स्वागत है दोस्तों एपिसोड 4 में! पिछले एपिसोड में हमने देखा कि आन्या तूफानी रात में विक्रांत की में फंस चुकी है। जैसे ही गाड़ी शहर छोड़कर एक सूनसान, घने जंगल के रास्ते पर मुड़ती है, आन्या डर जाती है। और जब वह बिजली की कड़कड़ाहट में विक्रांत की आँखों में देखती है, तो उसका रंग बदलकर हल्का पीला और भेड़िये की तरह चमकदार हो चुका होता है! आन्या की चीख निकल जाती है। अब देखते हैं कि इस खौफनाक रात के बाद आन्या के साथ क्या होने वाला है... दिल थाम कर बैठिए!
एपिसोड 4: खौफनाक रात और सुबह का उजाला
"सर... आपकी आँखें! आप... आप कौन हैं?" आन्या की आवाज़ हलक में ही फंस कर रह गई।
कार के अंदर का तापमान अब किसी जलती हुई भट्टी जैसा हो चुका था। विक्रांत ने आन्या का हाथ अभी भी अपनी मज़बूत उंगलियों में कसकर जकड़ा हुआ था। उसकी साँसें इतनी भारी थीं मानो कोई जंगली शिकारी जानवर अपने शिकार पर झपट पड़े। बाहर बादलों की गड़गड़ाहट और तेज़ हो गई। बिजली फिर कड़की, और उस तेज़ रोशनी में आन्या ने देखा कि विक्रांत के
चेहरे के हाव-भाव पूरी तरह बदल रहे थे। उसके कड़क और हैंडसम चेहरे पर एक अजीब सा खूँखारपन आ चुका था।
आन्या का दम घुटने लगा। डर के मारे उसका पूरा शरीर थर-थर काँप रहा था। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर विक्रांत की पकड़ से अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन विक्रांत की ताकत के सामने वह कुछ भी नहीं थी।
"गाड़ी रोकिए... प्लीज गाड़ी रोकिए..." आन्या ने रोते हुए आखरी बार गिड़गिड़ाने की कोशिश की, लेकिन डर का दबाव इतना ज़्यादा था कि उसका सिर ज़ोर से चकराने लगा। चारों तरफ का नज़ारा धुंधला होने लगा, कार के अंदर की खुशबू और भारी लगने लगी, और अगले ही पल आन्या की आँखें बंद हो गईं। वह विक्रांत के मज़बूत काँधे पर ही बेहोश हो गई।
जैसे ही आन्या बेहोश हुई, विक्रांत की पीली, चमकदार आँखों में एक गहरा दर्द और तड़प उभर आई। उसने धीरे से अपनी उंगलियों की पकड़ को ढीला किया और आन्या के चेहरे पर बिखरे बालों को बहुत ही कोमलता से पीछे हटाया।
"मुझे माफ कर देना आन्या... मैं तुम्हें डराना नहीं चाहता था। लेकिन पूर्णिमा की इस रात को मैं खुद पर काबू नहीं रख पाता," विक्रांत ने एक दर्द भरी आवाज़ में कहा, जो किसी इंसान की नहीं बल्कि एक तड़पते हुए भेड़िये की लग रही थी। उसने गाड़ी चला रहे ड्राइवर को धीरे से इशारा किया।
"आन्या... ओ आन्या! उठ बेटा, सुबह के सात बज चुके हैं। तुझे आज ऑफिस भी तो जाना है ना?"
एक जानी-पहचानी, ममता भरी आवाज़ आन्या के कानों में पड़ी। आन्या ने झटके से अपनी आँखें खोलीं और उठकर बैठ गई। उसका दिल अभी भी ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। उसने घबराकर चारों तरफ देखा। वह किसी सूनसान जंगल या आलीशान कार में नहीं थी, बल्कि वह अपने घर के छोटे से कमरे में, अपने ही बेड पर सुरक्षित लेटी हुई थी। बाहर सुबह की ताज़ी और सुनहरी धूप खिड़की से अंदर आ रही थी।
"माँ... मैं... मैं यहाँ कैसे आई?" आन्या ने हांफते हुए अपनी माँ से पूछा, जो उसके लिए चाय का कप लेकर कमरे में आई थीं।
माँ ने मुस्कुराते हुए चाय का कप टेबल पर रखा और कहा,"रात को इतनी भयानक बारिश हो रही थी, मैं तो बहुत डर गई थी। लेकिन तभी रात के करीब बारह बजे एक बहुत बड़ी, आलीशान काली कार हमारे घर के बाहर आकर रुकी। उस गाड़ी का ड्राइवर और एक और आदमी तुझे संभालकर अंदर लाए। उन्होंने कहा कि ऑफिस में काम करते-करते तुम्हारी तबीयत खराब हो गई थी और तुम बेहोश हो गई थीं। उन्होंने तुझे बेड पर लेटाया और चले गए। सचमुच, तेरे ऑफिस के लोग बहुत अच्छे हैं।"
माँ की बातें सुनकर आन्या पूरी तरह हैरान रह गई। उसने अपने हाथों को देखा, उन पर कोई निशान नहीं था। उसने अपने माथे को छुआ, वह बिल्कुल नॉर्मल था।
"क्या... क्या वह सब सिर्फ मेरा एक वहम था? तेज़ बारिश और डर की वजह से क्या मैंने कोई बुरा सपना देखा था?" आन्या ने खुद से सवाल किया। उसके दिमाग में विक्रांत की वो पीली, चमकदार आँखें अभी भी घूम रही थीं। लेकिन सुबह के उजाले में उसे लगने लगा कि शायद कल रात का वो खौफनाक मंज़र सिर्फ उसके दिमाग का कोई धोखा या बुरा सपना था। आखिर कोई इंसान भेड़िया कैसे हो सकता है?
तभी उसकी नज़र घड़ी पर पड़ी। सुबह के सवा सात बज चुके थे!
"हे भगवान! आठ बजे की ड्यूटी (Duty) है। अगर आज लेट (Late) हुई तो वह खड़ूस बॉस (Boss) मुझे नौकरी (Job) से ही निकाल देगा!" आन्या ने अपने सारे डर को एक तरफ फेंका और फटाफट तैयार होने के लिए भागी। कॉन्ट्रैक्ट (Contract) की वजह से वह यह जॉब (Job) छोड़ तो सकती नहीं थी, इसलिए उसे जाना ही था।
ठीक सुबह के आठ बजे, आन्या सहगल इंडस्ट्रीज की इमारत के सामने खड़ी थी। रात का वो डरावना तूफ़ान अब पूरी तरह गायब हो चुका था। चमचमाती धूप में पूरी बिल्डिंग बहुत खूबसूरत लग रही थी। आन्या ने एक गहरी साँस ली, अपने दिल को समझाया और लिफ्ट (Lift) से सीधे चौदहवीं (14th) मंजिल पर पहुँच गई।
जैसे ही वह विक्रांत के पर्सनल केबिन के बाहर बने अपने डेस्क (Desk) पर पहुँची, उसने देखा कि केबिन का काँच का दरवाज़ा थोड़ा खुला हुआ था। आन्या ने डरते-डरते अंदर झाँका।
सामने विक्रांत सहगल बैठा था। वही सफेद कड़क शर्ट (Shirt), ब्लैक ब्लेज़र (Blazer) और चेहरे पर वही पुराना रौब। सुबह की धूप उसके चेहरे पर पड़ रही थी, जिससे उसका मॉडल (Model) जैसा लुक (Look) और भी आकर्षक लग रहा था। उसकी आँखें बिल्कुल सामान्य, गहरी और काली थीं। वह बहुत ही शांत और नॉर्मल (Normal) तरीके से लैपटॉप (Laptop) पर अपनी फाइल्स (Files) चेक कर रहा था, मानो कल रात कुछ हुआ ही न हो।
आन्या को केबिन के बाहर खड़ा देखकर विक्रांत ने अपनी फाइल से नज़रें उठाईं। उसकी कड़क आवाज़ कमरे में गूँजी, "अंदर आओ, आन्या।"
आन्या धीरे-धीरे चलकर उसके टेबल के सामने आकर खड़ी हो गई। उसका दिल अभी भी थोड़ा घबरा रहा था।
"सर... कल रात के लिए थैंक यू (Thank You)। आपकी गाड़ी मुझे घर छोड़ कर आई थी," आन्या ने अपनी उंगलियों को आपस में मरोड़ते हुए कहा। वह विक्रांत के चेहरे के हाव-भाव को समझने की कोशिश कर रही थी।
विक्रांत ने बहुत ही ठंडे और प्रोफेशनल (Professional) लहजे में जवाब दिया, "कल रात तूफ़ान बहुत ज़्यादा था। मेरी एम्प्लॉई (Employee) रास्ते में फंस जाए, यह मुझे पसंद नहीं। अब कल रात की बातें भूलो और काम पर ध्यान दो। यह रही आज की फाइलें (Files), मुझे ये शाम तक पूरी चाहिए।"
विक्रांत का यह नॉर्मल बर्ताव देखकर आन्या को पक्का यकीन हो गया कि कल रात जो कुछ भी हुआ, वह सिर्फ भारी बारिश और उसकी थकावट की वजह से देखा गया एक डरावना सपना था। वह राहत की साँस लेकर अपनी फाइल उठाती है और काम शुरू करने के लिए मुड़ती है।
लेकिन जैसे ही आन्या मुड़कर जाने लगती है, विक्रांत के होंठों पर एक बहुत ही हल्की और रहस्यमयी मुस्कान आ जाती है। वह धीरे से अपने लैपटॉप (Laptop) के पीछे छिपे हुए उस कॉन्ट्रैक्ट (Contract) पेपर को देखता है, जिस पर आन्या के साइन (Sign) थे। विक्रांत की आँखों में कुछ पलों के लिए फिर से वही अजीब सी पीली चमक लौट आती है, जिसे आन्या देख नहीं पाती।
दोस्तों, आन्या को लग रहा है कि कल रात का वो खौफनाक मंज़र सिर्फ एक बुरा सपना था! विक्रांत ने इतनी सफाई से सब कुछ छुपा दिया है कि आन्या उसके नॉर्मल रूप को देखकर धोखे में आ चुकी है। क्या आन्या विक्रांत के इस कड़क और हैंडसम चेहरे के पीछे छुपे असली भेड़िये को पहचान पाएगी? क्या विक्रांत का यह नॉर्मल बर्ताव किसी नए और बड़े जाल की शुरुआत है?
जानने के लिए पढ़ते रहिये: "द बिलियनयर वेयरवोल्फ्स ऑब्सेशन" (The Billionaire Werewolf's Obsession)