**भाग तेरह: दवा का असर और गहराता सस्पेंस**
हवेली के बाहर डॉक्टर मल्होत्रा की गाड़ी के टायर चीखते हुए रुके। राजेश खुद दौड़कर उन्हें सीढ़ियों से ऊपर पल्लवी के कमरे में लेकर आए। कमरे के अंदर का माहौल किसी आईसीयू (ICU) जैसा गंभीर हो चुका था। सुमन पल्लवी का हाथ पकड़े लगातार रोए जा रही थीं और रोहन एक कोने में खामोश खड़ा था।
डॉक्टर मल्होत्रा ने तुरंत अपना स्टेथस्कोप निकाला और पल्लवी की नब्ज़ जांची। उन्होंने उसकी आँखों की पुतलियों को देखा और फिर उसके टखने पर आई उस मोच का मुआयना किया। पूरे पांच मिनट तक कमरे में सिर्फ डॉक्टर के उपकरणों की हल्की आवाज़ें गूंजती रहीं। राजेश और सुमन की सांसें अटकी हुई थीं। आख़िरकार, डॉक्टर मल्होत्रा ने एक राहत भरी सांस ली और अपना स्टेथस्कोप वापस बैग में रखा।
"राजेश, सुमन... शांत हो जाइए, डरने की कोई बात नहीं है," डॉक्टर ने सुमन के कंधे पर हाथ रखते हुए बेहद शांत आवाज़ में कहा। "पल्लवी बिल्कुल ठीक हो जाएगी। असल में इसने पिछले चौबीस घंटों से अन्न का एक दाना नहीं चखा है, जिसकी वजह से इसके शरीर में ग्लूकोज़ का लेवल बहुत कम हो गया था। और सबसे बड़ी बात..." डॉक्टर मल्होत्रा कुछ पल के लिए रुके, उन्होंने पल्लवी के उस मुरझाए हुए चेहरे को देखा। "इसके दिमाग पर किसी बात का बहुत गहरा और भयंकर लोड था। यह बच्ची किसी बहुत बड़े मेंटल शॉक (सदमे) से गुज़र रही है, जिसकी वजह से इसका दिमाग इस तनाव को झेल नहीं पाया और यह बेहोश हो गई। शरीर में जान ही नहीं बची थी।"
सुमन ने रोते हुए पूछा, "तो डॉक्टर... मेरी बच्ची होश में कब आएगी?"
"मैं अभी इसे एक ताकत और नींद का इंजेक्शन दे रहा हूँ," डॉक्टर ने सिरिंज में दवा भरते हुए कहा। "इस इंजेक्शन के बाद यह कुछ घंटों के लिए गहरी और सुकून की नींद सोएगी। जब सुबह इसे होश आए, तो सबसे पहले इसे कुछ हल्का और सेहतमंद खाना खिला देना और जूस पिला देना। शारीरिक रूप से यह कुछ ही दिनों में बिल्कुल ठीक हो जाएगी, लेकिन हाँ... इसे उस मानसिक तनाव से दूर रखना होगा जिसने इसे इस हाल में पहुँचाया है।"
डॉक्टर ने पल्लवी के हाथ में बड़ी ही नरमी से इंजेक्शन लगाया। दवा का असर होते ही पल्लवी के चेहरे की वह खिंचावट थोड़ी कम हुई और वह एक गहरी नींद के आगोश में समा गई।
राजेश डॉक्टर मल्होत्रा को छोड़ने के लिए नीचे ड्रॉइंग रूम तक आए। उन्होंने डॉक्टर की फीस दी और उन्हें विदा किया। जैसे ही डॉक्टर की गाड़ी गेट से बाहर निकली, राजेश ने मुड़कर रोहन की तरफ देखा, जो उनके ठीक पीछे खड़ा था।
"रोहन," राजेश की आवाज़ में अब एक अजीब सी गंभीरता और भारीपन था। "कबीर ने जो कुछ भी कहा... वह सिर्फ एक धमकी नहीं थी। उसके लहज़े में कुछ ऐसा था जो मुझे अंदर से खाए जा रहा है। पल्लवी का कबीर के घर जाना, वहां उसका बेहोश होना, और फिर कबीर का हमारी दौलत को लेकर वह अजीब सा बयान... इस सब के पीछे कोई बहुत बड़ा राज़ छुपा है।"
रोहन ने कबीर को हमेशा एक सच्चे दोस्त के रूप में देखा था, इसलिए उसने कहा, "अंकल, कबीर दिल का बुरा नहीं है। वह कभी पल्लवी को नुकसान नहीं पहुँचाएगा। लेकिन हाँ, वह कुछ तो छुपा रहा है जो वह हमसे या पल्लवी से नहीं कह पा रहा।"
राजेश ने अपनी मुट्ठियां कसीं। उनकी रईस आँखें हवेली की छत को घूरने लगीं। कबीर ने उनकी दी हुई करोड़ों की चेकबुक उठाई थी (उन्हें नहीं पता था कि कबीर ने बाहर जाकर उसे फाड़ दिया है), लेकिन जाते-जाते उसने राजेश के वजूद पर एक ऐसा सस्पेंसिया सवालिया निशान खड़ा कर दिया था, जिसकी गूंज अब इस पूरे खानदान को हिलाने वाली थी।
पल्लवी ऊपर कमरे में सो रही थी, बेखबर इस बात से कि उसका यह पहला और अधूरा इश्क़ अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुका था जहाँ अमीर-गरीबी के अलावा भी कोई बहुत बड़ा खेल खेला जा रहा था।