अजय जी गाड़ी रोकते ही जंकी जी को सँभालकर Singhania Office के अंदर ले जाते हैं।अंदर कैबिन में Vansh और Agastya दोनों बेचैनी से इंतज़ार कर रहे थे।
जैसे ही उन्होंने अपनी माँ को थोड़ा लड़खड़ाते हुए अंदर आते देखा—Vansh की आँखें फैल गईं।
Vansh (घबराकर):“Maa! Aap aise kyun chal rahi hain? Dad, Mom ko क्या हुआ?”
अजय जी ने उन्हें कुर्सियों पर बैठने का इशारा किया और पूरी घटना धीरे-धीरे बताने लगे—कैसे ड्राइवर कार मारकर भाग गया,कैसे जंकी जी बेहोश थीं,और कैसे एक लड़की ने समय रहते उनकी मदद की।
बात सुनते ही Agastya एक झटके से अपनी कुर्सी से उठ गया और तेज़ कदमों से Tai Maa के पास पहुँच गया।
Agastya (तेज़, गुस्से में):“Tai maa, aap theek ho na? Us driver ko toh main chhodunga nahi!Vansh, call him. Abhi ke abhi!”
Vansh मोबाइल उठाने ही वाला था किअजय जी हल्की मुस्कान के साथ बोले—
Ajay Ji:“Agastya… tumhare डर से वो पहले ही भाग चुका है। Phone भी बंद है उसका.Chhodo, issue इतना बड़ा नहीं है.Point ये है कि Janki सही-सलामत हैं… और समय रहते उस लड़की ने help की।”*
Agastya ने सुन तो सब लिया…लेकिन चेहरा ऐसा रखा जैसे उसे लड़कि, मदद या किसी भी extra बात से कोई फर्क नहीं पड़ता।
उसी समय Vansh ने जंकी जी के हाथ में पकड़े बैग से उनका tiffin निकाला और जैसे ही खोला—
Vansh (बचपने वाली excitement में):“Maa! Bahut भूख लगी है… आपके आलू के पराठों की खुशबू यहाँ तक आ रही है!”
Agastya ने तुरंत Vansh की तरफ गुस्से से देखा।
Agastya:“Behave yourself, Vansh!Ab tum chote nahi रहे. Khana serve karo… Tai maa आराम करेंगी।”
इतना कहकर उसने जंकी जी को आराम से सोफ़े पर बैठा दिया।
Vansh मुंह बनाकर plates निकालने लगा।
दोनों भाइयों ने पराठे का पहला bite लिया—
Agastya (धीमे, impressed):“Wow… yummy.Tai maa, main toh aapke haath ke parathe रोज़ खा सकता हूँ…”
Vansh भी बड़े चाव से खाने लगा और कुछ ही सेकंड बाद बोला—
Vansh:“Maa, aaj parathe बहुत yummy बने हैं…पर आपने इनमें सौंफ क्यों डाली है?”
जंकी जी का सिर झटका।
Janki Ji:“सौंफ?”
Vansh ने पराठा उनकी तरफ बढ़ाया।
Vansh:“Haan ये देखो… aur aap toh कहती थी ना, papa को सौंफ से allergy है?”
जंकी जी ने तुरंत tiffin को ध्यान से देखा…उनका माथा सिकुड़ गया…फिर अचानक—
Janki Ji:“अरे! ये tiffin तो… उस बच्ची का रह गया मेरे पास!”
तीनों एक साथ देखने लगे।
Janki Ji (हल्की हैरानी में):“जब मुझे कमजोरी आ रही थी, वो मुझे अपने बैग से tiffin निकालकर parathe खिलाने लगी…उस वक़्त मैंने ध्यान ही नहीं दिया कि ye mera tiffin नहीं है…”
अयान, Vansh और Agastya—तीनों कुछ पल के लिए चुप हो गए।
पर Agastya ने चेहरे पर कोई expression लाने से साफ इंकार कर दिया।जैसे किसी अंजान लड़की का care देना, उसके लिए zero importance रखता हो।
लेकिन Vansh के चेहरे पर pure wonder था।
और अंदर, बहुत अंदर…Tai Maa के शब्दों ने Agastya के दिल में कहींएक नामहीन, अनजानी सी हलचल छोड़ दी।
जंकी जी अब तक बार-बार उस लड़की का ज़िक्र कर रही थीं…उनके चेहरे पर softness थी… gratitude था… और एक अजीब-सा अपनापन।
Janki Ji (धीमे, मुस्कुराते हुए):“Pata hai… vo kitni प्यारी bacchi thi…Bilkul घबराई नहीं…एकदम संभलकर मुझे car से बाहर निकाला…Itne प्यार से pani pilaya…Aur phir jab weakness hui toh… apne tiffin se parathe खिला दिए…”
Vansh interest से सुन रहा था, और Agastya बस अपने phone को घूर रहा था —जैसे आदमी को परवाह है ही नहीं, पर हर शब्द उसके कान के पास से टिक-टिक कर रहा हो।
Janki Ji (थोड़ी भावुक):“Aajkal kaun karta hai kisi ke liye itna…Uski आँखों में kitni saafiyat thi…Bilkul apne jaisi लग रही थी mujhe…Pata nahi kyu….”
अजय जी हल्की हँसी के साथ बोले—
Ajay Ji:“Lagta hai tumhe apni koi बिछड़ी पिछले जनम की सहेली mil gayi…”
जंकी जी भी धीमे से हँस पड़ीं।
फिर अचानक उनकी भौहें सिकुड़ीं…जैसे कोई बात याद आई हो—
Janki Ji:“Dekho na…Main toh us bacchi ka naam puchna hi भूल गई…”
कमरे में दो सेकंड की चुप्पी छा गई।
Vansh ने हामी भरी—
Vansh:“Haa, ye galat kiya aapne… naam toh puch lena chahiye tha… hum thanks bhi bol dete usse…”
Agastya की उँगलियाँ phone पर रुक गईं।
वो शायद सुनना भी नहीं चाहता था,और शायद… अंदर से सब सुन भी रहा था।
Janki Ji (थोड़ा सा अफ़सोस के साथ):“Itni मदद ki… aur main uska naam तक nahi jaanti…Bas ek cheez yaad hai…Uske haath ka paratha… बिलकुल ghar jaisa…”
Agastya के चेहरे पर हल्की-सी movement आई—जैसे किसी ने उसकी शांत सतह पर कंकड़ फेंक दिया हो।
पर उसने expression तुरंत दबा दिया।
कमरे का माहौल हल्का-सा tense था।साहिल जी, राखी जी और कबीर—तीनों वाणी का इंतज़ार कर रहे थे।
Kabir (बेचैन अंदाज़ में):“Papa… ap वाणी को समझा ke …New scooty दिलवा दो…Itni टूटी हालत me kaise जाएगी office?”
Sahil Ji (थोड़े भारी मन से):“Tumhe pata hai na, Kabir…Vo apne papa ki tarah कितनी self-respect वाली है.Pension ka ek rupiya तक use nahi करती…Mere se scooty लेगी? Bilkul nahi.”
कबीर ने frustration में सिर पकड़ लिया।
तभी पीछे से रोहन अपनी usual nautanki mode में बोला—
Rohan:“To phir is gareeb ko दिलवा do!Meri scooty to jab chahe, jaha chahe bandh ho jati hai…Zara sa चढ़ाव aya nahi ki bas 'main mar gayi' bol deti hai—”
Sahil Ji, Rakha Ji और Kabir (एक साथ चिल्लाते हैं):“SHUT UP, Rohan!!”
रोहन मरे हुए चेहरे के साथ पकड़कर अपने कमरे में चला गया—
Rohan:“Yaha to koi mere dard ko समझता hi nahi…”door closed
इसके बाद साहिल जी ने धीरे से कबीर के कंधे पर हाथ रखा—
Sahil Ji:“Kabir, tu वाणी के साथ है to mujhe jyada tension nahi.Par beta… tu usse थोड़ा नर्मी से बोला कर.Tu uska भाई hai… thodi samjhdari hum tujhse bhi expect kr skte hain"
कबीर frown बनाता हुआ—
Kabir:“Papa! Ghar में वो मेरी ‘बड़ी बहन’।Office में मेरी ‘junior’।Waha me uske sath बिल्कुल waise hi behave karunga jaisa boss karta hai.Aur waise bhi… उसे dekh कौन बोलेगा ki vo meri badi behen hai?Uske सामने to main hi bada lagta hoon!
Aapne maa se late shaadi nahi ki होती,to aaj main सच me उससे bada hota…”
तभी दरवाज़ा खुलने की आवाज़
वाणी घर में दाखिल होती है।थकी हुई… पर चेहरा अब उतना टूटा नहीं।और जैसे ही कबीर का dialogue खत्म होता है—
Vaani (entrance से, हल्की चिढ़ में):“Tum bada bankar bhi kya hi कर लेते—Tab bhi mujhe hi tumhare पीछे-पीछे हर जगह जाना पड़ता…”
कमरा थोड़ी देर के लिए बिल्कुल शांत हो गया।कबीर की आँखें नरम हो गईं।साहिल जी ने राहत की साँस ली।
Flashback
वाणी ही थी जो कबीर को tuition से ले जाती थी ।
कॉलेज की लड़ाईयों में उसकी ढाल बनती थी।
उसकी पहली गर्लफ्रेंड से लेकर उसके दुखभरे breakup तक—वाणी हमेशा उसकी side में खड़ी होती थी।
और आज भी…उसके घर लौटने से कमरे में जैसे life वापस आ गई हो।
वाणी को थोड़ा normal होते देखसाहिल और कबीर—दोनों के चेहरों पर शांति उतर आई।