हिंदी क्लासिक कहानियां कहानियाँ मुफ्त में पढ़ेंंऔर PDF डाउनलोड करें

दो बहने - 12
द्वारा Mansi

Part 12 अब तक आपने देखा कि निशा ओर नियती हल्दी की रसम के लिए तैयार हो गई थी अब आगे की कहानी देखते है। निशा ओर नियती अपनी ...

स्वेटर के फंदे
द्वारा Poonam Gujrani Surat

कहानीस्वेटर के फंदेसूरज अस्ताचल की ओर बढ़ते हुए अपनी लालीमा के निशान नीलगगन पर छोड़ रहा था। ऐसा लग रहा था मानो किसी सुहागिन के हाथ से सिंदूर की ...

दो बहने - 11
द्वारा Mansi

Part 11 अब तक आपने देखा कि निशा ओर नियती की मेहंदी की रस्म होने वाली थी अब आगे की कहानी देखिए। फिर रात हो चुकी थी निशा ओर ...

कंक्रीट के महल
द्वारा Dakshal Kumar Vyas

बरसो से चल रहा कार्य आज तेज हो गया । गांव जाते समय देखा ट्रेन में से क्या था क्या हो गया । नदी , नाले ,तालाब , जंगल ...

दो बहने - 10
द्वारा Mansi

Part 10 अब तक आपने देखा कि निशा ओर नियती की पांच दिन बाद की शादी की तारीख तय हुई थी अब आगे की कहानी देखते है। फिर उसी ...

दो बहने - 9
द्वारा Mansi

Part 9 अब तक आपने देखा कि निशा ने माफी मांग ली थी ओर सब कुछ ठीक हो चुका था। अब आगे की कहानी देखे। मिहिर कहता है तो ...

दो बहने - 8
द्वारा Mansi

Part 8 अब तक आपने देखा की नियती केहती है मे यह शादी नहीं करूंगी अब आगे की कहानी देखिए। नियती के मना करने पर खिमजी कहता है निशा ...

दो बहने - 7
द्वारा Mansi

Part 7 अब तक आपने देखा कि निशान को निशा पसंद आती है,निशा को निवान पसंद आता है ओर निवान को नियती पसंद आती है अब आगे देखिए। सब ...

दो बहने - 6
द्वारा Mansi

Part 6 अब तक अपने देखा की खिमजी ओर पूरे परिवार को घनश्याम जी ने अपने दोस्त को मिलने के लिए बुलाया निशा ने सोचा अरे ये अब घनश्याम ...

दो बहने - 5
द्वारा Mansi

Part 5 अब तक आपने देखा निशा ने शादी के लिए मना कर दिया ओर नियती की हामी हो गई थी शादी में। निशा अपने कमरे में जा कर ...

पलायन - 2
द्वारा राज कुमार कांदु

कोरोना की पहली लहर से सबक न लेते हुए सरकार ने इस बीमारी से लड़ने का कोई कारगर उपाय नहीं किया जिसका नतीजा यह निकला कि गंगा का पानी ...

पलायन - 1
द्वारा राज कुमार कांदु

वह युवा सोशल मीडिया पर एक जाना पहचाना नाम बन गया था। लोगों तक पहुँचकर जन समस्याओं की पड़ताल करना और सरकार के बारे में उनकी राय सोशल मीडिया ...

दो बहने - 4
द्वारा Mansi

Part 4 आज ८ साल बीत चुके थे। निशा आज २४ साल की हो गई थी ओर नियती २३ साल की।लेकिन इन ८ सालो मे निशा का स्वभाव नियती ...

दो बहने - 3
द्वारा Mansi

Part 3 नियती वह जुले को देखे जा रही थी, वह सोच रही थी कि यह जुला इतना हिल-डुल क्यों रहा है या फिर यह मेरा वहम है।नियती भागती ...

दो बहने - 2
द्वारा Mansi

(part2). निशा मेले मे जाने के लिए खूब उत्सुक थी। वह मेले में जाने के पहने के लिए कपड़े अभी से निकालने लगी।तभी नियती वहा आयि उसने निशा से ...

दो बहने - 1
द्वारा Mansi

प्रीतमपुरा गाओ मे एक मध्यम वर्गीय पति पत्नी रहते थे जिनका नाम सरला ओर खिमजी था।उनकी १५ ओर १६ साल की दो बेटियां थी एक निशा ओर दूसरी नियती।निशा ...

सत्य की खोज
द्वारा Poonam Gujrani Surat

अजीब कशमकश थी गिरीराज के मन में ।रात आधी से ज्यादा बीत चुकी थी पर उसकी आंखों में अंश मात्र भी नींद नहीं थी। वो सोच रहा था- क्या ...

वेश्या का भाई - (अन्तिम भाग)
द्वारा Saroj Verma

जब रामजस चुप हो गया तो कुशमा ने उससे कहा... तुम चुप क्यों हो गए? जी! आपने ही तो चुप रहने को कहा मुझसे,रामजस बोला।। अच्छा वो सब छोड़ो ...

गुलाब का खून
द्वारा Prabodh Kumar Govil

गुलाब का खून- प्रबोध कुमार गोविल ज़्यादा हरियाली तो अब नहीं बची थी पर जो कुछ भी था, उसे तो बचाना ही था। इसीलिए वो पानी का पाइप हाथ ...

वेश्या का भाई - भाग (२०)
द्वारा Saroj Verma

माई की कहानी सुनकर सबका मन द्रवित हो आया और तब रामजस बोला.... तो ये है आपके विजयलक्ष्मी से भाड़ लगाने वाली माई तक के सफर की कहानी,महलों में ...

वेश्या का भाई - भाग(१९)
द्वारा Saroj Verma

सबको दवाखाने से लौटते-लौटते दोपहर हो चुकी थी,सबके मन में हलचल भी मची थी कि माई अंग्रेजी में गोरे डाक्टर से क्या गिटर-पिटर कर रही थी ?क्योकिं चारों में ...

वेश्या का भाई - भाग(१८)
द्वारा Saroj Verma

घायल लठैत की बात सुनकर गुलनार बोली... जाने दीजिए उन्हें,जी लेने दीजिए अपनी जिन्द़गी,केशरबाई बड़े नसीबों वालीं निकलीं तभी तो उन्हें उनका भाई अपनी जान पर खेलकर उन्हें यहाँ ...

वेश्या का भाई - भाग(१७)
द्वारा Saroj Verma

दोनों का खाना बस खत्म ही हो चुका था कि तभी बुर्के में सल्तनत उनके पास आ पहुँची सल्तनत को देखते ही मंगल बोला.... अरे,बहु-बेग़म! आप ! यहाँ और ...

खुल जा सिम सिम
द्वारा Prabodh Kumar Govil

बाहर गली में बच्चे खेल रहे थे। चौंकिए मत!आप कहेंगे कि बच्चे बाहर कब खेलते हैं, वो तो मोबाइल हाथ में लेकर घर के भीतर ही खेलते हैं। नहीं, ...

वेश्या का भाई - भाग(१६)
द्वारा Saroj Verma

गुलनार और नवाबसाहब को ये मालूम नहीं चला कि उन दोनों की बातें परदे के पीछे से बहु-बेग़म सल्तनत सुन रहीं थीं,दोनों की साजिश का पर्दाफाश करने के लिए ...

वेश्या का भाई - भाग(१५)
द्वारा Saroj Verma

नवाबसाहब के जाते ही गुलनार ने केशर से पूछा... क्या हुआ केशर! नवाबसाहब ऐसे ख़फा होकर क्यों चले गए? आपने उनसे ऐसा क्या कह दिया? जी! ख़ालाजान वें मुझे ...

वेश्या का भाई - भाग(१४)
द्वारा Saroj Verma

बहु-बेग़म झरोखे पर अपने बीते हुए कल को याद करने लगी,उसके अब्बाहुजूर निहायती गरीब थे,उसकी अम्मी कैसे एक एक चीजों की बजत किया करती थी,अब्बा किसी जमींदार के यहाँ ...

वेश्या का भाई - भाग(१३)
द्वारा Saroj Verma

कोठे के बाहर मंगल ,रामजस का इन्तज़ार ही कर रहा था,जब रामजस मंगल के पास पहुँचा तो मंगल ने फ़ौरन रामजस से पूछा.... क्या कहती थी कुशमा? कहती थी ...

चपरकनाती
द्वारा Prabodh Kumar Govil

"चपरकनाती"- प्रबोध कुमार गोविल दूरबीन से इधर- उधर देखता हुआ वो सैलानी अपनी छोटी सी मोटरबोट को किनारे ले आया। उसे कुछ मछुआरे दिखे थे। उन्हीं से बात होने ...

वेश्या का भाई - भाग(१२)
द्वारा Saroj Verma

फिर कुछ देर सोचने के बाद केशर बोली.... क्या कहा तुमने? तुम मंगल भइया के दोस्त हो और यहाँ उनके कहने पर आएं हो।। जी!हाँ! आप उनसे बात करने ...

वेश्या का भाई - भाग(११)
द्वारा Saroj Verma

मत रो मेरे भाई! अब से तू खुद को अकेला मत समझ,मैं हूँ ना ! तेरे दुःख बाँटने के लिए,मंगल बोला।। लेकिन मंगल भइया! कभी कभी जब माँ की ...

श्रीलाल शुक्ल
द्वारा Saumya Jyotsna

साहित्य जगत में ऐसे अनेक नाम हुए हैं, जिन्होंने एक युग की शुरुआत की है। अपने साहित्य सृजन से लोगों को अनेक कृतियां प्रदान की हैं, जिसे पढ़कर पाठक ...