नकाब और तन्हाई - 5 Shaziya Khan द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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नकाब और तन्हाई - 5

किस्त 5: जिम्मेदारी की पुकार


कैफे की उस मेज पर रखी कॉफी अभी भी गर्म थी। एली अपनी स्केचबुक में डूबी हुई थी, वह उस 'जाले' वाले डिजाइन को और बारीक बना रही थी। लेकिन जैक का ध्यान अब वहां नहीं था। उसकी जेब में रखा स्कैनर लगातार थरथरा रहा था—यह 'कोड रेड' था। शिकागो की 'वेस्ट स्ट्रीट' पर एक बहुत बड़ा हादसा हुआ था, जहाँ एक पुरानी इमारत ढहने की कगार पर थी।


जैक ने एली की तरफ देखा। उसका चेहरा सुकून से भरा था। उसे लग रहा था कि शायद आज उसे वह दोस्त मिल गया है जिसका वह बरसों से इंतजार कर रहा था।


"जैक? क्या हुआ? तुम अचानक इतने खामोश क्यों हो गए?"

एली ने अपनी नजरें स्केचबुक से हटाकर जैक की तरफ कीं।


जैक ने एक कड़वा घूँट भरा। उसे झूठ बोलने से नफरत थी, पर सच बताना मौत जैसा था। उसने घड़ी की तरफ देखा और जल्दी से अपनी जैकेट उठाई।


"एली... मुझे माफ करना। मुझे अभी निकलना होगा। एक बहुत जरूरी काम याद आ गया है, जिसे मैं टाल नहीं सकता।

" जैक की आवाज में घबराहट साफ थी।

एली की मुस्कुराहट थोड़ी फीकी पड़ गई।

"इतनी जल्दी? पर अभी तो बारिश भी नहीं रुकी। क्या सब ठीक है?"


जैक ने उसके कंधे पर धीमे से हाथ रखा—यह एक लेखक का नहीं, एक रक्षक का मजबूत हाथ था।

"सब ठीक हो जाएगा। बस... अपना ख्याल रखना। मैं तुम्हें फिर से इसी लाइब्रेरी में मिलूँगा।"


जैक कैफे से बाहर भागा। बारिश अब और तेज हो चुकी थी। वह एक अंधेरी गली में घुसा, जहाँ कचरे के डिब्बे और पुरानी ईंटें बिखरी थीं। उसने चारों तरफ देखा—वहां कोई नहीं था। उसने अपनी शर्ट के बटन खोले। अंदर का नीला और लाल लिबास बारिश की बूंदों के बीच चमक उठा।


उसने अपना नकाब चेहरे पर चढ़ाया। नकाब चढ़ते ही वह 'जैक' नहीं रहा। वह मसीहा बन गया।

एक लंबी छलांग लगाकर वह इमारत की दीवार पर चढ़ा और शिकागो की धुंधली ऊंचाइयों में ओझल हो गया। हवा उसके कानों के पास सीटी बजा रही थी। बारिश के बीच से गुजरते हुए वह बिजली की तरह वेस्ट स्ट्रीट की तरफ बढ़ा।


जब वह वहां पहुँचा, मंजर खौफनाक था। इमारत का एक हिस्सा गिर चुका था और मलबे के नीचे चीखें दबी थीं। पुलिस की गाड़ियां वहां तक नहीं पहुँच पा रही थीं क्योंकि रास्ता जाम था।


जैक (नकाब में) ने एक भारी लोहे के खंभे को थाम लिया ताकि बाकी हिस्सा न गिरे। उसके हाथ की नसें फूल गईं, पसलियों का पुराना दर्द फिर से उभर आया। उसने अपने जाले फैलाए और मलबे के बीच फंसे एक बच्चे को बाहर निकाला।

लोग ऊपर देख रहे थे, चिल्ला रहे थे—"देखो! वो आ गया!"


मदद करते हुए जैक के जेहन में सिर्फ एक ही ख्याल आ रहा था—एली। वह कैफे में अभी भी उसका इंतजार कर रही होगी। उसने अपनी डायरी में लिखने के लिए एक शेर मन ही मन बुना:


"किसी के घर का चिराग बचाने निकल पड़ता हूँ,
मैं खुद की खुशियों को दांव पर लगा देता हूँ।
वो इंतज़ार करती रही और मैं शहर बचाने चला गया,
इश्क और फर्ज़ की जंग में, मैं फिर से तन्हा रह गया।"


तभी, मलबे के एक कोने से उसे एली की वही 'सफ़ेद ओवरकोट' जैसी झलक दिखी। क्या वो यहाँ आ गई थी? जैक का दिल जोर से धड़का। अगर एली ने उसे इस रूप में देख लिया, तो क्या होगा? (जारी है) 
 लेखक _समीर खान