मां की परछाई, पिता का गुरूर बेटियां... Purnima Kaushik द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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मां की परछाई, पिता का गुरूर बेटियां...

अपनी मां की परछाई तथा उन्हीं का दूसरा रुप होती हैं बेटियां, अपने पिता की सबसे अधिक लाडली और उनका गुरूर होती है बेटियां | मां के संस्कारों को, उनकी बातों और आदर्शों को अपने मन में संजोकर रखती है बेटियां | पिता के द्वारा सिखाए गए आदर्श विचारों को सदैव स्मरण रखती है बेटियां | बेटियां ही तो हैं जो घर - आंगन को अपनी मीठी सी मुस्कान से खुशनुमा बना देती हैं | अपने नन्हें नन्हें कदमों से आकर जब वो दौड़कर अपने पिता की गोद में बैठ जाती है तो पिता अपनी सारी थकान भूल जाते हैं |

बेटियां वो होती है जो अपने पिता से हर छोटी छोटी बातों के लिए जिद करती हैं | कभी उनके साथ अपने खेल खेलती हैं | उन्हीं के साथ हस्ती है, उन्हीं से ही कभी कभी नाराज भी हो जाती हैं और उन्हीं के साथ ही अपनी पढ़ाई भी करती हैं तथा उनसे (पिता) नई नई कहानियां भी सुनती है | जीवन की हर छोटी बड़ी समस्याओं का हल वो अपने पिता के पास ही ढूंढती है और उन्हीं के आदर्श विचारों का ही स्मरण कर एक बेटी अपने हर लक्ष्य में कामयाब होती है और अपने पिता का मान बढ़ाती हैं |


अपनी मां के संस्कारों को सदैव स्मरण कर एक बेटी आगे चलकर आदर्श नारी बनती है | उनकी बातें उसे कभी हारने नहीं देती है | डटकर हर समस्या से लड़ने की ताकत देती है | कैसी भी मुश्किल हो, कोई भी समस्या क्यों न आ जाए जब तक मां का आशीर्वाद साथ हो तो हर मुश्किल आसान लगती है | एक मां अपनी बेटी को हर कार्य में निपुण करती हैं और हर दम आगे बढ़ने का हौसला प्रदान करती है | किसी से न डरना, सदैव दूसरो की सहायता ही करना ये सभी बातें एक मां ही बताती है |

बेटियां तो घर की रौनक होती है | उनके होने से घर आंगन खुशियों से भरा रहता है | बेटी के जन्म लेने पर कहा जाता है कि, " घर में लक्ष्मी आई है | " यह सत्य है क्योंकि बेटियां मां भगवती का ही रूप होती है | बेटो के जन्म लेने पर घर में ढोल बजाए जाते हैं और बेटियां तो स्वयं मां लक्ष्मी का रूप होती है जो अपने साथ ढेरों खुशियाँ लेकर आती है | बेटियां हमेशा अपने से पहले अपने परिवार को आगे रखती है, उनकी खुशियों को कोई आंच न आने पाए इसका हमेशा ध्यान रखती है बेटियां |


कहते हैं कि, " बेटे तो भाग्य से होते हैं लेकिन बेटियां तो सौभाग्य से होती है | अपने परिवार का गुरुर होती है बेटियां | पिता की लाडली और मां की परछाई होती है बेटियां | अपने परिवार वालों के लिए किसी से भी लड़ जाती हैं बेटियां | वो ( बेटियां)
अपने परिवार की खुशियों के लिए अपनी हर हर इच्छा का त्याग कर देती हैं | उनके लिए सबसे पहले उनका परिवार होता है | ऐसी होती है बेटियां.......


घर के आंगन का महकता फूल है बेटियां
मां की परछाई व पिता का गुरूर है बेटियां
उनके बिना हर घर परिवार सूना सा रह जाता है........