मूठ का मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ माँ... नौकरी मिल गई। सैलरी (Salary) भी बहुत अच्छी है। अब हमारे घर का सारा कर्ज खत्म हो जाएगा।"

"भगवान का शुक्र है! मुझे तुम पर पूरा भरोसा था," माँ की आवाज़ में बहुत खुशी थी।

फोन (Phone) रखने के बाद आन्या को थोड़ी हिम्मत मिली। भले ही उसका बॉस विक्रांत सहगल बहुत अजीब था, लेकिन यह नौकरी उसके परिवार के लिए बहुत ज़रूरी थी।

उधर चौदहवीं (14th) मंजिल के केबिन में, विक्रांत सहगल अभी भी खिड़की के पास खड़ा था। बाहर काले बादल और घने हो चुके थे। तभी केबिन का दरवाज़ा खुला और उसका आदमी, राघव अंदर आया।


राघव ने केबिन का भारी दरवाज़ा धीरे से बंद किया और दबे पाँव विक्रांत की तरफ बढ़ा। उसके चेहरे पर गहरी चिंता और घबराहट साफ दिखाई दे रही थी। वह कुछ पल के लिए रुका, फिर हिम्मत जुटाकर बेहद धीमी आवाज़ में बोला, "सर... आपने वाकई आन्या को नौकरी पर रख लिया? बिना किसी गहरी जाँच-पड़ताल के? लेकिन आज की रात..."

राघव की आवाज़ अचानक काँप गई। उसने अपनी नज़रें झुका लीं और डरते हुए आगे कहा, "सर, आज रात तो पूर्णिमा (Full Moon) है! आसमान में पूरा चाँद खिलने वाला है। आपके अंदर का वह रूप... वह धीरे-धीरे बेकाबू हो रहा है। अगर आज रात आन्या को आपके इस सच का ज़रा सा भी पता चल गया, तो वह खौफ से मर जाएगी। वह एक बेहद आम लड़की है सर, वह इस भयानक रूप को देखकर पूरी तरह डर जाएगी!"

विक्रांत के होंठों पर एक कड़वी मुस्कान आई। उसने अपनी छाती पर हाथ रखा, जहाँ उसका दिल एक खूँखार भेड़िये की तरह ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। रात के साथ-साथ उसका शरीर गर्म होता जा रहा था।

"उसे यहाँ आना ही था, राघव। तुम बस गाड़ी तैयार करो और उस पर नज़र रखो," विक्रांत ने कड़क आवाज़ में आदेश दिया।

शाम के सात बज चुके थे। ऑफिस के सभी एम्प्लॉइज़ (Employees) अपने घर जा चुके थे। आन्या भी अपना सामान समेटकर नीचे लॉबी में पहुँची। बाहर देखते ही उसके होश उड़ गए।

विक्रांत की बात सच थी। बाहर बहुत भयानक बारिश हो रही थी। तेज़ हवाएँ चल रही थीं और हर तरफ अंधेरा था। सड़क पर कोई भी ऑटो (Auto) या कैब (Cab) नहीं थी। आन्या को बचपन से ही ऐसी तूफानी रातों से बहुत डर लगता था। उसके दिमाग में फिर से वही पुराना सपना घूमने लगा—एक घना जंगल, तेज़ बारिश और अंधेरे में चमकती हुई दो आँखें।


तभी उसके ठीक सामने एक बड़ी काली कार आकर रुकी। कार का शीशा नीचे हुआ। पीछे की सीट (Seat) पर विक्रांत सहगल बैठा था। कार की हल्की लाइट में उसका चेहरा किसी मॉडल जैसा हैंडसम और कड़क लग रहा था।

"अंदर आओ, आन्या," विक्रांत ने सीधे उसकी आँखों में देखकर कहा।

"नहीं सर... थैंक यू (Thank you)। मैं कोई ऑटो देख लूँगी," आन्या ने डरते हुए मना किया।

विक्रांत ने ठंडे लहजे में कहा, "इस तूफान में तुम्हें कोई गाड़ी नहीं मिलेगी। मैं अपने ऑफिस की एम्प्लॉई (Employee) को इस तरह सड़क पर भीगने के लिए नहीं छोड़ सकता। मेरा वक्त बर्बाद मत करो, चुपचाप अंदर बैठो।"


आन्या को समझ आ गया कि बहस करने का कोई फायदा नहीं है। वह चुपचाप गाड़ी का दरवाज़ा खोलकर पीछे बैठ गई। गाड़ी जैसे ही आगे बढ़ी, आन्या को विक्रांत के शरीर से जंगल की गीली मिट्टी और बारिश जैसी एक अजीब सी खुशबू आने लगी। कार के अंदर बिल्कुल सन्नाटा था। आन्या खिड़की से बाहर देख रही थी, लेकिन उसे लग रहा था कि विक्रांत लगातार उसे ही देख रहा है।

​अचानक, आसमान में एक बहुत तेज़ बिजली कड़की। आन्या डर के मारे चौंक गई और अनजाने में उसका हाथ विक्रांत के मज़बूत हाथ पर जा टिका। विक्रांत का शरीर बहुत गर्म था, जैसे उसे तेज़ बुखार हो। आन्या ने घबराकर अपना हाथ हटाना चाहा, लेकिन विक्रांत ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया।

"सर... आपका हाथ इतना गर्म क्यों है? और... और यह गाड़ी कहाँ जा रही है? मेरा घर तो इस रास्ते पर नहीं है!" आन्या ने डरते हुए बाहर देखा। गाड़ी शहर के जाने-पहचाने रास्तों को छोड़कर एक सूनसान और घने पेड़ों वाले रास्ते की तरफ बढ़ रही थी।

"सर, प्लीज गाड़ी रोकिए! मुझे घर जाना है!" आन्या चिल्लाई, उसका दिल डर के मारे ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।

विक्रांत ने कोई जवाब नहीं दिया। उसकी साँसें भारी हो चुकी थीं और उसके गले की नसें उभर आई थीं। उसने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। इस बार जब आन्या ने उसकी आँखों में देखा, तो उसके हलक से एक खौफनाक चीख निकल गई। विक्रांत की उन गहरी आँखों का रंग पूरी तरह बदलकर हल्का पीला और भेड़िये की तरह चमकदार हो चुका था!

दोस्तों, आन्या ने विक्रांत के इस डरावने और खौफनाक रूप को अपनी आँखों से देख लिया है, जिसकी आँखें पूर्णिमा की रात को एक खूँखार भेड़िये जैसी चमक रही हैं! क्या आज रात पूर्णिमा का यह खौफनाक सच आन्या को हमेशा के लिए विक्रांत का बंधक बना देगा? क्या विक्रांत अपनी बढ़ती हुई दरिंदगी पर काबू रख पाएगा या आन्या उसकी इस जानलेवा दीवानगी का शिकार बनेगी?
​जानने के लिए पढ़ते रहिये: "द बिलियनयर वेयरवोल्फ्स ऑब्सेशन" (The Billionaire Werewolf's Obsession)