अजबदे पंवार- महाराणा प्रताप की पत्नी धरमा द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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अजबदे पंवार- महाराणा प्रताप की पत्नी

अजबदे पंवार महाराणा प्रताप की पत्नी तथा अमरसिंह सिसोदिया की माँ थी। इनके पिता का नाम राव माम्रक सिंह तथा माता का नाम हंसा बाई था। अजबदे पंवार ने महाराणा प्रताप की राजनीतिक मामलों में काफी मदद की थी।

परन्तु राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उन्ह अकबदे पंवार से दूर रहना पड़ा। पर फिर मारवाड़ से युद्ध जीत कर। जंगल से राव मम्रक जी राणा उदय सिंह और प्रताप को निमंत्रण दे कर उन्हें अपने साथ बिजोलिया गए। तब प्रताप का हृदय तेजी धड़कने लगा। क्योंकि वह अजबदे के पास जा रहे थे। ऐसा ही अजबदे के साथ भी हुआ। जैसे ही प्रताप बिजोलिया पहुंचे वैसे ही अजबदे खिड़की की नीचे उतर रही थी और वह गिर गई। पर प्रताप ने उन्हें पकड़ लिया। फिर सभी लोग पूजा करने नदी पर गए और वहां प्रताप के गले में स्नान करते समय अजब्दे की रुद्र माला आ गई। और पंडितो ने इसे ईश्वर का इशारा समझा और विवाह के कहा और दोनों ही खुश थे । और विवाह हुआ ।

महाराणा प्रताप जयंती: पहली पत्नी थी अजबदे पंवार, इस कारण की 10 और शादियां

महाराणा प्रताप का जन्म अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक 9 मई, 1540 को हुआ था, लेकिन हिन्दू पंचांग विक्रम सम्वत् के अनुसार, उनकी जयंती हर साल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। वे अपने युद्ध कौशल, राजनीतिज्ञ और अपने धर्म व देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व बलिदान करने को तत्पर रहने वाले महान सेनानी थे। उन्हें भारत का प्रथम स्वतंत्रता सेनानी भी कहा जाता है। महाराणा प्रताप ने कुल 11 शादियां की थी और उनकी पहली पत्नी का नाम अजबदे पंवार था। महारानी अजबदे महाराणा प्रताप की मुख्य पत्नी और मेवाड़ की महारानी थी।

एक सखा की तरह अजबदे हमेशा पति के साथ खड़ी रही। अपनी सादगी और बुद्धि से उन्होंने सबका दिल जीता था। वह महाराणा प्रताप की सबसे वफादार साथी थी। उन्हें एक सच्ची पत्नी और मित्र के रूप में सुख और दुख दोनों में साथ दिया।

बता दें कि महारानी अजबदे का जन्म सिसोदिया परिवार में हुआ था। उनके पिता राव मम्रख सिंह थे और उनकी मां रानी हंस बाई थी। महाराणा प्रताप और अजबदे एक-दूसरे को शादी करने से कुछ समय पहले से ही जानते थे। जब उनकी शादी हुई तब वह 15 साल की थी और महाराणा प्रताप 17 साल के थे।

राणा की सबसे चहेती पत्नी वहीं थी, जिन्होंने राजनीतिक मसलों पर भी उनका हमेशा साथ दिया। प्रताप ने राजनीतिक वजह से 10 और शादियां की थी। इस फैसले में उनके साथ न होने के बावजूद वह महारानी के तौर पर निष्ठा के साथ उनके साथ खड़ी थी।


प्रताप के 17 बेटे और 5 बेटियां थीं और अमर सिंह उनमें सबसे बड़े बेटे थे। वह अपने पिता और मेवाड़ के सिंहासन पर वहीं बैठे। 1576 में हल्दीघाटी की लड़ाई के बाद चोट लगने के वजह से महारानी अजबदे का निधन हो गया। यह महाराणा प्रताप के लिए सबसे बड़ा झटका था।

हल्दीघाटी का युद्ध ना केवल राजस्थान के इतिहास बल्कि हिंदुस्तान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण युद्ध था। जब राजस्थान के सभी राजाओं ने अकबर के सामने घुटने टेक दिए थे लेकिन राणा प्रताप ने अकबर की गुलामी स्वीकार नहीं की थी तब हल्दीघाटी के मैदान में युद्ध हुआ था।

जंगल में शिकार के दौरान एक दुर्घटना में महाराणा प्रताप की मृत्यु हो गई थी। 19 जनवरी, 1597 को 57 साल की उम्र में निधन हो गया था।

ये तथ्य भी जानिए :

- महाराणा प्रताप हमेशा दो तलवार रखते थे। वे एक अपने लिए और दूसरी निहत्थे दुश्मन के लिए रखते थे।

- महाराणा प्रताप को बचपन में कीका के नाम से पुकारा जाता था।

- महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक बहुत ताकतवर था युद्ध के समय चेतक के मुंह पर हाथी का मुखोटा पहनाया जाता था ताकि दुश्मन सेना के हाथी कंफ्यूज रहे।

- महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो और लंबाई 7 फुट 5 इंच थी।

- जानकर हैरत होगी कि महाराणा प्रताप का भाला 81 किला वजनी था और उनकी छाती का कवच 72 किलो वजन का। अगर उनके भाले, कवच, ढाल और दो तलवारों का वजन जोड़ा जाए तो 208 किलो था।

- महाराणा प्रताप जी ने एक बार मायरा की गुफा में घास की रोटी बनाकर कई दिनों तक अपना गुजारा किया था और यह भी बताया जाता है कि प्रताप के सेनापति जी सिर कटने के बाद भी वह कुछ देर तक लड़ते रहे।