कमरा — रात गहरी हो चुकी है। बाहर हल्की हवा चल रही है… खिड़की अब बंद है… सब शांत है…कृषांत बिस्तर के किनारे बैठा है…उसकी बाहों में बेहोश श्राव्या है… उसका सिर उसके सीने पर टिका है। कृषांत की आँखों में नींद नहीं… सिर्फ चिंता…।वो धीरे-धीरे श्राव्या के बालों को सहलाता है…।
कृषांत (धीरे, भारी आवाज़ में) बोला -
तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा…कुछ भी हो जाए…।
उसकी आवाज़ में दर्द साफ है…उसकी आँखों से एक आँसू गिरता है…श्राव्या के हाथ पर…💧 कृषांत की आँखों के सामने वो सारे पल घूमने लगते हैं । 8th फ्लोर की रात 😨 श्राव्या का डर प्रिशा का कब्ज़ा 👻 और अभी का हमला…वो आँखें बंद कर लेता है… जैसे खुद को संभालने की कोशिश कर रहा हो।
अचानक — श्राव्या की उँगलियाँ हल्की सी हिलती हैं…।कृषांत तुरंत झुकता है…
कृषांत (उम्मीद भरी आवाज़ में) बोला -
श्राव्या…?
श्राव्या धीरे-धीरे आँखें खोलती है…उसकी आँखें कमजोर हैं… लेकिन इस बार… वो वही है…।
श्राव्या (धीरे, टूटी आवाज़ में) बोली -
Sir…
कृषांत हल्का सा मुस्कुराता है… लेकिन आँखों में दर्द अभी भी है।
कृषांत बोला -
मैं यहीं हूँ…
श्राव्या उसे कसकर पकड़ लेती है…।
श्राव्या (रोते हुए) बोली -
मुझे बहुत डर लग रहा है…वो फिर आएगी ना…?
कृषांत उसका चेहरा अपने हाथों में लेता है…।
कृषांत (मजबूत आवाज़ में) बोला -
जब तक मैं हूँ… कोई तुम्हें छू भी नहीं सकता…।
श्राव्या उसकी आँखों में देखती है… जैसे वही उसका भरोसा हो…।
पर कमरे के कोने में — अंधेरे के बीच…एक हल्की सी हरी चमक फिर से उभरती है…। और एक फुसफुसाहट…।
प्रिशा (बहुत धीमे) बोली -
मैं वापस आऊँगी…
प्यार जितना गहरा होता है…उतना ही बड़ा इम्तिहान लेता है…।
रात — वही कमरा। हल्की रोशनी… बाहर सन्नाटा…। कृषांत खिड़की के पास खड़ा है…उसका चेहरा गंभीर है… आँखों में सोच…। उसके दिमाग में एक ही बात घूम रही है —
प्रिशा… स्मिता… संतोष…
तीनों… अब इस दुनिया में नहीं हैं…और उनकी लाशें… उसी ऑफिस में मिली थीं…। स्मिता — जिसने फांसी लगा ली थी…
लेकिन क्यों… ये आज तक कोई नहीं जान पाया…। कृषांत धीरे से पीछे मुड़कर देखता है…।
बिस्तर पर — श्राव्या बैठी है…डरी हुई… सहमी हुई… जैसे अभी भी वो डर उसके अंदर जिंदा हो…उसकी आँखें हर कोने को देख रही हैं…जैसे कोई अभी भी उसे देख रहा हो…। श्राव्या धीरे-धीरे उठती है…और सीधा कृषांत के पास आ जाती है…। वो बिना कुछ बोले… उसके सीने से लग जाती है…। उसका शरीर हल्का-हल्का काँप रहा है…।
श्राव्या (धीरे, डरते हुए) बोली -
Sir… मुझे अकेला मत छोड़िए…।
कृषांत उसे तुरंत अपनी बाहों में ले लेता है…जैसे उसे दुनिया से छुपा रहा हो…।
कृषांत (धीरे, मजबूती से) बोला -
मैं कहीं नहीं जा रहा…मैं यहीं हूँ… तुम्हारे साथ…।
श्राव्या उसकी शर्ट पकड़ लेती है… कसकर…जैसे वो ही उसका एकमात्र सहारा हो…। श्राव्या का चेहरा उसके सीने में छिपा है…
आँखें बंद… लेकिन आँसू बह रहे हैं…वो बिल्कुल उसी मासूम लड़की जैसी लग रही है…जो पहली बार ऑफिस आई थी…।
कृषांत उसकी तरफ देखता है…उसकी आँखों में अब डर नहीं… बल्कि एक फैसला है…।
कृषांत (धीरे, खुद से) बोला -
अब बस…मैं ये सब खत्म करके रहूँगा…।
वहीं 8th floor पर वही पुरानी बालकनी…जहाँ से सब शुरू हुआ था…एक हल्की सफेद छाया (स्मिता) खड़ी है…।वो नीचे देख रही है… जैसे किसी गहरे राज़ को छुपा रही हो…।
स्मिता (धीरे) बोली -
सच अभी बाकी है…
हर आत्मा की कहानी अधूरी नहीं होती…कुछ राज़ ऐसे होते हैं… जो मौत के बाद भी छुपे रहते हैं…।
रात — ऑफिस का 8th फ्लोर।टूटी खिड़कियाँ… ठंडी हवा… वही डरावना सन्नाटा…। कृषांत अकेले वहाँ खड़ा है। उसके हाथ में टॉर्च… आँखों में दृढ़ता…।
कृषांत (धीरे) बोला -
आज… मुझे सच जानना ही होगा…।
अचानक — हवा तेज़ चलती है…और सामने की दीवार पर एक पुरानी रस्सी का निशान उभरता है…।कमरा धीरे-धीरे बदलने लगता है…जैसे समय पीछे जा रहा हो…।
अब वही 8th फ्लोर — लेकिन सालों पहले…ऑफिस चालू है… लाइट्स जल रही हैं…स्मिता वहाँ खड़ी है… आँखों में आँसू…।
उसके सामने — तीन लोग खड़े हैं… वही सीनियर्स 😨
सीनियर 1 (धमकाते हुए) बोले -
अगर ये बात किसी को बताई… तो याद रखना…।
स्मिता काँप रही है…
स्मिता (रोते हुए) बोली -
मैंने कुछ गलत नहीं किया… प्लीज़ मुझे जाने दो…।
दूसरा सीनियर हँसता है…।
सीनियर 2 बोला -
गलती तो कर दी तुमने… यहाँ काम करके…।
फ्लैशबैक में खुलता है —
👉 स्मिता को उन सीनियर्स ने परेशान किया था…
👉 उसके साथ गलत बर्ताव… धमकी… और दबाव…)
वो अकेली पड़ गई थी… कोई उसकी बात सुनने वाला नहीं था…।
स्मिता कोने में बैठी है… रो रही है…।
स्मिता (टूटी हुई आवाज़ में) बोली -
अब… मैं और नहीं सह सकती…।
वो धीरे-धीरे खड़ी होती है…उसकी आँखों में दर्द… और हार…।
वो छत के पास रस्सी बांधती है…।हाथ काँप रहे हैं… आँसू गिर रहे हैं…एक आखिरी बार पीछे देखती है…।
स्मिता (धीरे) बोली -
काश… कोई मुझे बचा लेता…
और… वो फांसी लगा लेती है… 😢💔
फ्लैशबैक खत्म होता है…
कृषांत वहीं खड़ा है… उसकी आँखें भर चुकी हैं…।
कृषांत (गुस्से और दर्द में) बोला -
उन्होंने… उसे मजबूर किया…।
अचानक — स्मिता की आत्मा सामने आती है… सफेद साया…।
स्मिता (शांत लेकिन दर्द भरी आवाज़ में) बोली -
मैं मरना नहीं चाहती थी…
कृषांत उसकी तरफ देखता है…
स्मिता बोली -
मुझे मारा नहीं गया…पर जीने का हर रास्ता छीन लिया गया…।
अचानक — हरी आभा फैलती है…प्रिशा की आवाज़ गूंजती है…
प्रिशा (गुस्से में) बोली -
अब समझे तुम?!
इस जगह ने हमसे सब छीन लिया!
कभी-कभी मौत खुद नहीं आती…उसे मजबूर किया जाता है…।