नक्षत्रा का पंछी jagGu Parjapati ️ द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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नक्षत्रा का पंछी

उन सर्द रातों में अगर कोई घर की छत पर जाए तो ... उस अंधेरे आसमान में हजारों पक्षियों की अजीब आवाजें आसानी से सुनी जा सकती थी। हां अजीब...क्यूंकि आमतौर पर पक्षी भोर के समय ही चेहचाते हैं।
उसको उस रात नींद नहीं आ रही थी तो... रात को लगभग एक बजे वह अपने बिस्तर से उठ कर...सर्दी से बचने के लिए अपनी शॉल ओढ़कर छत पर निकल जाती हैं। जिंदगी के उजाले ने उसे इतने गम दिए थे कि अब रात के अंधेरे में नींद अक्सर उसकी आंखों से झगड़ा कर ही लेती थी...और अंधेरा अब उसको डराता भी कहां था...अकेले में पता नहीं उसको एक अलग ही सुकून मिलता था।
छत पर इधर से उधर चक्कर लगाने के बाद वो छत की रेलिंग से लग कर खड़ी हो जाती है।तभी उसका ध्यान काले आसमान की तरफ जाता है..जहां एक पक्षी जो अंधेरे में भी चमक रहा था...वो उसकी ही छत पर बार बार चक्कर लगा रहा था। उसको देख कर उसको याद आता है कि अक्सर जब भी वो रात को छत पर आती है तो यह पक्षी उसे हमेशा ही उनकी छत पर मंडराता हुआ दिख जाता है। देखने में आम पक्षिओं से बिल्कुल अलग... आकार में भी औसतन से बड़ा लगता था और उसका वो चमकता हुआ बदन ...किसी के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता था।
नक्षत्रा भी.. जब भी उसको देखती तो अपने सब गम भुलाकर उसमें ही खो जाती थी और फिर उसको वहीं इतनी ठंड में भी कब नींद अा जाती थी उसको पता भी नहीं चलता था...बस यही वजह थी कि जब कभी उसको नींद नहीं आती थी तो वो अपना रुख सीढ़ियों की तरफ मोड़ लेती थी।
लेकिन उसका हर बार मिल जाना नक्षत्रा को हर बार उसके लिए और ज्यादा जिज्ञासु बना देता था। वो दिन में भी बहुत बार आती थी कि शायद वो मिल जाए... लेकिन उजाले में चमक कभी उसको नजर ही नहीं अाई।
आज उसको नींद ना आना ही एक कारण नहीं था बल्कि वो उस से मिलने ही अाई थी...वो उसको जानना चाहती थी कि आखिर वो है क्या?? वो पक्षी ही है या उसका भ्रम..या फिर कुछ और??
उसके छत पर आते ही वो भी छत के ऊपर मंडरा रहा था...आज नक्षत्रा ने तय किया कि कुछ भी हो जाए वो सोएगी नहीं...उसने उसकी तरफ आज पूरी तरह नहीं देखा..क्यूंकि वो जानती थी कि उसका आकर्षण अक्सर उसको मोहित कर देता है और वो सोने को मजबुर हो जाती है।
वो खड़ी हुई और उपर की तरफ देखते हुए पागलों की तरह खुद में ही चिल्लाने लगी..
" कौन हो तुम?? और क्या चाहते हो मुझसे?? क्यूं हर बार मिल जाते हो तुम??"
उसको यकीन था कि वो पक्षी उसको नहीं सुन रहा...और वो पक्षी तो है तो उसको कैसे ही समझेगा ..लेकिन उसने आज पहली बार उस से बात करने का प्रयास किया था। उसकी आंखें ये सब कहते कहते खुद ब खुद ही भीग गई थी। वो नहीं जानती थी क्यूं?? मगर वो रो रही थी।
लेकिन जैसे ही उसका ध्यान फिर से आसमां की तरफ जाता है तो वो देखती है कि वो धीरे धीरे उसके करीब अा रहा था...आहिस्ता आहिस्ता वो बिल्कुल छत पर अा चुका था। नक्षत्रा उसको देख पा रही थी..वो अब भी चमक रहा था..उसके अगर पंख उसके शरीर से अलग कर दिए जाएं तो वो पक्षी था ही नहीं।
" मुझे नहीं पहचाना नक्षत्रा तुमने? बहुत देर लगा दी ..खुद को मुझसे मिलाने में बच्चा..!" उसने कहा..!
" आप बोल सकते हो..और मेरा नाम आपको कैसे...!!" नक्षत्रा ने हैरानी से उसकी तरफ देखते हुए कहा।
" अब भी नहीं पहचाना मुझे ?? " उसने फिर से कहा।
" आप..." नक्षत्रा ने गौर से उसकी तरफ देखते हुए कहा। वो चाहते हुए भी उसको जान नहीं पा रही थी।
" और अब .. ??" उसने कहा और धीरे धीरे उसके शरीर से निकलती रोशनी कम हो रही थी..और उसका चेहरा अब बिल्कुल नक्षत्रा से मिलता जुलता सा लग रहा था।
" मां आप..!" नक्षत्रा ने हैरानी से उनकी तरफ देखते हुए कहा..उसकी आंखें फिर से नम थी...वो भाग कर उनके करीब चली जाती हैं और उनसे लिपट जाती हैं।
" क्यूं मां..क्यूं... क्यूं आप इतनी जल्दी चली गई..आपको पता है ना मुझे आपकी कितनी जरूरत थी तब..आपको एक बार भी मेरा ख्याल नहीं आया ?? बोलो मां??" उसने रोते रोते पूछा।
" ऐसा नहीं है मेरे बच्चे...सिर्फ तेरे लिए ही तो आज तक मैं यही हूं..हमेशा तुम्हारा ख्याल रखती हूं..तुम कब क्या खाती हो से कब सोती हो हर बात तेरी मां को पता है बच्चे..अब रोना बन्द करो...और मुझसे वादा करो आगे से कभी नहीं रोओगी..!" उसने उसके सिर पर प्यार से अपना हाथ फेरते हुए कहा।
" हां आगे से कभी नहीं रोऊंगी..लेकिन आप भी वादा करो अब से आप मुझे कभी छोड़कर नहीं जाओगी मां..आपके सिवा है भी कौन मेरा इस दुनिया में??" उसने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा।
" मुझे जाना तो होगा ही ना मेरे बच्चे...तुम भी जानती हो कि हम इस दुनिया से नहीं है.. अगर मुझे तब तेरे पापा से प्यार ना होता तो आज तुम इस श्राप में ना बंधती..." उन्होंने सोचते हुए कहा।
" कैसा श्राप मां??"
" बेटा ..हम इस दुनिया से नहीं है ...एक बार जब मेरा धरती पर घूमने का मन हुआ था तब मैं किसी को बिना बताए ही अा गई थी...और तब मैंने पहली बार तुम्हारे पापा को देखा था...देखते ही मैं उन्हें अपना दिल दे बैठी और किसी को बिना बताए उनसे विवाह रचा लिया...लेकिन जैसे ही तुम्हारे नाना जी को पता चला उन्होंने हमें श्राप दिया कि तुम्हारी होने वाली संतान को सौ सालों तक इंसानों कि तरह रहना होगा..और वो जैसे ही 16 साल की होंगी तो तुमसे दूर हो जाएगी...उसके बाद तुम सिर्फ उस से एक बार बात कर पाओगी वो भी तब जब वो खुद तुम्हे बुलाएगी...बस यही वजह है कि हम तुमसे दूर है बच्चा।" उन्होंने मुरझाए स्वर से कहा।
" और पापा??"
" वो तो हमसे विवाह के एक हफ़्ते बाद ही अपना शरीर त्याग गए थे क्यूंकि हमारा तेज उनसे सहा नहीं गया था.. मुझे पहले ये सब पता होता तो मैं कभी उनसे विवाह ना रचाती ।।" उसने फिर भरे हुए गले से कहा।
" मां...इसमें आपकी कोई गलती नहीं है और ना कभी थी..."
" हूं"
" तुम भी बस अब फ़िक्र ना करो...देखो बस 100 साल की ही बात तो है जिसमें से 20 साल तो गुजर भी चुके हैं.. फिर तुम भी इंसान से हम जैसी ही बन जाओगी..जैसा कि तुम्हे होना चाहिए..फिर तुम्हे भी यहां रहने की जरूरत नहीं होगी.. तुम भी अा जाना ..मेरे साथ.. वही जहां हमें होना चाहिए...लेकिन अभी तुम इंसान हो ..और इंसानों को वहां जाना..और हमें यहां अक्सर आना अभी अलाउड नहीं है बच्चे...तो बस थोड़ा सा इंतजार करो...और खुश रहो हमेशा.. तुम अपनी मां के लिए तुम इतना भी नहीं कर सकती क्या??" उसने कहा।
" जी मां...आपके लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूं...लेकिन आपने ये सब मुझे पहले क्यूं नहीं बताया ...और पहले मुझसे मिलने क्यूं नहीं आए मां आप??"
" कैसे आती बच्चा...तुमने कभी बुलाया ही नहीं...और बिन बुलाए हम किसी से भी बात नहीं कर सकते हैं।"
" ओह अच्छा... सॉरी मां"
" कोई बात नहीं..अब मुझे चलना होगा...सुबह होने वाली है ..और कभी मत डरना...याद रखना तेरी मां भले तेरे पास नहीं है लेकिन साथ हमेशा है..." उसने मुस्कुराते हुए कहा।
" जी मां" उसने भी कहा।
" और अब सौ साल बाद ही मुलाकात होगी..क्यूंकि मुझे तुमसे सिर्फ एक बार ही बात करने कि इजाजत थी...तो कभी मत रोना ..ठीक है...अब चलती हूं...,ख्याल रखना अपना..."
इतना कहते कहते वो फिर से एक चमकते पक्षी में बदल जाती है और अंधेरे के बीच ही कहीं गायब हो जाती है।नक्षत्रा उसके औझल होने तक आसमां की तरफ निहारती रहती है। उसकी आंखे आज भी नम थी ..लेकिन साथ ही उसके लब मुस्कुरा रहे थे।
*****

सौ साल बाद.....

उसकी मां फिर से उस के लिए उसकी छत पर अाई थी...और आज उसकी मां ने जब उसको छुआ था तो वो भी उन्हीं कि तरह चमक उठी थी। दोनो एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रही थी..और धीरे धीरे वो फिर आसमां में उड़ान भर रही थी...फर्क था तो बस इतना की आज वो दोनो साथ थी ...हमेशा हमेशा के लिए...।

समाप्त
©jagGu parjapati ✍️