दो पागल - कहानी सपने और प्यार की - 15 VARUN S. PATEL द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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दो पागल - कहानी सपने और प्यार की - 15

अंक १५ रहस्यमय इंसान      

     नमस्कार आज फिर हाजीर हु आपके लिए आपकी अपनी बहेतरीन नवलकथा का एक ओर अंक को लेकर लेकिन मेरी आपसे एक बिनंती है कि अगर आपने अभी तक हमारी इस बहेतरीन कहानी के अगले अंको को नहीं पढा है तो प्लीज़ पहले उन अंको को पढले ताकी आपको यह अंक समझ आए।  आइए शुरू करते है इस रहश्यमय अंक को |

शुरुआत                                                                 

      आगे हमने देखा की केसे रिवरफ्रन्ट पर जीज्ञा और रुहान के बिच फिर से सबकुछ सही हो जाता है और रुहान जीज्ञा को अपने सपने तक पहुचने का एक और रास्ता बताने का वादा करता है लेकिन अहमदाबाद के एक अच्छे से कोफी शोप पर फोकी पीते पीते। पुर्वी, रुहान, जीज्ञा और रवी चारो अहमदाबाद के कोफी वेड्स चा नाम के एक सुप्रसिद्ध कोफी शोप पर इक्कठा होते हैं और चारो टेबल पर बेठकर कोफी पीने का मजा ले रहे थे।

      वाह मस्त कोफी है जीज्ञा... रुहानने कोफी की पहली चुस्की मारते हुए कहा।

      सही मे रुहान बढिया कोफी है... रवीने भी रुहान से कहा।

     कोफी तो बढिया है ही लेकिन तुम लोगो के पास जो बढीया प्लान है वो मुझे बताने की तकलीफ करोगे... जीज्ञाने रुहान से कहा।

      हा जरुर तो प्लान यह है कि इस साल के अंत में हमारे गुजरात में एक स्पर्धा होने जा रही है जीसका नाम है टेलेन्ट मर्ज जीस मे बहुत सी स्पर्धाए हैं जेसे कि सारे खेल, गाने की स्पर्धा और तो और उसमे सबसे अच्छी बात तो यह है कि उसमे इस बार नाटकीय स्पर्धा को भी जगह दी गई है और उसमे जो फाइनल मे पहुचेगा उसको फिल्म जगत के बहुत ही बडे डिरेक्टर राजकुमार हिराणीजी के सामने परफोर्मन्स करने को मिलेगा दोस्तो... रुहानने एक अलग ही स्फुर्ती के साथ जीज्ञासे कहा।

      हा पर इससे क्या होगा ? नाटक स्पर्धा जीतने से पापा थोडी मानने वाले हैं और हा अब मे कोई झुठे सपने देखकर अपने मन में आशाए बांधना नहीं चाहती इससे तो अच्छा है की मे अपने बचे हुए कॉलेज के दिन अच्छे बिता लु क्योकी उसके बाद तो पापा मेरी जींदगी बरबाद करने का प्लान तो बना ही चुके हैं... जीज्ञा क्या बोल रही उसका उसे कोई अंदाजा ही नहीं था।

      तु क्या बोल रही है जीज्ञा। तु कब से इन सब चिजो से हारने लगी। तु तो हंमेशा लडने की बात करती थी... पुर्वीने कहा।

      हा लेकिन वो तब जब उपरवाला हमारे साथ हो यहा तो बचपन से एसा ही लगता है कि उपरवाला और पापा दोनो जेसे मिले हुए हो... जीज्ञाने अपनी कोफी का एक घुट पीते हुए कहा ।

      देख जीज्ञा तु अभी बहुत ही भावुक होकर सबकुछ बोल रही है इसलिए तुझे कुछ सुझ नही रहा है। तु ना पहले ठंडे दिमाग से सोच की तुझे अपने जीवन समान सपने के लिए लडना है या नहीं क्योकी दो साल में भी हम बहुत कुछ कर सकते हैं अगर तु चाहे तो और हा रही बात ईश्वर की तो क्या पता वो तुम्हारे पेशन्स की परीक्षा ले रहे हो और हा बिना अपने सपने के लोग मरे हुए मुर्दे के समान होते हैं और मे मुर्दे से दोस्ती नहीं रखता क्योकी मेरी मुर्दो से बहुत फटती... रुहानने अंत मे हस्ते हुए जीज्ञा को अपनी बात समझाने की कोशिश करते हुए कहा।

      देख रुहान तु पहले मुझे सबकुछ विस्तार से बता की यह स्पर्धा क्या है और इसका मेरे सपने से क्या लेना देना है... जीज्ञाने रुहान से सवाल करते हुए कहा।

      सीधी सी बात है कि एक नाटकीय स्पर्धा है जीसकी शुरुआत गुजरात की सभी कॉलेज से होगी जो पहला राउन्ड होगा और उसमे जो जीतेगा वो दुसरे राउन्ड मे डिस्ट्रिक्ट लेवल पे हिस्सा लेगा और उसमे भी जो जीतेगा उसको स्टेट लेवल पे हिस्सा लेने को मिलेगा और उसमे जज के तौर पर राजकुमार हिराणी सर आनेवाले है और अगर हम वहा तक पहुच गए तो सोचो हमे बॉलीवुड के सबसे बडे डिरेक्टर के सामने परफोर्मन्स करने को मिलेगा... रुहानने अपनी बात समझाते हुए कहा।

      हा पर इससे मेरा सपना कैसे शाकार होगा। मेरे पापा मेरे एक नाटक जीत जाने से तो मानने वाले है नहीं और मे लेखक बनना चाहती हु एक्टर नहीं तो केसे होगा मेरा सपना शाकार थोडा सही से समझा सकते हो... जीज्ञाने कहा।

      सर सही बात है आपको थोडा सही से समझाना चाहिए क्योकी मुझे भी कुछ समझ नहीं आ रहा है... वहा खडे एक इक्कीस साल के वेइटरने कहा।

     अबे तुझे क्या समझना है हा चल निकल... रवीने उस वेइटर से कहा।

     ओ रवी जरा संभालके बात कर वो वेइटर है तेरे पापा का पर्सनल नोकर नहीं है... पुर्वीने कहा ।

      हा समझे... वेइटरने फिरसे कहा।

      बे तु चाहता है कि दो कान के निचे बजाउ ... रवीने फिरसे अपनी जगह पे खडे होकर उस वेइटर से कहा।

      वेइटर वहा से चला जाता है।

      बे तुम्हारे मे थोडी सी भी शर्म नही है... पुर्वीने रवीसे कहा।

      नहीं क्योकी क्या है मे नमक कुछ ज्यादा ही खाता हु तो आज कल शर्म थोडी सी आनी कम हो गई है... रवीने पुर्वी की बात को मजाक बनाते हुए कहा।

      तुम दोनो चुप करोगे तो मे जीज्ञा को समझा शकु कुछ... रुहानने पुर्वी और रवी से कहा।

      हा ठीक है समझा पर पहले इस पुर्वी को... रवीने फिर गुस्से में कहा।

      पुर्वीने कुछ भी ना बोलते हुए रवी की तरफ जेसे सभी लडकीया लडको के सामने अपना मुह तेडा करती है वेसे अपना मुह तेडा करती है ।

      देख जीज्ञा सिम्पल सी बात है  हम उस नाटक स्पर्धा मे हिस्सा लेंगे जीसमे तु अपने नए और एकदम फ्रेस नाटक लिखेगी और उसे मे डिरेक्ट करूंगा और हमारे यह तीनो दोस्त और कॉलेज के बाकी लडके हिस्सा लेंगे तो कुछ इस तरह हम अपना नाटर स्पर्धा मे लोगो के सामने और जज के सामने रखेंगे और अगर हम जीतते जीतते फाइनल में पहुच गए तो हम इसी तरह राजकुमार सर के सामने नाटक करेंगे और तुम्हे तो पता ही है कि राजकुमार सर कन्टेन्ट के कितने दिवाने है अगर उन्हे तुम्हारा कन्टेन्ट पसंद आ गया तो क्या पता वो इस पर फिल्म बनाने का मुड भी बना ले...रुहानने अपनी बात रखते हुए कहा।

       हा पर इस मे भी बात तो वही उम्मीदे रखनेवाली ही है की अगर एसा होता है तो मेरा सपना सच होगा वरना नही होगा... जीज्ञाने अपना मुद्दा रखते हुए कहा।

       जीज्ञा अब मानने को इसलिए तैयार नहीं थी क्योकी उसे अब कोई झुठी उम्मीदो पर जीना नही था।

      देख जीज्ञा रुहान का सुझाव एकदम सही है और हा गारन्टी तो हमारे जीवन की भी नहीं है फिर भी हम आगे की योजना बनाते हैं ना और रही बात तुम्हारे सपने की तो इसमे तो हमे महेनत और उम्मीद दोनो की जरुरत होगी और हम वो मिलकर करेंगे अगर तुम तैयार हो तो... पुर्वीने अपनी बहन को सही सलाह देते हुए कहा।

      देख तुझे अपने सपने के पुरा होनी की उम्मीद नहीं रखनी है तो मत रख पर तु इस नाटक मे इसलिए हिस्सा ले ताकी तु अपनी वो जींदगी जी सके जो तु जीना चाहती है कि सुबह उठकर बस लिखने का ही काम हो और कुछ भी काम नहीं...रुहान हर तरह से जीज्ञा को समझा रहा था।

      ठीक है मे तैयार हु बिना किसी उम्मीद के इस स्पर्धा में हिस्सा लेने के लिए... जीज्ञाने फिरसे अपने सपने की और एक कदम आगे बढाने की और सोचते हुए कहा।

      सभी दोस्त जीज्ञा की इस बात को सुनकर खुश हो जाते हैं और जेसे 2011 मे भारत कप जीता था और पब्लिक अपनी जगह पे खडी होकर अपनी खुशी ज़ाहिर कर रही थी वेसे ही जीज्ञा के दोस्त भी चील्लम चिल्ली करने लगते हैं। सभी की आवाज सुनकर शोप का मेनेजर उनको शान्त होने के लिए बोलता है। सभी दोस्त फिरसे अपनी जगह पर बेठ जाते हैं।

      तो ठीक है मे आज से लिखना शुरु कर देती हुं तु बाकी की जो नाटक स्पर्धा के लिए प्रक्रिया है उसे देख लेना ... नाटक स्पर्धा के बारे में बताते हुए कहा

      ओह मेडम जी एसे थोडी चलेगा पहले तुम दोनो मिलकर मुझे पुरा अहमदाबाद घुमाओ बाद में इसका कुछ होगा। ठीक है रवी... रुहानने रवी से कहा।

      बिलकुल... रवीने रुहान को साथ देते हुए कहा।

      क्या ठीक कहा अगर पापा ने मुझे आप लोगो के साथ देख लिया ना तो यह नाटक स्पर्धा का भी सपना सपना बनकर ही रह जाएगा... जीज्ञाने अपने दोस्तों से कहा।

      बे जीज्ञा तु इतनी चिंता क्यो करती है इतना बडा अहमदाबाद हैं तेरे पापा को क्या पता चलनेवाला है...रवीने जीज्ञासे कहा।

      जीज्ञा प्लीज़ यार अब मना मत कर... रुहानने अपना उदासीवाला मु बनाते हुए कहा।

      चलो ठीक है लेकिन घुमने की हर जगह मेरे घर से दुर होनी चाहिए...जीज्ञाने अपने दोस्तों से कहा।

      ठीक है डन वो जिम्मेदारी मेरी... रवीने कहा।

      तो कुछ एसे एकबार फिर से जीज्ञा के सपने को एक और नया रास्ता और उम्मीद मील जाती है।

      दुसरे दिन महावीर भी अहमदाबाद पहुच जाता है और पाचो दोस्त घुमने के लिए निकल पडते है। अहमदाबाद की बात करे तो अहमदाबाद मेरा सबसे पसंदीदा शहर है और उसका ट्राफिक मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। आप सोच रहे होंगे कि यह केसी बात कर रहा है ट्राफिक किसी को कैसे पसंद हो सकता है। मे आपको बताता हु की मुझे ट्राफिक क्यो पसंद है। मुझे ट्राफीक इसलिए पसंद है की उसके भी कुछ फायदे होते हैं नुकसान तो आप सभी को पता है लेकिन उसके फायदे मे आपको बताता हुं। ट्राफिक वो जगह है जहा पे लोगो को धैर्य रखने का सबक मिलता है। भागा भागी मे परेशान लोगो को जबरदस्ती तो जबरदस्ती पर दो पल की शांती जरुर मिलती है। कही घर जाते दो प्रेमीओ को साथ मे और ज्यादा समय बिताने को मिल जाता है। कही अपने बोयफ्रेन्ड से रुठकर भागी हुई गर्लफ्रेंन्ड को मनाने जा रहे बोयफ्रेन्ड को ट्राफिक की वजह से पाच मिनट ज्यादा मिल जाते हैं क्योकी उसकी गर्लफ्रेंन्ड को जबरदस्ती ट्राफिक की वजह से रुकना पडता है। कही बस मे बरसो से न मिले दोस्त टकरा जाए तो उन्हें दो पल का वक्त एक दुसरे के साथ बिताने के लिए मिल जाता है। एक गरीब बच्चा जो अखबार बेचकर अपनी रोजी रोटी चला रहा होता है उसे इसी ट्राफिक की वजह से कही ग्राहक मिल जाते हैं तो कही कीसी को अगर अखबार पढने का समय नही रहा तो उसे इस ट्राफिक की वजह से अखबार पढने का समय मिल जाता है। तो एसी बहुत सी ट्राफिक की अच्छी बाते है जो हम को बहुत कम दिखती है तो इसी ट्राफिक के मजे के साथ जीज्ञा, रुहान और उनके तीनो दोस्त अहमदाबाद घुमने की शुरुआत करते हैं। अहमदाबाद का काकरीया, सायन्स सीटी और उसमे सभी दोस्तो की घमाल मस्ती, 3d फिल्म मे किसी डरावने सीन से डरजाता हुआ महावीर, अन्नपुर्णा मा के दर्शन और लास्ट में अहमदाबाद की एक अच्छी सी गार्डन होटल मे खाने का मजा। कुछ इस तरह अपनी मजा और मस्ती के साथ पुरा दिन सभी लोग बिताते है लेकिन इसमे गभराने वाली बात यह थी की वो अंजान आदमी भी रुहान के पीछे पीछे बरोडा से अहमदाबाद भी आ जाता है और जीज्ञा और रुहान के पुरे दिन के घुमते फिरते मजाक मस्ती के फोटो खीचलेता हैं और अभी तक वो आदमी रुहान और जीज्ञा के पीछे ही था। सभी लोग अहमदाबाद के एक अच्छे से गार्डन होटल में बेठकर खाना खा रहे थे और उनसे थोडी दुर बेठा हुआ वो अंजान आदमी अपने मोबाइल फोन मे सबकुछ विडियो रेकोर्डिग कर रहा था।

      बाकी मजा आ गया आज घुमने का इतना तो हम साथ मे कभी बरोडा भी नहीं घुमे है... रवीने कहा।

      हा सभी जगह पे खाना पिना भी अच्छा था... महावीरने खाने की बात करते हुए कहा।

      अच्छा तो वो 3d मुवी वाले पोपर्कोर्न केसे लगे थे... पुर्वीने मजाक मजाक मे कहा।

      अरे यार उसकी बात ही ना कर उन ड्रेगनने तो मेरी सारी भुख मीटा दी थी मुझे डराकर... महावीरने अपने डरने का सीन याद करते हुए कहा।

      इससे हमारी दोस्ती एक परिवार मे जरुर बदल गई है क्यु जीज्ञा... रुहानने जीज्ञा से कहा लेकिन जीज्ञा का ध्यान कही और था इसलिए जीज्ञाने कुछ सुना ही नहीं था।

      ओह जीज्ञा हेल्लो कहा खोई हुई है तु... रुहानने जीज्ञा के हाथ को स्पर्श करते हुए कहा।

      सायद वो आदमी आज सुबह से हमारा पीछा कर रहा है और अभी भी हमारी फोटो ले रहा हो एसा लग रहा है... जीज्ञाने अपने दोस्तों से कहा।

      सभी दोस्त उस अंजान आदमी की तरफ देखते हैं और उस अंजान आदमी को भी शक हो जाता है की सायद इन लोगो को पता चल गया है कि मे उनकी फोटो खीच रहा हु इसलिए वो फटाफट अपना फोन जेब मे रखकर अपनी जगह से खडा होकर होटल की बहार की तरफ जाने लगता है और इस तरफ रुहान भी समझ गया था कि वो आदमी भाग रहा है इसलिए रुहान और रवी भी अपनी जगह से खडे होकर उस आदमी के पीछे चलने लगते हैं। उस अंजान आदमी को भी पता चल जाता है की रुहान और रवी मेरे पीछे आ रहे है इसलिए वो आदमी भागने लगता है और पीछे पीछे रुहान और रवी भी भागने लगता है।

      होटल से बहार रोड पर आगे वो अंजान आदमी और पीछे रुहान और रवी भाग रहे थे। भागते भागते वो आदमी अहमदाबाद की एक गली में घुसजाता है और पीछे पीछे रुहान और रवी भी। बहुत दुर तक भागने के बाद वो अंजान आदमी कही गायब हो जाता है और हांफते हुए रुहान और रवी एक जगह पर खडे खडे चारो और देखते हैं लेकिन उन्हें वो आदमी कही नहीं दिख रहा था। रुहान और रवी और होटेल पे खडे जीज्ञा, पुर्वी और महावीर सभी दोस्त सोच मे पड जाते हैं कि कोन था वो अंजान आदमी और क्यु वो उनकी फोटो खीच रहा था ? क्या उसकी वजह से फिर से जीज्ञा और रुहान के जीवन में भुचाल आनेवाला है ? क्या सजंयसिह, अंजान आदमी, जीज्ञा के पापा यह सभी लोग जीज्ञा के सपने की जगी हुइ नई उम्मीद को पुरा होने देंगे ? केसे शुरुआत होगी रुहान और जीज्ञा के प्यार की सफर ? आपको सबकुछ बहुत जल्द देखने को मिलेगा। सभी सवालो के जवाब को जानने के लिए पढते रहे दो पागल के आनेवाले अंक को।

     अगर आपको यह नवलकथा अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेर जरुर करे। 

TO BE CONTINUED NEXT PART ...

|| जय श्री कृष्णा ||

|| जय कष्टभंजन दादा ||

A VARUN S PATEL STORY