तुमसे मोहब्बत है - 10 Deepshikha Kedia द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

तुमसे मोहब्बत है - 10


Kabir पूरी रास्ते गाड़ी ड्राइव करता है,

पास बैठी वाणी खिड़की के बाहर देखती रहती है।

ना कोई आँसू,

ना कोई शब्द —

एकदम खाली।

घर का गेट खुलता है।

Rekha ji मुस्कुराते हुए बाहर आती हैं—

Rekha ji (खुश होकर):

“अरे वाणी!

Congratulations beta!”

वो तुरंत उसके मुँह में मिठाई रख देती हैं।

वाणी बस हल्की सी मुस्कान…

बहुत हल्की।

साहिल जी आगे आते हैं,

उसके सिर पर हाथ फेरते हैं—

साहिल जी (गर्व से भरी आवाज़):

“मुझे तुझ पर बहुत proud है,

मेरी गुड़िया रानी…”

वाणी आँखें झुका लेती है।

कुछ कह नहीं पाती।

उधर Kabir एकदम बच्चे जैसी शक्ल बनाकर—

Kabir:

“हाँ, बस… अब सब ध्यान उसी पर।

मैं भी इतने महीनों बाद घर आया हूँ,

उसका कोई मोल नहीं?”

Rekha ji घूरकर उसका कान खींचती हैं—

Rekha ji:

“पहली बात,

हमने तुझे घर से निकाला नहीं,

तू खुद अपनी मर्जी से दूर रहता है!

और आज वाणी के लिए इतना बड़ा दिन है,

तो तू खुश हो — वही काफी है!

ऊपर से… बड़ी बहन है तेरी,

कम से कम उसे चिढ़ा मत कर।”

Kabir ठंडी साँस लेते हुए—

Kabir (अभिमान में):

“मैं चिढ़ता नहीं हूँ उसे!

बड़ी बहन है घर में,

पर office में मैं उसका boss हूँ।

वो मत भूलो!”

तभी Rohan भागता हुआ आता है—

Kabir को गले लगाते हुए—

Rohan (हँसते हुए):

“क्या बात कर रहे थे bro?

और हाँ — अब इस लड़की को थोड़ा control में रखना!

रात–रात भर late आती है,

और बहाना सुनो—

‘ meri scooty ki wajah se late hogayi…’ ”

“Scooty”

शब्द सुनते ही

वाणी का चेहरा बदल जाता है।

वो एक पल को पलक झपकती है…

और फिर—

दबे हुए आँसू उसकी आँखों से बाहर आने लगते हैं।

इतना अचानक कि सब चौंक जाते हैं।

Rekha ji फौरन उसकी तरफ बढ़ती हैं—

Rekha ji:

“अरे, वाणी?!

क्या हुआ बेटा??”

साहिल ji घबरा जाते हैं—

साहिल ji:

“गुड़िया… बता तो सही क्या हुआ?”

लेकिन

वाणी कुछ नहीं कहती।

सिर झुकाती है,

बैग उठाती है…

और चुपचाप बाहर निकल जाती है।

घर का दरवाज़ा धीरे से बंद हो जाता है।

अंदर एक घना सन्नाटा।

सबकी नज़रें Kabir पर।

Kabir गहरी साँस लेता है…

चेहरा सख़्त करके—

Kabir (serious आवाज़ में):

“Office में…

उसकी scooty  को किसी ने जान कर के टकर मार दी, स्कूटी पूरी खत्म है , ओर वो उसकी फर्स्ट इनकम से की स्कूटी थी तो आप समझ सकते है,

जान-बूझकर हुआ है ये सब।”

Rekha और साहिल दोनों चौंक जाते हैं।

दोपहर का समय था।

सड़क पर सूरज की तेज़ धूप तीर की तरह गिर रही थी।

वाणी चुपचाप सड़क के किनारे–किनारे चलती जा रही थी।

उसका दिमाग अभी भी उसी टूटी हुई स्कूटी पर अटका था…

पर दिल—उसे उन दिनों में खींच ले गया जब वो स्कूटी पहली बार लाई थी।

उसे याद आया—

कैसे दादाजी ने दरवाज़े पर आरती उतारी थी,

कैसे पापा ने मुस्कुराते हुए उसके सिर पर हाथ रखा था,

और कैसे खुद वाणी ने गर्व से कहा था—

“अपनी कमाई की चीज़ है,

isko sambhal ke chalungi…”

वाणी के पास हमेशा पैसे थे,

पर उसने कभी भी दादा या पापा की पेंशन नहीं छुई।

उन पैसों से वो हमेशा ग़रीबों की मदद करती थी।

और साहिल जी के घर में रह कर भी उन्हें किराया देती थी।

उसकी ख़ुदारी… उसकी सबसे बड़ी पहचान थी।

वाणी की सोच अचानक भंग हुई।

सड़क के दूसरी ओर एक कार ज़ोर से पेड़ से जा भिड़ी।

चारों तरफ़ भीड़ इकट्ठी—but कोई आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर रहा था।

वाणी दौड़ पड़ी।

कार का दरवाज़ा किसी तरह खोला…

अंदर एक मध्यम आयु की महिला बेहोश पड़ी थीं।

Driver भाग चुका था।

वाणी ने बिना देर किए

उन्हें बाहर निकाला, साइड में बैठाया,

उनके चेहरे पर पानी छींटा—

“Ma’am… सुन पा रही हैं?

Aap theek hain? Aap ka naam kya hai? "

धीरे–धीरे उनके होंठ हिले—

“मे… मेरा नाम… जं… जंकी… सिंग…हा…”

वो बोलते-बोलते रुक गईं।

(हाँ—ये अगस्त्य की ताई माँ, जंकी सिंहानिया ही थीं।)

वाणी ने उन्हें गोद सी थाम लिया,

अपने बैग से तुरंत पानी पिलाया,

और फिर

अपने टिफ़िन से आलू के परांठे निकालकर

नर्म आवाज़ में कहा—

“थोड़ा खा लीजिए…

शुगर गिर रही है शायद।”

जंकी जी बड़ी मुश्किल से एक बाइट ले पाती हैं…

फिर उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आती है।

जंकी जी थोड़ा ठीक महसूस करने लगती हैं।

Janki ji (हौले से):

“बहुत… बहुत प्यारी हो तुम… अपनापन है तुममें…”

“Beta…

Mere bete ka office yahi paas hi hai…

Wahin jaa rahi thi…

पर ड्राइवर ने अचानक कार पेड़ में दे मारी

Phir bhaag gaya…”

वाणी तुरंत खड़ी हो जाती है—

“Chaliye ma’am,

main aapko office chhod deti hoon.”

उसी समय जंकी जी का फोन बजता है।

हाथ काँप रहे थे, इसलिए उन्होंने वाणी को पकड़ाया।

वाणी ने फोन उठाया—

दूसरी तरफ Ajay Singhaniya (जंकी जी के पति) की चिंतित आवाज़—

Ajay ji:

“Hello? Janki?!”

वाणी ने शांत स्वर में पूरी बात बताई।

Ajay ji (हड़बड़ाकर):

“Beta tum wahi ruko!

Main abhi aa raha hoon!

Please… uske saath hi rehna.”

वाणी ने “जी अंकल” कहकर फोन रखा

और जंकी जी का हाथ थामे उन्हें संभालती रही।

कुछ देर बाद…

एक काली SUV ब्रेक मारती हुई सामने आकर रुकती है।

Ajay Singhaniya लपकते हुए उतरते हैं—

अपनी पत्नी को उस हालत में देखकर उनकी सांसें अटक जाती हैं।

“Janki!!

Yeh kya ho gaya?!”

जंकी जी वाणी की ओर इशारा करती हैं—

Janki ji (धीमे से):

“Ye… ye ladki na hoti…

to pata nahi…

main bachti bhi ya nahi…”

Ajay ji की नजर पहली बार वाणी पर पड़ती है—

और उनके चेहरे पर गहरा सम्मान उतर आता है।

जंकी जी ने वाणी का हाथ कसकर पकड़ा और धीरे-धीरे उठते हुए उसे अपनी बाँहों में खींच लिया।

जंकी जी (गले लगाते हुए, भर्राई आवाज़ में)

“Beta… thank you… agar tum nahi hoti toh pata nahi kya hota… Bhagwan ne tumhe mere liye bheja tha…”

उनकी आवाज़ में डर, राहत और स्नेह—तीनों मिला हुआ था।

वाणी एक पल के लिए ठिठक गई… फिर उसकी आँखें नरमी से भर उठीं।

उसने धीरे से कहा—

“Aap theek hain बस, bas wahi important hai ma’am.”

जंकी जी कुछ क्षण तक उसे ऐसे ही पकड़े रहीं, जैसे कोई अपना बरसों बाद मिला हो।

वाणी को उनके आलिंगन में एक अजीब-सा अपनापन महसूस हुआ…

पर फिर उसने खुद को संभाला।

अजय जी अब उनके पास पहुँच चुके थे।

उन्होंने पहले जंकी जी को सँभाला, फिर वाणी की ओर देखा—आँखों में कृतज्ञता साफ थी।

अजय जी:

“Beta, tum na hoti toh… hum soch bhi nahi sakte. Thank you.”

वाणी सिर झुकाकर हल्का-सा मुस्कुरा दी।

पर जैसे ही उसकी नज़र अजय जी के चेहरे पर गई, उसके कदम एक पल को रुक गए।

“Ye chehra…”

दिल में एक धीमी-सी आवाज़ उठी।

उसे लगा उसने ये कभी कहीं देखा है।

फिर उसने तुरंत खुद को टोक दिया—

“Itni badi duniya hai… har insaan ke 7 हमशक्ल होते hain…

Aur inki gaadi, inka attitude… clearly bade ghar ke log hain.

Galat soch rahi hogi main.”

उसने खुद को समझाया और हल्का-सा सिर हिला दिया।

पर अजय जी, जो उसे ध्यान से देख रहे थे…

उनकी नज़रों में एक पल को अजीब-सी पहचान झलकी—

बस एक पल।

फिर उन्होंने खुद को सामान्य कर लिया।

अजय जी:

“Chalo Janki, doctor ko dikhate hain.”

जानकी जी मन कर देती है ओर कहती है बच्चे भूखे हैं इंतजार कर रहे होंगे। उनको खाना खिलते हैं पहले चल के....

जंकी जी जाते-जाते फिर मुड़कर बोलीं—

“Beta, kabhi milna… zaroor.”

वाणी ने बस शालीनता से सिर हिलाया।

लेकिन उसे क्या पता…

ये मुलाक़ात उसकी ज़िंदगी का दिशा बदलने वाली थी