आख़िरी मुलाक़ात।️ jagGu Parjapati ️ द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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आख़िरी मुलाक़ात।️

"तो तुम भी यही मानती हो कि ये सब हमारी वजह से हुआ है ??"
"हां बिल्कुल क्यूं नहीं और सच मानने या ना मानने से बदल नहीं जाता और इन सब की वजह तुम हो, ये भी एक सच है।"
"तुम इतने यकीन से हम पर इल्ज़ाम कैसे लगा सकती हो।"
"क्यूंकि अगर तुम मेरी जिंदगी में ना होते तो आज हम कहां से कहां पहुंच गए होते,लेकिन तुम्हारी वजह से हम पहुंचना तो दूर एक कदम चलना भी शुरू नहीं कर पाते।"
"पर मैंने तो तुम्हे कभी नहीं बोला कि तुम मुझे हमेशा अपने साथ लेकर चलो,तुम जब चाहो मुझे छोड़ सकती हो।यकीनन अगर तुम चाहो तो मैं कभी भी तुम्हारी जिंदगी में लौट कर नहीं आऊंगा।"
" लेकिन गुरु समस्या तो यही है जब तुम हमारे सामने होते तो हमारा खुद पर भी ज़ोर नहीं चलता,किसी और पर रौब झाड़ना तो फिर दूर की बात है।"
"ऐसा क्यूं?? पर तुम तो मुझसे नफरत करती हो।"
"किसने कहा हम तुमसे नफरत करते है,भला कभी किसी को खुद से भी कभी नफरत हुई है ?? और फिर तुम तो हमेशा हमारे अंदर ही रहते हो। हां माना कुछ लोग बोल देते हैं कि हमें खुद से नफरत है लेकिन अगर कहीं उनको खुद का एक बाल भी सफेद दिख जाए तो चिल्ला चिल्ला कर पूरा मोहल्ला इकट्ठा कर लेते हैं।"
"नफरत भी नहीं करती हो और मुझे छोड़ना भी चाहती हो ……मैं तुम्हें समझ नहीं पा रहा हूं।"
"अरे नहीं नहीं .....ना ही हम आपसे नफरत करते हैं और ना ही आपको छोड़ना चाहते हैं।"
"फिर तुम क्या चाहती हो? "
" हम बस चाहते हैं कि तुम बस सही समय पर हम से मिलो ,लेकिन तुम तो कभी भी मुंह उठा कर चले आते हो ,कभी कभी तो जब तुम्हे बिल्कुल भी हमारे पास नहीं होना चाहिए तब सबसे ज्यादा तुम्हे हम अपने साथ महसूस करते हैं।"
"मैं बिना बुलाए कभी नहीं आता जब तुम याद करती हो बस तभी आता हूं।"
"ओह हेल्लो ! हम तुम्हे कभी याद नहीं करते समझे तुम।"
"तुम करती हो,बस तुम्हे खुद भी पता नहीं चलता"
"अच्छा "
"जी"
"उस दिन जब हमारा बारहवी कक्षा का रिजल्ट आना था याद है तुम्हे वो दिन??
"हां बिल्कुल"
" हमें पता भी था कि हम पास हो जाएंगे ,एक दिन पहले भी खुश थे,लेकिन जिस दिन रिजल्ट आया तुम उस दिन फिर अा टपके ,तब हमने तुम्हे कब याद किया बताना जरा??"
"तुम्हे याद है जब पापा ने कहा था कि बेटा अगर मेरिट से पास नहीं हुई तो कहीं भी अच्छे कॉलेज में एडमिशन नहीं हो पाएगा,तब तुम ने किसके बारे में सोचा था??"
"हम… हम।।"
"हां तुम,सोचो सोचो।"
" अच्छा चलो ठीक है मान लिया वो गलती से कर लिया था तुम्हे याद उस दिन। लेकिन उस रात क्षेत्रा की पार्टी में तब??"
"तब भी जब तुम्हे 8 बजे घर की याद अाई थी कि तुमने किसी को बताया ही नहीं कि तुम यहां हो और उपर से घर का नंबर भी नहीं मिल रहा था,तब तुमने घर के साथ साथ मुझे याद किया था।"
"यार तुम हर बार अपनी बात क्यूं मनवा लेते हो हमसे।।"
"मैं नहीं मनवाता तुम खुद मानती हो , मैं तो हमेशा वही करता जो तुम चाहती हो।"
"अच्छा,मतलब तुम वहीं करोगे जो हम चाहते?"
"जी बिल्कुल"
"तो फिर हम चाहते कि तुम अब यहां से चले जाओ।"
"जो हुकुम सरकार"
अरे सच में चला गया। चलो अच्छा ही हुआ चला गया। लेकिन अगर वो दोबारा अा गया तो …. ।"
"तुम फिर से अा गए?? अभी तो तुमने कहा था कि जो हम चाहेंगे तुम वहीं करोगे।"
"हां मैंने बोला था,लेकिन अभी तुमने ही तो मुझे याद किया?"
"मैंने कब याद किया तुम्हे"
"तुमने किया था। तुम्हे इस बात का भी डर है कि कहीं तुम्हारा डर फिर से वापिस ना अा जाए,और तुम्हारा ये सोचना ही मुझे तुम्हारे सामने लाकर खड़ा करने के लिए पर्याप्त है।'
" हे मेरे प्रभु जी !!तो फिर तुम ऐसे तो कभी जाओगे ही नहीं यार"
"मैं कहीं कभी जाता ही नहीं हूं,हमेशा तुम्हारे साथ ही होता हूं ,बस जब तक तुम नहीं चाहती तब तक मैं तुम्हारी जिंदगी का हिस्सा नहीं बन सकता हूं।"
"ओके !! तो फिर सुनो अब तुम सिर्फ तब आना जब हम कुछ गलत कदम बढ़ाए,तब नहीं जब हम सही हो। तुम सिर्फ तब आना जब हम किसी को नुकसान पहुंचाए ना कि तब जब हम नुकसान पहुंचाने वाले को सजा दे।तुम बस तब आना जब हम हारकर टूट जाए और जीत को भूलने लगे ,तब नहीं जब हम जीत जाए ।तब आना कब कभी हम इंसानियत भूलने लगे। तब आना जब हम झूठ का साथ दे।तब नहीं जब सच के लिए लडे।
सुनो अब बस तुम तब ही आना जब तुम्हे आना चाहिए ,तब नहीं जब तुम्हे वहां नहीं होना चाहिए।"
"जो हुकुम सरकार"
उस दिन से वो चला गया। और अब तक हम उनसे दोबारा नहीं मिले। वो कोई और नहीं हमारा डर था,जिसको अब हम अलविदा कह चुके हैं।अब तक वो लौट कर नहीं आया शायद हमने कुछ गलत नहीं किया।।"
हमारी माने तो आप भी अलविदा केह दीजिए अपने डर को , सच में बहुत अच्छा लगेगा।
डरिए लेकिन सिर्फ तब जब आप कुछ गलत करें।।।।।
jagGu parjapati,☺️🙏