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    दास्तान-ए-अश्क -17
    by SABIRKHAN
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    कोई अपना सा होता जो मेरे मन को छुता.. कोई सपना सा था जो सारी रात न रुठा कहा से सिमट आई बरखा आंखो तले जमकर  उसने मन के ...

    शक्ति
    by सरिता बघेला "अनामिका"
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    कहानी = "शक्ति"---------------------- रात के 3:00 बजे थे भोपाल स्टेशन पर रेल की आने की आहट पाकर सारे ऑटो वालों की हलचल तेज हो गई थी।भले हो भी क्यों ...

    परिवार की वापसी
    by r k lal
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    परिवार की वापसी                                                                                                                               आर0 के0 लाल             मोहल्ले की किटी पार्टी मैं आज नीलम कहीं दिखाई नहीं दे रही थी। पूछने पर शीला ने बताया कि अ

    दास्तान-ए-अश्क - 16
    by SABIRKHAN
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    " खामोश रहने से दम घुटता है ! और बोलने से जुबान छिलती है डर लगता है नंगे पांव चलने से पांव के नीचे कोई  कब्र हिलती है!"            ...

    घरोंदा - कहानी -
    by TEJ VEER SINGH
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    #MORAL STORIES घरोंदा - कहानी - "रवि, आज तीन तारीख हो गयी। तुम माँ को लेने नहीं आये? महीना खत्म हुए तीन दिन ऊपर हो गये।तुम हर बार ऐसे ...

    दास्तान-ए-अश्क - 15
    by SABIRKHAN
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    "चल्ल बुल्लिया..  चल उथ्थे चल्लिये.. जिथ्थे सारे अन्ने..  ना कोई साड्डी जात पहचाने... ना कोई सान्नु मन्ने.. ( पंजाब के एक मशहूर कवि कहते हैं "चल रे बलमा हम ...

    दास्तान-ए-अश्क - 14
    by SABIRKHAN
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    आंखों मे कुछ तेरे अरमान छोड जायेंगे.. जिंदगी मे तेરે  कुछ निशान छोड जायेंगे ले जायेंगे सिर्फ एक कफन अपने लिये तेरे लिये सारा जहान छोड जायेंगे.. ---------    ------ ...

    शेक्सपियर के नाटक ओथेलो का अनुवाद
    by Swapnil Vaish
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    चार सौ साल पहले वेनिस में लागो नाम का एक निम्न श्रेणी का अवसर रहता था। वो अपने सेनापति ऑथेलो से उसे लेफ्टिनेंट ना बनाये जाने के कारण नफरत ...

    सोने के आलू
    by Bhupendra Dongriyal
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                                      सोने के आलू                              (1)               यह पूस का महीना था । कुछ लोग कह रहे थे कि आज़ साल ...

    मेरा भाई
    by PAWAN KUMAR
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    मेरा भाई .. कभी कुछ बताने के लिये बहुत कुछ  होता  है  तो  कभी  जितना बताओ ऊतना  काम  हो  जाता है  पर हम किसी  को जानना  नही  छोडते  तोह ...

    पिंजड़ा
    by Mukteshwar Prasad Singh
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    "पिंजड़ा"अनिमेश आज नये आॅफिस में ज्वाइन कर लिया था। साल भर पहले ही बदली हुई थी पर बाॅस ने मुख्यालय से बदली रुकवा दी थी। पेन्डिंग पड़े सभी प्रोजेक्ट ...

    फंदा
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                         "फंदा"​एक ओर पति की अचानक मृत्यु के मानसिक आघात से बदहवास थी शकुन्तला। तो दूसरी ओर मृत आनन्द के ...

    समझ अपना अपना
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                ‘‘समझ अपना अपना‘‘रजनी एवं कमलेश पति-पत्नी थे। इनकी विवाहित जिन्दगी के लगभग पन्द्रह वर्ष बीत गये थे। कमलेश एक साफ्टवेयर फैक्ट्री का मालिक ...

    प्रेम अपना अपना
    by Mukteshwar Prasad Singh
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    ​​​​              "‘प्रेम अपना अपना‘‘अचानक महानगर से एक कस्बाई शहर में आ गयी थी। बदला-बदला वातावरण अनजाने लोग, अजनबी गलियाँ, जर्जर मकान में निवास, ...

    चोर और चोरी
    by bhai sahab chouhan
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    बहुत पुरानी बात है एक शहर में एक बिज़नेस का परिवार निवास करता था . बिज़नेस मेन का नाम दशरथ सिंह था उसकी धर्मपत्नी का नाम सुशीला बाई तथा ...