तुमसे मोहब्बत है - 3 Deepshikha Kedia द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तुमसे मोहब्बत है - 3


Singhania ऑफिस के बाहर एक—एक कर के सभी कारें आकर रुकती गईं।दरवाज़े खुलते ही दर्जनों बॉडीगार्ड बाहर निकलकर सीधी लाइन में खड़े हो गए—जैसे किसी राजा के महल में सैनिक तैनात हों।

असिस्टेंट जल्दी से उतरकरसबसे पीछे चल रही काली, शाही कार का दरवाज़ा खोलता है।

और फिर…

उस कार से जो शख्स बाहर आया—उसका अंदाज़ ऐसा था मानो कोई रियासत का शासक अपनी धरती पर कदम रख रहा हो।

उसकी ऊँचाई करीब 6 फीट,कंधे चौड़े जैसे शक्ति का ढांचा,और शरीर में वो ठंडा सन्नाटा थाजो सिर्फ खतरनाक लोगों में पाया जाता है।

उसने गहरे काले रंग का थ्री-पीस सूट पहन रखा था।सूट का कपड़ा इतना नफ़ीस और महँगा थाकि उसकी कीमत भी शायदउसके रुतबे के आगे कम लगती।उस सूट में वह किसी प्राचीन महाराजा के आधुनिक अवतार जैसा दिख रहा था।

उसके चेहरे पर एक अलग ही तेज,एक दिव्य-सा आभामंडल था—जो किसी सूरज की किरण की तरह आँखों में चुभता था।ये तेज़ साधारण नहीं,बल्कि उसके अहंकार, काबिलियत और सत्ता का प्रमाण था।

माथे पर गिरते हुएहल्के बिखरे बाल—उसके व्यक्तित्व को खतरनाक हद तक आकर्षक बना देते थे। उमर 28 ओर अभी तक बैचलर।

पर उसकी सबसे घातक चीज़ थीं—उसकी आँखें।

घोर गहरी,निर्भीक,और आदेश से भरी हुई।

एक नज़र में वो सामने वाले कोबिना कुछ कहे कमज़ोर,बेबस औरउसकी मौजूदगी के आगे झुकने पर मजबूर कर देती थीं।

वो चलता थातो ऐसा लगता था मानोज़िंदगी उस पर नहीं, बल्कि वो ज़िंदगी पर हुकूमत करता है।

ना मुस्कान,ना नरमी।बस एक राजसी शान,एक जन्मजात अधिकार,और एक अभिमान—जो सिर्फ अगस्त्य सिंहानिया के पास हो सकता था।

कोई भी लड़की उसे एक नज़र देख ले—तो उसकी ये राजसी शख्सियत,उसकी चुभती आँखें,और उसका घमंडी साया—उसे उसके प्यार में पागल कर देने के लिए काफी था।

“Boss आ गए हैं!”पीछे से अचानक PA सिस्टम चीख उठा।

ये शब्द ऑफिस के हर कोने में ऐसे दौड़ेजैसे किसी ने बिजली छोड़ दी हो।

अगले ही पल—जो जहाँ था, वहीं से उछलकर सीधा बैठ गया।किसी की फाइल नीचे गिरी,कोई टेबल से टकराया,कोई जल्दबाज़ी में चश्मा उल्टा पहनकर बैठ गया—बस किसी तरह नज़र ना पड़े, डांट ना पड़े।

5th फ्लोर के बड़े कैबिन सेवंश और कमल सिंहानिया (दादाजी) भी बाहर आ गए।

दादाजी जान चुके थे किअब इस ऑफिस की हवा भी अपनी जगह से हिलने वाली है।

और तभी…

लिफ्ट की घंटी बजी।Ting!

वही एक आवाज़ पूरा माहौल जाम कर गई।

लिफ्ट खुलते हीकाले सूट में लिपटावो ख़तरनाक शख़्स बाहर निकला—

अगस्त्य सिंहानिया।

उसके हर कदम की आवाज़मार्बल पर ऐसे गूंज रही थीजैसे किसी सेना का कमांडर युद्धभूमि में उतर रहा हो।

स्टाफ की तो धड़कनें ही रुक गईं।किसी की उंगलियाँ की-बोर्ड पर जमी रह गईं,कोई पैरों के नीचे से जमीन जैसे खो बैठा हो।

अगस्त्य की रफ्तार धीमी थी,पर उसके कदमों का असर तेज—हर कदम किसी की रूह में उतरता।

वो सीधे 5th फ्लोर के केबिन की तरफ बढ़ा।

ऊपर पहुँचते हीपूरा फ्लोर एक साथ साँस रोक कर खड़ा हो गया।

Manager घबराहट में दौड़करउसके केबिन का दरवाज़ा खोलने लगा—

और जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला…

धड़ाम!

एक मोटी, भारी फाइलसीधे उसके चेहरे पर आकर लगी।

इतनी जोर से किउसका चश्मा तिरछा हो गयाऔर हाथ से फाइल नीचे गिरते-गिरते संभली।

पूरे ऑफिस में सन्नाटा छा गया।किसी ने सांस तक लेने की हिम्मत ना की।

Manager ने काँपती आवाज़ में कहा—सर मैंने पु पूरी कोस कोशिश की थी।

अगस्त्य ने सिर्फ एक नज़र उठाई।बस एक।

और वो नजर इतनी ठंडी,इतनी तेज़,इतनी भयानक थी—

कि Manager के पैरों में कँपकँपी साफ़ दिखाई दे रही थी।वहीं खड़े वंश ने धीरे में कहा—

“daddu ये तूफान आने से पहले की शांति है... तूफान आएगा तब क्या ही होगा…”

अगस्त्य  का PA बिना किसी expression के मैनेजर के सामने एक फ़ाइल बढ़ाता है।

अगस्त्य PA:"Your termination letter. आज के बाद आप यहाँ काम नहीं करेंगे."मैनेजर के हाथ काँपते हैं। वह अचानक अगस्त्य के पैरों में गिर जाता है—

मैनेजर (रोते हुए):"Sir please… मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं… मुझे नौकरी से मत निकालिए, sir. I beg you…"

पूरी टीम सन्न। सबको पता है, अगस्त्य को ऐसी ड्रामा बिल्कुल पसंद नहीं।

वह एक कदम पीछे हटता है… और ठंडे, सख़्त स्वर में बोलता है—

अगस्त्य:"भावनात्मक कहानी सुनाने से पहले काम ठीक से कर लेते।"

फिर अगस्त्य की नज़र बाकी टीम पर पड़ती है। उसकी आवाज़ और भारी, और गुस्से से भरी—

अगस्त्य:"आप लोगो ने अब तक अपनी गलतियां पहचान ली होगी जिसके कारण हमारे हाथ से वो प्रोजेक्ट गया ? Bajaj group का छोटा सा ही प्रोजेक्ट था जो आप लोगों से संभाला नहीं गया... नालायक है सारे के सारे... एक ढंकी प्रेजेंटेशन आप लोगों से नहीं दी गई।"

कमरा और भी खामोश। सब निगलते रह जाते हैं।

अगस्त्य का irritation, frustration और authority—एकदम साफ दिखता है।

अगस्त्य की नज़र सीधे वंश पर टिकती है।

अगस्त्य (तेज़ और हुक्म चलाने वाले अंदाज़ में):"मुझे कल तक हमारी नई लीगल टीम चाहिए। और मिस्टर सक्सेना के साथ सभी संपर्क तुरंत खत्म करो।जो आदमी इतना सरल-सा मामला भी नहीं जीत पाया… वह मेरी कंपनी के लायक बिल्कुल नहीं है।"

वंश घबराकर सिर झुका देता है।

तभी बूढ़े मगर सुलझे हुए कमल सिंहानिया (दादा जी) धीरे से बोलते हैं—

कमल सिंहानिया:"बेटा… यह मामला जीतना संभव नहीं है। जो भी हल निकल सकता है वह आपसी समझौते से ही निकलेगा। उनके पास सही काग़ज़ात हैं… जिन पर तुम्हारे परदादा जी के हस्ताक्षर—"

अगस्त्य उन्हें बीच में ही घूरकर रोक देता है।उसकी आँखें गुस्से से लाल हो उठती हैं।

अगस्त्य:"दादाजी… आपके पिता दानवीर थे, पर इसका मतलब यह नहीं कि आप भी आज उन्हीं के तरह दानवीर बन जाएँ।"

वह मेज़ पर दोनों हाथ टिकाकर आगे झुकता है—

अगस्त्य:"उन्हें उस हवेली और ज़मीन की असली कीमत नहीं पता थी। पर हमें पता है।ये सारे गाँव वाले धोखेबाज़ हैं, बेईमान हैं।हमारी ज़मीन पर खेती करके सालों से मुफ़्त का फायदा उठा रहे हैं… और आप उन्हीं की तरह सोचना चाहते हैं?"

कमरा पिन गिरने जितना शांत।

अगस्त्य (तीखे तंज़ में):"मैं उन्हें इस ज़मीन के बदले हर घर को एक करोड़ देने को तैयार हूँ।पर वो चालाक लोग?एक करोड़ के बदले पाँच सौ करोड़ की ज़मीन कैसे छोड़ देंगे?"

कमल सिंहानिया फिर कुछ कहने की कोशिश करते हैं—

कमल सिंहानिया:"पर बेटा—"

अगस्त्य इस बार और भी ऊँची आवाज़ में उन्हें रोक देता है

अगस्त्य:"बस!मुझे इस तरह के मुफ़्तखोर लोग बिल्कुल पसंद नहीं, दादाजी।माना उनके पुरखों ने हमारे घर की मदद की थीवो सबके सब ईमानदार थेपरआज उनके लोग सबके सब बेईमान, फायदा उठाने वाले और धोखेबाज़ निकले!"

कमल सिंहानिया चुप हो जाते हैं।पूरा ऑफिस जड़वत खड़ा है।अगस्त्य की नज़र में सिर्फ—

गुस्सा… ज़िद… और जीतने की सनक।

रात के ठीक 3 बज रहे थे।पूरे ऑफिस में सिर्फ़ टेबल लैम्प्स की हल्की पीली रोशनी और कंप्यूटरों की ब्लू लाइट चमक रही थी।थकान से टूटा हुआ स्टाफ़ कमरे के कोनों में बैठा था।

अगस्त्य अपनी चेयर पर झुका, फाइलों में डूबा था।तभी उसका PA धीरे से अंदर आता है।

PA (हिचकिचाते हुए):“स…सर, क्या पूरे स्टाफ़ को घर भेज दूँ? बहुत रात हो गई है…”

अगस्त्य अपना पेन रोकता है।धीरे-धीरे सिर उठाता है।और PA को ऐसे देखता है जैसे उसने कोई अविश्वसनीय बेवकूफ़ी बोल दी हो।

उसकी गुस्से से भरी, ठंडी नजर कमरे का तापमान गिरा देती है।

PA का गला सूख जाता है।

तभी वंश दरवाज़े के पास आता है और बीच बचाव करते हुए बोलता है—

विनेश:“सबको अभी घर भेज दो। पर कल सुबह ठीक 10 बजे तक सब यहाँ मौजूद हों। बजाज ग्रुप के साथ हम वापस से deal करेंगे...कल सब न्यू प्रेजेंटेशन बनाएंगे।और हाँ… मिस रागिनी से कहना, घर जाने से पहले मिस्टर सक्सेना को मेल कर दे—कि उनकी लीगल कंपनी को हम अपनी टीम से हटा रहे हैं।और मुंबई की सबसे बेहतरीन लॉ फर्म को हायर करो।”

PA जल्दी-जल्दी नोट करने लगता है।

PA:“सर… मुंबई की सबसे बेहतरीन लॉ फर्म तो Damani Groups है… पर—”

अगस्त्य की आँखें तुरंत PA पर टिक जाती हैं।

अगस्त्य (ठंडे, तीखे स्वर में):“पर…?”

PA डर के मारे थूक निगलता है।एक घूँट मुंह में लेते हुए कहता है—

PA:“सर… पाँच साल पहले आपने कोर्ट में दमानियों की बेइज़्ज़ती की थी…इसलिए उन्होंने हमें अपनी ब्लैकलिस्ट में डाल रखा है…”

कुछ सेकंड की भारी चुप्पी।घड़ी की टिक-टिक तक सुनाई देने लगती है।

अगस्त्य कुर्सी से सीधा उठता है।उसके चेहरे पर हार का गुस्सा, भरोसे का टूटा हुआ अभिमान और बदला—तीनों साफ़ दिख रहे थे।

अगस्त्य (दाँत भींचकर):“जितने पैसे फेंकने पड़ें—उनके मुँह पर फेंको।पर मेरी कंपनी के लिए मुझे सबसे अच्छी लीगल फर्म चाहिए।”

उसकी आँखे लाल हो जाती हैं।

अगस्त्य (और ज़ोर से):“आज के दिन मैं दो प्रोजेक्ट हार चुका हूँ…और इसका जुर्माना…सबको…भुगतना पड़ेगा।”

पूरे ऑफिस में बस अगस्त्य की साँसों की आवाज़ गूँजती है—भारी… ठंडी… और आदेश जैसी।