नकाब और तन्हाई - 7 Shaziya Khan द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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नकाब और तन्हाई - 7

किस्त 7: एक और नकाब (The Second Mask)


लाइब्रेरी के उस ठंडे कोने में वक्त जैसे थम गया था। एली की नज़रें जैक की फटी हुई आस्तीन और उसके जमे हुए खून पर टिकी थीं। जैक को महसूस हुआ कि अगर उसने अगले चंद सेकंड में कुछ नहीं कहा, तो एली सच के इतने करीब पहुँच जाएगी जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं होगी।


जैक ने एक ठंडी और बनावटी हंसी हंसी—एक ऐसी हंसी जिसमें कोई चमक नहीं थी। उसने अपनी आस्तीन को झटके से नीचे किया।


"एली, तुम सच में बहुत बड़ी आर्टिस्ट हो! तुम्हारी कल्पना (Imagination) को तो सलाम करना चाहिए,

जैक ने थोड़ा बेरुखी से कहा।

"कल कैफ़े से मैं इसलिए भागा क्योंकि मुझे अपने मकान मालिक को किराया देना था, वह बहुत सख्त आदमी है। और रही बात इस चोट की...


जैक ने अपनी मेज़ पर पड़ी एक भारी-भरकम पुरानी किताब उठाई।

"कल लाइब्रेरी की शेल्फ साफ करते वक्त ये 'हिस्ट्री ऑफ शिकागो' मेरे हाथ से फिसल गई। इसी के कोने से ये खरोंच आई है। अब तुम ये मत कहना कि ये किताब भी किसी सुपरहीरो ने मुझ पर फेंकी थी?


एली की आँखों में अभी भी शक की एक लकीर थी।

"लेकिन जैक, वो आँखें... कल मैंने उस मलबे के पास जो महसूस किया...


"एली!

जैक ने उसकी बात काटते हुए थोड़ा कड़ा लहज़ा अपनाया।

"ये शिकागो है। यहाँ हर दूसरा शख्स परेशान है और हर तीसरी आँख में दर्द है। तुम जिसे मेरा दर्द समझ रही हो, वो शायद सिर्फ मेरी कम नींद और थकान है। मुझे नहीं पता वो नकाबपोश कौन है, और सच कहूँ तो मुझे कोई दिलचस्पी भी नहीं है।


जैक की बातों में जो कड़वाहट थी, उसने एली को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। उसे लगा कि शायद उसने वाकई ज़्यादा सोच लिया है। वह अपनी स्केचबुक बंद करते हुए थोड़ी शर्मिंदा दिखी।


"आई एम सॉरी जैक... मुझे लगा शायद... खैर, छोड़ो। शायद मैं वाकई पेंटिंग्स में खो गई थी,

एली ने धीमी आवाज़ में कहा और वहां से जाने लगी।


जैक उसे जाते हुए देखता रहा। उसे खुद से नफरत हो रही थी कि उसने एली से इतनी रुखी बात की। उसने उसे सच तो नहीं बताया, पर उसके दिल को चोट ज़रूर पहुँचा दी थी। वह वापस सीढ़ी पर चढ़ गया, लेकिन उसका मन किताबों में नहीं था।


उसने अपनी जेब से एक मुड़ा हुआ कागज़ निकाला और उस पर लिखा:


"तुझे बचाने की खातिर, तुझे ही रुला दिया मैंने,
अपनी हकीकत को एक नए झूठ में छुपा दिया मैंने।
तू समझती है मैं पत्थर दिल हूँ और बेपरवाह हूँ,
पर काश तू जानती कि तुझे खोने के डर से, खुद को ही गंवा दिया मैंने।



रात को जब जैक घर लौटा, तो उसकी फूफो ने उसे एक चिट्ठी दी। वह शिकागो के सबसे बड़े 'डेली न्यूज़' ऑफिस से थी। उन्हें एक ऐसे फोटोग्राफर की तलाश थी जो उस नकाबपोश की साफ़ तस्वीरें खींच सके जिसे लोग 'मसीहा' कह रहे थे।


जैक के सामने एक नया रास्ता खुल गया था। वह खुद अपनी तस्वीरें खींचकर दुनिया को गुमराह कर सकता था और अपनी गरीबी भी मिटा सकता था। लेकिन इसका मतलब था—अपनी ज़िंदगी के साथ एक और खतरनाक खेल खेलना। (जारी है) 
लेखक _समीर खान