पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 13 Sonam Brijwasi द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 13

गंगा किनारे की उस मुलाकात के बाद…राधा के अंदर कुछ बदलने लगा था। वो अब पहले जैसी नहीं थी। काम करते-करते अचानक रुक जाती…लैपटॉप की स्क्रीन घूरती रहती…और बिना वजह उसके दिल की धड़कन तेज़ हो जाती।

⚡ कृष्णा की बातें दिमाग में घूमती रहतीं —
मेरी सिद्धिका…वो मुझसे बहुत प्यार करती थी…
वो वैंपायर थी…

ये शब्द बार-बार उसके दिमाग में घूम रहे थे।

उस रात…राधा को फिर सपना आया। काले आसमान के नीचे वो खड़ी थी…उसके पीछे पंख खुल रहे थे…

और सामने कृष्णा खड़ा था—
सिद्धिका…

राधा हड़बड़ा कर उठ गई। पूरा शरीर पसीने से भीगा था।

वो बोली - 
ये सपना क्यों आ रहा है मुझे…?

उसी समय…कृष्णा उसी गंगा किनारे बैठा था। भीगी हुई मिट्टी…
टूटी सीढ़ियाँ…और उसके हाथ में वही उम्मीद सिद्धिका की याद।

अचानक…दोनों को एक ही पल में सीने में तेज़ दर्द महसूस हुआ।
जैसे कोई धागा दोनों को जोड़ रहा हो…राधा ने अपने सीने पर हाथ रखा…

और फुसफुसाई—
ये दर्द… क्यों जाना-पहचाना लग रहा है…

दूर कहीं…वही रहस्यमयी आवाज़ गूंजी—
यादें टूट रही हैं…अब असली रूप सामने आएगा…

राधा के हाथ पर…एक सेकंड के लिए हल्की लाल नसें चमक गईं…
फिर गायब। कृष्णा अचानक खड़ा हुआ।

वो बोला - 
वो पास है।

उसकी आँखों में पहली बार उम्मीद जगी…लेकिन किस्मत चुप थी…और अंधकार धीरे-धीरे अपना खेल फिर से शुरू कर चुका था।

🔥 अब कहानी नए मोड़ पर है—
🩸 राधा की यादें टूट रही हैं…
❤️ और सिद्धिका का अंधकार फिर जाग रहा है…


रात गहरी हो चुकी थी…गाँव में सब सो चुके थे, लेकिन राधा की आँखों में नींद नहीं थी। वो बिस्तर पर लेटी थी…लेकिन मन शांत नहीं था। हर कुछ मिनट में वही चेहरा सामने आ जाता कृष्णा का… टूटा हुआ, रोता हुआ चेहरा। तभी उसके सीने में तेज़ दर्द उठा।

वो चीखी -
आह…

वो करवट लेकर बैठ गई। अचानक उसके दिमाग में एक फ्लैश आया—
गंगा किनारा…
बारिश…
लाल साड़ी…

और कोई उसे पकड़कर कह रहा है—
तुम मेरी हो…

राधा बोली - 
ये… ये मैं क्यों देख रही हूँ…?

उसकी साँसें तेज़ हो गईं।

उसी पल…कृष्णा भी अचानक उठ बैठा। उसका दिल जोर से धड़क रहा था।

उसने फुसफुसाया -
सिद्धिका…

दोनों के बीच एक अनदेखी ऊर्जा की रेखा खिंच रही थी। दूरी चाहे कितनी भी हो…कनेक्शन टूट नहीं रहा था। राधा धीरे-धीरे उठी…
और आईने के सामने खड़ी हो गई। उसने खुद को देखा…

और पहली बार उसे लगा—
मैं ये चेहरा… पहले भी देख चुकी हूँ…

अचानक…उसकी आँखों में हल्की लाल चमक आई…और फिर तुरंत गायब हो गई।

वो बोली - 
मैं कौन हूँ…?

उसकी आवाज़ काँप रही थी।

अंधेरे में वही आवाज़ फिर गूंजी—
अब वक्त आ गया है…यादें पूरी तरह लौटेंगी…

कृष्णा गंगा किनारे खड़ा होकर चिल्लाया—
सिद्धिका!!

उसकी आवाज़ हवा में गूंज गई…और उसी पल…राधा ने भी दूर कहीं उसी नाम को अपने दिल में महसूस किया।

🔥 कहानी अब अपने सबसे बड़े मोड़ पर है—
🩸 राधा की यादें टूट रही हैं…
❤️ और सिद्धिका धीरे-धीरे वापस आ रही है…

अगली सुबह…गाँव में हल्की धूप फैली हुई थी। राधा पूरी रात सो नहीं पाई थी।

उसके मन में अब सिर्फ एक ही बात थी—
मुझे सच जानना है…

वो चुपचाप तैयार हुई…और कृष्णा के पास जाने निकल पड़ी। गंगा किनारे वही सीढ़ियाँ…कृष्णा वहीं बैठा था, बिल्कुल वैसा था थका हुआ, टूटा हुआ, और उम्मीद से खाली। राधा उसके पास खड़ी हुई…

थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोली—
आप मेरे घर में रह सकते हैं…

कृष्णा ने ऊपर देखा, हैरान।

राधा ने धीरे से कहा—
आप कब तक यहाँ गंगा किनारे भटकेंगे?

उसकी आवाज़ में सख्ती नहीं थी…बस चिंता थी। कृष्णा कुछ पल उसे देखता रहा…

फिर हल्की सी हँसी आई—
तुम मुझे अपने घर बुला रही हो…?

उसकी आँखों में दर्द था। राधा ने नजरें झुका लीं।

वो बोली - 
मुझे बस… ये समझना है…कि आप मुझे देखकर इतने टूट क्यों जाते हैं…।

कृष्णा खड़ा हो गया…उसने राधा को बहुत ध्यान से देखा।

उसकी आँखों में वही सवाल था—
तुम कौन हो सच में?

राधा के अंदर फिर वही हल्का दर्द उठा…लेकिन इस बार वो नहीं भागी।

कृष्णा ने धीरे से कहा—
ठीक है…मैं आ जाऊँगा।

दूर कहीं…काले साये में एक आँख खुली…

और एक आवाज़ आई—
अब वो पास आ रहा है…

🔥 अब कहानी एक नए मोड़ पर है—
🩸 कृष्णा अब राधा के घर रहेगा…
❤️ और सच धीरे-धीरे सामने आने लगेगा…

आख़िरकार…कृष्णा राधा के घर आ गया। घर छोटा था…कच्चा था, लेकिन साफ-सुथरा और शांत। चारों तरफ सादगी थी…जैसे वहाँ की हवा भी भारी यादों से दूर हो।

राधा के सामने आने से पहले…कृष्णा ने खुद को थोड़ा ठीक किया।
👉 उसने दाढ़ी कटवा ली
👉 बाल ठीक किए
👉 कपड़े भी बदल लिए
अब वो पहले जैसा “टूटा हुआ भटकता इंसान” नहीं लग रहा था…

कृष्णा ने ऐसा इसलिए किया…क्योंकि राधा उसे देखकर घबरा जाती थी। और वो नहीं चाहता था कि वो और डर जाए। जब राधा ने उसे घर के अंदर देखा…तो वो कुछ पल चुप रही। अब कृष्णा थोड़ा अलग लग रहा था…ज्यादा शांत…ज्यादा इंसान जैसा…फिर भी…उसकी आँखों में वही दर्द था।वही इंतज़ार…वही अधूरापन।

दोनों के बीच कुछ पल खामोशी रही। केवल घर के बाहर हवा चल रही थी…और अंदर।सवालों की एक दीवार खड़ी थी।

राधा ने धीरे से पूछा—
आप… अब यहाँ रहकर क्या ढूंढना चाहते हैं?

कृष्णा ने उसे देखा…

और बहुत धीरे से बोला—
सच…

ये शब्द सुनकर राधा के अंदर फिर वही हल्का दर्द उठा…जैसे कोई पुराना दरवाज़ा हिल रहा हो…लेकिन अभी खुल नहीं रहा था।

अंधेरे में…एक लाल चमक फिर से जागी…

और आवाज़ आई—
अब वह उसके करीब है…

🔥 अब असली खेल शुरू होने वाला है—
🩸 कृष्णा और राधा एक ही घर में हैं…
❤️ और सच अब ज्यादा देर छुप नहीं सकता…

👉 क्या इस साथ रहने से राधा को सब याद आएगा?
या अंधकार पहले अपना कदम बढ़ाएगा…?