मां कब आयेगी - (भाग १) Dikshadixit द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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मां कब आयेगी - (भाग १)

आज से मीठी की दुनिया पलटने वाली है बह नही जानती आगे किया होगा, पर जो होगा आप लोग यहां मेरी कहानी के जरिए पड़ेंगे (भाग से भाग ) में प्लीज स्पोर्ट करें।
मीठी की मां को गुजरे कुछ ही वक्त हुआ था, और उसके रिश्तेदार उसकी पापा को दूसरी शादी के बारे में सोचने लगे, पिता जी की सरकारी नौकरी होने के कारण किसी को ज्यादा समय नहीं लगता था लड़की देखने में,उन्होंने बहुत सी लड़कियां देख ली पर मीठी के पिता हमेशा मना कर दिया करते, क्यों कि उनको पता था, कि कोई भआई दूसरी मां कभी भआई मां ही बन सकती। बह कभी भी मां की तरह प्यार और स्नेह बच्चो को नही दे सकती, उन्होंने अपने बच्चो को अकेले संभालने का फैसला किया और बह बहुत ही अच्छे तरीके से अपने बच्चो की परवरिश करने लगे थे। पर भगवान को कुछ और ही मंजूर था। मीठी के पिता नौकरी और बच्चे कैसे दोनो संभाल सकते थे, एक तरफ दो मासूम छोटे बच्चे, दूसरी तरफ नौकरी की टेंशन पुंको खाए जाती बह चिंतित होने लगे। एक दिन मीठी अपने पिता के पास आती है अपने नन्हे से हाथों से अपने पिता की दोनो आंखे धक लेती है, उसके पिता उसको अपने हाथो से उठा कर गोद में उठा लेते है और बहुत ही प्यार से कहते है....
आज हमारी राजकुमारी हमारे कमरे में कैसे आई, मीठी कुछ नही बोली बस अपने पिता को गले लगाए एक गहरी सोच में खो गई पिता उसको ऐसे देख कहने लगे अगर कुछ चाहिए तो बताओ कल ही लाते हैं,मीठी कहती है नही उसको कुछ भी नही चाहिए, पिता जी उसको ऐसे देख कर फिर से पूछते है किया बात हा लाडो,
मीठी अपने पिता की गोद में बैठी बोलने लाती है की उसके भआई उदय ने उसको आज परेशान किया, उसको मरना पापा,पिता उसकी बातों को सुन कर हसने लगते हैं,कहते है आपका छोटा भाई है, अपने पिता की बात सुन कहती है की बहन उससे बड़ी है तो बह उसको क्यों परेशान करता है, उसके पिता उसके माथे को चूमते हैं और कहते है हम सुबह देखते है उसको आप खाना खाओ और सो जाओ।
मीठी अचानक बोलती है, पापा मुझे आपकी शादी देखनी है आप शादी कर लो मुझे आपकी शादी में डांस करना है, मीठी की बात सुन पिता जी सोच में पड़ जाते है की बह बात उसके दिमाग में आई कहा से, बेचारी मीठी मां और सौतेली मां में अंतर नही जानती उसको उसकी दादी जैसे बोलने को बोली उसने अपने पिता से कह दिया।
बह फिर बोली पापा आप शादी करोगे ना, मीठी के पिता जी कुछ नही बोले अपनी मासूम बेटी को गले लगाए कस लेते हैं, और अपने दोनो तरफ तकिए लगाए अपने सीने पर मीठी को लगाए लेट जाते है और अपनी पहली पत्नी के याद में खो जाते है और बोलते है की रागिनी आप अच्छा नही की जो दो मासूम बच्चे और हमे अकेला छोड़ गई दो ऐसे बच्चे जिनको कोई भआई कुछ भी बोल दे बह आके बोल देते है दो ऐसे बच्चे जिन्होंने अभी तक दुनिया में कुछ नही देखा एक साल का उदय अपनी मां को भी ठीक प्रकार नही देख पाया, ऐसा सोचते हुए दोनो बाप बेटी एक गहरी नींद में सो जाते हैं
आगे पढें (भाग –२)
दीक्षा दिक्षित
उत्तर प्रदेश मथुरा