पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 17 Sonam Brijwasi द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 17

कृष्णा जैसे ही घर के अंदर पहुँचा…दरवाज़ा अपने आप पीछे से हल्के से बंद हो गया। घर में एक अजीब सी गर्माहट थी…जैसे सब कुछ पहले जैसा हो गया हो। रसोई से हल्की खुशबू आ रही थी…
और वहाँ एक लड़की लाल साड़ी में खाना बना रही थी।
लंबे बाल…वही चेहरा…वही मुस्कान…
कृष्णा के कदम वहीं रुक गए। उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़का जैसे टूट जाएगा…वो धीरे-धीरे आगे बढ़ा…

वो बोला - 
सिद्धिका…?

लड़की ने धीरे से पलटा…और मुस्कुरा दी।

बोली - 
आ गए आप…

उसकी आवाज़ बिल्कुल वही थी। वो हल्के से हँसी…

वो बोली - 
ये क्या हाल बना रखा है आपने?
पता है मैं कितनी परेशान थी इतने समय…

वो थोड़ा पास आई…

और धीरे से बोली—
अब तो नहीं जाओगे ना……अपनी राधा को छोड़कर?

ये शब्द सुनते ही…कृष्णा के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसकी आँखें फैल गईं।

वो बोला - 
राधा…?

उसके दिमाग में एक साथ सब कुछ टकराने लगा—
👉 सिद्धिका की मौत…
👉 सुनहरी रोशनी…
👉 ट्रेन की यादें…
👉 और ये सामने खड़ी लड़की…

कृष्णा काँपते हुए बोला—
तुम… सिद्धिका हो?

लड़की बस मुस्कुराती रही…लेकिन उसकी आँखों में एक हल्का सा अंधेरा था…जैसे वो जवाब छुपा रही हो। घर के बाहर हवा तेज़ हो गई…और कहीं दूर—

वही आवाज़ फुसफुसाई—
पुनर्जन्म पूरा हुआ है…

🔥 अब असली रहस्य शुरू है—
🩸 क्या ये सच में सिद्धिका है लौट आई?
❤️ या राधा के रूप में कोई नया खेल शुरू हुआ है…?

घर के अंदर हवा अब शांत थी…लेकिन उस शांति के नीचे एक बहुत बड़ा झूठ दबा हुआ था। रसोई में खड़ी लड़की…अब वही “राधा” थी।
👉 साधारण इंसान
👉 शांत जीवन
👉 और एक “सामान्य पत्नी” वाली यादें

उसके दिमाग में बस इतना ही था—
कृष्णा मेरा पति है…

और कुछ नहीं। उसकी असली जिंदगी…
👉 सिद्धिका वाला अंधेरा
👉 वैंपायर की दुनिया
👉 मंदिर की मौत
👉 और पुनर्जन्म का सच

सब कुछ उसके दिमाग से गायब था। जैसे किसी ने जानबूझकर उसे एक नई कहानी में डाल दिया हो। राधा के लिए…कृष्णा बस उसका पति था। जिसके साथ वो “नॉर्मल” जिंदगी जी रही थी…
खाना बनाना…घर संभालना…और प्यार करना।

लेकिन कृष्णा जानता था—
👉 ये सच नहीं है
👉 ये सिर्फ एक बनाया हुआ भ्रम है

उसकी आँखें भारी थीं…वो उसे देखते ही टूट जाता था।

कृष्णा धीरे से बोला—
तुम सच में मुझे याद नहीं करती…?

राधा मुस्कुराई।

वो बोली - 
क्यों नहीं याद करूँगी?
आप मेरे पति हो…

उसकी आवाज़ साफ थी…और सच्ची भी। लेकिन कृष्णा के अंदर सब टूट रहा था। क्योंकि वो जानता था ये “यादें” उसकी नहीं हैं…
किसी ने उसे गढ़ा है।

अंधेरे में वही आवाज़ गूंजी—
इसे नई जिंदगी दी गई है…अब इसे पुरानी दुनिया में मत ले जाओ…।

कृष्णा ने राधा की तरफ देखा…उसके चेहरे पर दर्द था…लेकिन आँखों में एक अजीब सा संकल्प।

वो बोला - 
अगर ये झूठ है…तो मैं इसे सच बना दूँगा…कभी भी सच सामने नहीं आने दूंगा।

राधा रसोई में खाना बनाती रही…मुस्कुराते हुए…बिल्कुल एक सामान्य पत्नी की तरह…

लेकिन कृष्णा जानता था—
👉 ये “सामान्य जिंदगी” बहुत बड़ी कैद है
👉 और असली सिद्धिका अभी भी कहीं अंदर दबी हुई है

🔥 कहानी अब सबसे खतरनाक स्थिति में है—
🩸 एक लड़की जो खुद को इंसान मानती है
❤️ और एक पति जो उसकी असली पहचान जानता है

राधा ने कृष्णा की शर्ट पर लगे धूल और पुराने खून के निशान देख लिए थे…उसके चेहरे पर हल्की चिंता आ गई।

उसने धीरे से पूछा -
ये कपड़े इतने गंदे कैसे हो गए?
और ये चोट कैसे लगी आपको?

बिना ज्यादा सोचे…राधा उसे कमरे में ले गई। जैसे एक पत्नी अपने घायल पति का ख्याल रखती है। उसने धीरे से उसकी शर्ट बदली…
और दूसरी साफ़ शर्ट उसे पहना दी। उसके हाथ बहुत सावधानी से काम कर रहे थे…जैसे उसे डर हो कि कहीं उसे दर्द न हो जाए।
फिर वो दवाई लेकर आई…और उसके घाव पर हल्के हाथ से लगाने लगी।

उसने बहुत धीरे से कहा -
थोड़ा सा जलेगा…

कृष्णा उसे देख रहा था…उसके चेहरे पर दर्द नहीं था। बल्कि एक अजीब सा सुकून था

क्योंकि उसके लिए—
"राधा” अब भी “सिद्धिका” ही थी…

बस यादों से दूर।

वो मन ही मन सोच रहा था—
👉 “वो मेरे साथ है…”
👉 “बस भूल गई है…”
👉 “लेकिन वापस आ जाएगी…”

राधा को ये नहीं पता था कि उसके अंदर कोई और कहानी दबी हुई है…उसके लिए ये बस एक आम जीवन था—
👉 एक पति
👉 एक घर
👉 और एक जिम्मेदारी

लेकिन खिड़की के बाहर…हवा अचानक तेज़ हो गई। और दूर किसी जगह…एक हल्की लाल चमक फिर से जागी…कृष्णा ने राधा की तरफ देखा…और हल्की मुस्कान आई।

उसने धीरे से सोचा -
बस ऐसे ही रहो…यही सुरक्षित है…

क्योंकि कुछ यादें…चाहे जितनी भी दबा दी जाएँ… वो मिटती नहीं हैं। बस इंतज़ार करती हैं जागने का

🔥 अब कहानी दो रास्तों पर खड़ी है—
🩸 एक लड़की जो अपनी असली पहचान से अनजान है
❤️ और एक इंसान जो सच जानते हुए भी झूठ में जी रहा है