तू जाने ना... - 5 Priyanca N द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तू जाने ना... - 5

5. आज कुछ स्पेशल है




सुबह जल्दी उठ रिधिका लॉन में घूम रही थी तभी क्रियांश वहां आ गया दोनों साथ में बिन कुछ बोले घूम रहे थे कि तभी अहाना कि आवाज़ रिधिका के कानों में पड़ी जो उसे ही घूम रही थी। अहाना कि आवाज़ सुन रिधिका अंदर जाने के लिए जैसे ही मुड़ी कि तभी किसी ने उसका दुपट्टा पकड़ खींच लिया था।

रिधिका का दिल ज़ोर से धड़का और उसने मन में कहा... क्रियांश के अलावा तो यहां कोई भी नहीं है तो फ़िर इसने मेरा दुपट्टा क्यों पकड़ा ? आख़िर क्या कर रहा है ये लड़का ? रिधिका के चेहरे पर पसीने कि बूंदे उभर आई।

उसने लगभग हकलाते हुए कहा... अ आपने मेरा दुपट्टा क्यों पकड़ा है ? मुझे जाना है मेरा दुपट्टा छोड़ दीजिए... ये कहते ही रिधिका जैसे पीछे मुड़ी तो वो हैरान हो गई। क्रियांश तो उससे दूर खड़ा फूलों को निहार रहा था और वो उससे इतनी दूर था कि दुपट्टा पकड़ना तो दूर क्रियांश को तो उसकी आवाज़ भी नहीं गई होगी। तभी रिधिका कि नज़र गमले पर गई उसका दुपट्टा तो गुलाब के कांटों में फंसा था। रिधिका ने धीरे से दुपट्टा कांटों से हटाया और जल्दी अंदर गई।

रिधिका का दुपट्टा तो छूट गया था लेकिन उसका दिल अभी भी उस गुलाब के कांटों में उलझा था। उसे ख़ुद की नासमझी पर हसी आ रही थी और चेहरा लाल हो गया था। अब वो जल्दी से जल्दी वापस हॉस्टल जाना चाहती थी।

रिधिका जैसे ही हॉल में गई अहाना ने उसे घूरते हुए सवाल किया... इतनी सुबह तुम कहां गई थी ? पैर का दर्द अब कैसा है ?

रिधिका कुछ कहती इससे पहले ही अद्वैत ने कहा... इतनी सुबह तुम दोनों लॉन में वॉक कर के आ भी गए ? ये तो अच्छी बात है।

अहाना ने सवालिया नज़रों से पूछा... दोनों लोग ?

तभी अहाना कि नज़र रिधिका के पीछे आ रहे क्रियांश पर गई रिधिका ने भी उसे पीछे मुड़ कर देखा। वो उसके पीछे ही खड़ा था। इससे पहले कि रिधिका कुछ कहती अहाना उसका हाथ पकड़ उसे रूम में ले गई।

क्रियांश को चुप देख कर अद्वैत ने पूछा... सुबह सुबह कौनसी चिंता में गुम हो भाई ? क्या बात है ?

इस पर थोड़े परेशान होते हुए क्रियांश ने कहा... मेरा मौन व्रत टूट गया न भाई अब मैं ये सोच रहा हूं UPSC में फेल होने का सबको क्या रीज़न दूंगा

ये सुन अद्वैत ने कहा... हां भाई सोचो सोचो क्योंकि जो तुम्हारा जवाब होगा वही तो मेरा जवाब भी माना जाएगा।

क्रियांश ने थोड़ा चिड़ते हुए कहा... हर बार मैं क्यों सोचूं कभी तू भी तो मुझे किसी मुश्किल से निकाल लिया कर

अरे भाई ये तो छोटी मोटी परेशानियां हैं ना मैं तो एक दिन तुझे तेरी लाइफ़ की सबसे बड़ी प्रोब्लम से निकाल लूंगा... अद्वैत ने मुस्कुराते हुए कहा और क्रियांश के कांधे पर हाथ रखते हुए बोला चल अब जल्दी सोच हमें क्या कहना है और दोनों रूम में चले गए।

नाश्ते के वक्त सब लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे थे। आज बहुत दिनों के बाद क्रियांश और अद्वैत सबके साथ नाश्ता करने वाले थे वरना वो अपनी पढ़ाई कि वजह से अपने रूम में ही नाश्ता करते। इसीलिए आज अमृता जी और सुनंदा जी दोनों मिलकर उन दोनों की पसंद का नाश्ता बनाने में लगी थी।

कुछ देर बाद रिधिका भी वहां आई और उन दोनों की मदद करने के लिए किचन में गई। असल में वो क्रियांश के सामने नहीं आना चाहती थी। लेकिन कुछ ही देर बाद क्रियांश अद्वैत के साथ किचन के गेट के सामने आके खड़ा हो गया। रिधिका को अपने किचन में अपनी मां और चाची के साथ यूं खाना बनाते देख कर एक अजीब सी राहत मिल रही थी। उसने मन में कहा... काश तुम यहां रोज़ हो सकती रिधिका...

रिधिका की नज़र जैसे ही क्रियांश पर पड़ी वो झट से जाके अमृता जी के पीछे खड़ी हो गई। अमृता जी उस वक्त पूडियां तल रही थी उन्होंने रिधिका को देखते हुए प्यार से कहा... तुम आराम करो बेटा ये सब हम कर लेंगे। तुम्हारा पैर अब तक ठीक नहीं हुआ।

रिधिका ने हल्की मुस्कान के साथ कहा... पैर ठीक है आंटी जी। अब दर्द भी नहीं है और अगर अब और बैठी रही तो सच में बीमार पड़ जाऊंगी। ये कहते हुए उसने अमृता जी के हाथ से कड़छुल लेते हुए कहा... लाइए पूरियां मैं निकल देती हूं। और वो पूरियां निकलने लगी।

किचन के गेट पर खड़े क्रियांश और अद्वैत ये सब बड़े ध्यान से देख रहे थे रिधिका को यूं हाथ बंटाते देख क्रियांश के मुंह से निकला... लगता है आज नाश्ते में कुछ स्पेशल मिलने वाला है।

क्रियांश की आवाज़ सुन जाने रिधिका को क्या हुआ उसका हाथ कांपा और गरम खौलते हुए तेल का एक बड़ा छींटा उसकी कलाई पर आ गिरा। उसके मुंह से एक आह निकल गई और कड़छुल उसके हाथ से नीचे गिर गया।

अमृता जी और सुनंदा जी ने जब ये देखा वो जल्दी से रिधिका के पास आई और बोली अरे बेटा क्या हुआ ?

इससे पहले कि रिधिका कुछ कहती क्रियांश पलक झपकते ही किचन में आया और रिधिका का हाथ पकड़ कर नल के नीचे कर दिया। क्रियांश ने उसे देखते हुए हल्के गुस्से में कहा... कल पैर आज हाथ उससे पहले एक्सीडेंट ये क्या कर रही हैं आप ? ध्यान कहां रहता है आपका ?

क्रियांश के लफ़्ज़ों में रिधिका के लिए फिक्र साफ दिखाई दे रही थी। पानी से जलन कम तो हो रही थी लेकिन रिधिका की आंख नम हो गईं थीं। इतने में अमृता जी ने फ्रिज से बर्फ़ निकाली और क्रियांश को देते हुए कहा... जल्दी से इसे लगा दो बेटा नहीं तो छाला पड़ जायेगा। क्रियांश ने बर्फ़ लेते हुए रिधिका के हाथ पर लगाया कि तभी वहां अहाना आ गई और उसने आते ही कहा... ओहो रिधु तुम कभी ठीक क्यों नहीं रहती ? अहाना ने जब क्रियांश को उसके हाथ पर बर्फ लगाते देखा तो छेड़ते हुए फिर से कहा... कहीं ऐसा तो नहीं तुम्हें क्रियांश भैया से अपनी सेवा करवाना अच्छा लग रहा है इसीलिए कल से उनसे अपनी सेवा करवाए जा रही हो।

ये सुन क्रियांश का ध्यान वहां खड़े बाकी लोगों पर गया वो तो जैसे भूल ही गया था यहां बाकी सब भी हैं। जैसे क्रियांश को रियलाइज हुआ वो रिधिका के हाथ में बर्फ़ पकड़ा कर कीचन से बाहर चला गया।

अमृता जी ने अहाना को घूरते हुए कहा... अनू...
और अहाना चुप हो गई। फिर उन्होंने रिधिका से कहा... बेटा अब तुम बाहर जाओ और आराम करो अब कोई ज़िद नहीं।

रिधिका ने सर हिलाया और बर्फ़ का टुकड़ा हाथ में लिए हुए किचन से बाहर आ गई क्रियांश वहां नहीं था। कुछ देर में सब लोग नाश्ते के लिए टेबल पर आ गए। आज घर का सबसे बड़ा बेटा संकेत भी वहां मौजूद था। फ़ील्ड मार्शल संकेत कल रात ही कुछ दिन की छुट्टी आया था।

नाश्ता शुरू हुआ और आज संकेत ने क्रियांश और अद्वैत की क्लास लगानी शुरू कर दी... तुम दोनों ने अपने 2 साल वेस्ट कर दिए हैं और मुझे लगता है अब तुम दोनों को UPSC भूल कर किसी और करियर की तरफ़ ध्यान देना चाहिए।

क्रियांश ने देखा अब रिधिका को ठीक लग रहा है। ये देख उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसका पूरा ध्यान जैसे रिधिका पर ही था। उसे तो जैसे संकेत की बात सुनाई ही नहीं दे रही थी। अपनी बातों पर क्रियांश को कोई जवाब ना देता देख संकेत ने थोड़ा ज़ोर से कहा... क्रियांश ध्यान कहां है तुम्हारा ?

संकेत कि तेज़ आवाज़ से क्रियांश का ध्यान टूटा और वो हड़बड़ाते हुए बोला... वो कहीं नहीं भैया मैं कह रहा था

संकेत ने अपनी भोंह चढ़ाते हुए बोला... हां तो कहो मैं सुन रहा हूं

अब क्रियांश सोच में पड़ गया कि आख़िर संकेत ने उससे पूछा क्या था। वो अभी सोच ही रहा था कि संकेत ने फिर से कहा... बोलो अब क्या सोचा है ? अब आगे क्या करना है ? कुछ सोचा है ?

अब क्रियांश ने कहा... वो भैया अभी नीचे आने से पहले मैं और अद्वैत यही सोच रहे थे हमने सोचा है हम एक कोचिंग सेंटर ओपन करेंगे।

टेबल पर बैठी रिधिका भी सबकी बातें बड़े ध्यान से सुन रही थी। संकेत ने एक और सवाल किया... कोचिंग सेंटर में पढ़ाई किस चीज़ कि होगी ? गज़लो कि शायरी कि या हिंदी साहित्य कि ?

उन सब कि जो UPSC में पढ़ाया जाता है... क्रियांश ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा।

अब अद्वैत ने भी अपनी बात रखते हुए कहा... हां भैया हमने सोचा है इस बहाने हम पढ़ भी लेंगे और दूसरों को भी पढ़ा देंगे। वैसे मैं तो नेक्स्ट अटेम्प्ट भी ट्राई करूंगा। मुझे कोचिंग के अलावा UPSC भी क्वालीफाई करना है।

अच्छा... और कोई आप दोनो से क्यों पढ़ेगा ? एक असफल टीचर आख़िर अपने स्टूडेंट्स को क्या पढ़ा सकता है.. संकेत ने दोनों से पूछा

अब क्रियांश ने कहा... सॉरी भैया... लेकिन हम असफल नहीं हैं लाखों बच्चे UPSC अटेम्प्ट करते हैं और जिसके लिए वो सालों मेहनत करते हैं हम भी कि है और भैया सच्चाई तो यही है ना UPSC कोचिंग वही पढ़ाते हैं जिनका एग्जाम क्लियर नहीं होता अब कोई IAS या IPS बनने के बाद तो कोचिंग सेंटर खोलेगा नहीं इसीलिए ये ज़िम्मेदारी हमने ली है।

बात लॉजिकल थी और सही तरीक़े से कही गई थी तो सब इस बात से मान गए।

कमीशनर साहब ने कहा... ठीक है... कोचिंग कहां खोलनी है बता देना।

अब जज साहब भी बोले... और इसके लिए तुम दोनों के क्या प्लांस है वो भी बताओ। सिविल सर्विसेज के लिए कोचिंग खोलना भी कोई आसान काम नहीं है। मुझे प्रॉपर ब्लू प्रिंट चाहिए तुम लोगों कि कोचिंग प्लानिंग का

जी छोटे पापा वो बस रेडी है हम 4-5 दिन में आपको दिखा देंगे.... क्रियांश ने कहा

4-5 दिन में नहीं मुझे आज शाम तक तुम दोनों की कोचिंग स्कीम का ब्लू प्रिंट चाहिए... जज साहब ने लगभग ऑर्डर देते हुए कहा। इस पर दोनों ने हां में सर हिलाया।

कमीशनर साहब और जज साहब वहां से चले गए थे संकेत भी अपने रूम में जा चुका था और अमृता जी और सुनंदा जी भी किचन के बाकी काम खत्म करने चली गई थी। रिधिका ये सारी बातें बड़े ध्यान से सुन रही थी उसने मन में कहा... समझदार तो बहुत है सबसे अपनी बात मनवा लेता है। जाने इसकी बातें हमें क्यों इतना बेचैन करती हैं। हमें इससे दूर रहना होगा। सबके जाने के बाद रिधिका अहाना से बोली... हम रूम में जा रहे हैं ज़रा बैग ठीक कर लें।

अहाना रिधिका के साथ जाने के लिए उठी ही थी की उसने अद्वैत और क्रियांश की बातें सुनी।

अद्वैत जो क्रियांश से कह रहा था... अरे भाई कहां है ब्लू प्रिंट ? कहां है कोई स्कीम ? मुझे तो अभी पता चला हम कोचिंग सेंटर खोलने वाले हैं। कोचिंग तो ठीक है लेकिन ब्लू प्रिंट वो बी शाम तक कैसे तैयार होगा ? मैंने तो कुछ सोचा भी नहीं

तभी अहाना उन दोनों के पास आई और बोली... आदी भाई मैं आपकी हेल्प कर सकती हूं लेकिन बदले में मुझे कुछ चाहिए।

अद्वैत ने कन्फ्यूज होते हुए उससे कहा... तुम कैसे करोगी हमारी हेल्प तुम्हें पता भी है कोचिंग सेंटर का कुछ ?

अहाना चिड़ते हुए बोली... ठीक है मत लो हेल्प अब जब शाम को पापा आपसे ब्लू प्रिंट मांगेंगे तो आप खुद ही मैनेज करना... मैं तो चली... इतना कहकर वो आगे बढ़ी कि तभी अद्वैत ने पीछे से उसे पकड़ा और प्यार से कहा... अरे मेरी प्यारी बहना नाराज़ क्यों होती है अपने भैया की हेल्प नहीं करेगी ?

अहाना ने चहकते हुए कहा... भाई मैंने तो बोला था आप ही मेरी हेल्प नहीं ले रहे

अरे नहीं नहीं तू हमारी हेल्प कर दे ना... अद्वैत

वो तो ठीक है अनु पर तुम हमारी हेल्प करोगी कैसे ? क्रियांश ने सवालिया नज़रों से पूछा

अहाना बोली... मैं नहीं भैया... मेरी प्यारी रिधिका आपकी हेल्प करेगी आप दोनों को पता नहीं है ये कितनी अच्छी प्लानर है और आपकी कोचिंग सेंटर के लिए इससे अच्छा प्लैनर कोई हो ही नहीं सकता

ये सुन रिधिका तो बिल्कुल चौंक गई वो मना करने के लिए जैसे ही बोलने को हुई के तभी क्रियांश ने रिधिका से पूछा... क्या आप हमारी स्कीम प्लान करने में हमारी हेल्प करेंगी ?

रिधिका अपना जवाब दे पाती इससे पहले ही अहाना बोल पड़ी... अरे भैया ये आपकी हेल्प करेगी लेकिन बदले में आपको हम दोनों को शॉपिंग करवानी होगी।

अब अद्वैत ने क्रियांश के जवाब देने से पहले हां कर दी। अहाना खुश होते हुए अद्वैत के गले लग गई। वहीं क्रियांश की नज़र रिधिका पर पड़ी जो परेशान दिख रही थी।

रिधिका जो क्रियांश से दूर जाना चाहती थी अहाना जाने अनजाने में उन दोनों को करीब ला रही थी। क्या रिधिका करेगी क्रियांश की मदद ? क्या होगा रिधिका का फ़ैसला ?