एली के हाथ में मौजूद वह लेंस कैप जैक की तरफ एक सवालिया निशान बनकर उठा हुआ था। जैक ने चारों तरफ देखा, लाइब्रेरी का वह कोना खाली था, पर उसे ऐसा लग रहा था जैसे शिकागो की हर दीवार उसे देख रही हो।
जैक ने एक लंबी और बोझिल सांस ली। उसने अपनी आँखें बंद कीं और जब खोलीं, तो उनमें वह डर नहीं था जो पिछले एपिसोड्स में दिखता था। अब उन आँखों में एक अजीब सा सुकून था—जैसे किसी ने बहुत भारी बोझ उतार दिया हो।
"एली... चलो मेरे साथ। यहाँ नहीं,
जैक ने धीमी आवाज़ में कहा।
जैक उसे लाइब्रेरी की छत पर ले गया। वहाँ से शिकागो का पूरा मंज़र साफ़ दिखता था—ऊँची इमारतें, धुएं उड़ाती चिमनियाँ और वह शोर, जिसे दबाने के लिए जैक हर रात नकाब पहनता था। ठंडी हवाएं एली के बालों से खेल रही थीं, पर उसकी नज़रें सिर्फ जैक पर टिकी थीं।
जैक ने अपनी शर्ट के ऊपर के दो बटन खोले। एली की सांसें अटक गईं। उसने देखा कि जैक की शर्ट के अंदर वही नीला और लाल लिबास लिपटा हुआ था, जिसकी चमक ढलते सूरज की रोशनी में और भी गहरी लग रही थी।
"मैं नहीं चाहता था कि तुम ये देखो,
जैक ने रेलिंग को पकड़ते हुए कहा।
"इस नकाब को पहनने की एक कीमत चुकानी पड़ती है एली। और वो कीमत है—अकेलापन। जब मैं ये पहनता हूँ, तो मैं 'जैक' नहीं रहता। मैं एक उम्मीद बन जाता हूँ। पर जब मैं इसे उतारता हूँ, तो मैं वही मामूली लड़का हूँ जिसे डर लगता है, जिसे चोट लगती है, और जो अपनी फूफो के दवा के पैसे जोड़ने के लिए दिन-भर धूप में जलता है।
एली की आँखों में आंसू आ गए। उसने धीरे से अपना हाथ जैक के हाथ पर रखा।
"तुमने ये सब अकेले क्यों सहा जैक? तुम मुझसे कह सकते थे।
जैक कड़वाहट से मुस्कुराया।
"कैसे कहता? जिस दिन तुम इस राज का हिस्सा बनती, उसी दिन तुम उन दुश्मनों के निशाने पर आ जातीं जिनसे मैं रोज लड़ता हूँ। इस शहर के अंधेरे बहुत गहरे हैं एली। मैं तुम्हें उन अंधेरों का हिस्सा नहीं बनाना चाहता था।"
जैक ने अपनी डायरी का एक मुड़ा हुआ पन्ना निकाला और एली को थमा दिया। उस पर लिखा था:
"नकाब उतार दिया है मैंने, अब कोई पर्दा नहीं रहा,
तेरी आँखों के सामने, अब मेरा कोई राज न रहा।
चाहे तो मुझे मसीहा कह ले, या एक मामूली सा शायर,
मगर सच तो ये है, कि तेरे बिना ये 'जैक' कुछ न रहा।"
एली ने वो पंक्तियाँ पढ़ीं और फिर जैक को गले लगा लिया। शिकागो की उस ऊँची छत पर, दो तन्हा रूहें एक हो रही थीं। लेकिन जैक को पता था कि यह सुकून बस कुछ ही पलों का है। उसे दूर कहीं एक धमाके की आवाज़ सुनाई दी। शहर को फिर उसकी ज़रूरत थी।
जैक ने अपना नकाब निकाला। उसने एली की तरफ देखा, जैसे उसकी इजाज़त मांग रहा हो।
एली ने उसकी आँखों के आंसू पोंछे और मुस्कुराते हुए कहा,
"जाओ जैक... पूरा शहर तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है। पर याद रखना, इस नकाब के पीछे एक दिल है, जो मेरा है।
जैक ने नकाब पहना और एक पल में छत से छलांग लगा दी। एली वहीं खड़ी उसे हवाओं में जाले बुनते हुए देखती रही। आज पहली बार उसे डर नहीं लग रहा था, क्योंकि अब उसे पता था कि वह जिसे 'मसीहा' समझती थी, वो असल में उसका अपना 'जैक' था। (जारी है)