तू जाने ना... - 2 Priyanca N द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तू जाने ना... - 2

2. मौन व्रत



क्रियांश और अद्वैत जैसे ही घर में आए अहाना भागते हुए दोनों के पास आई और बोली... क्रियांश भईया आदी भईया आप दोनों जल्दी से अपने रूम में चले जाइए। बड़े पापा और पापा दोनों बहुत गुस्से में हैं। जब पाखी दी और जीजू आयेंगे, हम सब उस वक्त आपको बुला लेंगे वर्ना आप दोनों को बहुत डांट पड़ेगी।




अहाना की बात सुन कर अद्वैत ने घबराते हुए कहा... भाई मुझे तो टेंशन हो गई है। अब कहीं बड़े मामा और छोटे मामा हमें ज़्यादा ना डांट दे और आज तो पाखी दी और पुष्कर जीजा जी भी आ रहे हैं अगर मामा जी ने उनके सामने डांटा तो पाखी दी कितना ज़्यादा हर्ट होंगी... ये कहते हुए अद्वैत थोड़ा मायूस हो गया।




क्रियांश कुछ कहने ही वाला था इससे पहले ही सुनंदा जी ने उनके पास आते हुए कहा... बेटा आप दोनों क्यों चिंता करते हैं, हम और दीदी हैं ना... हम भाई साहब और आपके छोटे मामा जी को आप दोनों को डांटने नहीं देंगे।




अमृता जी ने भी दोनों बच्चों के सर पर हाथ फेरते हुए कहा... हम अपने बच्चों को जानते हैं। आप दोनों ने कितनी मेहनत की थी इस एग्जाम के लिए। कितनी रातें आप दोनों ने जागते हुए बिताई हैं। हम सब जानते हैं कुछ नहीं छुपा हमसे और हमें अपने बच्चों पर पूरा भरोसा है, आप दोनों अगले एग्जाम को ज़रूर क्वालीफाई कर लेंगे।




अमृता जी की बात सुन कर दोनों भाई उनसे लिपट गए। तभी पीछे से धनंजय जी गुस्से में बोले... बस यही तो करना आता है आप दोनों को... पता नहीं कब बड़े होंगे... कब अपनी जिम्मेदारियां समझेंगे... एक एग्जाम तक क्वालीफाई नहीं हो रहा है आप दोनों से... फिर अपने फ़्यूचर में क्या करेंगे आप दोनों... पता है ना बिना किसी बड़े पद पर पहुंचे इंसान किसी काम का नहीं होता... कुछ सीखिए अपने बड़े भाइयों से...




World's second toughest exam UPSC में 1 नंबर से भी कम की वजह से एग्जाम क्वालीफाई ना कर पाने पर आज क्रियांश और अद्वैत धनंजय जी की नज़रों में कुछ नहीं रहे थे। अद्वैत को धनंजय जी ज़्यादा कुछ नहीं कह सकते थे इसीलिए उनका सारा गुस्सा बेचारे क्रियांश पर ही निकल रहा था। क्रियांश चुपचाप सब सुन रहा था लेकिन अब धनंजय जी ने उसके Writer बनने के सपने को लेकर बोलना शुरू कर दिया।




धनंजय जी ने कहा... हमें यकीन है अद्वैत तो अगले साल अपने एग्जाम को क्वालीफाई कर लेंगे लेकिन क्रियांश आप क्या करेंगे ? सिर्फ कागज़ पर कुछ शब्द लिखने से घर नहीं चलता, ना ही कोई रेपुटेशन बनती है। हम जानते हैं इस बार भी आपका पूरा ध्यान एग्जाम पर कम और अपनी पोयट्री और नोवेल्स लिखने में ही होगा इसीलिए आप ये एग्जाम क्वालीफाई नहीं कर पाए।




अपने writer बनने के सपने को छोड़ क्रियांश एग्जाम प्रिपरेशन में लगा हुआ था। दिन रात मेहनत भी की थी लेकिन क़िस्मत ने साथ नहीं दिया और एग्जाम क्वालीफाई ना करने की वजह उसके सपने को बना दिया गया। क्रियांश को ये तो पता था कि उसके पिता उसके राइटर बनने के सपने को इतनी इम्पोर्टेंस नहीं देते लेकिन आज वो अपने पिता की बातों से बहुत हर्ट हुआ था। क्रियांश ने अपनी सफाई में कुछ कहना चाहा तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई और पाखी अपने पति पुष्कर और अपनी एक साल की बेटी परिधि के साथ घर आ गई। उन दोनों को देख धनंजय जी ने अपने गुस्से पर थोड़ा कंट्रोल किया और नॉर्मल होकर पाखी और पुष्कर का स्वागत कर उनसे बात करने लगे। अद्वैत हॉल में ही रुक गया लेकिन क्रियांश थोड़ी ही देर बाद ऊपर अपने कमरे में चला गया।




सिंघानिया मेंशन का ऊपरी हिस्सा क्रियांश का था जहां उसके रूम के साथ अद्वैत का रूम था और दोनों के सामने वाली छत पर एक छोटा कमरा था जो की ख़ाली था और उसी कमरे के ठीक साथ में थी क्रियांश और अद्वैत की लाइब्रेरी जहां पर इन दोनों के अलावा किसी और का जाना सख़्त मना था।




क्रियांश अपनी लाइब्रेरी की दीवार पर लगे नोटिस बोर्ड के सामने खड़ा था उसने वहीं साइड में रखा एक नोट पैड उठाया और उस पर लिखना शुरू किया...

काश... इस परिवार में कोई मुझे और मेरे सपने को समझने वाला होता...

और उसे सिंगल फोल्ड करके नोटिस बोर्ड पर लगा दिया। क्रियांश और अद्वैत की एक आदत थी उन्हें अपने परिवार के सदस्यों से जो भी शिकायतें होती या वो बातें जो वो किसी से शेयर नहीं करना चाहते उन बातों और शिकायतों को ये दोनों पेपर पर लिख कर नोटिस बोर्ड पर लगा देते। अपनी मन की बात लिखने के बाद क्रियांश अपने रूम में चला गया और खुद को अपने रूम में बंद कर लिया। दोपहर से रात होने को आई थी पाखी और पुष्कर भी चले गए थे लेकिन क्रियांश अब तक अपने कमरे में ही था। पाखी और पुष्कर के साथ व्यस्त होने के वजह से अद्वैत भी क्रियांश के पास नहीं गया था।




पाखी और पुष्कर के जाते ही अमृता जी ने अद्वैत से कहा... आदी बेटा आप जाकर ज़रा क्रियांश को देखिए दोपहर से अपने रूम में बंद हैं कुछ खाया भी नहीं है कहीं बीमार ना हो जाए।




सुनंदा जी ने कहा... हममें से अगर कोई भी ऊपर गया तो क्रियांश और ज़्यादा गुस्सा हो जायेगा। आदी सिर्फ़ आप ही हैं जो ऊपर जा सकते हैं और क्रियांश का गुस्सा शांत कर सकते हैं।




अद्वैत ने कहा... बड़ी मामी छोटी मामी आप दोनों चिंता मत कीजिए हम भी बस अभी ऊपर ही जा रहे थे दी और जीजू के यहां होने के वजह से हमें टाइम ही नहीं मिला क्रियांश के पास जाने का .. हम अभी जाते हैं।




सुनंदा जी ने कहा... हम खाना लाते हैं आप क्रियांश को वहीं खिला देना हमें उनकी आदत पता है जब तक गुस्सा शांत नहीं होगा तब तक वो भाई साहब के सामने नहीं आएगा।




अमृता जी ने भी हामी भरी और खाने की प्लेट अद्वैत को दी। अद्वैत खाना लेके ऊपर आया और उसने क्रियांश के रूम का गेट नॉक किया लेकिन अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई। अब अद्वैत ने क्रियांश को आवाज़ लगाई और उसे गेट खोलने के लिए कहा लेकिन अब भी कोई जवाब नहीं।




अद्वैत को सबसे ज़्यादा लगाव क्रियांश के साथ था जबसे वो इस घर में आया था क्रियांश के साथ ही रहता था दोनों में चाहे कितनी भी लड़ाई क्यों न हो लेकिन दोनों की आदत थी दोनों एक दूसरे से ज़्यादा समय तक नाराज़ और बात किए बिना नहीं रह सकते थे।




अद्वैत ने क्रियांश को फिर से पुकारा और कहा... यार भाई ऐसे मत कर ना देख मुझे बहुत भूख लगी है तुझे पता है तू खाना नहीं खाएगा तो मैं भी नहीं खाऊंगा तुझे अपने भाई की फ़िक्र नहीं है क्या ?




अद्वैत अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था इससे पहले ही क्रियांश ने गेट खोला और अद्वैत को अंदर आने का इशारा किया। अद्वैत भी अंदर आ गया उसने क्रियांश से बात करने की कोशिश की लेकिन ये पहली बार था जब क्रियांश घरवालों के साथ साथ अद्वैत से भी बात नहीं कर रहा था। दोनों ने खाना खत्म किया और क्रियांश ने उससे बस इतना कहा... मुझे सर दर्द है सोना है गुड नाईट और गेट बंद कर दिया। अद्वैत नीचे आया और उसने सब अपनी दोनों मामीयों को बता दिया।




अगले दिन नाश्ते के वक्त सब डाइनिंग टेबल पर थे सिवाय क्रियांश के जो अब तक अपने कमरे में बंद था। धनंजय जी ने नाश्ता खत्म कर उठते हुए अमृता जी से कहा... अपने लाड़ले को बोल दीजिए ऐसे खुद को कमरे में बंद रखने से UPSC क्वालीफाई नहीं होगा। और वहां से चले गए कुछ देर बाद जज साहब यानी संजय जी, भी चले गए। अमृता जी और सुनंदा जी के साथ साथ अहाना ने अद्वैत कि तरफ देखा और अद्वैत ने कहा... हां हां हम जा रहे हैं... इतना कह कर अद्वैत अपने भाई को बुलाने के लिए ऊपर चला गया।




अद्वैत ने ऊपर आके देखा क्रियांश अपने कमरे में नहीं है अद्वैत ने लाइब्रेरी में देखा क्रियांश उसे वहां भी नहीं मिला। अद्वैत नीचे जाने के लिए मुड़ा ही था कि तभी उसे उस खाली कमरे से कुछ आवाज़ आई और वो उस कमरे में गया वहां क्रियांश मुंह को ढक कर उस कमरे को साफ करने में लगा हुआ था।

अद्वैत ने क्रियांश से कहा... क्रियांश ये क्या कर रहा है ? नीचे चल सब नाश्ते के लिए तेरा वेट कर रहे हैं।

क्रियांश... तू जा मुझे सबके साथ नाश्ता नहीं करना

अद्वैत... बड़े मामा और छोटे मामा अपने अपने काम के लिए चले गए हैं दोनों मामी तुझे लेके परेशान हैं चल नीचे

क्रियांश... मुझे नहीं जाना

क्रियांश के इतना कहने पर अद्वैत उसका हाथ पकड़ ज़बरदस्ती उसे नीचे ले आया। वहां अमृता जी और सुनंदा जी ने उसे नाश्ता दिया और समझाने लगे। क्रियांश का मूड ठीक करने के लिए अहाना ने उससे कहा... क्रियांश भईया आपको याद है ना आपने मुझसे प्रोमिस किया था आप आज मेरे साथ मेरे कॉलेज के कल्चरल प्रोग्राम में चलेंगे।




क्रियांश को याद आया और उसने अहाना के साथ ना जाने के लिए कहते हुए कहा... छोटी मुझे कुछ काम है तुम आदी के साथ चले जाना।




इतना सुनते ही अहाना ने रोनी सूरत बनाते हुए अमृता जी से कहा... बड़ी मम्मा देखो ना भईया को अपना प्रोमिस ब्रेक कर रहे हैं गलत बात है ना ये तो और इतना कहते हुए उसकी आंखें नम होने लगी। अहाना सिंघानिया परिवार में सबसे छोटी थी सबकी लाडली और अपने सभी भाईयों की जान भी थी। उसके चेहरे पर उदासी उसके किसी भी भाई और परिवार के किसी भी सदस्य को ज़रा भी पसंद नहीं थी। इसी का फायदा उठाकर अहाना अपने भाईयों से और बाकी सब से अपनी हर बात मनवा लेती थी और आज भी ऐसा ही हुआ।




उसका मायूस चेहरा देखकर क्रियांश ने उसके कॉलेज के कल्चरल प्रोग्राम में जाने के लिए हां कर दी। वैसे तो अहाना को कॉलेज के किसी भी प्रोग्राम में कोई रुचि नहीं थी लेकिन इस बार उसके कॉलेज के कल्चरल प्रोग्राम में उसकी बेस्ट फ्रेंड पार्टिसिपेट कर रही थी और इसीलिए अहाना को वो प्रोग्राम अटेंड करना था।




अहाना अपने दोनों भाई क्रियांश और अद्वैत के साथ कॉलेज के लिए निकल गई। अहाना का कॉलेज आज बहुत ही सुंदर लग रहा था कल्चरल प्रोग्राम होने के वजह से सभी स्टूडेंट्स ट्रेडिशनल वेयर में थे। जहां सब लड़को ने कुर्ता पहना था वहीं सभी लड़कियां सूट, अनारकली और साड़ी में थी। तीनों बहन भाई सेमिनार हॉल में पहुंचे और अपनी अपनी सीट पर बैठ गए।




कुछ देर तक तो क्रियांश वहीं रहा लेकिन 2-3 परफॉर्मेंस के बाद वो वहां से जाने के लिए उठ खड़ा हुआ। अद्वैत के पूछने पर उसने बस इशारे में कहा अभी आता हूं... और वहां से जाने लगा। उसके जाते ही अहाना ने अद्वैत से कहा... आदी भईया ये क्रियांश भईया का मौन व्रत आख़िर कब खत्म होगा ?

अद्वैत ने कहा मैं जाकर देखता हूं और वो उठने ही लगा था कि तभी अहाना ने उसका हाथ खींच उसे नीचे बैठाते हुए कहा.. ओहो भैया अभी तो मेरी बेस्ट फ्रेंड की परफॉर्मेंस स्टार्ट हुई है जिसके लिए मैं यहां आई हूं और अभी आप दोनों को जाना है आप कहीं नहीं जायेंगे यहीं बैठिए। इतना कहकर उसने अद्वैत को वापस सीट पर बैठा दिया।




क्रियांश जो अभी सेमिनार हॉल के गेट से बाहर बस जाने ही वाला था की तभी उसके कानों में इक मीठी कुछ जानी पहचानी आवाज़ आई... कोई लड़की बहुत ही मीठी आवाज़ में कृष्ण भजन गा रही थी...




अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।

हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ॥




वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।

चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ॥





वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।

नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ॥




ये आवाज़ सुन क्रियांश जल्दी से अपनी सीट पर आया और देखा स्टेज पर अंधेरा है और कोई लड़की अंधेरे में माइक के सामने बैठ कर गा रही है। देख कर लग रहा है जैसे वो इस भीड़ के सामने नहीं आना चाहती।




क्रियांश ने अहाना से पूछा... अहाना ये कौन है ? इतनी मीठी आवाज़... इसके भजन में इतना सुकून...। क्रियांश के चेहरे पर अब मुस्कान थी। अहाना ने चहकते हुए कहा.. भैया यही तो है मेरी बेस्ट फ्रेंड रिधिका...




गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् ।

रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ॥




करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम् ।

वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ॥




गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।

सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ॥




अहाना ने फिर कहा... यू नो भैया रिधिका अपने नाम के जैसी ही है... कृष्ण भक्ति में रहने वाली और खुद को कृष्ण की राधा समझने वाली। ना जाने इसके पास इतना टाइम कहां से आता है भक्ति भी करती है और क्लास में भी टॉप करती है।




अहाना बोले जा रही थी लेकिन क्रियांश के मन में एक ही नाम बार बार घूम रहा था... रिधिका... अचानक उसे अपने नाम का मतलब याद आया और उसने मन में कहा... क्रियांश यानी कृष्ण... रिधिका यानी राधा... और उसके चेहरे की स्माइल और बढ़ गई और वो उस मीठे गीत में खो गया...




गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम् ।

दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ॥




गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।

दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ॥




कृष्ण गीत के खत्म होते ही पूरा सेमिनार हॉल तालियों से गूंज उठा। सब लोग बाहर खाने के लिए जाने लगे तभी अहाना अपने दोनों भाईयों का हाथ पकड़े हुए बैक स्टेज आई और उसने आवाज़ लगाई... ओ मेरी प्यारी रिधिका... अहाना की आवाज़ सुन 4-5 लड़कियों के ग्रुप में खड़ी एक लड़की पीछे मुड़ी।




हल्के नीले रंग की अनारकली हाथों में चूड़ियां कमर तक आती लंबी चोटी सामने के बालों से निकलती एक लट जो बार बार आंखों के पास आ रही थी कानों के झुमके जो बार बार गालों को चूम रहे थे माथे पर छोटी सी शीशे जैसी बिंदी और हल्की पिंक लिपस्टिक और गले में चमकता कान्हा जी का एक लॉकेट... और उसकी वो गहरी झील सी खूबसूरत आंखें जिनमें में थोड़ा सा काजल था। जिन्हें देख क्रियांश ने मन में कहा इतनी खूबसूरत आंखें... लग रहा है मैं इन आंखों को जन्मों से पहचानता हूं और बस इनमें खोना चाहता हूं... क्रियांश ने ऐसा पहले कभी महसूस नहीं किया था। सादगी भरा ऐसा लुक जो किसी को भी अपना दीवाना बनाने के लिए काफी था।




क्रियांश ने उसे देखा और बस देखता ही रह गया... इतना मासूम चेहरा जिसपे किसी को भी प्यार आ जाए चेहरे पर इतना सुकून और अपनी सुंदर मुस्कान लिए रिधिका अहाना के पास आई और बोली... अनु हमसे बात मत करो तुम हमने तुमसे कहा था तुम्हें जल्दी आने को लेकिन तुम हो की सबसे लेट आई। तुम्हें पता है हमें ये सब प्रोग्राम वगैरा नहीं पसंद ये तो तुमने हमारा नाम रिकमेंड कर दिया था वो भी हमारे कान्हा के भजन को गाने के लिए इसीलिए हम मान गए थे लेकिन तुमने हमारी बात नहीं मानी...




अहाना... यार रिधु आई एम सो सॉरी... ये सारी गलती ना हमारे क्रियांश भईया की है इनकी वजह से मैं लेट हुई। अहाना ने रिधिका का इंट्रोडक्शन अपने दोनों भाइयों से करवाना शुरू किया... ये हैं मेरे प्यारे आदी भईया...




हेलो माइसेल्फ अद्वैत मेहरा... अद्वैत ने हाथ बढ़ाते हुए कहा




जी... हम रिधिका... रिधिका ने हाथ जोड़ते हुए कहा




और ये हैं मेरे बड़े भइया जिनकी वजह से मैं आज लेट हुई... क्रियांश भईया




रिधिका क्रियांश की तरफ मुड़ी जो बस एकटक उसे ही देख रहा था... अपने चेहरे पर मुस्कान लिए रिधिका जैसे ही क्रियांश की तरफ मुड़ी उसके मुंह से निकला... अरे आप... आप तो...




अहाना ने चौंकते हुए पूछा... तुम क्रियांश भैया को जानती हो ??




नहीं नहीं हम जानते नहीं हैं हमने तुम्हें बताया था न कल हमें रोड पर उस तेज़ बाइक सवार से किसी ने बचाया था लेकिन हम उन्हें थैंक्स भी नहीं कर पाए थे यही थे वो हमें बचाने वाले... रिधिका ने कहा




क्रियांश जो अब तक अपने ही ख्यालों में खोया था अद्वैत के हाथ का अपने कंधे पर स्पर्श पाकर अपने ख्यालों की दुनिया से बाहर आया।




अद्वैत ने क्रियांश ने पूछा... क्रियांश तुम कहां खोए हो ? और तुमने रिधिका को कब बचाया ?




क्रियांश कुछ कहता उससे पहले ही रिधिका ने कहा... माफ कीजिएगा कल आपने हमारी जान बचाई और हमने आपको थैंक्यू भी नहीं कहा वो हम थोड़ा जल्दी में थे। आई होप यू डोंट माइंड। हम रिधिका...




रिधिका बोल रही थी और क्रियांश अब भी उसकी गहरी खूबसूरत आंखों में खोया था। इतनी मीठी आवाज़ जिसे बार बार सुनने का मन करे। इतना प्यारा चेहरा जिसे देख कर दिल ही नहीं भरे। इतना सुकून... क्रियांश ने आज से पहले ऐसा कभी महसूस नहीं किया था। कुछ तो था जो क्रियांश उन खूबसूरत आंखों में खुद को खोने से बचा नहीं पा रहा था। कुछ तो था जो क्रियांश की नज़रें एक टक बस उसी चेहरे की खूबसूरती को अपनी आंखों में उतार रही थी।

क्रियांश को इस तरह खुद को निहारता देख रिधिका थोड़ा हिचकिचा गई।




अद्वैत ने क्रियांश के कान में कहा... क्रियांश भाई आई नो ये बहुत सुंदर और प्यारी है लेकिन तुम इस तरह उसे देख कर उसको अनकंफर्टेबल फील करवा रहे हो। और इतना कह कर अद्वैत मुस्कुराने लगा।




अद्वैत की बात सुन क्रियांश होश में आया और उसने अपना इंट्रोडक्शन दिया... हैलो माइसेल्फ क्रियांश सिंघानिया




रिधिका ने फिर कहा... जी हम रिधिका




और क्रियांश ने मन में ही कहा... क्रियांश की रिधिका... और उसके चेहरे पर फिर से मुस्कान आ गई।




जहां एक तरफ़ क्रियांश अपने ही ख्यालों की दुनिया में खोया था वहीं दूसरी तरफ अहाना और अद्वैत क्रियांश को ऐसे देख हैरान थे। अहाना ने धीरे से अद्वैत के कान में कहा... आदी भईया.. हमारा प्लान काम कर गया अब एटलीस्ट क्रियांश भईया का मौन व्रत तो टूटा और दोनों धीरे धीरे हसने लगे। वहीं रिधिका क्रियांश की नज़रों से खुद को बचाने की बेकार कोशिश में लगी थी।




तभी अनाउंसमेंट हुई... सब लोग लंच के लिए बेसमेंट में चले जाएं।

अहाना ने सबसे कहा... मुझे तो बहुत भूख लगी है चलो सब लंच करने चलते हैं। अहाना ने रिधिका का हाथ पकड़ा और भागते हुए सीढियां उतरने लगी।

रिधिका ने कहा... अहाना प्लीज़ धीरे चलो हमारा अनारकली हेवी है हमारा बैलेंस बिगड़ जायेगा।

लेकिन अहाना कुछ सुन ही नहीं रही थी वो बस जल्दी जल्दी सीढियां उतर रही थी कि तभी रिधिका डिसबैलेंस हुई और 3-4 सीढ़ियों के ऊपर से गिर गई।




आह... हमारा पैर... रिधिका चिल्लाई... क्रियांश और अद्वैत भागते हुए रिधिका के पास आए अहाना ने उसे उठाने की कोशिश की लेकिन रिधिका उठ ही नहीं पा रही।

लगता है मोच आ गई... अद्वैत ने कहा और क्रियांश अहाना पर भड़क गया।