अतीत के पन्ने - भाग 14 RACHNA ROY द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

अतीत के पन्ने - भाग 14

फिर दोनों बस स्टॉप पर उतर गए और आलेख को पिया ने कहा शाम को हवेली आती हूं।
आलेख ने कहा हां ठीक है पिया।
कुछ देर बाद ही पिया की गाड़ी भी आ गई। पिया गाड़ी में बैठते हुए बोली आलेख अब घर जाओ।
आलेख ने हाथ हिलाते हुए कहा हां ठीक है।
दोनों अपने अपने रास्ते चले गए।
आलेख हवेली पहुंच कर ही चिल्लाने लगा छोटी मां ओ छोटी मां देखो आज तुम्हारा सपना पूरा हुआ है।
छाया ने कहा अरे बाबू को क्या हुआ।
आलेख बेटा मैं शर्बत लाती हूं।
आलेख एक दम से चौंक गए और फिर बोला ओह छोटी मां आप तो नहीं हो कहीं काश आज आप होती तो मैं आपको गले से लगा लेता कहीं जाने नहीं देता।
तभी फोन की घंटी बजने लगीं।
आलेख ने फोन उठाया और उधर से आवाज आई बेटा कैसा रहा पहला दिन?
आलेख ने कहा ओह पापा आप! बहुत ही अच्छा रहा पापा।
आलोक ने पूछा अरे ये आवाज़ क्यों भारी सा है?
आलेख ने कहा हां बस कुछ याद आ गया पापा।
आलोक ने कहा देखो बेटा मैं समझ सकता हूं पर तुम्हें समय के साथ चलना होगा।
आलेख ने कहा हां ठीक है मैं रखता हूं।
फोन का रिसीवर रख कर आलेख आगे बढ़ा तो देखा दिवाल पर टंगे हुए उस तस्वीर पर जैसे आंसूओं की धारा बह रही हो।।
आलेख दौड़ कर गया और फिर बोला नहीं, नहीं ऐसा नहीं हो सकता छोटी मां रो नहीं सकती । आलेख भी रोने लगा।
तभी छाया ने कहा अरे बाबा ये खुशी के आंसु भी हो सकते हैं ना।।
आलेख ने अपने आंसुओं को पोंछने लगा और वो बैठ गया।
छाया ने कहा ये लिजिए शर्बत पी कर फेंक होकर आइए मैं खाना लगाती हूं।
फिर शर्बत पीने के बाद आलेख ऊपर बेडरूम में चला गया। और उसे एक आभास हुआ जैसे कोई उसके कमरे में था।
आलेख ने कहा वही जास्मिन तेल की खुशबू जो छोटी मां लगाया करती थी।
और मैं हमेशा छुपा देता था।
आलेख ने पुकारा छाया जी ऊपर आइए।
छाया ने कहा हां आती हूं।
छाया ऊपर आ गई और फिर बोली क्या हुआ?
आलेख ने पूछा अरे वो छोटी मां का तेल कहां है?
छाया ने कहा अरे उनके कमरे में होगा।
आलेख ने कहा क्या आपको भी तेल की खुशबू आ रही है?
छाया ने कहा हां आ रही है पर कैसे?
आलेख ने कहा कुछ नहीं।।
फिर आलेख बाथरूम में चला गया।
और उनकी आलमारी में से वही डायरी निकल लिया।
और फिर वही बैठ गया।
डायरी के पन्ने पलटते हुए कहा कि छोटी मां मुझे आपके सारे सपने पूरे करने है।
आगे लिखा था कि मेरा बाबू मुझे कभी मां कह कर नहीं बुलाएगा। हमेशा से छोटी मां ही बोलेगा। वैसे भी उसकी क्या गलती है मैंने ही तो उसे ये सिखाया था कि छोटी मां बोले।
आलेख इतना पढ़ते ही रोने लगा और फिर बोला अरे एक बार तो कहा होता मां मैं तो जन्म के बाद से ही स्वयं ही तुम्हें अपनी मां बना चुका था। किस्मत का खेल देखो।आज वो नहीं है जिसको सुनने के लिए कान तरस गए थे।
ओह इतना बड़ा पाप हो गया तुमसे तुम्हारा ख्याल तो किसी को ना था,पर तुम्हें सबका ख्याल था कैसे करती थी तुम मां।

आज के बाद मेरे मुंह से तुम्हारे लिए मां ही निकलेगा।
बचपन में कभी कभी मैं तुम्हें मां कह देता था पर मुझे रोक दिया करती थी।
ऐसे क्यों किया तुमने।
भगवान से प्रार्थना करता हूं कि मेरा अगला जन्म तुम्हारे कोख में हो, मुझे और कोई नहीं चाहीए।

इस तरह से आलेख वहीं पर लेट गया।
तन्द्रा टुटी तो देखा कि शाम हो चुकी थी।
तभी छाया आकर बोली भैया पिया आ गई है।
आलेख ने कहा हां,हां उसको बैठाओ मैं आता हूं।
फिर आलेख उठकर अपने कमरे में जाकर तैयार हो कर सारी किताबें लेकर बैठक में पहुंच गए।
देखा तो पिया बैठी थी।
आलेख ने कहा शुभ संध्या।।
पिया ने हंसते हुए कहा हां तुम्हें भी।
आलेख ने किताबें टेबल पर रख दिया।
फिर छाया चाय और समोसे लेकर आ गई।
पिया ने कहा हां आज मुझे पापा ने बताया कि तुम्हें बेसन का लड्डू बहुत पसंद हैं। छोटी मां बनाती थी तुम्हारे लिए।
आलेख ने कहा हां पर तुम्हें।
पिया बैग में से एक टिफिन बॉक्स निकाल कर आलेख के हाथों में दे दिया और फिर बोली खाकर देखो।
आलेख ने कहा हां ज़रूर। जैसा आलेख को किसी ने कहा खा ले बेटा।।
आलेख ने डिब्बे में से एक लड्डू उठा कर मुंह में डाल दिया और फिर वही स्वाद जैसे कि छोटी मां ने बनाया हो।

आलेख ने खाते हुए कहा बहुत ही अच्छा बना है।।
पिया ने कहा हां, इसलिए तुम्हारे लिए ले कर आई।
फिर नाश्ता और चाय पीने के बाद ये दोनों ही मेडिकल की पढ़ाई में मग्न हो गए।।
पिया को बहुत ही अच्छे से आलेख ने विज्ञान समझा दिया।

आलेख ने कहाडॉक्टर बनने के लिए विद्यार्थियों को साइंस स्ट्रीम में PCB यानी कि physics, chemistry और biology लेना चाहिए, बल्कि ये subjects चुनना एक डॉक्टर बनने के लिए अनिवार्य होता है। एक डॉक्टर बनने के लिए विद्यार्थी को पीसीबी यानी कि फिजिक्स केमिस्ट्री और बायोलॉजी चुनना जरूरी होता
है।


पिया ने कहा कितना अच्छा बोलते हो मुझे सब समझ आ गया।
फिर दोनों अपनी अपनी किताबों में पढ़ने लगे।
देखते देखते आठ बज गई थी।
कुछ देर बाद ही पिया की गाड़ी आ गई।
पिया ने कहा अब मुझे जाना होगा कल बस स्टैंड पर इन्तजार करूंगी।
आलेख ने कहा हां कैसे समय निकल गया पता नहीं चल पाया।
फिर पिया चली गई और आलेख वहीं पर बैठ कर पढ़ने लगा।
काफी देर तक पढ़ता रहा और उसके बाद छाया ने कहा कि बाबू ख़ाना खा लो।
क्रमशः

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Ghanshyam Patel

Ghanshyam Patel 4 महीना पहले

Suresh

Suresh 3 महीना पहले

Darshita Babubhai Shah

Darshita Babubhai Shah मातृभारती सत्यापित 3 महीना पहले

Deboshree Majumdar

Deboshree Majumdar 4 महीना पहले