Pyar ek anokha rishta - 6 books and stories free download online pdf in Hindi

प्यार का अनोखा रिश्ता - भाग ६

फिर राजीव धीरे धीरे सीढ़ी चढ़ कर उपर जाता है और फिर अमर के रूम के बाहर से ही दरवाजा खटखटाया और फिर क्या मैं अन्दर आ सकता हूं।
अन्दर से आवाज आई हां ज़रूर।
राजीव थोड़ा सा संकोच हो कर रूम प्रवेश करता है तो देखा कि एक सफेद साड़ी में कोई खड़ी है पर धुंधली सी, और फिर राजीव ने कहा भाभी मैं राज, राजीव हुं आपका देवर।
ये सुनकर कर हिना तुरंत मुड़ी तो देखा कि उसकी जिंदगी उसके सामने खड़ा है।
एक दूसरे को देखते ही दोनों ही चौंक जाते हैं और फिर हिना बेहोश हो कर जमीन पर गिर जाती है।
राज भी एक दम घबरा कर दौड़ कर हिना को उठा कर बेड पर लिटा देता है और फिर टेबल पर रखे हुए गिलास का पानी लेकर उसके चहरे पर छिड़काव करता है।।
फिर हिना उठकर बैठ जाती है और फिर रोने लगती है ये कैसी सजा है।

कशमकश है कि दोनों एक-दूसरे के लिए मर मिटने वाले आज एक भाभी और देवर के ऐसे रिश्ते में बंधे हुए हैं जो कि किसी से कहें भी तो कैसे।
राजीव अपना हाथ दीवार पर मारने लगता कि ये क्या हुआ! क्यों हुआ ?हिना ही भाई की पत्नी हैं ओह माई गॉड !मैं क्या करूं।

हिना ने कहा क्या कहुं आपको देवर जी या फिर राज?
राज ने कहा हां, सही है भाभी जी।

मुझे किसी ने बताया नहीं कि तुम ही हो हां, और फिर अब समझ आया कि भाई ने जान क्यों दिया?
हिना रोते हुए बोली हां, अब तो मेरी गलती है मैं ही मनहूस हुं।। ऐसा है देवर जी आप अब जा सकतें हैं।
हिना कहते हुए रोने लगी और फिर राज पहले की तरह हिना के आंसु पोंछने जाने लगा पर रुक गया और फिर वहां से चला गया।

हिना और जोर, जोर से रोने लगी और सोचने लगी कि जिंदगी ने कैसा मजाक किया है ये कोई और नहीं बल्कि मेरा राज़ है जिसे मैं दिलोजान से चाहती हुं पर क्या डैडी को ये बात पता थी?
नैना अपने अतीत में चली गई।
राज ने कहा अरे बाबा मेरे भाई है और जब तक उनकी शादी नहीं होती हम कैसे शादी कर लें।
हिना ने कहा हां, तो भाई की करवा दो शादी।
राज ने कहा देखो मेरी नौकरी बैंगलोर में लग गई है शादी के बाद वही जाना होगा।
हिना ने कहा हां ठीक है पर पहले अपने मां पापा से मिलवाओगे।
राज ने कहा अरे अभी नहीं।
हिना ने कहा हां ठीक है तब तक हम भी नहीं मिलेंगे।
राज ने कहा पागल हो गई हो मै तुम्हे देखें बिना मर जाऊंगा।
दो दिन तो क्या ना गुजरेगी ,दो पल तेरे बगैर,हो जाऊंगा प्यार में पागल,मैं तेरे बगैर।।
फिर दोनों एक दूसरे के गले लग गए और फिर दोनों एक दूसरे को चूमने लगे ।।
हिना ने कहा अरे बाबा बस करो शादी से पहले नही करना है।।
राज ने कहा ओह माई गॉड तुम भी ना।
हिना अपने वर्तमान में वापस आ गई थी।
आभा उठा रही थी हिना बेटा चलो कुछ खा लो।
हिना ने कहा मम्मी मन नहीं है।
आभा ने कहा हां जानती हूं पर क्या है ना कुछ तो खाना होगा अमर के लिए।
और फिर छोटे से मिली?
हिना ने कहा हां राजीव ना।
आभा ने कहा हां बिलकुल अलग है अमर से।
हिना ने कहा हां वही तो।
आभा ने कहा हां उसके बहुत सारे नाम है राज भी उसी का नाम है।
हिना ने कहा हां पर शादी में नहीं आएं अपने भाई की?
आभा ने कहा हां ,ठीक कहा तुमने पर क्या है ना वो थोड़ा सा मुडी है इसलिए जब सुना भाई की शादी हो रही है तो वो पुछा कि कौन है? मैंने कहा था कि हिना है उसका नाम।
उसके बाद ही उसने फोन काट दिया था।
फिर वो एक दिन बोला कि मैं शादी में नहीं आ सकता।। हमें अब तक समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों कहां था?
हिना ने कहा ओह ये बात है।
आभा ने कहा चल बेटा सब इन्तजार कर रहे हैं।
फिर हिना हिम्मत करके आभा के साथ आ गई।
सभी खाने की टेबल पर बैठ गए थे। हिना धीरे- धीरे वहां तक पहुंच गई।

राज ने देखा और फिर सोचने लगा कि ये वो हिना है आंखों को विश्वास नहीं हो रहा है ये सफेद साड़ी उस पर अच्छा नहीं लग रहा है और फिर ये क्या कोई काजल नहीं, कोई भी गहने भी नहीं , बेरंग सी हिना को मैं नहीं देख सकता। ऐसा सोचते हुए उसने हाथ में लिए पानी का गिलास जो कांच का था वो तोड़ दिया और फिर बोला मां मैं अपने रूम में जा रहा हुं प्लीज़ मुझे खाना वहीं दे देना।।
आभा ने कहा अरे पर बेटा क्या हुआ तुझे अभी तक ठीक था।।

हिना के ससुर जी बोले जाने दो उसे।।
आ हिना बैठ मेरे पास ये कहते हुए पापा जी ने कहा।
हिना भी अपने आंखों में आंसु लेकर बैठ गई और फिर बोली पापा जी आप दवा लिए?
पापा जी ने कहा हां, बेटा।
फिर हिना के प्लेट में फल परोस दिया और साथ में दुध भी।
हिना धीरे-धीरे खाने लगी।
उधर राज अपने कमरे में जाकर खुद को इन सब का जिम्मेदार मानने लगा। ओह मैं हिना को ऐसे नहीं देख सकता। भगवान ने बहुत ग़लत किया उसके साथ।
पर ये सब मैं चाह कर भी कुछ ठीक नहीं कर सकता हूं ओह!ये पाप है।
फिर आभा ने दरवाजा खटखटाया और फिर अन्दर पहुंच गई और फिर बोली बेटा यह लो खा लो कुछ।।
राजीव ने कहा हां, पर आप सबने खाया।

आभा ने कहा हां, बेटा चल मैं चलती हूं।

फिर राज अपने कमरे का दरवाजा बंद कर देता है फिर सोचने लगा कि ये मैंने मां को वादा कर दिया। कैसे एक ही छत के नीचे रह सकता हूं मैं उस के साथ जो मेरी जान है।
किस राह पर आ गया मैं मुझे शक तभी हो गया था जब भाई ने उसका नाम हिना कहा था तभी तो मेरा दिमाग कुछ काम नहीं कर रहा था और मैं भी पीछे हट गया था मुझे लगा था कि भाई को आखिर कोई तो पसंद आया वरना भाई तो शादी नहीं करते।
अगर बता पाता तो आज शायद सब अच्छा होता मै क्या करूं हिना को सफेद कपड़ों में बिल्कुल भी नहीं देख सकता हुं कितनी गन्दी लग रही है वो।।
अब मैं क्या करूं जिंदगी इतनी उलझ गई है और मैं इस में फंसता जा रहा हुं।
क्या हिना को मैसेज करूं मैं?? नहीं, नहीं ऐसा नहीं कर सकता मैं अब।।
उधर हिना भी अपने कमरे में चली गई।

राज जूस पीने लगा और फिर दरवाजा पर दस्तक हुई और फिर राज ने दरवाजा खोला तो देखा कि मां खड़ी थी। राजीव ने बोला मां तुम आओ,आओ,जरा सर दबा दो।
आभा ने हंसते हुए कहा हां, मैं समझ गई थी, बेटा आज कितने सालों के बाद तूने मुझे ये कहा।
राज ने कहा हां ,मां भाई इस तरह से चला जाएगा सोचा नहीं था।
वैसे वो हिना क्या कर रही है?
आभा ने कहा हां, सोने चली गई।
फिर आभा ने कहा अरे हिना तो
गोल्ड मेडल जीती है और वह वकालत की पढ़ाई की है तेरी तरह।।
अच्छा बेटा वो तेरे कालेज का नाम क्या था? दिल्ली में।
राज ने कहा अरे मां तू भी ना, अच्छी तरह से सर दबा दें।
राज ने बात काट दिया पर राज की मां को कुछ, कुछ समझ आ रहा था।


फिर इसी तरह एक हफ्ते बीत गए और फिर दसवां दिन भी आ गया था।
हिना सफेद साड़ी में लिपटी हुई थी और फिर पंडित जी ने जैसे, जैसे कहा हिना ने बिल्कुल वैसा ही विधि् वत पुजा किया। और फिर पंडित जी ने राजीव को अपने भाई का काम करने को कहा।।
हिना भी वही पुजा स्थान पर बैठी ।

जहां सब कानाफूसी कर रहे थे। हिना ने ही ये सब किया है और मनहूस है ये लड़की।।
जैसे ही ये बात राज के कान में गया उससे सहन नहीं हुआ और वो बोल पड़ा ये सब क्या बोल रहे हैं आप लोग।। यहां पर एक मातम छाया है आप लोग एक लड़की को ग़लत बात बोल रहे हैं मुझे तो शर्म आती है कि आप सब भी एक स्त्री है और उसके नाते एक दूसरी स्त्री के सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं।।
आभा ने कहा राजीव बस कर बेटा,जो बोल रहे हैं उन्हें बोलने दो हम जानते हैं कि हिना कैसी है!
हिना एकदम पत्थर बन कर बैठी रही और उसके आंखों से आंसू बहते जा रहें थे।

फिर उसके बाद दस बह्ममणो को भोजन खिलाया गया और फिर सब अतिथि को भी अमर के आत्मा की शांति के लिए अच्छी तरह से सत्कार और दान भी बहुत ही अच्छे से दिया गया ।
भोजन जलपान कराए जाने के बाद राज ने सबको नमस्कार के साथ विदा किया।
हिना भी वही पर खड़ी हो कर सब कुछ देख रही थी।
फिर सारे मेहमान , रिश्तेदार भी चलें गए।
बड़ी ताई जी ने हिना को अपने पास बुलाया और फिर कहा ऐसा क्यों हुआ किस लिए तूने अमर को अकेले जाने दिया?
हिना ने कहा ताई जी, मैं तो कुछ देर बाद ही जाने वाली थी पर पता नहीं अमर को किस बात जल्दी थी।।
ताई जी ने कहा हां, कुछ तो बात है वरना।।
हिना ने कहा कि ये तो मुझे भी नहीं पता ताई जी।
आभा ने कहा जीजी अब हिना को मत पुछिए कुछ उसे क्या पता।
कुछ देर बाद ही हिना के मम्मी डैडी भी आ गए।
हिना मम्मी से लिपट कर रोने लगी।

आशा ने पुछा ये कैसे हुआ बेटा?
हिना ने कहा पता नहीं क्यों हुआ ऐसा।

हिना अपने डैडी के गले लग कर ऱोने लगी। और फिर बोली मम्मी आप और डैडी ने तो कहा था कि मैं कभी अपने घर नहीं जा सकती हुं?

आशा ने कहा, नहीं ऐसा नहीं है इतना दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है तेरे ऊपर हम तुम्हें लेकर जाएंगे।

तभी आभा ने कहा , नहीं-नहीं हिना मेरी बेटी बन गई है, आज वो ही सब कुछ है हमारे लिए , उसके बिना हम कैसे रह पाएंगे उसका ही सब कुछ है।
रमेश ने कहा ,हां और क्या फिर राजीव भी आ गया है ,राजीव बेटा यहां आओ।
रमेश ने महेता जी से कहा ये अमर का छोटा भाई है ।
मेहता ने कहा हां ठीक कहा पर शादी में नहीं दिखा?
रमेश ने कहा हां,वह नहीं आ पाया था।
राजीव ने कहा नमस्ते अंकल मैं तो बंगलौर में रहता हूं।
महेता जी ने कहा ओह अच्छा।
फिर चाय नाश्ता करने के बाद महेता जी और आशा जाने लगें।
हिना रोने लगी और फिर बोली मम्मी मैं आऊंगी।
आशा ने कहा हां बेटा, कुछ दिनों के लिए आ जाना मन लग जाएगा।।
फिर वो‌ लोग भी चले गए।

हिना की नजरें राज से टकरा गई और फिर दोनों ही नजरें झुका लिए।।

राजीव अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर दिया और सोचने लगा कि किस दोराहे पर खड़ा हुं मैं। अगर मां, पापा को पता चला कि मैं हिना को जानता हूं तो क्या होगा?अगर आज अंकल पहचान लेते मुझे।।
दिल में तेरी चाहत है, होंठों पर तेरा नाम,तू साथ दे ना दे, जिंदगी तेरे नाम।।

कुछ देर बाद ही अमर के आफिस से सारे लोग आ गए।।
रमेश ने कहा आइए आप लोग बैठिए।।
रमेश ने कहा आशा राजीव को बुला लो।।

आशा ने कहा हां ठीक है।
आशा ने नूतन से कहा जाकर भाई को बुला ला।
नूतन ने कहा जी मैडम।

नूतन ने ऊपर जाकर कहा राजीव भाई आपको मैडम नीचे बुला रही है।
राजीव ने कहा हां, ठीक है।
राजीव नीचे पहुंच गए और फिर बोला अरे आप लोग कब आए?
अमर के बास ने कहा अरे राजीव कैसे हो?.
राजीव ने कहा हां सर ठीक हुं।


सब बहुत अफसोस कर रहे थे। सबने फल, मिठाई लेकर अमर के फोटो के सामने रख दिया।।
सबने कहा कि भगवान आप सब को दुख सहने की क्षमता दें।

फिर आभा ने कंचन से कहा कि सबको शर्बत और मिठाई दो।
अमर का खास दोस्त अभय ने कहा अरे भाभी जी कहां है? आभा ने कहा हां मैं बुलाती हुं।
आभा हिना को बुलाने उसके कमरे में गई।
हिना ने कहा हां ठीक है मैं चलती हूं।
फिर हिना नीचे पहुंच गई और सबको नमस्कार किया।
सब खड़े हो गए और कहा कि भाभी भगवान आपको शक्ति दे।
हिना के आंखों से आंसू निकलने लगे और यह देख राज खुद को रोक न सका और फिर अपनी आंख बंद कर दिया।
फिर हिना बैठ कर बातें करने लगी।
राज ने मन में सोचा ये सब मुझे अच्छा नहीं लगता है ये सफेद साड़ी क्यों पहना है?

फिर आफिस के सारे दोस्त चले गए।
हिना भी वहां से उठ कर ऊपर जाने लगीं ‌
तो रमेश ने कहा हिना बेटा तुम मेरे कमरे में आओ तो।।
हिना ने कहा हां, पापा जी।

राज सोचने लगा कि पापा ने हिना को क्यों बुलाया क्या पापा को पता चल गया है। ओह माई गॉड।।

हिना सहमी सी अन्दर पहुंच गई।
रमेश ने कहा आओ, डरो नहीं।
हिना अन्दर पहुंच कर देखा तो बहुत सारे तस्वीरें थी जिसमें अमर और राज की तस्वीर बचपन से लेकर जवानी तक।

हिना सब कुछ घुम, घुम कर देखने लगी।
रमेश ने कहा आओ बेटा देखो अमर को गए आज ग्यारह दिन हो गए हैं।
और फिर तुम तो एक फुल सी बच्ची तुम्हारे लिए सारी उम्र पड़ी है तो हम कभी नहीं चाहेंगे कि तुम्हारे साथ कुछ अन्याय हो।
और हां तुम फिर से वकालत शुरू कर दो मन लगा रहेगा और फिर तुम तो हिना हो हमेशा खुश रंग रहने वाली। और हां, अमर का जो कुछ भी है वो तेरा है अब।।
हिना ने कहा कि ये क्या बोल रहे हो आप लोग ,मैं तो ठीक हुं मुझे कुछ नहीं चाहिए।
आभा ने कहा हां ,बेटा वो तो ठीक है बस हम चाहते हैं कि तुम खुश रहो।।

हिना ने कहा हां मैं ठीक हूं। पापा जी मुझे भी ऐसा लगता है कि वकालत फिर से शुरू करना चाहिए।।मै जरूर करुंगी।। क्या मैं अपने कमरे में जाऊं?.आभा ने कहा हां, बेटा ठीक है।
हिना अपने कमरे में चली जाती है।
फिर हिना अपने कमरे में जाकर बैठ जाती है और फिर सोचने लगती है कि मुझे राज से बात करनी चाहिए या नहीं??
ये सब सोचते हुए कब आंख लग गई ।।
रात को डिनर करते समय जब आभा ने कंचन को कहा कि जाकर हिना को बुला ले। कंचन ने हिना को उठाया पर हिना को बुलाने पर हिना नहीं उठीं।।
कंचन ने देखा तो दर्द में थी हिना।
कंचन जल्दी से नीचे उतर कर बोलने लगी अरे भाभी को तो बुखार है दर्द से कराह रही है।
आभा रमेश खाना खाने बैठ गए थे पर राज बैठने जा रहा था तो उसने कहा कि आप लोग खाना खाइए। मैं देख कर आता है।
ये कहते हुए राज ऊपर हिना के रूम में गया।
और देखा तो दर्द से कराह रही थी हिना, क्या हुआ? और फिर राज ने अपना हाथ हिना के सर पर रख दिया और फिर बोला ओह बुखार बहुत है।
राज ने कंचन से कहा कि ठंडा पानी
जल्दी से लेकर आओ। पट्टी करना होगा।

क्रमशः

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