पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 8 Sonam Brijwasi द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 8

दिन बीतते गए…और कृष्णा ने अब अपनी पूजा-पाठ और बढ़ा दी थी। सुबह मंदिर…घर में मंत्र…रात को रामायण का पाठ…जैसे वो हर पल सिद्धिका के चारों तरफ एक सुरक्षा कवच बना रहा हो।
सिद्धिका अब पहले से शांत रहने लगी थी…उसकी आँखों की लाल चमक लगभग गायब हो चुकी थी।
लेकिन उसकी कमजोरी बढ़ती जा रही थी।और शायद…अंधकार ये सब देख रहा था।

रात बहुत भारी थी।बाहर तेज़ हवा चल रही थी…और सिद्धिका कृष्णा के पास सोई हुई थी।

अचानक उसने खुद को एक अजीब जगह पर खड़ा पाया।चारों तरफ काला धुआँ…जमीन पर अजीब निशान…और हवा में डरावनी फुसफुसाहटें…सिद्धिका ने नीचे देखा वो अपने असली वैंपायर रूप में थी। लाल आँखें…नुकीले दाँत…और चारों तरफ अंधकार की ऊर्जा।
उसके सामने एक विशाल काली सभा थी…वहाँ बहुत डरावने लोग बैठे थे कुछ आधे इंसान…कुछ राक्षस जैसे…उनकी आँखें चमक रही थीं…और सब उसे घूर रहे थे।

सबसे सामने…एक काले सिंहासन पर कोई बैठा था।उसकी आँखें आग की तरह जल रही थीं…आवाज़ इतनी भारी कि जमीन तक काँप रही थी। शैतानों का राजा।

उसने सिद्धिका को घूरते हुए कहा—
तुम कमजोर पड़ रही हो…एक इंसान के लिए…

सभा में अजीब हँसी गूंजने लगी।

वो बोला - 
तुम भूल रही हो कि तुम कौन हो…तुम्हारे अंदर अंधकार है…।

सिद्धिका चुप खड़ी रही…लेकिन उसके अंदर डर बढ़ता जा रहा था।
शैतानों का राजा सिंहासन से उठा…

और उसकी तरफ आते हुए बोला—
अगर तुमने उस इंसान को नहीं छोड़ा…
तो तुम्हारी आत्मा हमेशा के लिए खत्म कर दी जाएगी…

फिर उसकी आँखें खतरनाक तरीके से चमकीं—

वो बोला - 
और अगर जरूरत पड़ी…
तो अगली बार…हम खुद कृष्णा अग्निहोत्री को खत्म कर देंगे।

सिद्धिका चीख पड़ी -
नहीं!

और उसी पल उसकी नींद खुल गई।वो जोर-जोर से साँस ले रही थी…पूरा शरीर काँप रहा था…

और कृष्णा तुरंत उठ बैठा और बोला—
सिद्धिका! क्या हुआ?

लेकिन वो सपना नहीं था, वो एक चेतावनी थी।
🩸 अब अंधकार सीधे कृष्णा तक पहुँच चुका है…
❤️ और सिद्धिका को फैसला लेना होगा—

सपने से जागने के बाद भी सिद्धिका काँप रही थी…उसकी साँसें तेज़ थीं…और आँखों में डर साफ दिखाई दे रहा था।

कृष्णा ने उसका चेहरा पकड़कर पूछा—
क्या देखा तुमने…?

कुछ पल तक सिद्धिका चुप रही…फिर उसने सब बता दिया।
काली सभा…डरावने लोग…शैतानों का राजा…और कृष्णा को मारने की धमकी…सब कुछ। सुनते-सुनते कृष्णा की आँखों में पहली बार तेज़ गुस्सा उतर आया। उसने मुट्ठी भींच ली।

वो बोला - 
अब हद हो गई है…

उसकी आवाज़ शांत थी…लेकिन भीतर आग जल रही थी।

वो धीरे से बोला—
अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा…
मैं तुम्हें इन अंधेरों के भरोसे नहीं छोड़ सकता।

सुबह होते ही कृष्णा ने कोई देर नहीं की। उसने सिद्धिका को तैयार होने को कहा। कुछ देर बाद…दोनों शहर से दूर जा रहे थे। रास्ते भर सिद्धिका चुप थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कृष्णा क्या करने वाला है।

आखिरकार…वे पहुँचे गंगा नदी के किनारे। सुबह की धूप पानी पर चमक रही थी…घंटियों की आवाज़…मंत्रों की गूंज…और हवा में पवित्रता…जैसे ही वो सीढ़ियों के पास पहुँची सिद्धिका रुक गई।
उसके कदम पीछे हट गए।

वो बोली - 
कृष्णा…मैं… वहाँ नहीं जा सकती…

उसकी आवाज़ काँप रही थी। कृष्णा उसके सामने आकर खड़ा हो गया। उसने उसका हाथ पकड़ लिया।

वो बोला - 
मैं हूँ ना…तुम्हें कुछ नहीं होगा।

सिद्धिका ने डरते-डरते गंगा के पानी की तरफ देखा…

उसके मन में वही डर था—
अगर मैं सच में अंधकार हूँ…तो ये पवित्र जल मुझे जला देगा…।

लेकिन कृष्णा की आँखों में पूरा भरोसा था।

वो बोला - 
अगर भगवान ने तुम्हें मेरे पास भेजा है…तो वो तुम्हें खत्म नहीं करेंगे।

सिद्धिका काँपते हाथों से आगे बढ़ी…और धीरे से अपनी उंगलियाँ गंगा के पानी में डुबो दीं…कुछ होने वाला था…।

 अचानक हवा तेज़ चलने लगी।गंगा का पानी हल्का-हल्का चमक उठा…और अगले ही पल सिद्धिका दर्द से तड़प उठी।

आहhh…!

वो पीछे हट गई…और कृष्णा ने देखा सिद्धिका का शरीर बदलने लगा था। उस की आँखें फिर से गहरी लाल हो गईं…नुकीले लंबे दाँत बाहर आ गए…उसकी लाल साड़ी हवा में लहराने लगी…
और उसकी पीठ से बड़े-बड़े काले पंख निकल आए। गंगा घाट पर मौजूद लोग डरकर पीछे हटने लगे।

लोग बोले - 
ये… ये क्या है?
कोई शैतानी शक्ति है!

कुछ लोग मंत्र पढ़ने लगे…कुछ मोबाइल निकालकर देखने लगे…
सबकी नज़रें अब सिर्फ सिद्धिका पर थीं। कृष्णा तुरंत उसके पास गया। उसने बिना डरे उसका हाथ पकड़ लिया…और उसे जल्दी से घाट के किनारे से दूर ले गया। सिद्धिका की साँसें तेज़ थीं…उसकी आँखों में डर था।

उसने काँपती आवाज़ में कहा -
मेरी… शक्तियाँ वापस आ रही हैं…

कृष्णा समझ गया गंगा जल ने उसे खत्म नहीं किया…बल्कि उसके अंदर दब चुकी शक्तियों को जगा दिया। ये संकेत था सिद्धिका अब पूरी तरह कमजोर नहीं रही।
साइड में सुनसान जगह पर खड़ी सिद्धिका अब अपने पूरे असली रूप में थी—
🩸 लाल आँखें…
🩸 लंबे नुकीले दाँत…
🩸 हवा में उड़ते काले पंख…
🩸 और लाल साड़ी में डरावनी लेकिन बेहद खूबसूरत…

लेकिन…कृष्णा की आँखों में डर नहीं था।वो उसे वैसे ही देख रहा था…जैसे हमेशा देखता था।

उसने धीमे से पूछा -
अब तो डर लग रहा होगा ना…?
अब दिख गया ना… मैं क्या हूँ…।

कृष्णा धीरे-धीरे उसके करीब आया…

और उसके काले पंखों को देखकर भी बिना हिचके बोला—
तुम जैसी भी हो…मेरी पत्नी हो।

सिद्धिका वहीं जड़ हो गई।उसकी आँखों की लाल चमक हल्की काँपी…क्योंकि पहली बार किसी ने उसके असली रूप को देखकर भी उसे अपनाया था।

 अब कहानी और खतरनाक हो चुकी है—
🩸 सिद्धिका की शक्तियाँ वापस लौट रही हैं…
❤️ लेकिन कृष्णा का प्यार भी उतना ही मजबूत हो चुका है…

गंगा घाट के किनारे…सिद्धिका अपने असली रूप में खड़ी थी।
उसके काले पंख हवा में हल्के फैल रहे थे…लाल आँखों में बेचैनी थी…और कृष्णा अब भी उसके सामने बिना डरे खड़ा था।
तभी चारों तरफ की हवा अचानक बदल गई।तेज़ हवाएँ चलने लगीं…आसमान पर काले बादल छा गए। गंगा का शांत पानी भी उफान लेने लगा। सिद्धिका का चेहरा तुरंत बदल गया। उसने ऊपर आसमान की तरफ देखा…

और धीमे से फुसफुसाई—
नहीं…

अचानक पूरा घाट जैसे अंधेरे में डूब गया।लोग डरकर भागने लगे…
घंटियों की आवाज़ हवा में खो गई। फिर आसमान में तीन काले साये दिखाई दिए। वे इंसान नहीं थे…तीन वैंपायर हवा में उड़ते हुए नीचे उतर रहे थे। उनके बड़े काले पंख थे आँखें खून जैसी लाल…
और चेहरों पर खतरनाक मुस्कान।

धड़ाम…!
तीनों सिद्धिका के सामने आकर उतरे। उनके आते ही आसपास की हवा और भारी हो गई।
उनमें से एक आगे बढ़ा…।

उसकी आवाज़ गहरी और डरावनी थी बोला—
आखिरकार मिल ही गई तुम…

दूसरा कृष्णा को घूरते हुए हँसा और बोला—
तो ये है वो इंसान…जिसके लिए तुमने अपने कबीले को छोड़ दिया…।

तीसरी… जो शायद सबसे ताकतवर थी…

वो सिद्धिका के करीब आई और बोली—
चलो हमारे साथ…राजा तुम्हें वापस बुला रहे हैं।

 सिद्धिका पीछे हटी सिद्धिका तुरंत कृष्णा के पास आकर खड़ी हो गई। उसकी आँखों में डर था…क्योंकि वो जानती थी ये साधारण वैंपायर नहीं थे। कृष्णा ने सिद्धिका को अपने पीछे कर लिया।

वो बोला - 
ये कहीं नहीं जाएगी।

उसकी आवाज़ शांत थी…लेकिन आँखों में अडिग जिद थी।
तीनों वैंपायर हँस पड़े।

एक बोला - 
एक इंसान…हमसे लड़ने की बात कर रहा है?

पहला वैंपायर गुर्राया—
सिद्धिका अब हमारी है…अगर वो नहीं आई…
तो हम तुम्हारा खून बहाकर उसे मजबूर कर देंगे।


सिद्धिका की लाल आँखें चमक उठीं…उसके काले पंख पूरी तरह फैल गए…और कृष्णा ने अपनी कलाई का लाल धागा कसकर पकड़ लिया।

🔥 अब पहली बार—
🩸 कृष्णा सीधे वैंपायरों के सामने खड़ा है…
❤️ और सिद्धिका को चुनना होगा—

अपना अंधकार…या अपना प्यार…

क्या सिद्धिका उनके साथ जाएगी?
या कृष्णा के लिए अपने ही कबीले से लड़ पड़ेगी…?