नकाब और तन्हाई - 4 Shaziya Khan द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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नकाब और तन्हाई - 4

किस्त 4: बारिश, कॉफ़ी और अधूरी पेंटिंग



शिकागो का मौसम भी जैक की ज़िंदगी की तरह अनिश्चित है। अभी दोपहर की हल्की धूप खिली थी और देखते ही देखते आसमान स्याह बादलों से घिर गया। लाइब्रेरी की ऊँची खिड़कियों पर बारिश की बूंदें ज़ोर-ज़ोर से थपकियाँ देने लगीं।


जैक अपना काम खत्म कर के बाहर निकलने ही वाला था कि उसने देखा—एली लाइब्रेरी के मुख्य द्वार पर खड़ी है। वह बाहर गिरती मूसलाधार बारिश को देख रही थी और उसके पास छाता नहीं था। उसके हाथ में वही स्केचबुक थी, जिसे उसने अपने ओवरकोट के अंदर बड़ी हिफाज़त से छुपा रखा था ताकि वो भीग न जाए।


जैक अपनी साइकिल की चाबी घुमाता हुआ उसके पास पहुँचा। "शिकागो की बारिश से दोस्ती अच्छी है, पर इसके साथ बाहर जाना थोड़ा मुश्किल है।"


एली मुड़ी और उसे देखकर मुस्कुराई। "लगता है ये शहर चाहता है कि मैं आज यहीं रुककर अपनी पेंटिंग पूरी करूँ। पर यहाँ रोशनी बहुत कम है।"


जैक ने कुछ पल सोचा। पास ही में एक छोटा सा, पुराना 'ब्रुकलिन कैफ़े' था, जहाँ बारिश के दिनों में बहुत कम लोग आते थे। उसने थोड़ी झिझक के साथ कहा, "यहाँ से दो गली छोड़कर एक कॉफ़ी शॉप है। वहां की रोशनी अच्छी है और कॉफ़ी... ठीक-ठाक मिल जाती है। अगर आप चाहें तो?"


एली की आँखों में एक चमक आई। "सिर्फ अगर आप भी साथ चलें तो। मुझे 'ग़ालिब' के कुछ और शेरों का मतलब समझना है।"


कुछ ही मिनटों बाद, दोनों उस छोटे से कैफ़े के कोने वाली मेज़ पर बैठे थे। बाहर बारिश का शोर था और अंदर हल्की जैज़ म्यूज़िक (Jazz music) बज रही थी। मेज़ पर दो गरम कॉफ़ी के कप थे जिनसे धुआं उठ रहा था।


एली ने अपनी स्केचबुक मेज़ पर फैला दी। उसने जैक की तरफ देखते हुए कहा, "पता है जैक, मैं पिछले तीन साल से इस शहर में हूँ, पर आज पहली बार मुझे किसी अजनबी से बात करते हुए डर नहीं लग रहा। आप... आप थोड़े अलग हैं। जैसे आप यहाँ होकर भी कहीं और हों।"


जैक के दिल की धड़कन तेज़ हो गई। वह अपनी कॉफ़ी का कप पकड़कर अपनी उंगलियों की थरथराहट छुपाने लगा। "शायद हम सब नकाब पहने हुए हैं एली। कोई पेंटिंग के पीछे छुपा है, तो कोई... किताबों के पीछे।"


उसने धीरे से एली की स्केचबुक की तरफ हाथ बढ़ाया। उसमें वही खिड़की वाली पेंटिंग थी, लेकिन अब उसमें एक साया (Shadow) भी नज़र आ रहा था—एक ऐसा शख्स जो अंधेरे में बैठा शहर को देख रहा था।


जैक का गला सूख गया। क्या एली ने उसे रात के अंधेरे में देखा था? या यह सिर्फ एक इत्तेफ़ाक था?


उसने बात बदलने के लिए डायरी का एक कोना फाड़ा और उस पर एली के लिए एक शेर लिखा:


"शहर की बारिश ने आज एक मौका दिया है,
तन्हाई के सफर में किसी को साथ दिया है।
तुम रंगों से बातें करती हो, मैं लफ़्ज़ों में खो जाता हूँ,
शायद खुदा ने आज दो मुसाफिरों को मिला दिया है।"



एली ने वो पर्चा पढ़ा और आहिस्ता से मुस्कुराई। उसने अपनी कलम उठाई और उसी पर्चे के नीचे एक छोटा सा जाला (Web) बना दिया—सिर्फ एक आर्टिस्टिक डिज़ाइन के तौर पर।


जैक को लगा जैसे उसका दिल बैठ जाएगा। उसे लगा एली सब जानती है। पर तभी एली बोली, "ये जाला... उन रिश्तों की तरह है जैक, जो हमें अनजाने में एक-दूसरे से जोड़ देते हैं। है ना?"


जैक ने राहत की सांस ली और मुस्कुरा दिया। उस शाम, शिकागो की उस बारिश में, जैक को पहली बार अपनी 'मसीहा' वाली ज़िंदगी भारी नहीं लग रही थी। उसे लग रहा था कि शायद इस नकाब के पीछे भी एक दुनिया मुमकिन है।


लेकिन तभी, जैक की जेब में रखा उसका 'पुलिस स्कैनर' (Police Scanner) हल्का सा थरथराया। शहर के दूसरे कोने में कुछ गलत हो रहा था। (जारी है )
लेखक _समीर खान