अमर अमर Shakti द्वारा क्लासिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

अमर अमर

अमर


मै अमर तो हो गया। लेकिन फिर इससे कई प्रॉब्लम भी आने लगी। जवान और अमर होने के फायदे तो कई हुए। लेकिन घाटे भी कई हुए। सैकड़ो साल जिंदा रहने के कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं। सैकड़ो साल में शहर जंगल बन जाते हैं और जंगल शहर। इसलिए मैंने समझदारी दिखाते हुए एक घने जंगल में अपना स्थाई अड्डा बना लिया। यह एक विशाल गुफा थी। इस गुफा को मैंने अच्छे कारीगरों से तरासवाकर ठीक-ठाक करवा दिया। यह गुफा बहुत सुंदर थी और इसमें प्राचीन ज्ञान विज्ञान योग साहित्य आदि की मुख्य मुख्य रत्न सजो कर रखे थे। मेरे पास एक पुष्पक भगवान भी था। जिसे मैं समय-समय पर नया लुक देता रहता था। इससे मैं क्षण मात्र की दुनिया के किसी भी कोने पर पहुंच जाता और वहां का वातावरण पसंद आने पर वहां कोई अच्छा सा भवन ले लेता और कुछ साल वही व्यतीत करता। इससे मेरी अमरता पर कोई शक नहीं करता और वहां मेरी शादी वगैरह भी हो जाती और बच्चे भी पैदा हो जाते। लेकिन समय आने पर बच्चे बूढ़े हो जाते। और मैं जवान का जवान रहता। फिर मैं अपनी गुफा में लौट आता और कुछ समय आराम करने के बाद दुनिया के किसी और शहर में आबाद हो जाता।कई शहरों में मेरी बच्चों की कई पीढ़ियां हो गई और कई शहरों में नई पीढ़ियां तैयार होने लगी। हालांकि मेरे बच्चों की नस्ल और लोगों से उत्तम मानी जाती थी। क्योंकि कुछ परसेंटेज तो मेरे शरीर के तत्व उनके शरीर में आ जाते थे।




मेरे पास स्वर्ण सिद्धि भी थी। इसलिए मैंने एक प्रोग्राम बनाया। मैंने बहुत सा लोहा और तांबा खरीदा और स्वर्ण सिद्धि से इसको सोना बना दिया। इस सोने को मैंने स्विस बैंक में जमा कर दिया। क्योंकि वहां ज्यादा पूछताछ नहीं होती। अब मैं बहुत धनी बन चुका था। इस धन को मैंने अलग-अलग देशों की मुद्राओं में बदल दिया। अब मैंने एक लंबा चौड़ा टापू खरीदा और उसे समतल करवाया। वहां बाग बगीचे और शहर बनवाये। शहरों के प्रशासन की अच्छी व्यवस्था की। यह टापू एक स्वतंत्र राज्य था। इस राज्य में मैंने देश-विदेश के गरीब लोगों को बसाने की सोच रखी। देश-विदेश के सभी गरीब लोग यहां बसने लगे। उन्हें सभी सुख सुविधा नौकरी अच्छी सैलरी और अच्छा वातावरण प्रदान किया गया। उनके बच्चों की शिक्षा दीक्षा की अच्छी व्यवस्था की गई। सबके लिए भरपूर वस्त्र और भोजन की व्यवस्था की गई। सबको सभी आधुनिक सुविधाएं प्रदान की गई। सभी इस स्वर्ग जैसे टापू में आकर बहुत खुश थे। टापू का एक अध्यक्ष चुना गया। यह अध्यक्ष हर 5 साल के लिए चुना जाता था। इसे टापू के लोग ही मिलकर चुनते थे। अध्यक्ष को मुझझे परामर्श लेना आवश्यक होता था। मैं केवल जरूरी काम में ही उसे परामर्श देता था। एक तरफ से इंग्लैंड के राजा की तरह मेरी स्थिति थी। मेरा हर परामर्श अध्यक्ष को मानना ही पड़ता था। इस तरह मैंने टापू के शासन प्रशासन की सुंदर व्यवस्था कर रखी थी। हालांकि में पूरी दुनिया मै छद्म वेश में घूमता रहता था और जरूरतमंद लोगों की मदद करता रहता था। इस तरह से मुझे बड़ी शांति मिलती थी। मुझे अमर होकर बहुत मजा आया। मुझे सब चिरंजीवियों के भी दर्शन हुए और आठवे चिरंजीवी मारकंडे जी के भी दर्शन हुए तथा अन्य चिरंजीवी आल्हा के भी दर्शन हुये। सभी चिरंजीवी बहुत प्रसन्न हुये और उन्होंने मुझे बहुत-बहुत आशीर्वाद दिया और कई किस्म की नई विद्याएं और अस्त्र-शस्त्र भी प्रदान किये।इस सबसे मेरे मन को बहुत शांति मिली और मैं भी सप्त चिरंजीवियों की तरह इधर-उधर घूमते हुए और तपस्या करते हुए लोगों की मदद करने लगा।



हालांकि इससे कोई समस्याएं भी उत्पन्न हुई। मैं ज्यादा वर्ष तक एक ही जगह में नहीं रह सकता था। क्योंकि इससे मैं लोगों की निगाहों में चढ़ जाता और लोग मुझझे थोड़ा दूसरा व्यवहार करते। इस समस्या का भी मैंने फायदा निकाला और मैं जगह-जगह रहने लगा और जगह-जगह के लोगों को शिक्षित और विकसित करने लगा। उनके जीवन के स्तर को सुधारने लगा। उनके जीवन में संतुष्टि का भाव ज्यादा लाने लगा। पूर्व जन्म होता है। कई बार मुझे सपने में पूर्व जन्म की भी याद आई। हालांकि किसी समय में मेरा पूर्व जन्म था। धीरे-धीरे साधना से मुझे याद आती है। पूर्व जन्म का एक वृतांत मुझे याद आ गया। मेरा पूर्व जन्म का शरीर एक राजमहल में दफन था। वहां मै योग मुद्रा में बैठा था। मैंने इस शरीर को प्राप्त कर उसे शुद्ध किया और उसे तरो ताजा करके एक अच्छे स्थान पर स्थापित किया। कभी-कभी मै योग विद्या से उस शरीर में प्रवेश कर जाता और फिर मुझे बड़ा मजा आता।


एक नायक होता है तो इस कहानी में एक प्रति नायक भी होता है। मुझे नायक मान लो तो मेरा प्रति नायक कौन है यह समझ लो। दूर से दूर एक निर्जन जगह है। वहां एक टूटा फूटा शहर बिखरा हुआ है। शहर बहुत पुराना है। शहर में एक पूर्ण जीर्न शीर्न महल है। महल जमीन पर गिर चुका है। महल के भुगर्भ में हलचल हो रही है। एक हाथ ऊपर आता है। अरे यह क्या है। यह तो एक सुंदर स्वस्थ व्यक्ति भूगर्भ से निकल रहा है। हाइट लगभग 6 फीट है और शरीर पर पुराने जमाने के जीरण शीर्ण वस्त्र हैं। उस व्यक्ति ने बाहर निकल कर अपने बदन को झाड़ा और चारों तरफ देखा। बोला बहुत लंबी नींद हो गई। जमाना कितना बदल गया। यह कहकर वो वही ध्यान में बैठ गया। उसे पता चल गया कि 10000 साल पहले वह नींद में चला गया था। आज फिर उसकी नींद टूटी है। यह भी एक अमर व्यक्ति है। इस व्यक्ति ने पूरे ब्रह्मांड और धरती पर योग से अपनी नजर घुमाई। आज तक जितना कुछ हुआ था। सब पता चल गया। वर्तमान स्थिति पता चल गई। तुरंत उसने योग शक्ति से कुछ लोगों को आकृष्ट किया। सँमोहन से प्रभावित कुछ लोग उसके सामने पहुंचे। इसमें कुछ नाई थे। कुछ धोबी थे ही और कुछ मकान बनाने वाले मजदूर थे। मजदूरों को उसने महल को खोदने के लिए कहा। महल के तहखाना में एक बहुत बड़ा खजाना था।


उसमें तांबे पीतल सोने चांदी के सिक्के थे। नाई से उसने कैस और दाढ़ी मूछ बनवा दिये। कुछ ही देर में कुछ व्यक्ति ने वस्त्र लेकर उसके पास आए। यह आधुनिक वस्त्र थे। ये आधुनिक वस्त्र उसने पहन लिए। अब वह एक आधुनिक व्यक्ति लग रहा था। उसने सभी को कुछ धन देकर विदा किया। जैसे वे सभी उसके महल के क्षेत्र से बाहर निकले। सभी का सम्मोहन टूट गया। उनकी जेब में कुछ चांदी के सिक्के थे। इधर मजदूर उसके महल का निर्माण कर रही थे। कुछ दिनों में वहां एक भव्य महल तैयार था और महल के चारों तरफ एक सुंदर शहर बसा हुआ था। उसकी चारों तरफ पर कोटा था। अब उसने मजदूरों को भी कुछ धन देकर विदा कर दिया। इस प्रकार धीरे-धीरे वो अपने शहर और महल में सभी किस्म की सुविधा एकत्र करता रहा। अपने तहखाना के धन को उसने सोने की ईंटों और विश्व की सभी मुद्राओं में बदल दिया। अब वह एक संपन्न शहर का मालिक था। अगल-बगल के कुछ ग्रामीण लोगों को उसने अपने शहर में बसा दिया। अब उसका शहर हरा-भरा और चहल-पहल से भरा था। शहर का भयंकर विकाश होने लगा। व्यापार दिन दूना और रात चौगुना फैलने लगा। कुछ ही दिनों में दस हजार सालों की नींद से जागे आदमी ने अपना अम्पायर खड़ा कर दिया।



एक दिन मैं अपनी पुराने शरीर में स्थित था। अचानक मुझे प्रतिनायक मिल गया। आगे की मुलाकात बड़ी रोमांचक होने वाली थी। प्रति नायक ने मेरे पुराने शरीर को पहचान लिया और मुझे गले से लगा लिया। मुझे प्रतिनायक के इस व्यवहार से बड़ा आश्चर्य हुआ और घर जाकर में कई दिनों तक प्रतिनायक के इस व्यवहार के कारण के पीछे छुपे रहस्य के बारे में सोचता रहा। मेरे दिमाग में कई थ्योरीज आई। लेकिन कोई भी थ्योरी मेरे दिल के दरवाजे को संतुष्ट न कर सकी। आखिर पता चल ही गया कि प्रतिनायक पिछ्ले जन्म में मेरा भाई था। यह सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन मुझे यह जानकर बड़ा दुख हुआ कि प्रति नायक एक बुरा व्यक्ति है। वह एक विलन है। प्रति नायक ने बहुत विकास कर रखा है। पिछले जन्म में भी सोने से पहले उसने काफी भौतिक विकास किया था। लेकिन आध्यात्मिक और नैतिक विकास हुआ नहीं कर पाया। मैंने प्रति नायक को शिक्षित करने का प्रयास किया और धीरे-धीरे वह शिक्षित होता चला गया। उसके आध्यात्मिक और नैतिक मूल्य भी विकसित होते गये। प्रति नायक और मेरे स्थान के बीच आदिवासियों के कई गांव थे। हम दोनों ने अपना धन आदिवासियों पर लगाने का निर्णय किया और आदिवासियो के लिए सुंदर शहरों का निर्माण किया। आदिवासियों को शिक्षित करने का प्रयास किया। धीरे-धीरे आदिवासी भी समाज की मुख्य धारा में आने लगे। मैंने एक नए ग्रह की खोज की और प्रति नायक के साथ मिलकर वहां के आदिमानव को सभ्य बनाना शुरू किया। मैंने उन्हें झोपड़ी बनाना, खाना बनाना आदि सिखाया और उन्हें झोपड़ियो में रहना सिखाया। आज मैं 10 साल बाद वहां गया तो मैंने देखा कि वह सभ्य हो गये तो मैंने वह एक सुंदर नगर का निर्माण किया। यह एक पक्का और सुंदर नगर था। यह नगर मैंने उन लोगों को दे दिया। सभी आदिमानव सभ्य रूप में उस नगर में रहने लगे। मैंने आदिवासियों और आदिमानव की एक सभ्य सेना का निर्माण किया और उन्हें आधुनिक जीवन की हर वस्तु और हर हथियार उपलब्ध करया। उन्हें सुंदर वर्दी दी। सुंदर रहने का स्थान दिया। अच्छी सैलरी दी। अब मेरी सेना बहुत तगड़ी हो गई।प्रतिनायक ने भी हर कार्य में मेरा सहयोग किया। हम दोनों ने मिलकर इसी धरती को स्वर्ग से बेहतर बना दिया।