रात का अंधेरा बहुत गहरा था…आसमान में बादल ऐसे छाए थे जैसे किसी अनहोनी का इंतज़ार कर रहे हों।
एक पुराने खंडहर जैसे महल के अंदर…लाल रोशनी टिमटिमा रही थी। वहीं धीरे-धीरे एक लड़की बाहर आती है —सिद्धिका…
उसने लाल रंग की साड़ी पहनी थी, बिल्कुल एक सुहागन की तरह, लेकिन उसके चेहरे पर मासूमियत के साथ एक डरावनी शांति थी।
उसकी आँखें हल्की-सी लाल चमक रही थीं… और जब वो मुस्कुराई, तो उसके नुकीले वैंपायर दाँत दिखाई दिए। सिद्धिका कोई साधारण लड़की नहीं थी…वो एक वैंपायर थी।
उसकी सबसे खास बात थी उसकी दोस्ती बुराई और अंधकार से।खून, डर और शैतानी ताकतें उसके इशारे पर चलती थीं। लेकिन आज उसकी आँखों में कुछ अलग था… जैसे वो किसी का इंतज़ार कर रही हो।
अंधेरे में एक आवाज़ गूँजी —
सिद्धिका… आज तुम्हारी किस्मत बदलने वाली है…
और वो मुस्कुराई… खतरनाक तरीके से।
दूसरी तरफ… सुबह का समय। एक शांत मंदिर में घंटियाँ बज रही थीं। धूप की किरणें पत्थरों पर पड़ रही थीं, और पूरा माहौल पवित्रता से भरा हुआ था। वहीं एक लड़का बैठा था —कृष्णा…
उसके हाथ में माला थी, माथे पर तिलक, और आँखों में गहरी श्रद्धा। वो हर दिन भगवान की पूजा करता था, जैसे उसकी पूरी दुनिया उसी मंदिर में बसती हो।
लोग उसे देखते और कहते —
ये लड़का भगवान का सच्चा भक्त है…
कृष्ण आँख बंद करके प्रार्थना कर रहा था…लेकिन उसी पल हवा अचानक बदल गई। मंदिर की घंटियाँ अपने आप तेज़ बजने लगीं…और मंदिर के बाहर एक अजीब-सी ठंडी हवा चलने लगी।
कृष्णा ने धीरे से आँखें खोलीं…उसके सामने एक अनजानी शक्ति का संकेत था…जैसे कोई अंधेरा उसकी पवित्र दुनिया में घुसने वाला हो।
और उसी क्षण…किस्मत ने दोनों को जोड़ने की पहली डोर डाल दी। भक्त और वैंपायर की कहानी अब शुरू होने वाली थी…
💔🙏🩸
अब कहानी बदल चुकी थी…एक तरफ था अंधकार, दूसरी तरफ था प्रकाश। कृष्णा अग्निहोत्री अब सिर्फ भक्त नहीं था…वो एक बहुत बड़ा इंजीनियर था। उसकी सोच सबसे अलग थी,दिमाग इतना तेज़ कि बड़ी-बड़ी कंपनियों के प्रोजेक्ट भी वो अकेले संभाल लेता था।
ऑफिस में सब कहते थे —
ये लड़का मशीनों को नहीं, किस्मत को भी कंट्रोल कर सकता है…।
उसके चेहरे पर एक अलग ही आत्मविश्वास और तेज़ था। शांत स्वभाव, लेकिन आँखों में गहराई… जैसे वो हर चीज़ को पहले से समझ लेता हो।
इसी बड़ी टेक कंपनी में एक नई लड़की की एंट्री हुई…सिद्धिका।
सुंदर, शांत… लेकिन उसके अंदर एक खतरनाक साया छुपा था।
वो बाहर से बिल्कुल normal दिखती थी, लेकिन असल में वो इंसानों के बीच अपनी असली पहचान छुपाकर आई थी।
उसका एक ही मकसद था…
आदमियों का खून पीना… और अपनी ताकत बढ़ाना।
वो धीरे-धीरे कंपनी के अंदर घुलने लगी, लोगों से मिलती, मुस्कुराती… लेकिन हर मुस्कान के पीछे एक शिकार छुपा था। पहले ही दिन ऑफिस में…कृष्णा अग्निहोत्री और सिद्धिका आमने-सामने आए। कृष्णा ने उसे देखा…और कुछ पल के लिए रुक गया। उसे समझ नहीं आया क्यों, लेकिन उसके अंदर एक अजीब सी ऊर्जा महसूस हुई। और सिद्धिका ने भी उसे देखा…
उसकी आँखें हल्की सी चमकीं।
वो मन में बोली -
ये इंसान… अलग है…
कृष्णा ने शांत आवाज़ में कहा —
Welcome to the company.
सिद्धिका हल्की मुस्कान के साथ बोली —
Thank you…
लेकिन उस मुस्कान के पीछे छुपा था एक खतरनाक राज़… उसी पल से दोनों की कहानी शुरू हो चुकी थी…एक तरफ था भक्त + इंजीनियर कृष्णा, और दूसरी तरफ थी वैंपायर सिद्धिका… जिसका मकसद सिर्फ खून और अंधकार था।
सिद्धिका के ऑफिस में आने के बाद माहौल धीरे-धीरे बदलने लगा था…शुरुआत में सबने इसे बस तकनीकी गड़बड़ी समझा।
लेकिन कुछ दिनों में सच सामने आने लगा — ये कोई आम समस्या नहीं थी।
अजीब घटनाएँ शऑफिस में बैठे-बैठे अचानक कंप्यूटर अपने आप बंद हो जाते, जैसे किसी ने सिस्टम की सांस ही रोक दी हो।
लाइट्स बिना किसी वजह के कभी तेज़ हो जातीं, कभी पूरी तरह बंद…और फिर अचानक खुद ही वापस जल उठतीं।
लोग एक-दूसरे से पूछते —
ये पावर फेल्योर है क्या?
लेकिन बिजली विभाग से कोई दिक्कत नहीं थी…सबसे डरावनी चीज़ ये थी… कभी-कभी ऑफिस के अंदर अचानक कड़क ठंड महसूस होती, जैसे किसी ने AC नहीं, बल्कि पूरी हवा ही जमा दी हो। और अगले ही पल…वहीं जगह इतनी गर्म हो जाती कि लोग पसीने से भीग जाते।
लोग समझ ही नहीं पा रहे थे —
ये हो क्या रहा है…
कुछ कर्मचारियों ने शिकायत की —
मुझे अचानक घुटन होने लगती है…
जैसे किसी ने हवा को भारी कर दिया हो।
किसी-किसी को ऐसा लगता जैसे कोई अदृश्य मौजूदगी उनके पास खड़ी है। और फिर सबसे अजीब बात…ऑफिस के अलग-अलग कोनों में कभी-कभी एक तेज़ परफ्यूम जैसी खुशबू फैल जाती।लेकिन वो कोई सामान्य खुशबू नहीं थी…उसमें कुछ ऐसा था जो मन को खींचता भी था और डराता भी।
कई लोग कहते —
ये खुशबू कहाँ से आ रही है?
पर कोई जवाब नहीं मिलता…कृष्णा अग्निहोत्री ने ये सब नोटिस किया।वो हर चीज़ को समझने की कोशिश करता था…और धीरे-धीरे उसका शक एक ही दिशा में जा रहा था —👉 नई लड़की सिद्धिका…वो सामान्य नहीं थी। उसके आने के बाद ही ये सब शुरू हुआ था…कृष्णा की आँखों में अब गंभीरता थी। और उसके अंदर का भक्त और इंजीनियर दोनों जाग चुके थे।
वो मन ही मन बोला —
यहाँ कुछ बहुत गलत हो रहा है…
और अब कहानी एक मोड़ पर थी…जहाँ विज्ञान, आस्था और अंधकार एक-दूसरे से टकराने वाले थे…।
आधी रात का समय था…ऑफिस लगभग खाली हो चुका था। सिर्फ एक केबिन में रोशनी जल रही थी — वहाँ बैठा था कृष्णा अग्निहोत्री, अपनी नाइट शिफ्ट में लगातार कंप्यूटर पर काम करता हुआ। कीबोर्ड की आवाज़…और बाहर सन्नाटा…सब कुछ सामान्य लग रहा था।
तभी अचानक—
💡 “टक…”पूरी बिल्डिंग की लाइट चली गई। चारों तरफ घना अंधेरा छा गया। कृष्णा एक पल के लिए रुका… लेकिन उसने घबराहट नहीं दिखाई। लेकिन उसी पल…उसे अपनी गर्दन के पास किसी की गर्म साँसें महसूस हुईं। वो पूरी तरह जम गया…उसके चेहरे का रंग फीका पड़ गया।
अंधेरे में किसी ने उसके कान के पास बहुत धीरे से कहा—
अब तुम्हारा खून सिर्फ मेरा है…
कृष्णा की सांस रुक गई। वो समझ गया था…ये कोई इंसान नहीं हो सकता। धीरे-धीरे उसने सामने देखा…अंधेरे के बीच ऑफिस के कोने में रखी भगवान की मूर्ति दिखाई दे रही थी। कृष्णा का ध्यान उसी पर टिक गया…जैसे वो अकेला सहारा हो। और तभी…अंधेरे से सिद्धिका सामने आई। उसकी आँखें लाल चमक रही थीं…
चेहरे पर मासूमियत और भूख दोनों का मिलाजुला रूप था।
वो धीरे-धीरे आगे बढ़ी…और कृष्णा की ओर झुकी, काटने के लिए…लेकिन उसी पल उसका हाथ अचानक कृष्णा की कलाई से टकरा गया। और वहाँ था…एक लाल धागा। वो वही धागा था जो कृष्णा ने भगवान के नाम पर अपनी कलाई में बाँधा था। जैसे ही सिद्धिका की त्वचा उस धागे से लगी… उसे एक अजीब सी जलन महसूस हुई। उसकी आँखों में दर्द और गुस्सा दोनों आ गए।
सिद्धिका तुरंत पीछे हट गई…उसके चेहरे पर पहली बार डर और बेचैनी दिखाई दी।
उसने घबराकर सोचा -
ये… ये क्या है?
उसकी ताकत उस एक छोटे से धागे के सामने कमजोर पड़ गई थी।
और बिना देर किए…वो अंधेरे में गायब हो गई। कृष्णा बच गया
कृष्णा अभी भी कांप रहा था…लेकिन उसके सामने भगवान की मूर्ति थी और हाथ में वही लाल धागा। वो समझ चुका था ये धागा सिर्फ धागा नहीं… उसकी रक्षा का कवच था।
और उस रात के बाद सिद्धिका के अंदर पहली बार एक नई भावना पैदा हुई…जलन… और डर…और कृष्णा के लिए ये साफ हो गया था अब ये लड़ाई सिर्फ नौकरी या लॉजिक की नहीं रही…ये लड़ाई थी आस्था बनाम अंधकार की।