कहानी प्यार कि - 20 Dr Mehta Mansi द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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कहानी प्यार कि - 20

" ये सब झूठ है हमने एसा कुछ भी नहीं किया है ..." जगदीशचंद्र अब भी अपने किए पर पर्दा डालने कि कोशिश कर रहे थे..।

" कितना जूठ बोलेंगे आप ... ये मत भूलिए कि सच कभी ना कभी तो बाहर आ ही जाता है ..." मोहित ने कड़क लहज़े मे कहा...

" कैसा सच ? और सब क्यों मान ले कि तुम जो सब को बता रहे हो वो सच है ? " जगदीशचंद्र फिर से बोले..

" तो क्या करे ... कि सब को हमारी बात पर यकीन आ जाए...? हा ... एक काम करते है सब को सबूत ही दिखा देते है ... " अनिरूद्ध ने कहा और फिर उसने मोहित को इशारा किया...
मोहित ने सामने लगाई हुई स्क्रीन के पास जाकर उस मे पेनड्राइव लगाई और वीडियो शुरू कर दिया... जिसमे हरदेव ने अनिरूद्ध पर गोली चलाई और फिर वो और जगदीशचंद्र उसे कार कि तरफ ले जा रहे थे ये सब उस वीडियो मे दिखाई दे रहा था... वीडियो जैसे ही खत्म हुआ मोहित ने वीडियो बंध कर दिया...

" तो मि.. त्रिपाठी अब आपका क्या कहना है ...? अब तो सब मान जाएंगे ना..? " अनिरूद्ध ने जगदीशचंद्र कि तरफ देखते हुए कहा...पर जगदीशचंद्र सीर जूकाए एसे ही खड़े रहे... साथ मे दोनो ये वीडियो देखकर हैरान भी थे...

" ओह... एक बात तो मे बताना ही भूल गया... आप सोच रहे होंगे ये वीडियो किसने बनाया ..? कहा से आया ? क्योंकि आप लोगो ने सब कैमरे तो बंध कर दिए थे...! क्यों हरदेव ? " अनिरूद्ध ने मुस्कुराते हुए हरदेव कि तरफ देखकर कहा...
और ये सुनकर हरदेव उसे गुस्से से घूरने लगा...

" कोई बात नहीं मे ही बता देता हूं... वो क्या है ना की ये वीडियो मुझे हरदेव कि वजह से ही मिला है.. इसीलिए तो पहले तुम्हे थैंक यू... " ये सुनकर जगदीशचंद्र हरदेव को घूरने लगा.. और हरदेव सोच मे पड़ गया कि उसने तो अनिरूद्ध की कोई हेल्प नहीं कि है ... फिर ये सब...

" इतना मत सोचो हरदेव ... क्योंकि तुम्हे कुछ याद भी नहीं आएगा... की तुमने मेरी हेल्प कब और कैसे कि ... ख़ैर मे ही बता देता हूं... वो हुआ यू कि हरदेव ने संजू को जब किडनेप करने कि कोशिश कि थी उसके बाद संजू कि सेफ्टी के लिए मैंने खुद बाहर सब जगह हिडन कैमरे लगाए हुए थे जिसके बारे में सिर्फ और सिर्फ में जानता था.. और उस कैमरे मे यह सब रेकॉर्ड हो गया... अगर तुमने एसा कुछ नहीं किया होता तो मे वहा कैमरा भी नहीं लगाता और हमे सबूत भी नहीं मिलता .. सो धिस इस ओनली पॉसिबल बीकॉज ऑफ़ यु हरदेव ..."
हरदेव को बहुत ही गुस्सा आया और उसने अपने जूतों में छुपाई हुई बंदूक निकाली और अनिरूद्ध पर ताक दी...

" मे तुम्हे छोडूंगा नहीं ... उस वक्त तुम बच गए ... आज नहीं बच पाओगे..." हरदेव गुस्से में बोला..

पर अनिरूद्ध उसे देखकर मुस्कुराने लगा और ये देखकर हरदेव को बहुत हैरानी हुई...
" शायद तुम्हे अपनी जान प्यारी नहीं है इसीलिए मुस्कुरा रहे हो ..." हरदेव शैतानी मुस्कुराहट के साथ बोला..

" एकबार अपने पीछे तो देख लो ... हरदेव ... तुम्हे पता चल जाएगा कि में क्यों मुस्कुरा रहा हूं ..."
हरदेव ने तुरंत पीछे देखा और उसके साथ उसके चेहरे पर से सारी हवाए उड़ गई...
सामने पुलिस हरदेव पर बंदूक से निशाना लगाए हुए खड़ी थी...
" मेरे पास मत आना नहीं तो मे गोली चला दूंगा..." हरदेव घबराता हुआ बोला...

पर पुलीस उसके पास आने लगी... और घबारहट मे हरदेव के कांपते हाथो से बंदूक गिर गई...

" इस्नपेक्टर साहब अरेस्ट हिम " अनिरूद्ध ने कहा...
इंस्पेक्टर ने हरदेव को पकड़ लिया और उसके हाथो मे हथकड़ी पहना दी...जगदीशचंद्र भी घबराते हुए ये सब देख रहे थे...
" अनिरूद्ध बेटा.. मे तुम्हारे सामने हाथ जोड़ता हूं... प्लीज़ मेरे बेटे को माफ़ करदो ... उसने ये सब सिर्फ अपने प्यार के लिए किया... वो अकेला वहा कैसे रहेगा..." जगदीशचंद्र अनिरूद्ध के पास आकर गिड़गिड़ाने लगे...

" अकेला कहा... आप भी तो जा रहे है ना उसके साथ ...! " अनिरूद्ध ने जैसे ही कहा जगदीशचंद्र एकटक अनिरूद्ध को देखने लगे..

" जी... एम एल ए साहब ... आपको भी गिरफ्तार किया जाता है " इंस्पेक्टर हथकड़ी के साथ जगदीशचंद्र के पास आते हुए बोले...

" तुम मुझे एसे गिरफ्तार नहीं कर सकते हो ... जानते नहीं हो की मै कौन हूं? इस शहर का एम् एल ए हूं कोई ऐरा गेरा नहीं हूं कि तुम मुझे गिरफ्तार करने चले आए..." जगदीशचंद्र चिल्लाते हुए बोले...

" माफ़ कीजिए पर ऊपर से ऑर्डर है... आपको गिरफ्तार करने के लिए... " इंस्पेक्टर बोले...

किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था सब बड़े ही आश्चर्य के साथ ये सब देख रहे थे ... पर मोहित अनिरूद्ध और सौरभ के चहेरे पर मुस्कुराहट थी ...

" सोरी एम् एल ए साहब ... मे तो चाहता था कि आप आराम से मेरी और संजना कि शादी देखे... उसका हिस्सा बने .. इसीलिए मे चुप था.. मैं चाहता था कि शादी खत्म होने के बाद ये सच सबको पता चले खास तौर से आपको पर अब क्या करे आपके बेटे ने सब पर पानी फेर दिया... और मुहूर्त भी निकल गया है... अब दो घंटे तक और कोई मुहूर्त है भी नहीं तो आपके सच से भी सब को रूबरू करवा ही देते है ! " अनिरूद्ध तीखी मुस्कुराहट के साथ बोला...

" ये क्या कह रहे हो तुम ? " जगदीशचंद्र गुस्से में चिल्लाए...

" चिल्लाई मत त्रिपाठी जी.. देख ही लीजिए..." मोहित ने कहा... और उसने फिर से स्क्रीन ऑन कर दी... और इस बार उसने वन इंडिया न्यूज़ चैनल लगाई... जिसमे जगदीशचंद्र के फोटो के साथ न्यूज आ रही थी...

" आज कि बड़ी खबर एम् एल ए जगदीशचंद्र ने देश और ओब्रॉय फार्मा कंपनी को दिया बहुत बड़ा धोका... उनकी इस गद्दारी कि वीडियो हुई वायरल ..."
इस न्यूज़ के साथ एक वीडियो प्ले हो रहा था जिसमे जगदीशचंद्र और अमेरिका से आई हुई पार्टी के साथ जो मीटिंग हुई थी उसकी कुछ रेकॉर्डिंग्स जिसमे जगदीशचंद्र जी का खुद को अखिल मल्होत्रा बताना और फिर पार्टी के जाने के बाद जो बात हुई थी वो रेकॉर्डिंग्स प्ले हो रही थी..
" जगदीशचंद्र जिन्हें हम हमारे देश का भविष्य समझ रहे थे वो ही देश के भविष्य को अंधेरे में ले जा रहे थे... इस वीडियो के मुताबिक़ एम् एल ए अमेरिका से आईं इस मेडिसीन को दुगने दामों में कोरिया को बैचने वाले थे... इतना ही नहीं आज ही उनके घर सीबीआई कि रेड पड़ी है और वहा का नजारा आप को दिखाएंगे हमारे साथिदार हर्षद राणा...." उस रिपोर्टर ने इतना कहा और फिर टीवी पर हर्षद राणा लाईव आ गए जो अभी जगदीशचंद्र के घर के बाहर खड़े हुए थे...

" वन इंडिया न्यूज़ चैनल से में हूं हर्षद राणा और अभी मे एम् एल ए साहब के घर के बाहर खड़ा हूं ... और अभी अभी यह रिपोर्ट आई है कि सीबीआई को उनके घर से करोड़ों का काला धन , ड्रग्स , हेरोइन और कोकेन मिले है ... जिन्हे सीबीआई ने जप्त कर लिया है ...और अब खबर यह भी आ रही है कि एम् एल ए साहब के फार्म हाउस और उनकी फैक्टरी से भी सीबीआई को ड्रग्स और शराब मिली है ...."

मोहित ने दूसरी चैनल लगा दी...

" जगदीशचंद्र ... एम् एल ए या माफिया...? "
सब जगह जगदीशचंद्र के बारे में ही बताया जा रहा था... ये सब देखकर वहा मौजूद सब कि आंखो मे जगदीशचंद्र के लिए गुस्सा नजर आ रहा था... मोहित ने टीवी स्क्रीन ऑफ़ करदी...

" क्यों हिला डाला ना ...? " सौरभ ने कहा...

जगदीशचंद्र का पूरा राजनीतिक करियर खत्म हो गया था... उनका सच अब पूरी दुनिया के सामने आ गया था... ये सब देखकर उनकी आंखो मे खून उतर आया...

" बहुत गलत किया तुमने .... मेरी इतने सालो कि मेहनत तुमने मिट्टी मे मिलादी... तुम सब को छोडूंगा नहीं पर सब से पहले तुम्हे मारूंगा मे " जगदीशचंद्र ने अनिरूद्ध के सामने उंगली दिखाते हुए कहा...

" रस्सी जल गई पर बल नहीं गया..." सौरभ जगदीशचंद्र को सुनाई दे एसे बोला...

और ये सुनकर जगदीशचंद्र गुस्से से सौरभ को घूरने लगे...

" मारेंगे तो तब ना जब आप जेल से बाहर आएंगे और आप के कर्म देखकर लग तो नहीं रहा कि आप को ससुराल से मायके आने को भी मिलेगा..और अगर आप कभी बाहर आ भी गए तो आपको रोकने के लिए सामने मे खड़ा मिलूंगा " अनिरूद्ध भी उसकी तरफ गुस्से से देखता हुआ बोला...

" मुझे कोई रोक नहीं सकता समझे ..? और तू है कौन .. जो मुझे रोकेगा ? "

" मे कौन हूं ये आप जानते नहीं है इसीलिए आप यह कह रहे हैं ..."

" तू किस खेत कि मूली है जो इतनी अकड़ दिखा रहा है ..."

" मे वो हूं जो आज तुम्हारी बर्बादी कि वजह है ... मे वो हूं जिसकी वजह से तेरा सच आज पूरी दुनिया के सामने है ... मे वो हूं जिसकी फार्मा कंपनी का तुम इस्तेमाल करके देश को धोका देने के बारे में सोच रहे थे... मे ही हूं ओब्रॉय फार्मा इंडस्ट्री का ओनर अनिरुद्ध ओब्रॉय..." अनिरूद्ध गुस्से वाली नजरों से जगदीशचंद्र कि आंखो मे देखता हुआ जोर से बोला...

और जगदीशचंद्र ये सुनकर हैरान रह गए... उन्होंने कभी सपने मे भी नहीं सोचा था कि उन्होंने जिस अनिरूद्ध को मारने कि कोशिश कि थी वहीं इतनी बड़ी कंपनी का मालिक है ... और वैसा ही हाल बाकी सब का भी था... राजेश जी ... रागिनी जी मीरा.. बाकी सब परिवार के लोग सब अनिरूद्ध का सच जानकर शॉक्ड रह गए थे... संजना , किंजल सौरभ , मोहित सब के चहरे पर खुशी थी अनिरूद्ध की सच्चाई सब के सामने आने की ... आखिलजी , अनुराधा जी और दादी को बहुत ही गर्व महसूस हो रहा था ...

" तुम अनिरुद ओब्रॉय हो ...? " जगदीशचंद्र और एक बार कन्फर्म करना चाहते थे कि क्या उन्होंने जो सुना वो सच है या नहीं...

" आप ने बिल्कुल सही सुना ... मे ही अनिरूद्ध ओब्रॉय हूं... और आपको क्या लगा आपने हमे उस वक्त बेवकुब बनाया था ? नहीं ... बेवकूफ तो हमने आप को बनाया था ... एम् एल ए साहब ...! " अनिरूद्ध तीखी मुस्कुराहट के साथ बोला...

" कहना क्या चाहते हो तुम ? "

" वहीं जो आप समझ रहे है... और आप पूछेंगे नहीं कि यह सब कैसे हुआ ? "

पर जगदीशचंद्र ने कुछ जवाब नहीं दिया वो बस अनिरूद्ध को घूरने लगे...

" ये क्या पूछेंगे अनिरूद्ध... आप ही बता दीजिए ..." मोहित ने जगदीशचंद्र के उपर नजर घुमाते हुए कहा..

" मेरे ठीक होने के बाद मैंने आप सब पर नजर रखने के लिए अपने आदमी लगा दिए थे... उनमें से कोई आपका वेटर था, कोई सर्वेंट , और कोई ड्राईवर... आपने जब यह प्लान बनाया था हमे तब ही पता चल गया था कि आप यह सब प्लांनिंग कर रहे थे... पर हमारे पास सबूत नहीं था .. अब सारे डॉक्यूमेंट आप जिस कमरे में रखते है वहा तो कोई सर्वेंट जा नहीं सकता तो फिर हमने दूसरा रास्ता निकाला..." अनिरूद्ध ने इतना कहा और मोहित के सामने मुस्कुराते हुए देखा...

" और फिर में आपके घर आया.. आप से और हरदेव से बात करने वो भी अनिरूद्ध को ढूंढने के बारे में आपको तो याद ही होगा... उस वक्त तब आप बाहर काम से गए थे तो हमारा आदमी एसी रिपेयर करने के बहाने वहा आया और उसने थोड़ी देर तक सारे कैमरे बंध कर दिए.. फिर में आपके उस रूम में आया.. और आप के सारे डॉक्युमेंट्स कि तस्वीर ले ली अपने फोन मे .. पर मेरा काम अभी खत्म नहीं हुआ था और आप आने लगे इसलिए मैंने अनिरूद्ध को मेसेज किया और उसने आपके घर कि बिजली का फ्यूज़ निकाल दिया और लाईट चली गई.. आप वहा आए उससे पहले में सब सबूत लेकर बाहर आ गया और आगे तो आप जानते ही है ..." मोहित ने सब बताया...

" बहुत गलत किया तुमने मोहित... याद रखना मे यह सब भूलूंगा नहीं..."

" अरे ! अभी आपने मैन बात तो सुनी ही नहीं है .. वो भी तो सुन लीजिए..." अनिरूद्ध ने मुस्कुराते हुए कहा...

" कौन सी बात ? "

" वो आप को याद है उस सर्वेंट ने आप पर चाई गिरा दी थी... वो दरअसल उसने नहीं मैंने ही उससे गिरवाई थी उसे हल्का सा धक्का देकर... और उस चक्कर मै आपकी पेंन नीचे गिर गई थी... और मैंने उस पैन को ले लिया था.. जो आप कि लकी पैन थी... मैंने उस पैन कि जगह दूसरी सेम टू सेम कैमरा वाली पेन आपको लौटाई... जिसे आप हर वक्त साथ रखते है.. और उस मीटिंग में भी आप पेन साथ लेकर गए थे और ये वीडियो जो आप देख रहे थे वो उसी पेन के कैमरा से रेकॉर्ड किया हुआ वीडियो है..." मोहित ने अपनी बात पूरी करते हुए कहा...

" पर अनिरूद्ध तुमने यह वीडियो भेजा कब .. मतलब अभी तो हम सब साथ मे ही थे .." किंजल को समझ में नहीं आया था.. क्योंकि उनके प्लान के मुताबिक तो यह सब शादी के बाद करना था..और हरदेव के आने से उनका सारा प्लान उलट सुलट हो गया था...

" वो मेरा जो दोस्त है वो न्यूज़ चैनल का एडिटर है मैने पहले से ही सब सबूत और वीडियो उसे दे दिए थे और वो मेरे ही मेसेज कि राह मे था.. पहले हम ये सच शादी के बाद सबको बताने वाले थे पर एसा हुआ नहीं तो.. मैंने बीच मे ही उसे मेसेज कर दिया और उसने ये वीडियो और खबर न्यूज़ चैनल पर चला दिया... "
अनिरूद्ध के कहते ही जगदीशचंद्र से अब इंतेज़ार नहीं हुआ...

" ये सब तो ठीक है पर उस मेडीसीन का तुमने क्या किया... कहा है वो सारी मेडिसीन ? और जो हमारे पास मेडिसीन आई थी वो क्या था तो फिर ? " जगदीशचंद्र ने सवाल बरसा दिए थे...

" एम् एल ए साहब आप बहुत ही भोले है ... वो अस्ली मेडिसीन नहीं थी... और मेडिसीन क्या वो अमेरिका से जो पार्टी आई थी वो भी भी अस्ली नहीं थी.. दरअसल मेडिसीन इंडिया आई ही नहीं है ..." अनिरूद्ध मुस्कुराता हुआ बोला...

" इंडिया आई ही नहीं है का क्या मतलब ? "

" हमे पहले से ही आप के प्लान के बारे में पता था ... इसीलिए हमने आप तक यह खबर पहुचाई की मेडिसीन उस दिन इंडिया आने वाली है .. और वो अमेरिका से जो पार्टी आई थी वो भी अस्ली नहीं थी.. वो भी मेरे ही आदमी थे.. आपको वो अस्ली लगे ... आपने उनके साथ मीटिंग भी कि .. आपने उनको पैसे भी दिए पर उन्होंने जो मेडिसीन दी थी वो सिर्फ ग्लूकोज कि गोलियां थी.. और जो हमने आपको बताई थी वो अस्ली थी पर वो सैंपल में आई हुई मेडिसीन थी...अमेरिका से कोई पार्टी इंडिया आई ही नहीं थी ... समझे एम् एल ए साहब ..! "

" तो फिर मेरे पैसे का क्या ? "

" आपके पैसे उस मेडिसीन के लिए ही यूज होंगे...हम उस ट्रांसपोर्ट और दूसरे काम के लिए इस्तेमाल करेंगे पर हा वो काम जनता कि भलाई के ही होंगे ..." अनिरूद्ध ने कहा .. और सब अनिरूद्ध के लिए तालिया बजाने लगे...

जगदीशचंद्र और हरदेव सिर्फ घूरते ही रह गए..

" अगर मे चाहता तो पहले भी आपकी सच्चाई दुनिया को दिखा सकता था पर मैने आज का ही दिन चुना क्यो ? पता है आपको ? क्योंकि मे आपकी सच्चाई आप के पूरे परिवार के सामने लाना चाहता था.. जब आपके छोटे से छोटे रिश्तेदार भी साथ हो तब बताना चाहता था क्योंकि आप उनके चहेरे देख सके कि आप दोनो कि इस हरकत से उन पर क्या बीती है ..! वो आपके बारे में क्या सोच रहे है ...! ये सब आप देख सको ... "

ये सुनते ही जगदीशचंद्र और हरदेव अपने पूरे परिवार के सामने देखने लगे... और उन्हें उन सब कि आंखों में अपने लिए सिर्फ नफरत और शर्म नजर आ रही थी... उन दोनों ने अपना सिर जु़का लिया... पर अब भी अनिरूद्ध और संजना पर उनका गुस्सा वैसा ही था...

" चलिए..." इंस्पेक्टर ने उन दोनों को ले जाते हुए कहा...

" एक मिनिट इंस्पेक्टर साहब ..." जगदीशचंद्र ने उनको रोकते हुए कहा...

" हमे जेल भिजवा कर तुम यह मत समझना कि तुम जीत गए हो... तुम जानते नहीं हो की तुम्हारे दुश्मन हम एक नहीं है ... और तुम ये नहीं जानना चाहोगे कि सगाई वाले दिन तुम्हारी टाइट सिक्युरिटी के बाद भी हमारे आदमी वहा कैसे पहुंचे और तुम्हारे प्लान के बारे में हमे किसने बताया था ? "

ये सुनते ही अनिरूद्ध उन्हे एकटक देखने लगा...

" तुम्हारे ही घर से किसीने हमारी मदद कि थी और उसने ही हमे तुम्हारा प्लान फोन पर बताया था... घर में आग कोई अपना ही लगाता है इसीलिए पहले अपने घर कि आग बुजाओ और फिर बाहर कि बुजाना... समझे..." जगदीशचंद्र शैतानी नजर से गुस्से में घूरते हुए बोलकर वहा से चले गए...

अनिरूद्ध और बाकी सब यह सुनकर सोच मे पड गए..।

🥰 क्रमशः 🥰