हमने दिल दे दिया - अंक ६ VARUN S. PATEL द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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हमने दिल दे दिया - अंक ६

अंक ६ तहकीकात    

       भवानी सिंह और अपने दो हवालदारो के साथ मिलकर उस जगह तहकीकात करने पंहुचा था जहा पर वीर का अकस्मात हुआ था | रोड से थोड़ी दुर जहा वीर की गाडी लुडकती हुई आ पहुची थी अकस्मात के बाद जो पुरी तरह से तुट चुकी थी और उसके आस-पास कार का तुटा-फूटा सामान पड़ा हुआ था साथ ही वीर का ख़ून भी | भवानी सिंह और उसके हवालदार हर एक चीज को अच्छी तरह से देख रहे थे और और तलाश रहे थे और यह जानने की कोशिश कर रहे थे की यह अकस्मात हुआ कैसे |

       महेंद्र भाई आपको कितना टका यह लगता है की वीर की मौत शराब के नशे में धुत होने के कारण हुई होगी ... भवानी सिंह ने कार के पास तुटी हुई बत्ती का काच अपने हाथ में लेकर देखते हुए कहा |

       मुझे तो सर १०० % यह लग रहा है की उसने नशे में अपने आप ही कार ठौक दी है ... महेंद्र भाई ने कहा |

      भवानी सिंह अपने हवालदार की बात सुनने के साथ साथ उस काच को लेकर अंश की कार की बत्ती के काच के साथ मेच करके देखने की कोशिश करता है की यह काच वीर की कार का ही है या फिर कोई दुसरी कार का और होता वही है जिसका अंदाजा भवानी सिंह को था वह काच दुसरे किसी वाहन का ही था |

      मनसुख भाई वहा आगे वो एक ढाबा है उसके मालिक को यहाँ पे बुलाकर लाओ चाय बिस्कुट के साथ उससे पुछ्ताज करते है की यहाँ पर सही में हुआ क्या है उसने तो जरुर देखा होगा ... भवानी सिंह ने अपनी जेब से देसी बीडी निकालकर उसे जलाकर फूकते हुए कहा |

      जी सर ... इतना बोलकर मनसुख भाई उस ढाबे वाले को लेने के लिए चले जाते है और यहाँ पर महेंद्र भाई और भवानी सिंह कार के आस-पास अच्छे से नजर फेरने लगते है |

      महेंद्र जी यह लीजिए यह काच और मुझे बाकी की कई चीजे यहाँ पर तुटी-फुटी एसी लग रही है जो इस कार की नहीं लग रही है तो इसे RTO डिपार्टमेंट को दिखाईये शायद कुछ मिल सके क्योकी वीर को या तो किसीने उड़ाया है या वीर किसी के साथ जाकर टकराया है पता नहीं क्या हुआ है पर सवाल यह है की वो भागा क्यों ... महेंद्र के साथ बात करने के बाद मन-ही-मन गुनगुनाते हुए भवानी सिंह ने कहा |

      मनसुख भाई ढाबे वाले को बुलाकर लाते है साथ में चाय-बिस्कुट के साथ |

      लीजिए सर यह ढाबे वाला और यह आपके लिए चाय-बिसकुट ... मनसुख भाई ने कहा |

      ढाबे वाला साथ में चाय और बिस्कुट लेकर आया था जो बारी-बारी तीनो को कप में चाय और बिस्कुट खाने के लिए देता है और फिर चाय-बिस्कुट के साथ तहकीकात की भी शुरुआत होती है |

      अच्छा आप यह बताइए जब यह अकस्मात हुआ तब आप यही पर थे ... भवानी सिंह ने कहा |

      जी सर हम अपने ढाबे पर ही थे जब अकस्मात हुआ और तभी यहाँ पर आस-पास कोई नहीं था और रोड भी पुरा खाली था ... ढाबे वाले ने कहा |

      अच्छा यह बताओ की अकस्मात हुआ कैसे था ... भवानी सिंह ने चाय में अपना बिस्कुट डुबोकर खाते हुए कहा |

      हम अंदर काम कर रहे थे तो कैसे हुआ यह तो नहीं देखा पर जब यह अकस्मात हुआ तो हमको जोर से ढाबे पर आवाज सुनाई दी जिस वजह से हम दोड़कर बहार आए और हमने देखा तो यह कार तो यही पर थी इसी हालत में पर एक बड़ा ट्रक था जो शायद इसके साथ टकराया होगा वह रोड पर ही था जो इस अकस्मात के तुरंत बाद अपनी ट्रक लेकर चला गया ... उस ढाबे वाले ने भवानी सिंह ने कहा |

     अच्छा कहा पे खड़ा था वो ट्रक वाला दिखाओ जरा ... भवानी सिंह ने ढाबे वाले से पुछा |

     ढाबे वाला सबको लेकर रोड पर उस जगह जाता है जहा वो ट्रक वाला खड़ा था |

     यही पर साहेब ... ढाबे वाले ने कहा |

     और क्या देखा ... भवानी सिंह ने कहा |

     बस इतना ही जब यहाँ पर हम लोग दोडकर आए तो वो ट्रक जा चूका था और यहाँ पर यह कार थी और उसमे वीर भाई थे ... ढाबे वाले ने कहा |

     ठीक है आप जा सकते है ... भवानी सिंह ने कहा |

     ढाबे वाला वहा से चला जाता है और भवानी सिंह अपनी नजरो को छोटी करके बड़ी बारीकी से रोड को देखने लगता है और उसे वहा पर भी एक एसा सबुत मिलता है जो उसे उस ट्रक के पास ले जाने के लिए काफी था | भवानी सिंह को ट्रक के टकराने के बाद उसका शायद ओइल का टंकी या पाईप तूट गया होगा जिससे ओइल लिक हुआ होगा और उसके निशान ट्रक वाले से शायद न चाहते हुए भी रोड पर छुट गए | २-३ दिन होने के कारण निशान धुंधले से हो गए थे | भवानी सिंह उन निसानो पर अपनी उंगली फेरता है और अपने नाक के पास उस उंगली को ले जाकर उसे सूंघ कर यह तय करने की कोशिश करता है की यह ओइल ही है |

     यहाँ पर यह ओइल के निशान है और शायद यह वही ट्रक के भी हो सकते है तो आस-पास के गेरेग वालो से पुछ्ताज करो एसे ट्रक के बारे में जिसका अकस्मात हुआ हो और वह रिपेर के लिए आया हो जिसका ऑइल का टैंक या पाईप फटा हो और उस ढाबे वाले से भी पुछ्ताज करो की की ट्रक कोनसा था और उसमे कोई एसा निशान वगेरा था जिससे उस ट्रक को पहचाना जा सकता हो जल्द से जल्द आस-पास की हर जगह पहुचो और उस ट्रक को ढूढ़ लाओ ... भवानी सिंह ने अपने हवालदारो को आदेश देते हुए कहा |

      भवानी सिंह के आदेश से उसके दोनों हवालदार पुछ्ताज करने में लग जाते है और उनका पहला कदम था उस ट्रक को ढूढना क्योकी उससे ही पता चलेगा की यह अकस्मात था या फिर मर्डर क्योकी वीर मानसिंह जादवा का बेटा था और मानसिंह जादवा के कई दुश्मन थे |

      वीर की मृत्यु को ४ दिन बीत चुके थे | अंश बार-बार जादवा सदन दिव्या की हालत देखने के लिए पहुचता पर पिछले कई दिनों से दिव्या जादवा सदन में कही पर भी दिखाई नहीं दे रही थी और ख़ुशी जो घर में ज्यादा लोगो के आने जाने से काम थोडा ज्यादा रहता था जिस वजह से अंश से मिल नहीं पाती थी | अंश के दिमाग में हर बार एक सवाल आ रहा था की दिव्या को आख़िरकार कहा पे रखा गया है और वह किस हालत में होगी | कहते है जब इंसान तकलीफ में होता है तो सबसे पहले वह सारी बाते अपने जीवन साथी को जाकर बताता है और अगर उसका कोई जीवनसाथी नहीं है तो वह जाकर अपने अंदर भरी सारी बाते और तकलीफे अपने दोस्तों के साथ बाटता है |

      अंश, अशोक, पराग और चिराग चारो गाव से थोड़ी दुर जहा मानसिंह जादवा की पुरानी हवेली है जो करीबन १५० एकड़ में फेली हुई है उसके पीछे अपनी अपनी मोटर-साईकल लगाकर बेठे थे | सभी दोस्तों का मूड अच्छा था सिवाय अंश के |

      अबे वीर कोनसा तेरा भाई था साला एक नंबर का हरामी इंसान था उसके लिए तु अपना मु क्यों बिगाडके बेठा हुआ है ... चिराग ने अंश के उदाश मु की तरफ देखते हुए कहा |

      में तो खुश हु उसके जाने पर साले उसके बाप ने उसकी शादी के एक दिन पहले ही चार लडको को और अपने गाव की एक लड़की को जलाकर मार डाला था साला वह इसी लायक है में तो कहता हु मानसिंह जादवा के सारे परिजन मर जाने चाहिए ... पराग ने गुस्से से कहा |

      साले तुम लोगो की इसी सोच के कारण मेरा मु लटका हुआ है | इस गाव के हर एक मर्द को किसी और के पापो की सजा किसी और को देनी ही आती है | मानसिंह जादवा ने जो सारे पाप किए है उसमे उसके घर वालो की क्या गलती मतलब सिर्फ औरते उन्होंने तो कुछ नहीं किया है ... अंश ने कहा |

      औरते नहीं हम सिर्फ उस घर के नकली मर्दों की बात कर रहे है ... अशोक ने कहा |

      इस गाव की सोच एकदम घटिया है यहाँ के लोगो को अपनी आबरू इज्जत और मर्यादा अपनी इंसानियत से ज्यादा प्यारी है | वीर के जाने के बाद दिव्या के साथ जो सलूक हुआ वो किसी नरक से कम नहीं था यार मैंने देखी है उसकी हालत | कोड़े लगने की वजह से उसकी बाहरी चमड़ी पुरी की पुरी छिल गई है और उसका कोई इलाज भी नहीं करवा रहा है और तो और उसके सारे बाल भी मुंडवा दिए है | एक औरत की खूबसूरती के सारे सिंगार इन जादवा परिवार और गाव की गलत सोच ने छीन लिए है | मुझ घिन आती है एसे गाव वालो के उपर कोई इतना निर्दयी कैसे हो सकता है मुझे तो यही समझ नहीं आ रहा ... अंश ने कहा |

      हा लेकिन अब हम इसमें क्या कर सकते है यारा ... चिराग ने कहा |

      कुछ ना कुछ तो करना होगा एसे ही गाव की औरतो को बली तो नहीं चढ़ने दे सकते ना ... अंश ने कहा |

      मानसिंह जादवा रावण है और हम तो वानर सेना के बराबर भी नहीं है ... पराग ने कहा |

      में मानसिंह जादवा को मिटाने की बात नहीं कर रहा उनके मुझपर बहुत अहसान है में बात कर रहा हु गाव वालो की इस घटिया सोच को मिटाने की और वो मुझे किसी भी हालत में करना ही करना है ... अंश ने अपने दोस्तों से कहा |

      बात तो सही है यार अगर इन लोगो के अंदर की गलत सोच को मिटा दिया जाए तो इस गाव का कुछ हो सकता है ... अशोक ने कहा |

      हा पर वो भी इतना सरल है नहीं जितना तुम लोग सोच रहे हो | इन लोगो ने बचपन से यही सिखा है और इसी में इन लोगो की ख़ुशी है इसलिए इन लोगो को बदलना नामुमकिन सा है ... पराग ने अपने मु से गुटखा थूकते हुए कहा |

     सही है पर कोशिश तो होनी ही चाहिए लेकिन वो सब बाद में पहले मुझे दिव्या से मिलना है और उसके हाल-चाल पुछने है क्योकी में किसी औरत को अपने सामने किसी अत्याचार का गुलाम बनते नहीं देख सकता ... अंश ने कहा |

     पुरी बात के दरमियान अंश अपना मु निचे जमीन की और रखकर ही बेठा था |

     तु पागल मत बन वो मानसिंह जादवा के बेटे की बहु है और वो भी विधवा अगर उसके आस-पास भी तुझे किसी ने देखलिया ना तो तेरे शरीर के इतने टुकड़े होंगे की तु पहचान में भी नहीं आएगा ... चिराग ने कहा |

     वो जो भी हो मुझे कुछ भी करके दिव्या के पास जाना है और उसे इस हालत से निकालना है क्योकी मै गाव की किसी भी लड़की को इतनी तकलीफ में नहीं देख सकता में जा रहा हु अभी के अभी ख़ुशी के पास वही मुझे बता सकती है की दिव्या कहा है ... अंश ने अपनी मोटर-साईकल शुरू करते हुए कहा |

     अरे अंश रुक बे ... दोस्तों के रोकने पर भी अंश रुकता नहीं है और अपनी मोटर-साईकल लेकर चला जाता है |

     अबे इतने साल से इस गाव में कई अत्याचार होते आ रहे है और अचानक ही इस अंश को इस दिव्या पे इतना तरस कब से आने लगा है भाई इसका उसके साथ कुछ ? ? ... अशोक ने अंश को शंकास्पद नजरो से देखते हुए कहा |

     अंश के दिमाग में क्या चल रहा था उसका किसी को कोई अंदाजा नहीं था | अंश और दिव्या के बिच कुछ है या नहीं इसका भी किसी को कुछ अंदाजा नहीं था पर हां इतना जरुर कहा जा सकता है की यह नवलकथा हिंदी फिल्मो जैसी नहीं है जहा सिर्फ लड़की की शकल देखकर किसी को किसी से प्यार हो जाए | यहाँ पे जो कुछ भी होगा उसके पीछे कोई कारण जरुर होगा जो इस कथा को और भी रसप्रद बना देगा |

      गुजरात में मुख्यत्वे दो पार्टी थी जिनका अच्छे से जनता पर दब दबा था जिनमे एक पार्टी का नाम था विकास दल और दुसरी पार्टी थी जनता सेवा समिती | जनता सेवा समिती सत्ता पक्ष था और विकास दल विपक्ष में था | जनमावत तालुके के MLA थे शक्तिसिंह जहा हाल-फिलहाल में मानसिंह जादवा सत्ता में आने की तैयारी में है और उनके सामने आज तक किसी ने भी खड़े होने की हिम्मत नहीं की है आज तक इस सिट पर मानसिंह जादवा का आदमी बिन हरीफ चुनाव जीतता आया है पर अब एसा नहीं होने वाला था अब सबकुछ बदलने वाला था | विकास दल ने अपना सबसे पावरफुल कैंडीडेट को जनमावत तालुके में काम पर लगा दिया था जिनका नाम है शांतिलाल झा | शांतिलाल झा अब तक पार्टी के प्रदेश प्रमुख का कार्यभार सँभालते थे और अब भी संभाल रहे है लेकिन अब उनकी इच्छा है की वह MLA बने |

    सरस्वती निवास, शांतिलाल झा का निवास स्थान,

     शांतिलाल झा इस वक्त अपने निवास स्थान पर ही हाजिर थे और अपने घर के होल में कुर्ता-पजामा पहनकर हाथ में पेपर के साथ टेलीविज़न में चल रहे समाचार देख रहे थे जो उनकी पार्टी को लेकर ही चल रहे थे |

     ब्रेकिंग न्यूज़ मिल रहे है अभी हमें की विकास दल के शक्तिशाली नेला भूषण भट्ट पक्ष बदलाव जल्द से जल्द कर सकते है | कई दिनों से चल रही भूषण भट्ट की नाराजगी को देखकर एसा लग रहा है की वह अभी किसी भी वक्त अपनी पार्टी विकास दल से इस्तीफा दे सकते है और सत्ता पक्ष यानी जनता सेवा समिती में सामिल हो सकते है | कई दिनों से भूषण भट्ट जनता सेवा समिती के कार्यकारी अध्यक्ष लालभाई चंदा के संपर्क में है जिसका सबुत आपको भूषण भट्ट के Instgram अकाउंट से मिल जाएगा जहा पर उन्होंने अपनी एक विकास को लेकर पोस्ट की थी उसमे लालभाई चंदा की अच्छी कमेन्ट भी है और भूषण भट्ट ने लालभाई को टेग भी किया हुआ है | तो देखते रहिये सच तक चेनल को में रिपोटर रागिनी कैमरामैन दक्ष प्रजापति के साथ |

     समाचार सुनने के तुरत बाद शांतिलाल झा अपनी जगह से खड़े होते है और पेपर साथ लेकर अपने घर से बहार निकल जाते है और अपने PA से कार निकालने का आदेश देते है |

     कार निकालो आज की चाय भूषण भट्ट के साथ ही पियेंगे ... शांतिलाल झा ने कहा |

     कार के एक काफिले के साथ शांतिलाल झा अपने घर से निकलकर भूषण भट्ट के घर जाने के लिए रवाना होते है | शांतिलाल झा हमेशा की तरह अपनी suv कार में सफ़र कर रहे थे जिसमे एक छोटासा टीवी भी था जिसमे समाचार चल रहे थे जिसमे यह चर्चा हो रही थी की भूषण भट्ट के दुसरी पार्टी में जाने से विकास दल को कितना नुकशान हो सकता है |

     में जहा तक भूषण भट्ट को जानता हु तब तक अगर उन्होंने विकास दल पार्टी को छोड़ा तो पार्टी में से कम से कम १० एसे कैंडीडेट जो अगला MLA का चुनाव जीत सकते है वो भी इस पार्टी को त्याग कर दुसरी पार्टी में सामिल हो सकते है एसा मेरा मानना है ... समाचार में चल रही चर्चा में सामिल एक विशेषज्ञ ने अपनी राय देते हए कहा |

     अब में आपसे पूछना चाहूंगी शक्तिसिंह जी की आपको क्या लगता है की कितने सद्स्स्य विकास दल को छोड़कर जनता विकास समिती में आ सकते है ... न्यूज़ एंकर ने जनमावत तालुके के MLA से सवाल करते हुए कहा |

     विकास दल को में सबसे पहले छलावा दल कहूँगा जहा सभी के साथ छलावे ही किए जाते है और वह लोग अपने लोगो के साथ सही न्याय नहीं करते इस वजह से उनके नाराज और अच्छे लोग जो सच में जनता का विकास चाहते है पर गलत पार्टी के चुनाव के कारण वह उस विकास में अपना योगदान नहीं दे पाते इसी वजह से उनको एक एसी पार्टी चाहिए जो सच में जनता के विकास की बात करती हो और उसमे कार्यरत रहती हो और गुजरात में या पुरे देश में एक ही एसी पार्टी है और वह है जनता सेवा समिती तो हम तहे दिल से उन लोगो को हमारी पार्टी में आमंत्रित करेंगे जो जनता के विकास में रसप्रद हो ... शक्तिसिंह ने अपनी राय देते हुए कहा |

     इतनी चर्चा को सुनने के बाद शांतिलाल झा अपना टेलीविजन बंद कर देते है | शांतिलाल झा की कार का काफिला भूषण भट्ट के घर के पास पहुचता है जहा पर पत्रकार की खड़ी भीड़ उन्हें घेर लेती है |

    गाड़ी चलाते रहो रोकना मत ... शांतिलाल ने अपने ड्राईवर को आदेश देते हुए कहा |

    हजारो सवालों के साथ खड़े पत्रकारों की भीड़ जन्होने शांतिलाल झा की कार को घेर रखा था उनके बिच बिना रुके कार भूषण भट्ट के निवास स्थान के अंदर प्रवेश कर जाती है |

    शांतिलाल झा की कारो का काफिला अपने घर देखकर भूषण भट्ट घर के बहार निकलकर उन्हें लेने के लिए खुद आता है |

    शांतिलाल झा की कार भूषण भट्ट के घर के मुख्य दरवाजे के पास आकर खड़ी रह जाती है |

    आईए आईए झा साहब आईए ... शांतिलाल झा की कार के पास आते हुए भूषण भट्ट ने कहा |

    भूषण भट्ट शांतिलाल की कार का दरवाजा खोलते है और शांतिलाल चहरे पर नवाबो से रुआब के साथ कार से निचे उतरते है |

    कैसे हो भट्ट ... शांतिलाल झा ने मंद मुस्कान देते हुए कहा |

    ठीक हु आईए आप अंदर आईए ... भूषण भट्ट ने शांतिलाल झा और उनके PA दोनों को सद्कार के साथ अंदर ले जाते हुए कहा |

    भूषण भट्ट के घर में अंदर जाते ही शांतिलाल झा वहा पर हॉल में रखे हुए सोफे पर अपने हाथ दोनों तरफ फेलाकर बेठ जाते है |

    बेठिये भूषण जी बेठिये आज कल आप तो सुपर स्टार की तरह छाए हुए है बेठिए आप ही का घर है ... भूषण भट्ट से रुआब के साथ शांतिलाल झा ने कहा |

    भूषण भट्ट थोडा सा गभराया हुआ था | शांतिलाल के कहने से भूषण भट्ट उनके सामने की और सोफे पर बेठता है |

    जी कहिए कैसे आना हुआ झा साहब ... भूषण भट्ट ने शांतिलाल झा से कहा |

    देख मुझे बात को बार बार घुमाना पसंद नहीं है और तु भी जानता है की मै यहाँ पर क्यों आया हु | मुझे सीधा सीधा जवाब चाहिए की यह सारी नौटंकी किस लिए चल रही है इसमें सच क्या है और गलत क्या है ... शांतिलाल झा ने भूषण भट्ट से कहा |

    देखिये झा साहब लोगो में मेरा वर्चस्व आपको भी पता है और मै हर बार चुनाव जीतता आ रहा हु फिर भी आप लोग मुझे विपक्ष का कार्यभार नहीं दे रहे तो हमें कोई बड़ा पद ना मिलने की वजह से हम पार्टी को छोड़ रहे है ... भूषण भट्ट ने बड़ी हिम्मत से कहा |

    घर में कोई है ... शांतिलाल झा ने भूषण भट्ट से पूछा |

    जी ... भूषण भट्ट ने आश्चर्य से कहा |

    घर में कोई है ... शांतिलाल ने फिर से अपने प्रश्न को दोहराते हुए कहा |

    जी नहीं सब लोग बहार गए हुए है ... भूषण भट्ट ने कहा |

    देख तु हर साल थाईलेंड जाता है और वो भी पार्टी के पैसो से और वहा हर तरह की एस करता है लडकियो के साथ भी तु मजे करता है तो तुझे क्या लगता है पार्टी सिर्फ तुम लोगो को मजे कराने के लिए बनाई गई है सालो तुम सब लोगो के हर एक वीडियो हमारे पास है अगर तुन्हें शाम तक इस खबर को अफवा का नाम देकर ख़ारिज नहीं किया तो मै सारे वीडियो वायरल कर दूंगा और हा अगर यकीन नहीं आता तो एक बार पार्टी छोड़कर दिखा फिर तुझे सबूत और बदनामी दोनों एक साथ दूंगा और हां अगर पार्टी में रहा तो अच्छा पद भी देंगे मगर शब्र कर ... इतना बोलकर अपनी जगह से उठकर शांतिलाल झा वहा से अपनी कार में बैठकर निकल जाते है |

    भूषण भट्ट शांतिलाल की बातो से डर जाता है और शोफे पर बैठकर सोचने लगता है और शांतिलाल झा घर पहुचे उससे पहले ही भूषण भट्ट खुद मिडिया के सामने आकर इस खबर को अफवा का रूप देकर इसे ख़ारिज कर देता है |

    इस तरफ कार में | PA शांतिलाल झा से सवाल करता है |

    सर क्या सच में इन लोगो के वीडियो है ... PA ने सवाल करते हुए कहा |

    नहीं वीडियो नहीं है पर अगर इंसान के अंदर उसने कुछ गलत किया है और उस गलत करने का डर है तो हमें सिर्फ उसका इस्तमाल करना आना चाहिए उसे हम अपने प्यादे की तरह खिला सकते है | अब यह भूषण भट्ट और उसके प्यादे हमेशा इस डर की वजह से हमारे नौकर की तरह हमारी सेवा करेंगे ... आखो पर चश्मा लगाते हुए शांतिलाल झा ने कहा |

    यह था शांतिलाल झा जो मानसिंह जादवा की तरह है पैसो से ताकतवर था और अपने मक्सत के लिए शांतिलाल झा कुछ भी कर सकता था और किसी भी हद तक जा सकता था | आपके मन में इस पात्र को लेकर एक सवाल जरुर आया होगा की यहाँ पर शांतिलाल झा का क्या रोल होने वाला है तो इस उत्तर के लिए हम ने दिल दे दिया के आने वाले अंको के साथ जुड़े रहिएगा क्योकी शांतिलाल झा का रोल इस कथा में जितना भी होगा उतना बहुत ही रसप्रद होगा यह तो तय है |

    इस तरफ अंश ख़ुशी के पास पहुचता है और दोनों हमेशा की तरह आज भी जादवा सदन की छत पर थे जहा दोनों बचपन से हमेशा एक दुसरे के साथ अपनी-अपनी बाते किया करते थे चाहे वह सुख की बाते हो या दुःख की बाते |

    छत पर आते ही ख़ुशी अंश के गले लग जाती है और अपने भाई की मौत और भाभी दिव्या पर हो रहे अत्याचारों को लेकर बहुत दुःखी हो जाती है और रोने लगती है | अंश ख़ुशी को संभालता है और दोनों छत के एक कोने में बैठकर बाते करते है |

    मुझे पता है की जो भी हुआ वो नहीं होना चाहिए था पर क्या करे यह हमारे हाथ की बात नहीं है | हमारे हाथ में बस इतना ही है की किसी भी स्थिति में हम बस अपने आप को संभाले ... अंश ने कहा |

    जब कोई अपना जाता है तो यह सब बाते काम नहीं आती अंश ... ख़ुशी ने अपने आशु पोछते हुए कहा |

    सही है मैंने भी अपने बचपन में अपनी माँ को खो दिया था जिसकी जगह कभी कोई नहीं ले सकता पर मुझे बार बार एक ही ख्याल जहेन में आता है की हम ने तो सिर्फ परिवार का एक-एक सदस्य खोया है पर सोचो तुम्हारी भाभी की हालत कैसी होगी उसने तो सिर्फ वीर को नहीं बल्कि अपना पुरा जीवन अपनी सुंदरता, अपने शोख वगेरा सबकुछ छीन गया यार उसकी हालत कैसे होगी ... अंश ने भावुकता से ख़ुशी से कहा |

    मुझे भी उन पर बड़ा तरस आता है | मैंने उनकी इस हालत में मदद करने की बहुत कोशिश की पर क्या करे इस घर के लोग और पुराने रिवाज ने मुझे भी बांध लिया है | भाभी के पास किसी को भी जाने नहीं दिया जा रहा है | एसा लग रहा है जैसे भाभीने कोई अपराध किया हो उसे नरक से भी कठिन सजा दी जा रही है इस घर में अंश आज मुझे भी डर लग रहा है की कही मेरा पति भी एसे ही उसकी गलती की वजह से मर गया तो उसकी सजा मुझे भुगतनी पड़ेगी यार इससे तो अच्छा है की में मर जाऊ ... ख़ुशी ने अंश से कहा |

    ख़ुशी भी जादवा सदन में हो रहे दिव्या के साथ के व्यवहार को देखकर अंदर से पुरी तरह से हिल गई थी और डर भी गई थी इसी वजह से वो क्या बोल रही थी इसका उसे कुछ होश नहीं था |

    चुपकर एसा क्यों बोल रही है | में तेरे साथ एसा कभी नहीं होने दूंगा समझी | तु चिंता ना कर तेरा दोस्त जब तक जिंदा है तब तक में एसा तेरे साथ हरगिज नहीं होने दूंगा साला पुरे गाव को जला दूंगा ... अंश ने अपनी जगह से उठकर ख़ुशी के गले लगकर अपनी दोस्ती को बया करते हुए कहा |

     ख़ुशी अंश को कसके गले लगा लेती है जैसे कोई अपने प्यार को गले लगाता है | ख़ुशी को धीरे धीरे अंश से अब प्यार होने लगा था जिससे अंश बिलकुल अंजान था |

     मुझे बिचारी भाभी की चिंता हो रही है इन लोगो ने उन्हें हमारी पुरानी हवेली भेज दिया है जहा उसे केदियो जैसा जीवन जीना पड़ेगा में यह सब नहीं देख शक्ति ... अंश के गले लगी ख़ुशी ने रोते हुए कहा |

     तु चिंता ना कर ख़ुशी सब ठीक हो जाएगा ... अंश ने ख़ुशी से कहा |

     अंश thank you तुम ना होते तो मेरा क्या होता | मुझे छोड़कर कभी मत जाना ... ख़ुशी ने कसके अंश को गले लगाते हुए कहा |

     में हमेशा तुम्हारे साथ हु ख़ुशी ... अंश ने ख़ुशी से कहा |

     दोनों दोस्त थे लेकिन दोनों के बिच जो बात-चित चल रही थी वेसी बाते अक्सर दो प्रेमी के बिच ही होती है और यही समझ रही थी छत पर जानें वाले दरवाजे के पास खड़ी दोनों की बातें सुन रही सुरवीर की पत्नी ।

      सुरवीर की पत्नी इन बातो को किस तरह समझती है और इसका परिणाम क्या है वह देखना काफी रसप्रद होने वाला है तो पढ़ते रहिये Hum Ne Dil De Diya के आने वाले सारे अंको को |

TO BE CONTINUED NEXT PART...

।। जय श्री कृष्णा ।।

।। जय कष्टभंजन दादा।।

A VARUN S PATEL STORY