Honted Jobplace - 13 Sonam Brijwasi द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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Honted Jobplace - 13

रात — वही कमरा। हल्की रोशनी… बाहर धीमी हवा…श्राव्या अब थोड़ा संभल चुकी है… कृषांत उसके सामने खड़ा है… दोनों की आँखों में एक-दूसरे के लिए सुकून…।धीरे-धीरे… दोनों करीब आते हैं…। श्राव्या की साँसें तेज़… कृषांत का हाथ उसके चेहरे पर…।
दोनों के होंठ बस मिलने ही वाले होते हैं…तभी — अचानक कमरे की लाइट ज़ोर से टिमटिमाती है…। झटाक!!! ठंडी हवा का तेज़ झोंका… खिड़की अपने आप खुल जाती है…।
श्राव्या का शरीर एकदम से कांपने लगता है…उसकी आँखें धीरे-धीरे हरी चमकने लगती हैं…। वो कृषांत को जोर से धक्का देती है…।

कृषांत (चौंककर) बोला - 
श्राव्या!!

श्राव्या सीधी खड़ी हो जाती है…चेहरे पर खतरनाक मुस्कान…।

प्रिशा (उसके शरीर से, गुस्से में) बोली - 
इतनी जल्दी भूल गए…?

कृषांत का चेहरा सख्त हो जाता है…प्रिशा धीरे-धीरे उसके पास आती है… आँखों में जलन…।

प्रिशा (चीखते हुए) बोली - 
मैं और संतोष एक नहीं हो पाए…!!

कमरे में चीज़ें हिलने लगती हैं… लाइट्स फ्लिकर…

प्रिशा बोली - 
तो तुम दोनों भी एक नहीं होगे!!!

कृषांत उसकी आँखों में देखता है… बिना डरे…।

कृषांत (मजबूती से) बोला - 
तुम्हारा दर्द समझता हूँ…पर इसका मतलब ये नहीं कि तुम किसी और की ज़िंदगी बर्बाद करो!

प्रिशा गुस्से में और उग्र हो जाती है…श्राव्या का शरीर कांपने लगता है…एक पल के लिए उसकी असली आवाज़ बाहर आती है…।

श्राव्या (कमजोर, अंदर से) बोली - 
Sir… बचाइए…

फिर अचानक — प्रिशा फिर कंट्रोल ले लेती है…

प्रिशा (धीरे, खतरनाक आवाज़ में) बोली - 
ये तो बस शुरुआत है…अब मैं तुम्हें हर पल तोड़ूंगी…।

वो जोर से हँसती है… 😈 कृषांत वहीं खड़ा है…उसकी आँखों में गुस्सा… दर्द… और एक जिद…।

कृषांत (धीरे, खुद से) बोला - 
अब चाहे जो हो…मैं तुम्हें इससे आज़ाद कराऊँगा…।

जब प्यार अधूरा रह जाए…तो वो सिर्फ याद नहीं… श्राप बन जाता है…।

श्राव्या अचानक वहीं फर्श पर बैठ जाती है…उसका शरीर बुरी तरह काँप रहा है…।

कृषांत (घबराकर) बोला - 
श्राव्या!!

वो उसके पास भागकर आता है…श्राव्या धीरे-धीरे सिर उठाती है…
आँखें हरी चमक रही हैं…।

प्रिशा (उसके अंदर से, गुस्से में) बोली - 
मैं तेरी बीवी को नहीं छोड़ूंगी…

कृषांत की मुट्ठियाँ भींच जाती हैं…अचानक — श्राव्या का चेहरा बदल जाता है…आँखों से आँसू बहने लगते हैं…

श्राव्या (कराहते हुए, दर्द में) बोली - 
Sir… मुझे बचा लीजिए…बहुत दर्द हो रहा है…!

वो अपने सिर को पकड़ लेती है… जैसे अंदर कुछ फट रहा हो…।
एक ही पल में — उसका चेहरा बदलता है…।
👉 कभी — मासूम, रोती हुई श्राव्या 😢
👉 कभी — गुस्से से भरी प्रिशा 😈
आवाज़ भी बदलती रहती है…

श्राव्या बोली - 
Please sir…!

प्रिशा (उसी पल) बोली - 
उसे मत बचाओ!!

कृषांत उसे पकड़कर अपने सीने से लगाता है…जैसे उसे टूटने से बचा रहा हो…

कृषांत (टूटती आवाज़ में) बोला - 
श्राव्या! हिम्मत रखो… मैं यहीं हूँ…!

उसकी आँखों में पहली बार डर और बेबसी साफ दिखती है…।कमरे में चीज़ें हिलने लगती हैं…टेबल, कुर्सियाँ… सब कांप रहे हैं…। श्राव्या की चीखें गूंज रही हैं…।

श्राव्या बोली - 
आआह्ह!!!

अचानक — उसकी आवाज़ फिर बदलती है…

प्रिशा (भयानक हँसी के साथ) बोली - 
तुम उसे बचा नहीं पाओगे…

कृषांत उसकी आँखों में देखता है…जोर से उसका चेहरा पकड़ता है…।

कृषांत (चिल्लाकर) बोला - 
श्राव्या!!! तुम इससे ज्यादा मजबूत हो!
ये तुम्हारा शरीर है!!

कुछ सेकंड के लिए — श्राव्या की आँखों में होश लौटता है…

श्राव्या (कमजोर, रोते हुए) बोली - 
Sir… मुझे मत छोड़िए…

वो फिर से उसके सीने से चिपक जाती है…कमरे का माहौल धीरे-धीरे शांत होने लगता है…। पर उसकी आँखों के कोने में…
हल्की हरी चमक अब भी मौजूद है…।

प्रिशा (बहुत धीमे) बोली - 
ये खत्म नहीं हुआ…

जब जंग शरीर के अंदर हो…तो जीत भी अधूरी होती है…।

कमरा — तूफानी माहौल…लाइट्स तेज़ी से टिमटिमा रही हैं… चीज़ें हिल रही हैं…श्राव्या अचानक कृषांत को जोर से धकेलती है…

श्राव्या (लेकिन आवाज़ प्रिशा की, गुस्से में) बोली - 
दूर हटो मुझसे!!

उसकी आँखें पूरी तरह हरी हो चुकी हैं… चेहरा डरावना…वो पागलों की तरह चिल्लाने लगती है…।

प्रिशा (गरजती हुई) बोली - 
मैं सबको खत्म कर दूँगी!!!
श्रव्नाश कर दूँगी!!!
नहीं छोड़ूँगी… मार दूँगी… मार दूँगी!!!

कमरे की खिड़कियाँ जोर से बजने लगती हैं…टेबल उलट जाती है…।

कृषांत समझ नहीं पा रहा… क्या करे… कैसे रोके…उसकी साँसें तेज़… आँखों में डर… लेकिन साथ ही एक फैसला…।

कृषांत (धीरे, खुद से) बोला - 
अब… बस…

वो तेजी से आगे बढ़ता है…श्राव्या का चेहरा अपने हाथों में पकड़ लेता है…एक पल — दोनों की आँखें मिलती हैं…फिर… वो उसके होंठों को गहराई से चूम लेता है…श्राव्या/प्रिशा जोर से उसे धकेलने लगती है…उसका शरीर बुरी तरह कांप रहा है…।

प्रिशा (गुस्से में, टूटती आवाज़ में) बोली - 
दूर हटो!!!

लेकिन जैसे-जैसे कृषांत उसे पकड़े रहता है…उसके अंदर कुछ टूटने लगता है…अचानक — एक तेज़ हवा का झोंका...कमरे में हरी रोशनी फैल जाती है…श्राव्या का शरीर एकदम ढीला पड़ जाता है…और उसके अंदर से — प्रिशा की आत्मा बाहर निकलती है… 😨👻अब प्रिशा सामने है… हरी परछाई… गुस्से से भरी…श्राव्या बेहोश होकर गिरने लगती है…कृषांत उसे संभाल लेता है…।
प्रिशा हवा में तैर रही है… उसकी आँखों में आग…।

प्रिशा (गुस्से में, गूंजती आवाज़ में) बोली - 
सब खत्म कर दूँगी मैं!!!

उसकी चीख पूरे कमरे में गूंजती है…कृषांत श्राव्या को अपनी बाहों में कसकर पकड़े है…उसकी नज़र अब सीधे प्रिशा पर है…

कृषांत (दृढ़ आवाज़ में) बोला - 
अब ये यहीं खत्म होगा…

जब प्यार लड़ता है अंधेरे से…तो या तो रोशनी जीतती है… या सब कुछ जल जाता है…।