धारा - 22 Jyoti Prajapati द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

धारा - 22

धारा हैरान सी ध्रुव को देख रही थी और ध्रुव एक स्माइल देकर आगे बढ़ गया ! धारा को समझ ही नही आया ध्रुव का इतनी आसानी से माफ कर देना !!

ध्रुव को जाता देख, धारा आवाज़ लगाते हुए उसके पीछे भागी..." हेलो-हेलो !! रुको तो दो मिनट !!" पर ध्रुव बाहर निकल गया! 
"अजीब अकड़ू इंसान है !! माफी मांग रही हूँ तो भाव खा रहा है !!" धारा खुद से बड़बड़ाई।

"ओह हेलो सुनो तो.....!! ध्रुव जस्ट लिसन..!!" चिल्लाते हुए धारा उसके पीछे भागी !!

ध्रुव धारा से बचते हुए दूसरी दुकान में पहुंच गया ! वो धारा से भाव नही खा रहा था, मगर लड़कियों से कैसे बात की जाए इसका उसे कोई ज्ञान नही था ! विशेषकर धारा जैसी  चंट लड़कियों से ! उसपर धारा की तो ज़ुबान ही गाली देने से खुलती थी।

धारा ध्रुव के पीछे दूसरी दुकान में पहुँच गयी और मिताली उसे यहां वहां ढूंढ रही थी ! पीछे से अश्विन ने आवाज़ लगाकर कहा, " जिसे आप ढूंढ रही है ना...वो आपको यहां नही मिलने वाली !"

"मतलब..??" मिताली ने हैरानी से पूछा।

"अरे मतलब मैंने आपकी फ्रेंड को ध्रुव के पीछे जाते देखा !! वो सामने वाली स्टोर में !!" अश्विन ने इशारा करके बताया।

मिताली अपना सिर पीटकर, " हे प्रभु! ये लड़की ध्रुव को ओर गुस्सा ना दिला दे !!"

अश्विन,  " डोंट वरि ! मेरे दोस्त बहुत समझदार है !! वो जल्दी गुस्सा नही होता ! वो आपकी फ्रेंड से इसलिए भाग रहा है क्योंकि लड़कियों से बात करने में घबराता है वो थोड़ा !!"

मिताली नाखून चबाकर, " हम्म....लड़की अगर धारा के जैसी हो तो अच्छे अच्छे लड़के भी घबराएं !!"

अश्विन, "क्या..?? क्या कहा आपने ...?"

मिताली, " ना...नही, कुछ भी तो नही !!"


"बाय द वे... हाय.. अम अश्विन !!" अश्विन ने मिताली को अपना परिचय देते हुए कहा।

"हेलो !! माय सेल्फ मिताली !!" मिताली ने भी अपना परिचय दिया और धारा का परिचय देते हुए बोली, " और वो जो ध्रुव के पीछे गयी है वो धारा..मेरी सहेली !!"

"धारा.... नाइस नेम !!" अश्विन मुस्कुराते हुए बोला।

"वैसे सॉरी हां .. उस दिन मेरी फ्रेंड कुछ ज्यादा ही बोल गयी थी!! थोड़ी डिप्रेस्ड थी, तो सारा गुबार ध्रुव पर निकल गया !! बाकी वो दिल की बहुत साफ है...बस ज़ुबान थोड़ी कड़वी हो गयी अकेले रहते रहते !!" मिताली ने धारा की साइड लेते हुए सफाई दी।

अश्विन, "इट्स ओके ! समझ सकता हूँ !! वैसे भी अकेली लड़की को हर तरह के लोगो से निबटना होता है !! पर एक बात तो है....आपकी फ्रेंड है बहुत मजबूत !!"

"हां.. वो तो है !! अच्छे अच्छो को पसीना ला देती है वो !!" मिताली ने हंसते हुए अश्विन की बात का समर्थन किया।



जैसे विक्रम की पीठ पर वेताल होता है बिल्कुल वैसे ही धारा ध्रुव के पीछे पड़ गयी थी ! बस वेताल विक्रम की पीठ पर लदा हुआ था और धारा ध्रुव के आगे पीछे मंडरा रही थी।
और ध्रुव कभी घबराकर तो कभी झुंझलाकर उससे भाग रहा था ! पर आखिर भागता भी कब तक ?? 

जब बहुत देर हो गयी और ध्रुव नही माना तो धारा ने अपना शराफत का चोला उतारा और ओरिजनल टोन में बोली, "ओय.. समझता क्या है अपने आप को..?? मैं यहां इतनी देर से आगे पीछे घूम रही हूँ, माफी मांग रही हूँ कोई कदर ही नही है साहब को..!! बस लगे हुए हैं अपनी ही धुन में !!"

ध्रुव भौंचक्का रह गया ! मुंह खोले धारा की बात सुन जा रहा था वो !! अचानक से धारा का ये परिवर्तन हैरान कर देने वाला था उसके लिए !!

धारा ने ध्रुव के सामने  चुटकी बजाते हुए कहा, " कहां खो गए...?? कुछ बोल रही हूँ मैं इतनी देर से !!"

ध्रुव, " कुछ....?? कुछ नही बहुत कुछ !!"

धारा , " हां तो तुम जवाब ही नही दे रहे तो क्या करूँ मैं फिर..??"

ध्रुव, " देखिए... मैंने आपसे सॉरी कहा, आपने माफ कर दिया फिर आपने सॉरी कहा मैने माफ कर दिया ! हिसाब बराबर !! अब जब कोई इश्यू नही है तो फिर क्या बात करना...??"

धारा, " अरे बात क्यों नही करना..?? मैंने इतना कुछ सुना दिया उस दिन आपको..!! फिर भी आप बिना मुझे उल्टा जवाब दिए चले गए !! मैंने कितने दिन वैट किया आपका सॉरी बोलने के लिए !!"

ध्रुव बुक शेल्फ में बुक्स देखते हुए, " अब सॉरी बोल दिया ना... फिर क्यों इतना टेंशन ले रही हैं !!"

धारा, " हाँ बोल तो दिया....वो क्या है ना... तुमसे पहले भी मैं कितने लोगों से भीड़ चुकी हूँ ! पर कभी किसी ओर के साथ किये पर इतनी गिल्टी फील नही हुआ !!"

ध्रुव के हाथ वहीं रुक गए ! उसने धारा को देखा ! धारा उसकी नज़रो को भांपते हुए , " अरे मेरे मतलब.. सबसे एक बार ही झगड़ा होता था ! दोबारा उनलोगों से मुलाकात हुई ही नही और हमेशा झगड़े की शुरुआत दूसरों ने की ! पर तुमसे झगड़े की शुरुआत मैंने की ना...तो ! ज्यादा बुरा लगा।"

"अगर इतना ही बुरा लगा तो तुम एक छोटी सी सॉरी ट्रीट देकर अपना गिल्ट कम कर लो !!" उन दोनों के पास आते हुए अश्विन ने कहा , जिसके साथ मिताली भी थी। मिताली ने धारा को गुस्से देखा ! धारा ने उसे इशारो में सॉरी कहा।
आखिर मिताली धारा के साथ आई थी पर ध्रुव के चक्कर मे धारा उसे अकेले छोड़कर ध्रुव के पास चली आई !!

मिताली ने धारा से अपना ध्यान हटाकर, ध्रुव की ओर अपना हाथ बढ़ाते हुए कहा , " हेलो ! माइसेल्फ.. मिताली !!"

ध्रुव ने मिताली से हाथ मिलाते हुए अपना परिचय दिया ! मिताली के साथ ही धारा ने भी अपना हाथ आगे बढ़ा दिया," और मेरा नाम धारा है !"

धारा से हाथ मिलाने में जाने क्यों ध्रुव सकुचा रहा था !! वो कुछ देर धारा के हाथ को ही देखता रहा ! ध्रुव की ओर से रिस्पांस ना मिलने पर धारा को अच्छा नही लगा ! जब ध्रुव ने हाथ नही मिलाया तो धारा ने अपना हाथ वापस पीछे ले लिया।
धारा का उदास चेहरा ध्रुव को बिल्कुल पसंद नही आया ! धारा ने जैसे ही हाथ पीछे खींचा, ध्रुव ने तुरंत उसके हाथ को थामते हुए, " हाय आयम ध्रुव !!"

धारक चेहरे पर एक लंबी सी मुस्कान आ गयी ! और धारा को मुस्कुराते देख ध्रुव के होंठ अपने आप ही खिल उठे ! जिसका भान उसे भी नही था ! मगर मिताली बड़ा गौर कर रही थी दोनो पर।

कुछ समय ध्रुव और धारा यूँ ही एक दूसरे का हाथ पकड़े एकदूजे को ताकते रहे !! मिताली झूठ का खांसी हुए,  "उहु.. उहु...क्या हो रहा है..?? चलना नही है सॉरी ट्रीट के लिए..??"

धारा और ध्रुव झेंप गए और हड़बड़ाकर हाथ छोड़ कर इधर उधर देखने लगें !!  बात आगे न बढ़ जाये इसलिए धारा ने कहा, " हाँ चलो ना ! फिर हमें समय से होस्टल भी तो पहुंचना है !!" और जल्दी से बाहर निकल गयी !!

चारो ने मिलकर थोड़ी ही देर में एक दूसरे से अच्छी जान पहचान कर ली थी ! सब खूब बोल रहे थे, सिवाय ध्रुव के !! ध्रुव का स्वभाव ही कम बोलने वाला था ! पर अश्विन उसके उलट बहुत ज्यादा बोलने वाला ! ध्रुव अधिकतर समय शांत ही रहा और खामोशी के साथ तीनो की पागलपंती बर्दाश्त करता रहा !! 
धारा ने पेमेंट किया और एकदूसरे से विदा लेकर अपने अपने होस्टल पहुंच गए!!



होस्टल पहुंचते ही धारा पलंग पर फैल गयी और सुकून की सांस ली !! उसे इतना रिलैक्स देख मिताली ने पूछा , " क्या बात है.....कल तक तो जीना दुश्वार कर रखा था ! आज अचानक से इतनी रौनक कैसे आ गई शक्ल पर ?? क्या हुआ बता..??"


धारा, " पता नही यार मीतू !! पर जब से ध्रुव से माफी मांगी है ना... दिल को बड़ा सुकून मिला है !! ऐसे लग रहा है जैसे बहुत भारी बोझ हट गया हो !!"

मिताली,"बाबा रे..... धारा पहली बार तुझे मैं किसी के लिए इतना तड़पते देख रही हूँ !!"

धारा, " मुझे तड़पता देख रही मतलब !! मैं कोई तड़प-वडप नही रही थी समझी !!"

मिताली, " हां-हां समझ गयी !! चल अब पढ़ाई कर ले !!"




धीरे-धीरे चारो की दोस्ती का रंग चढ़ना शुरू हो चुका था ! मिलना...घूमना-फिरना , मस्ती करना नियम बन गया था जैसे चारो के लिए। चारो में अगर कोई सबसे ज्यादा समझदार और गम्भीर था तो वो था ध्रुव !! 
धारा ने बहुत कोशिश की ध्रुव को अपने जैसे बातूनी बनाने की पर ध्रुव को कोई असर ही नही हुआ।




एक दिन धारा अकेली ही कॉलेज से वापस लौट रही थी। ध्रुव ने उसे अकेले देखा तो मिताली के बारे में पूछा, " आज अकेले आ रही हो...?? मिताली कहाँ है ..??"

धारा ने कोई जवाब नही दिया बल्कि और जल्दी जल्दी कदम बढ़ाने लगी। ध्रुव को धारा का ये बर्ताव बिल्कुल समझ नही आया ! मगर वो इतना जरूर समझ गया कि धारा किसी उलझन में है ! और एक दोस्त होने के नाते धारा को ऐसे समय मे अकेले छोड़ना उसने बिल्कुल उचित नही समझा और बिना उसे आवाज़ दिए चुपचाप उसके पीछे चलने लगा !!

थोड़ी दूर जाने पर धारा ने एक ऑटो रुकवाया !! धारा जैसे ही उस ऑटो में बैठी, ध्रुव भी भागकर उसमे बैठ गया! धारा ने ध्रुव को देखा और वापस बाहर जाने लगी। मगर ध्रुव ने उसका हाथ पकड़ लिया।

ऑटो वाले ने मुड़कर पूछा , " भैया किधर...??"

ध्रुव, "गौरीघाट !!"

धारा, "ग्वारीघाट है !!" 

ध्रुव, " हां.... एक ही मतलब है ! चलिए भैया !!"


रास्ते में ही ध्रुव ने मिताली और अश्विन को मैसेज कर के अपने और धारा के साथ होने की सूचना दे दी थी !! 
शाम हो चुकी थी ! घाट पर बैठे बैठे धारा को लगभग आधे घण्टे बीत चुके थे !
ध्रुव कभी घाट की सीढ़ियों पर बैठ जाता तो कभी उठकर इधर उधर टहलने लगता !! पर धारा से कुछ भी नही बोला। वो इंतज़ार कर रहा था धारा अपने आप को शांत करने के बाद खुद ही उससे बात करे, उसे बताए !! और हुआ भी वही।

धारा को जब थोड़ा हल्का महसूस हुआ, उसने ध्रुव से कहा, "थैंक्स !!"

ध्रुव, " किसलिए..??"

धारा, " तुम अच्छे से जानते हो किसलिए !!"

ध्रुव, " बताओगी क्या हुआ..??"

धारा, " ऐसा क्यों होता है कि...मतलब लोगो को ऐसा क्यों लगता है कि, अगर कोई लड़की अकेली है उसके साथ कोई नही है तो वो जो चाहे वो मर्ज़ी हो कर सकती है ! कोई उससे कुछ नही कहेगा ! उसे रोकेगा टोकेगा नही !!"

ध्रुव को धारा की बातों को मतलब समझ नही आया ! उसने पूछा, "मतलब..??" 


धारा, "मतलब ये की...मैं एक अनाथ हूँ ! कोई नही है मेरा जो मुझसे सवाल जवाब करे, जब मैं देर से घर पहुँचूँ ..खाना खाया या नही ! कहाँ जा रही हूँ..? किसके साथ जा रही हूँ..? क्या कर रही हूँ..?? ऐसे सवाल पूछने वाला मेरा अपना कोई नही है !! इसलिये लोग मेरे पास ऑफर लेकर आते है...कमाई करने के !!"


ध्रुव को धारा की कही बातों का कुछ कुछ मतलब तो समझ आ रहा था ! पर उसने दोबारा प्रश्न नही किया ! बस धारा को ही देखता रहा इस उम्मीद में कई वो ही कुछ कहे। और धारा ने निराश भी नही किया उसे.... एक दोस्त मानकर अपने दिल की सारी बातों की परतें ध्रुव के सामने खोलने लगी ।

"हमे किसी शहर से पुलिस वालो ने रेस्क्यू किया था !! कई सारी लड़कियों को उनके पैरेंट्स ने एक्सेप्ट कर लिया ! मगर मेरे माँ बाप ने मुझे पहचानने से भी इंकार कर दिया !!"

ध्रुव को झटका लगा धारा की बात सुनकर ! धारा नदी की तरंगों को देखते हुए बोली, " मेरे मम्मी पापा को समाज और रिश्तेदारों की बड़ी चिंता थी कि वो लोग क्या कहेंगे...?? मुझे लेकर तरह तरह की बातें बनाई जाएगी ! लोग मेरे कारण उनसे दूरी ना बना ले !
क्या पता भविष्य में मेरी शादी हो न हो किसी अच्छे घर मे.!! मेरी वजह से घर के बाकी लोगो को कोई तकलीफ ना हो जाये ये सोचकर उन्होंने साफ इंकार कद दिया मुझे पहचानने से !!"

ध्रुव, " फिर...?"

धारा , "फिर..... फिर जिस पोलिसवाले ने हमे बचाया था वे हमें अपने साथ ले आये !!"

ध्रुव, " हमे मतलब..?? ओर भी कोई थी साथ मे..?"

धारा, " हाँ... दिव्या !! वो सचमे अनाथ थी ! एक अनाथालय से लेकर आये थे उसे !! "

ध्रुव, " ओह!!"


धारा, " अंकल ने हमे हमारी रुचि के अनुसार उसी क्षेत्र की पढ़ाई के लिए होस्टल में दाखिल करवाया दिया !! दिव्या को पुलिस सर्विस में जाना था.... पर धीरे धीरे आईएएस में रुचि होने से वो आईपीएस से आईएएस की लाइन में आ गयी ! और मैं मेडिकल में !!"


ध्रुव, " तुम अपने घरवालो की याद नही आती...??"

धारा, " ऐसा हो सकता है क्या...?? जब भी किसी बच्चे को उसके पापा मम्मी के साथ देखती हूँ...तो मुझे याद आते हैं वो  !!पर क्या कर सकते हैं ..??"


ध्रुव , "आज भी उन्ही की याद आ रही थी, इसलिए रोते हुए जा रही थी बिल्कुल ...??"

"हमारे कॉलेज के प्रोफेसर को मेरे साथ सिर्फ एक बार फीजिकल रिलेशनशिप बनानी है !!" धारा ने एकदम बेबाकी से कह दिया। ध्रुव स्तब्ध रह गया सुनकर !! उसे विश्वास ही नही हो रहा था कि धारा इतनी पर्सनल बात ऐसे बेझिझक उससे कह देगी।

धारा ने एक नज़र ध्रुव को देखा और बोलना आरम्भ किया, " पिछली बार भी उन्होंने मेरे मार्क्स काट लिए तय एग्जाम में और मेरी प्रैक्टिकल फ़ाइल को गायब कर दिया था इसी चक्कर मे !! क्योंकि मैंने उनकी बात नही मानी थी ! लेकिन इस बार उनका दवाब बढ़ता ही जा रहा है ! कॉलेज के साथ ही होस्टल में भी वे अब दखल देने लगे हैं !! हर रोज़ नए नए तरीके ढूंढकर लाते हैं मुझे टॉर्चर करने के लिए !!"

ध्रुव धारा के हर शब्द को बड़े गौर से सुन रहा था और धारा के चहरे पर आने जाने वाले भावों को देख रहा था ! दुख से ज्यादा तो नफरत झलक रही थी धारा की बातों में ..!! अगर ऐसा किसी ओर लडक़ी के साथ हो तो शायद वो अपने कदम पीछे खींच ले या फिर गलत कदम उठा ले मगर धारा अब तक इन सबसे बखूबी बचते हुए आ रही थी..!!! मगर अब उसकी भी हिम्मत जवाब देने लगी थी !!


धारा फिर से खामोश हो गयी ! एक बार फिर से गहरी खामोशी पसर गयी दोनो के बीच। मगर इस बार की ये खामोशी ध्रुव को अखर रही थी !! समझ नही पा रहा था वो क्यों हो रहा है ऐसा..?? पर धारा का यूँ चुप रहना...ध्रुव को चुभ रहा था !
अबतक तो ध्रुव धारा की बातों से भागता था...पर आज उसे धारा का ना बोलना खटक रहा था !!  धारा अपनी जगह से उठ खड़ी हुई। साथ ही ध्रुव भी खड़ा हो गया ! शाम गहराने के साथ ही लोगो का आना जाना भी बढ़ने लगा था ! लोग दीपदान करने आने लगे थे।

धारा ने कहा, " धारा ने कहा, " चलना चाहिए ना...!!मिताली परेशान हो रही होगी मेरे लिए !!"

ध्रुव, " नही होगी..!! मैंने मैसेज कर दिया था उसको !!"


धारा ने एक फीकी सी मुस्कान बिखेर दी। ध्रुव ने उससे पूछा, " अब आगे क्या करोगी तुम..?? उस प्रोफेसर के साथ...??"


धारा , " सोचती तो बहुत कुछ हूँ ! पर उस प्रोफेसर का दिमाग बहुत तेज़ है !! पहले ही समझ जाता है वो के हम क्या करने वाले हैं !!"

ध्रुव, " आज उसकी इसी बात से तुम इतनी विचलित थी..??"

धारा, " नही.... इस बात से विचलित होना होता तो कभी की हो जाती ! अब तो आदत हो चुकी है !! परेशान तो मैं इसलिए हूँ... हमारी एक सीनियर प्रेग्नेंट थी और उन्होंने सुसाइड कर लिया !! और उसका कारण....


"प्रोफेसर...??" ध्रुव धारा की बात बीच मे काटते हुए बोला 

धारा ,  " हां प्रोफेसर !! वो प्रोफेसर वीडियो क्लिप्स बनाकर रखता है अपने पास ! लड़कियों को ब्लैकमेल करने के लिए !!"


ध्रुव, " तो तुम अपने अंकल से क्यों नही कहती कुछ !! वो पुलिस में हैं ना....करेंगे कुछ न कुछ !!"

धारा, "अरे इस प्रोफेसर की पहुच बहुत ऊपर तक है ! मंत्री सन्त्रियो को तो जेब मे लेकर घूमता है और कानून तो जैसे मुठ्ठी में है उसकी !!  कोई कुछ नही करता उसके खिलाफ...सब डरते हैं !!"


ध्रुव, " और तुम...??"


"डरे मेंरी जुत्ति.....! डरना होता तो आज उसके बिस्तर पर होती मैं !!" धारा की बात ध्रुव को बिल्कुल अच्छी नही लगी।
उसने धारा की कलाई पकड़ी और उसे अपनी ओर खींचकर सीने से लगा लिया।
धारा के हाथ पैर एकदम ठंडे पड़ गए ध्रुव की इस हरकत से ! पर साथ ही एक अनचाहा से सुकून भी महसूस हुआ उसे..! ध्रुव को अपनी बेवकूफी समझ आई और कुछ बहाना सोचते हुए बोला, " वो...तुम..तुम दोस्त हो ना ! तुम्हारे साथ गलत हो, बर्दाश्त नही कर सकता !"


ध्रुव की हड़बड़ाहट धारा के चेहरे पर मुस्कुराहट की वजह बन गयी ! दोनो ने कुछ समय टहलकर बात करते हुए बिताया ! फिर ध्रुव धारा को उसके होस्टल छोड़ते हुए अपने होस्टल निकल गया !!





जारी...........

(JP)


रेट व् टिपण्णी करें

सबसे पहले टिपण्णी लिखें