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दशा और दिशा - गहरे मित्र
द्वारा Varun Sharma

इस कहानी में दो मित्र है जिनका जीवन अलग अलग दिशा में बढ़ता है और अपनी जिंदगी को किस मार्ग पर ले आते है इस कहानी से जरूर ...

भय से संतुष्टि
द्वारा Anand M Mishra

  कहानी नानी-दादी से सुनी थी। बहुत पुरानी बात है। एक राजा था। उसके पास घोडा था। घोड़ा सुंदर था। लेकिन घोड़ा लालची था। राजा घोड़े की देखभाल अच्छे ...

प्रतीक्षा
द्वारा नन्दलाल सुथार राही

प्रतीक्षा                                              १ विक्रमनगर में आज प्रातः की शुरुआत ही शंख की पवित्र ध्वनि और ढोल - नगाड़ों की गूंज से हुई। आज सम्पूर्ण नगर में हर्ष और उल्लास ...

कशिश - वो शायर बदनाम
द्वारा Anand Tripathi

वो शायर बदनाम में आज बात कुछ ऐसे लोगो को कर रहा हूं। जिनकी तबीयत बड़ी मासूम मिजाजी थी। जिनका करिश्मा उनके कारनामे से बड़ा होता है। ऐसे कुछ ...

साहित्‍य की जनवादी धारा
द्वारा डॉ स्वतन्त्र कुमार सक्सैना

         साहित्‍य की जनवादी धारा                                                                                             डॉ0  स्‍वतंत्र कुमार सक्‍सेना साहित्‍य के पाठक एवं रचनाकार सुधी जन सबके मन में यह प्रश्‍न उठता है । साहित्‍य में जनवादी कौन ...

चाणक्य की उलटफेर
द्वारा राज बोहरे

ऐतिहासिक कहानी चाणक्य की चतुराई मगध साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र उस दिन दुलहिन की तरह सजाई गई थी। साम्राज्य के नये राजा चन्द्रगुप्त को राजसिंहासन पर बैठाया जा रहा ...

विष कन्या - 43 - अंतिम भाग
द्वारा Bhumika

       राजगुरु क्या कहना चाहते हैं ये जान ने की सबको बहुत जिज्ञासा थी।       महाराज आप जानते हो की अब मेरी आयु हो गई हैं। ...

विष कन्या - 42
द्वारा Bhumika

       मृत्युंजय की बात सुनकर सब चिंतित हो गए की इस दुविधा का मार्ग कैसे निकले।       तुम राजमहल में नही रहे सकते तो कोई बात ...

विष कन्या - 41
द्वारा Bhumika

        वनदेवी के विषय में जान ने केलिए सब उत्सुक थे। वृषाली मृत्युंजय से पूछती है की, कोन थी वो वनदेवी?       मृत्युंजय जरासा मुस्कुरूया ...

अतीत
द्वारा Dr Mrs Lalit Kishori Sharma

वर्षा ऋतु का सुहावना समय था। आकाश में काले काले बादल छाए हुए थे 1 पपीहा पीयू पीयू की पुकार कर रहा था। मोर अपने सुंदर पंखों को फैला ...

विष कन्या - 40
द्वारा Bhumika

       जैसे ही मृत्युंजय ने ये बात सबके सामने रखी के उसके विषय में भी कुछ भेद हैं सबकी सांस मानो भारी सी हों गई। इतने सारे ...

विष कन्या - 39
द्वारा Bhumika

       राजकुमारी वृषाली लावण्या को आश्वस्त कर रही हे की, जो कुछ भी हुआ उसमे उसका कोई दोष नही हे।       सारिका ये सब देखकर बहुत ...

आधुनिक युग
द्वारा Anand Tripathi

कैसा जमाना आ गया है। है रि इसको देखो ये क्या से क्या हो गया। इनका देखो फैशन के नाम पर तन पर कपड़े ही कम है। और तो ...

विष कन्या - 38
द्वारा Bhumika

       अपने पिता तेजप्रताप के विषय में सत्य जानकर लावण्या का ह्रदय टूट जाता है। वो रोने लगती है, विलाप करने लगती है। अपने प्राणों से भी ...

विष कन्या - 37
द्वारा Bhumika

       में कनकपुर में जाकर वहां के राजवैध सुबोधन से जाकर मिला। वहां मेने उनसे अपनी पहचान नहीं छुपाई। मैने उनको बताया कि में महान वैदाचार्य वेदर्थी ...

लकीर का फ़क़ीर
द्वारा राज कुमार कांदु

दफ्तर से निकल कर दीपक बस स्टॉप की तरफ धीरे धीरे बढ़ रहा था कि उसके फोन की घंटी बज उठी। जेब से इयरफोन निकालकर उसने कान से लगाया ...

विष कन्या - 36
द्वारा Bhumika

       आगे हमने देखा की, महाराज तेजप्रताप से विष कन्या के विषय में पूछते हे पर तेजप्रताप अट्टहास करता है और कहेता है की मेरा शीश धड़ ...

मोक्ष
द्वारा Pratap Singh

    आस-पास के चालीस गावों के सबसे बड़े जमींदार उदय प्रताप के यहां बहुत बड़ा यज्ञ हो रहा था।। बाहर से आये स्वामी जी यज्ञ के बाद कथा ...

विष कन्या - 35
द्वारा Bhumika

              आगे हमने देखा की, तेजप्रताप बताता हे की केसे उसने इस राज्य के सैनिक को अपने साथ षडयंत्र में सम्मिलित करके राजकुमारी को ...

विष कन्या - 34
द्वारा Bhumika

       आगे हमने देखा की, तेजप्रताप स्वीकार करता हे की, उसने महाराज इंद्रवर्मा के विरुद्ध षडयंत्र रचा हे। सबके पूछने पर वो कारण बताता है की, उसकी ...

विष कन्या - 33
द्वारा Bhumika

       आगे हमने देखा की,राजकुमारी अब ठीक होने लगी है। एक दिन लावण्या को महाराज के कक्ष में उपस्थित होने का संदेश मिलता है। जब को वहां ...

विष कन्या - 32
द्वारा Bhumika

       आगे हमने देखा की, मृत्युंजय को याद करके वृषाली चिंतित हे, तभी सारिका और लावण्या कक्ष में चौसर लेके आते हे। वृषाली को चौसर देखकर चारूलता ...

विष कन्या - 31
द्वारा Bhumika

       आगे हमने देखा की, रात्रि का समय है, बाहर बिन मौसम  वर्षा हो रही है। महाराज राजगुरु के कक्ष में जाकर मृत्युंजय के विषय में पूछते ...

विष कन्या - 30
द्वारा Bhumika

       आगे हमने देखा की, मृत्युंजय राजकुमारी कि जिम्मेदारी लावण्या को सौंपता है और उनके सिवा किसी को भी राजकुमारी के कक्ष में प्रवेश ने न दे ...

पिता की खोज
द्वारा राज कुमार कांदु

" आज तो तुम्हें बताना ही पड़ेगा अम्मी... कौन हैं मेरे अब्बू ? क्या नाम है उनका ? कहाँ रहते हैं ?.. और तुम अकेले क्यों रहती हो ?"  ...

विष कन्या - 29
द्वारा Bhumika

       आगे हमने देखा की, राजकुमारी वृषाली अब धीरे धीरे धीरे स्वस्थ होने लगी है। लावण्या, सारिका, मृत्युंजय, भुजंगा ओर कुमार निकुंभ सब समान उम्र के हे ...

विष कन्या - 28
द्वारा Bhumika

        आगे हमने देखा की, सब अपनी सैया में सोने का प्रयत्न कर रहे हैं, किंतु सबके मस्तिष्क में अपने अपने प्रश्न चल रहे हैं। प्रातः ...

संयोग-मुराद मन की - 1
द्वारा किशनलाल शर्मा

या हू-------पहला लिफाफा खोलते ही उसमे से पत्र के साथ निकले फोटो को देखकर  अनुराग  खुशी से उछल पड़ा।"क्या हुआ बेटा?" अनुराग की आवाज सुनकर उसकी मां कमरे में ...

विष कन्या - 27
द्वारा Bhumika

       आगे हमने देखा की, राजकुमारी वृषाली मूर्छा से बाहर आ गई हैं। सब लोग यह देखकर खुश हे। तभी ये पता चलता हे की वो चल ...

विष कन्या - 26
द्वारा Bhumika

       आगे हमने देखा की, राजगुरु और सेनापति मृत्युंजय से मिलने उसके कक्ष में जाते है। दोनो राजमहल में होनेवाले षडयंत्र के विषय में जानने केलिए उत्सुक ...

हारने से पहले
द्वारा Poonam Gujrani Surat

कहानीहारने से पहले टिप....टिप.... टिप.....टपकती हुई गुल्कोज की बूंदें पिछले चार दिनों से लगातार मेरे शरीर में प्रवेश कर रही थी। इसके अलावा जाने कितनी दवाइयां, इंजेक्शन, विटामिन, प्रोटिन ...