जस्बात-ए-मोहब्बत - 2 dinesh amrawanshi द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • भय से मुक्ति

    ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्स...

  • मंजिले - भाग 49

    परिक्रमा की ही साथ चलती पटरी की तरा है, एक से गाड़ी उतरी दूसर...

  • सीप का मोती - 5

    भाग ५ "सुनेत्रा" ट्युशन से आते समय पीछे से एक लडके का आवाज आ...

  • Zindagi

    Marriage is not just a union between two people. In our soci...

  • Second Hand Love

    साहनी बिला   आलीशान महलघर में 20-25 नौकर। पर घर मे एक दम सन्...

श्रेणी
शेयर करे

जस्बात-ए-मोहब्बत - 2

और अपने सब्जेक्ट पे ध्यान देने लगती है ऐसे ही कुछ दिन तक यही शिलशिला होता है एक दिन तो कुछ यूं होता है जब प्रोफ़ेसर क्लास में पढ़ा रहे होते है तो रिचा की नज़रे प्रोफ़ेसर अवस्थी पर होती है जिसे प्रोफ़ेसर अवस्थी भी नोटिस करते है आवर कहते है रिचा ध्यान कहा है तुम्हारा तो रिचा कुछ घबरा सी जाती है तभी प्रोफ़ेसर अवस्थी रिचा से वही सवाल करते है जो बोर्ड पे समझा रहे होते है रिचा उसका जवाब तो देती है पर कुछ सहमे हुए अंदाज़ में ओर फिर प्रोफ़ेसर अवस्थी की क्लास ख़त्म हो जाती है और वो क्लास से चले जाते है
जब शाम को रिचा घर पहुँचती है तो रिचा की मम्मी उससे पुछती है बेटा कैसा था कॉलेज का पहला दिन रिचा कहती है बहुत अच्छा था मैंने खूब इंजोय किया और कुछ लड़कियों से तो जान पहचान भी हो गई है रितु नेहा ओर नयन्सी नाम की जिसमे नेहा ओर रितु कॉलेज हॉस्टल मे रहती है ओर नयन्सी अपनी कॉलोनी के आगे स्मिथ नगर कॉलोनी मे रहती हैअगले दिन रिचा कॉलेज पहुँचती है और नयन्सी के पास बैठ जाती है ओर बाजू की बैंच मे नेहा ओर रितु बैठी थी physiology की पहली ही क्लास होती है पर physiology के प्रोफेसर आज कॉलेज नहीं आए होते है तो रितु कहती है रिचा सर तो आज नहीं आए चलो केंटीन चलते है तो चारों कैंटीन जाते है ओर कॉफी ऑर्डर करते है तो नयन्सी कहती है यार कुछ खाने का मन हो रहा कुछ बुलवाये क्या तो नेहा पुछती है क्या बुलवाया जाए तो रिचा कहती है आप लोगो को जो खाना हो,रितु कहती है चाउमीन बुलवाते है तो वो लोग चाउमीन ऑर्डर करते है फिर ये चारों कॉफी नास्ता फीनिश करती है इसके बाद रिचा को याद आता है कि कॉलेज सेकंड हाफ़ मे अवस्थी सर की क्लास है तो रिचा कहती है गाएज़्स क्लास चले biochemistry का पीरिएड है सर आने वाले होंगे क्लास मे चले तो सब कैंटीन से क्लास की ओर चल देती है क्लास रूम जा कर बैठ जाती इन चारों की गौसिप चल रही होती है के इतने मे प्रोफ़ेसर अवस्थी आते है रिचा की नज़रे प्रोफ़ेसर के चहरे पर रुक सी जाती है पर रिचा समझ नहीं पाती की ये उसे क्या हुआ ओर क्लास के शोर मे उसका ध्यान टूटता है ओर वह अपनी नज़रे उन पर से हटा कर पढ़ाई मे ध्यान लगाती है प्रोफ़ेसर अवस्थी पूरी क्लास को बोर्ड पर कुछ समझा रहे होते है तब भी रिचा का ध्यान कभी बोर्ड पे तो कभी अवस्थी सर पे होता है प्रोफ़ेसर अवस्थी अपना पीरियड पूरा करके स्टूडेंट्स को अगले दिन के लिए कुछ प्रेक्टिस देकर क्लास से चले जाते है ओर फिर लास्ट क्लास अटेण्ड करके रिचा ओर उसकी फ्रेंड नयन्सी रितु और नेहा को बाए कहती है और दोनों घर चली जाती है घर पहुँच कर रिचा अपनी मम्मी से एक कप कॉफी मांगती है ओर रिचा के पापा उससे पुछते है बेटे क्लासेस कैसे चल रहे है रिचा कहती है अच्छी चल रही है पापा ,कॉलेज पसंद आया जी पापा बहुत पसंद आया ओर मेरी तो कुछ फ़्रेंड्स भी बन गई है ꠰ रिचा और उसके पापा काफी फ्रेंडली रहते है पीछे से रिचा की मम्मी की आवाज आती है पढ़ाई पे ध्यान देना इधर उधर की बातों पे नहीं तो उसके पापा कहते है क्यूँ बेटा कोई पसंद आया या नहीं तो रिचा मुस्कुराते हुये कहती है पापा आप भी न,इतने मे मम्मी की आवाज आती है यही सिखाना बेटी को ꠰