पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 9 Sonam Brijwasi द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 9

गंगा किनारे तूफानी हवाएँ चल रही थीं…आसमान पूरी तरह काला पड़ चुका था। तीनों वैंपायर सामने खड़े थे खतरनाक… शक्तिशाली… और गुस्से में। पहला वैंपायर आगे बढ़ा। उसकी लाल आँखें सीधे सिद्धिका पर टिकी थीं।

वो बोला - 
हम आखिरी बार कह रहे हैं…हमारे साथ चलो।
वरना इस इंसान की मौत तुम्हारी आँखों के सामने होगी।

सिद्धिका की उंगलियाँ काँपने लगीं।
वो जानती थी ये लोग सच में कृष्णा को मार सकते हैं।
उसने धीरे से कृष्णा की तरफ देखा…और उसकी आँखें भर आईं।
लेकिन कृष्णा बिना डरे उसके सामने खड़ा रहा।

वो बोला - 
अगर इसे ले जाना है…तो पहले मुझे पार करना होगा।

तीसरा वैंपायर गुस्से में गुर्राया—
तो मर जाओ!

वो बिजली जैसी रफ्तार से कृष्णा की तरफ बढ़ा।

सिद्धिका की चीख पड़ी -
कृष्णा!!

सिद्धिका तुरंत उसके सामने आ गई।
धड़ाम…!
वैंपायर का वार सीधे सिद्धिका पर लगा। अगले ही पल सिद्धिका की आँखों में तेज़ लाल चमक फैल गई। उसके काले पंख पूरी तरह खुल गए…और उसके आसपास लाल ऊर्जा घूमने लगी।


एक बोला - 
ये…!
इसकी शक्तियाँ वापस लौट आईं?!

सिद्धिका धीरे-धीरे उठी…उसकी आवाज़ अब पहले जैसी नरम नहीं थी।

वो बोली - 
कृष्णा को छूने की हिम्मत भी मत करना…

पहला वैंपायर उसकी तरफ झपटा। लेकिन इस बार सिद्धिका ने उसका गला पकड़कर उसे दूर फेंक दिया। धड़ाम! वो जाकर पत्थरों से टकराया। कृष्णा उसे देख रहा था…उसकी पत्नी…जो अभी किसी देवी और विनाश के बीच जैसी लग रही थी।

दूसरी वैंपायर स्त्री गुर्राई—
तुम अपने ही कबीले के खिलाफ जाओगी?

सिद्धिका ने बिना पलके झपकाए कहा—
अगर बात कृष्णा की होगी…तो पूरी दुनिया के खिलाफ चली जाऊँगी।

एक पल के लिए सब शांत हो गया…सिर्फ तेज़ हवाओं की आवाज़ बची। और उसी पल तीनों वैंपायर समझ गए सिद्धिका अब सिर्फ अंधकार की नहीं रही।

🔥 अब असली युद्ध शुरू हो चुका है—
🩸 वैंपायर कबीला सिद्धिका को वापस चाहता है…
❤️ और सिद्धिका अब कृष्णा के लिए सबसे लड़ने को तैयार है…

गंगा किनारे हवा अब तूफान बन चुकी थी…तीनों वैंपायर पीछे हट चुके थे। लेकिन उनकी आँखों में डर नहीं था…जैसे उन्हें किसी और ताकत पर भरोसा हो। तभी पूरा माहौल अचानक शांत हो गया।
हवा रुक गई…गंगा का पानी स्थिर हो गया…और आसमान के बीचोंबीच एक काला गोला बनने लगा। सिद्धिका का चेहरा तुरंत बदल गया।

उसने धीमे से कहा—
नहीं… वो खुद आ गया…

उस काले गोले से धीरे-धीरे एक विशाल परछाई उतरने लगी। लाल चमकती आँखें…लम्बे काले वस्त्र…और उसके आते ही आसपास की जमीन तक काँपने लगी। शैतानों का राजा। घाट पर बचे हुए लोग चीखते हुए भाग गए। कुछ लोग घुटनों पर गिरकर मंत्र पढ़ने लगे। वो दृश्य इंसानी दुनिया का नहीं लग रहा था।।उसकी आँखें सीधे सिद्धिका पर टिक गईं।

वो बोला - 
तो तुमने सच में हमें धोखा दे दिया…

उसकी आवाज़ आसमान में गूँज उठी। कृष्णा फिर सिद्धिका के सामने खड़ा हो गया।

वो बोला - 
इसे अकेला छोड़ दो।

पूरे घाट में डरावनी हँसी गूँज गई।

राजा बोला - 
एक इंसान…हमें आदेश दे रहा है?

अचानक राजा ने सिर्फ हाथ उठाया…और कृष्णा कई फीट दूर जाकर गिर पड़ा।

 सिद्धिका चीख उठी -
कृष्णा!

वो तुरंत उसकी तरफ भागी।कृष्णा के होंठों से खून निकल आया था…लेकिन फिर भी वो उठने की कोशिश कर रहा था।

राजा बोला - 
देखा? इंसान कितने कमजोर होते हैं।

फिर उसने सिद्धिका की तरफ हाथ बढ़ाया—
हमारे साथ चलो। अभी भी समय है।

सिद्धिका काँप रही थी…एक तरफ—
 उसका कबीला…उसकी पुरानी दुनिया…

और दूसरी तरफ—
 घायल कृष्णा।

दर्द में भी कृष्णा बोला—
मत जाना…मैं… तुम्हें फिर खो नहीं सकता…

सिद्धिका की आँखों से आँसू निकल पड़े। फिर उसने धीरे-धीरे अपने काले पंख फैलाए…और राजा की तरफ मुड़ गई। तीनों वैंपायर मुस्कुराने लगे उन्हें लगा सिद्धिका वापस आ रही है।

लेकिन अगले ही पल सिद्धिका राजा और कृष्णा के बीच आकर खड़ी हो गई। उसकी लाल आँखें चमक उठीं—

वो बोली - 
मैं कहीं नहीं जाऊँगी।
अब मेरी दुनिया सिर्फ कृष्णा है।

ये सुनते ही आसमान में बिजली चमक उठी। राजा का चेहरा गुस्से से विकृत हो गया।

वो बोला - 
तो फिर…आज से तुम हमारी दुश्मन हो।

🔥 अब युद्ध तय हो चुका है—
🩸 एक वैंपायर ने अपने ही राजा को चुनौती दे दी है…
❤️ और उसकी वजह है— एक इंसान का प्यार…

आसमान काले बादलों से भर चुका था…बिजलियाँ लगातार चमक रही थीं…और गंगा किनारे एक तरफ था शैतानों का राजा।
 दूसरी तरफ सिद्धिका… और कृष्णा। राजा की आँखें आग की तरह जल उठीं।

वो बोला - 
अगर तुमने इंसान को चुना है…तो तुम्हें उसकी कीमत चुकानी होगी।

अचानक पूरा आसमान लाल ऊर्जा से भर गया।सिद्धिका के काले पंख फैल गए…उसकी आँखों की चमक पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक हो गई। वहीं राजा के चारों तरफ काला धुआँ घूमने लगा।कृष्णा घायल था…लेकिन फिर भी वो उठकर सिद्धिका के पास आ गया। उसने उसका हाथ पकड़ लिया।

वो बोला - 
मैं तुम्हारे साथ हूँ…

सिद्धिका की आँखें भर आईं। उसने पहली बार डर से नहीं प्यार से कृष्णा को देखा। अगले ही पल राजा ने हमला कर दिया। पूरा घाट काँप उठा… सिद्धिका ने अपनी शक्तियों से उसका वार रोका।
दोनों की ऊर्जा टकराई और इतना तेज़ विस्फोट हुआ कि गंगा का पानी तक ऊँचा उठ गया।

लड़ते-लड़ते अचानक सिद्धिका के सीने में वही दर्द फिर उठा।उसकी शक्तियाँ बेकाबू होने लगीं…
क्योंकि उसके अंदर अब दो चीज़ें थीं।
अंधकार…और इंसानी प्यार। और दोनों साथ नहीं रह सकते थे। सिद्दिका समझ गई । उसने कृष्णा की तरफ देखा…

फिर धीमे से मुस्कुराई और बोली - 
शायद… हमारी कहानी यहीं तक थी…

कृष्णा चीख पड़ा जल
नहीं! ऐसा मत बोलो!”

सिद्धिका ने अचानक कृष्णा को पीछे धक्का दिया…और खुद राजा की तरफ उड़ गई।अगले ही पल पूरा आसमान काली रोशनी से भर गया। इतना बड़ा विस्फोट हुआ कि सब कुछ सफेद पड़ गया।

 कुछ देर बाद…धीरे-धीरे धुआँ हटने लगा…बारिश शुरू हो चुकी थी…पूरा घाट टूट चुका था…कृष्णा ज़मीन पर गिरा हुआ था।

वो तुरंत उठा—
सिद्धिका!!

उसकी आवाज़ पूरे घाट में गूँज गई…लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
ना शैतानों का राजा…ना सिद्धिका…बस उसकी लाल साड़ी का एक फटा हुआ टुकड़ा हवा में उड़ रहा था।
कृष्णा ने काँपते हाथों से वो कपड़ा उठाया…उसकी आँखों से आँसू बह निकले।

वो बोला - 
तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकती…

 लेकिन तभी…पीछे से अचानक पायल की बहुत हल्की आवाज़ आई। छन… छन…कृष्णा की साँस रुक गई।उसने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा और उसकी आँखें फैल गईं…।


To be continued....
👉 आखिर पीछे कौन था?
👉 क्या सिद्धिका सच में खत्म हो गई…
या वो वापस आ चुकी थी…?
👉 और क्या शैतानों का राजा सच में मर गया…?

जानने के लिए देखेंगे अगले episode में।