नकाब और तन्हाई - 9 Shaziya Khan द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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नकाब और तन्हाई - 9

किस्त 9: सबूत और साया


गली में सन्नाटा था, सिर्फ वैन के टायरों के घिसटने की आवाज़ और जैक की भारी सांसें सुनाई दे रही थीं। जैक (नकाब में) ने एली के दोस्त को सुरक्षित किनारे किया, लेकिन उसका दिल तब बैठा जब उसने एली को दीवार की तरफ बढ़ते देखा। वह ठीक उसी पत्थर की मूर्ति की तरफ देख रही थी जहाँ जैक ने अपना कैमरा सेट किया था।


जैक के पास सिर्फ कुछ सेकंड थे। अगर एली ने वो कैमरा उठा लिया, तो उसमें जैक की नकाब पहने हुए और बिना नकाब वाली (सेटअप करते वक्त की) दोनों तस्वीरें मिल जातीं।


जैक ने फुर्ती से एक जाला कैमरे की तरफ फेंका और उसे खींचकर अपने हाथ में ले लिया। एली ने सिर्फ एक परछाईं को हवा में उड़ते देखा।


"कौन है वहां?"

एली चिल्लाई।


जैक दीवार के साये में दुबक गया। उसने अपनी आवाज़ को थोड़ा भारी और बदला हुआ बनाकर अंधेरे से कहा,

"यहाँ रुकना ठीक नहीं है। अपने दोस्त को लेकर यहाँ से जाओ, पुलिस आती ही होगी।"


एली ठिठक गई। वह आवाज़... उसे जानी-पहचानी लगी, पर वह पूरी तरह यकीन नहीं कर पा रही थी। इससे पहले कि वह कुछ और पूछती, जैक ऊँची इमारतों की ओट में गायब हो चुका था।


अगली सुबह, जैक थका-हारा 'डेली न्यूज़' के दफ्तर पहुँचा। उसके हाथ में कैमरे का मेमोरी कार्ड था। एडिटर ने जब तस्वीरें देखीं, तो उसकी आँखें चमक उठीं।

"शानदार जैक! ऐसी साफ़ तस्वीरें आज तक किसी ने नहीं खींचीं। तुम तो उस 'मसीहा' के साये की तरह उसके पीछे रहते हो।"


जैक को पैसे मिले, पर उसे ऐसा लगा जैसे उसने अपनी रूह का एक हिस्सा बेच दिया हो। वह वहां से सीधा लाइब्रेरी पहुँचा।


एली वहां पहले से मौजूद थी, पर आज वह बहुत परेशान लग रही थी। जैसे ही उसने जैक को देखा, वह दौड़कर उसके पास आई।

"जैक! कल रात... कल रात मैंने उसे फिर देखा। उसने मेरे दोस्त को बचाया। पर जानते हो सबसे अजीब बात क्या थी?"


जैक ने दिल छोटा करके पूछा,

"क्या?"


एली ने जैक की आँखों में गहराई से झांका।


"उसने वही कैमरा इस्तेमाल किया जो कल तुमने मुझे दिखाया था। और जब उसने बात की... तो मुझे लगा जैसे तुम ही उस नकाब के पीछे से बोल रहे हो।"


जैक का चेहरा सफेद पड़ गया। उसने मेज़ पर रखी एक किताब को कसकर पकड़ लिया।


"एली, तुम सदमे में हो। कल रात जो कुछ हुआ, उससे तुम डर गई हो। मैं तो कल रात दफ्तर में अपनी तस्वीरें डेवेलप कर रहा था।"


एली ने एक लंबी सांस ली और अपनी जेब से एक छोटी सी चीज़ निकाली। वह जैक के कैमरे का 'लेंस कैप' (Lens Cap) था, जो कल रात हड़बड़ी में वहीं गिर गया था।


"ये कल रात उसी गली में गिरा था जैक। इस पर तुम्हारा नाम लिखा है,"


एली की आवाज़ अब कांप नहीं रही थी, उसमें एक अजीब सा ठहराव था।


"अब और झूठ मत बोलना। कम से कम मुझसे नहीं।"


जैक के पास अब भागने का कोई रास्ता नहीं था। लाइब्रेरी का वो कोना अचानक बहुत छोटा लगने लगा। उसने अपनी डायरी निकाली और कांपते हाथों से आखिरी पन्ने पर एक शेर लिखा, जिसे उसने एली की तरफ बढ़ा दिया:



"हकीकत और नकाब की जंग अब खत्म हुई,
जो छुपना चाहता था, वो नज़र के सामने है।
डर ये नहीं कि दुनिया मुझे जान जाएगी,
डर ये है कि तू मुझे जानकर, मुझसे ही रूठ जाएगी।"


जैक ने गहरी सांस ली और एली की तरफ देखा। "एली... मैं तुम्हें खतरे में नहीं डालना चाहता था।"(जारी है)
 लेखक _समीर खान