Honted Jobplace - 11 Sonam Brijwasi द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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Honted Jobplace - 11

ऑफिस — सीनियर्स के केबिन के अंदर। तीनों सीनियर्स ज़मीन पर बेहोश पड़े हैं। बाकी कर्मचारी दरवाज़े के बाहर खड़े डरे हुए देख रहे हैं। कृषांत धीरे से श्राव्या के कंधे पकड़कर उसे झकझोरता है।

कृषांत (तेज़ लेकिन कंट्रोल में) बोला - 
श्राव्या! होश में आओ!

श्राव्या की आँखें धीरे-धीरे झपकती हैं…उसका चेहरा confused है…

श्राव्या (घबराकर) बोली - 
S… sir… क्या हुआ?

वो चारों तरफ देखती है… सब उसे घूर रहे हैं।

श्राव्या (डरी हुई) बोली - 
सब… सब मुझे ऐसे क्यों देख रहे हैं?

श्राव्या की नज़र नीचे जाती है…तीनों सीनियर्स ज़मीन पर पड़े हैं।
वो एकदम से पीछे हटती है… घबरा जाती है।

श्राव्या (काँपती आवाज़ में) बोली - 
ये… ये क्या हुआ? ये सब… ऐसे क्यों पड़े हैं?!

उसके हाथ सिर पर चले जाते हैं…।

श्राव्या (दर्द से) बोली - 
मेरा… मेरा सर इतना दर्द क्यों कर रहा है…?

कृषांत उसे ध्यान से देख रहा है…उसकी आँखों में अब शक साफ दिख रहा है।

कृषांत (धीरे, गंभीर होकर) बोला - 
तुम्हें… कुछ याद है?

श्राव्या सिर हिलाती है — “नहीं”…

श्राव्या (रोने के कगार पर) बोली - 
मैं तो… बस अपने घर पर थी…फिर… फिर कुछ याद नहीं…।

साक्षी और बाकी लोग एक-दूसरे को डर के मारे देखते हैं। अचानक — श्राव्या के चेहरे पर एक सेकंड के लिए वही खतरनाक मुस्कान आती है…लेकिन फिर तुरंत गायब हो जाती है। कृषांत ये नोटिस कर लेता है 😨 कृषांत, श्राव्या को धीरे से पकड़कर केबिन से बाहर ले जाता है। बाकी सब लोग पीछे खड़े फुसफुसा रहे हैं। एक खाली कॉन्फ्रेंस रूम  कृषांत और श्राव्या आमने-सामने खड़े हैं।

कृषांत (धीरे, गंभीर आवाज़ में) बोला - 
श्राव्या… जो मैं कहने वाला हूँ… उसे ध्यान से सुनो…

श्राव्या डर के मारे उसकी तरफ देखती है…।

कृषांत बोला - 
तुम… कल रात के बाद से बदल गई हो…।

श्राव्या की आँखों में डर भर जाता है।

श्राव्या (धीरे) बोली - 
मतलब…?

कृषांत बोला - 
तुम कभी-कभी… खुद नहीं रहती…।

सन्नाटा…अचानक — श्राव्या के कानों में एक फुसफुसाहट गूंजती है…।

प्रिशा (उसके दिमाग में) बोली - 
उसे मत सुनो…

श्राव्या का चेहरा डर से सफेद पड़ जाता है।

श्राव्या (रोते हुए) बोली - 
Sir… मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा…मेरे साथ क्या हो रहा है…?

वो रोने लगती है…कृषांत धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखता है।

कृषांत (सख्त लेकिन protective होकर) बोला - 
जो भी है… मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा…

श्रव्या की आँखों में — एक सेकंड के लिए हरी चमक फिर से उभरती है…

प्रिशा (अंदर से धीमे) बोली - 
तुम उसे बचा नहीं पाओगे…

जब इंसान के अंदर दो आत्माएँ लड़ रही हों…तो असली चेहरा पहचानना नामुमकिन हो जाता है…।

उस घटना के बाद — ऑफिस में सब कुछ धीरे-धीरे सामान्य होने लगता है।ना कोई परछाई… ना कोई आवाज़… ना कोई हादसा…।
श्राव्या भी अब ठीक लगने लगी है।उसके चेहरे पर फिर से वही मासूम मुस्कान लौट आई है।

साक्षी (मुस्कुराते हुए) बोली - 
लगता है अब सब ठीक हो गया…।

पर रात — 8th फ्लोर।हल्की हवा… टूटी खिड़कियाँ…।अचानक — एक हल्की सी रोशनी चमकती है…।वहाँ एक सफेद साया खड़ा है… शांत… स्थिर…। और सामने — एक कोने में हरी परछाई (प्रिशा) जैसे कैद हो…।

प्रिशा (गुस्से में) बोली - 
मुझे रोको मत…

सफेद साया कुछ नहीं बोलता… बस खड़ा रहता है…।
जैसे कोई… उसे रोक रहा हो…।

कुछ महीने बाद — शादी का मंडप 💍✨श्राव्या लाल जोड़े में… बहुत खूबसूरत लग रही है। कृषांत शेरवानी में… उसकी आँखों में सिर्फ वही है। पंडित मंत्र पढ़ रहा है… अग्नि जल रही है…दोनों फेरे ले रहे हैं…।

पंडित बोला - 
अब आप दोनों सात जन्मों के बंधन में बंध चुके हैं…।

कृषांत धीरे से श्राव्या का हाथ पकड़ता है।

कृषांत (धीरे) बोला - 
अब मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ…

श्राव्या हल्का सा मुस्कुराती है…।

श्राव्या बोली - 
हमेशा…

पर मंडप के एक कोने में — वही हरी परछाई (प्रिशा) खड़ी है…।उसकी आँखों में जलन… दर्द… और गुस्सा…।

प्रिशा (धीरे, खुद से) बोली - 
हम एक नहीं हो पाए…पर तुम भी खुश नहीं रहोगी…।

शादी के बाद — श्राव्या और कृषांत अपने नए घर में। सब कुछ खुशहाल… शांत… सामान्य…श्राव्या रात को सो रही है… कृषांत उसके पास है…। अचानक — खिड़की अपने आप हल्की सी खुलती है…। चूँssss…श्रव्या की आँखें बंद हैं…लेकिन होंठों पर हल्की सी… खतरनाक मुस्कान उभरती है… 😨

कुछ साये जाते नहीं…बस सही समय का इंतज़ार करते हैं…।


रात — कृषांत और श्राव्या का कमरा।कमरे में हल्की रोशनी… फूलों से सजा हुआ बिस्तर…। श्राव्या धीरे-धीरे कमरे में आती है… घूंघट हल्का सा हटाती है…।कृषांत उसे देखता है — उसकी आँखों में प्यार है।

कृषांत (मुस्कुराकर) बोला - 
डर तो नहीं लग रहा?

श्राव्या हल्की मुस्कान देती है…।

श्राव्या बोली - 
आप साथ हो… तो नहीं…

दोनों करीब आते हैं…।अचानक — कमरे की लाइट टिमटिमाने लगती है…।ठंडी हवा चलती है… खिड़की अपने आप खुल जाती है…चूँssss…श्राव्या का चेहरा अचानक बदल जाता है… उसकी आँखें धीरे-धीरे हरी चमकने लगती हैं…। वो धीरे से कृषांत का हाथ कसकर पकड़ती है…।

प्रिशा (उसके अंदर से, भारी आवाज़ में) बोली - 
अब… कोई बीच में नहीं आएगा…

कृषांत चौंक जाता है 😨श्राव्या अचानक कृषांत को धक्का देती है…वो पीछे गिर जाता है।

कृषांत (हैरान होकर) बोला - 
श्राव्या!! ये क्या—?

श्राव्या धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ती है…चेहरे पर खतरनाक मुस्कान…।

प्रिशा बोली - 
तुम दोनों को अलग करना होगा…।

अचानक — कमरे में तेज़ सफेद रोशनी फैलती है…।एक लड़की का साया उभरता है… सफेद… शांत…।
वो है — स्मिता 😨✨
श्राव्या रुक जाती है… जैसे कोई उसे रोक रहा हो।

स्मिता (शांत लेकिन मजबूत आवाज़ में) बोली - 
बस प्रिशा… बहुत हो गया…।

प्रिशा गुस्से में चिल्लाती है।

प्रिशा बोली - 
तुम मुझे फिर से रोकोगी?!

स्मिता बोली - 
तुम्हारा दर्द सही है…पर किसी और की ज़िंदगी बर्बाद करना गलत…।

कमरा अचानक फ्लैशबैक दिखाता है…।
प्रिशा — जिसने प्यार किया… लेकिन अधूरी रह गई 💔
संतोष — जिससे वो कभी मिल नहीं पाई
स्मिता — 8th फ्लोर से गिरी… लेकिन उसकी आत्मा शांत थी
स्मिता धीरे से श्राव्या की तरफ देखती है।

स्मिता बोली - 
मैं उसे इसलिए रोक रही हूँ…क्योंकि मैं नहीं चाहती… जो मेरे साथ हुआ… वो किसी और के साथ हो…।

श्राव्या का शरीर कांपने लगता है…एक तरफ हरी आभा… दूसरी तरफ सफेद रोशनी…।

प्रिशा (चीखते हुए) बोली - 
मैं उसे छोड़ूंगी नहीं!!!

स्मिता बोली - 
तुम्हें छोड़ना ही होगा…

कृषांत ये सब देखकर स्तब्ध है…। अचानक — श्राव्या की असली आवाज़ अंदर से आती है…।

श्राव्या (कमजोर, रोते हुए) बोली - 
Sir… मुझे बचा लीजिए…

कृषांत तुरंत उसकी तरफ दौड़ता है… उसका हाथ पकड़ता है।

कृषांत (जोर से) बोला - 
श्राव्या! तुम मजबूत हो! तुम इससे लड़ सकती हो!

अचानक — सब शांत हो जाता है…हरी आभा धीरे-धीरे गायब हो जाती है…श्राव्या बेहोश होकर कृषांत की बाहों में गिर जाती है…।
स्मिता धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगती है…।

स्मिता (धीरे) बोली - 
मैं अभी उसे रोक रही हूँ…लेकिन वो फिर आएगी…।

और वो गायब हो जाती है…
जब दो आत्माएँ टकराती हैं…तो फैसला अभी बाकी रहता है…।