हीरोइन - 7 Prabodh Kumar Govil द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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हीरोइन - 7

हिंदी फ़िल्म जगत का ये दस्तूर है कि यहां हर साल चाहे दर्जनों नए हीरो हीरोइन अपनी किस्मत आजमाने आते रहें,पर टॉप, यानी कि नंबर वन पोजीशन पर हमेशा कोई एक ही रहता या रहती है।
और दिलचस्प बात ये है कि जो भी हीरो या हीरोइन शिखर के एक नंबर पर हो, उसे न तो आसानी से वहां तक पहुंचने दिया जाता है और न ही वहां पहुंच कर चैन से बैठने दिया जाता है।
साठ का दशक बीतते बीतते ये तय हो गया था कि अब जल्दी ही कोई नई नायिका टॉप पर दिखाई देने वाली है क्योंकि पुरानी जमी हुई अभिनेत्रियां किसी न किसी कारण से इस रेस से बाहर हो रही थीं।
या तो वे शादी कर रही थीं, या जो शादीशुदा थीं, वो प्रसव पीड़ा झेल रही थीं। कुछ की उम्र हो जाने के कारण फ़िल्में असफल भी होने लगी थीं।
ऐसे में टॉप के नंबर वन के दावेदार के रूप में दो नाम तेज़ी से आगे बढ़े।
एक थीं हेमामालिनी, जो राजकपूर की फ़िल्म "सपनों का सौदागर" से रजत पट पर आई थीं, और स्वप्न सुंदरी के रूप में ही प्रचारित भी की जा रही थीं।
राजेश खन्ना के साथ अंदाज़, धर्मेन्द्र के साथ राजा जानी, शराफ़त, सीता और गीता व शोले जैसी फ़िल्में करते हुए तेज़ी से आगे बढ़ रही थीं।
दूसरी थीं मुमताज़, जो फ़िल्मों में थीं तो पहले से, मगर शेख मुख़्तार, दारा सिंह, फिरोज़ खान के साथ एक खास जोनर की फिल्में करते रहने के बाद अब मुख्य धारा की लोकप्रिय फ़िल्मों में अपनी धमाकेदार एंट्री हर नायक के साथ आकर दर्ज़ करवा रही थीं।
संजीवकुमार के साथ आई "खिलौना" फ़िल्म के दमदार रोल से मानो उनका चोला ही बदल गया। राजेश खन्ना के साथ दो रास्ते, दुश्मन, सच्चा झूठा,बंधन आदि ने उन्हें नंबर वन की रेस में हेमा मालिनी के समकक्ष ला खड़ा किया। उन्हें सहनायिका के रूप में कई बड़ी फ़िल्मों में चोटी की हीरोइनों के साथ काम करने का तजुर्बा भी था।
लेकिन जल्दी ही फैसला हो गया और "नंबर वन" की जगह हेमा मालिनी को मिल गई, क्योंकि उनकी मल्टी स्टारर फ़िल्म शोले अब तक के सभी रेकॉर्ड्स को ध्वस्त करते हुए मील का पत्थर साबित हुई।
इसमें कई बड़े सितारों के होते हुए जो फुटेज हेमा को मिला,उसने उन्हें नंबर गेम में आसानी से आगे निकाल दिया।
उस समय के तीनों सबसे बड़े नायकों के साथ उन्हें निरंतर अनुबंधित किया जाने लगा। राजेश खन्ना के साथ मेहबूबा, प्रेमनगर, अमिताभ के साथ नसीब, देशप्रेमी, जितेंद्र के साथ खुशबू,किनारा, और धर्मेन्द्र के साथ दर्जन भर फ़िल्मों ने उन्हें अपने साथ की नायिकाओं से बहुत आगे निकाल दिया।
यहां तक कि राजेन्द्र कुमार, मनोज कुमार से लेकर संजय खान और विनोद खन्ना और रणधीर कपूर तक उनके साथ फिल्मी जोड़ी बनाने लगे।
हेमा मालिनी की फिल्मी जोड़ी भी धर्मेन्द्र के साथ बनी, और जीवनसाथी के रूप में जीवन डोर भी धर्मेन्द्र के साथ ही बंधी।
जबकि मुमताज़ राजेश खन्ना के साथ बेहतरीन फिल्मी जोड़ी बनाने के बाद असली जीवन में मयूर माधवानी नामक गैर फिल्मी व्यवसाई के साथ घर बसा कर फ़िल्मों से रुखसत हुईं।
ये भी एक रिकॉर्ड ही कहा जाएगा कि राज कपूर के साथ आई हेमा मालिनी ने शम्मी कपूर, शशि कपूर, रणधीर कपूर और यहां तक कि ऋषि कपूर तक के साथ काम किया।
और इस तरह हेमा मालिनी आगे जाकर नरगिस, मधुबाला, मीना कुमारी, वैजयंती माला,साधना, शर्मिला टैगोर के साथ "नंबर वन" क्लब में शामिल हुईं!