धारा - 1 Jyoti Prajapati द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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धारा - 1

धारा (भाग-1)


शहर का सिटी हॉस्पिटल..! जहां छह महीने पहले सीबीआई इंस्पेक्टर देव को लाया गया था.!हालांकि ये बात कोई नही जानता था कि वो एक सीबीआई इंस्पेक्टर है.!!
डॉक्टर धारा, जो किसी काम के सिलसिले में उस हॉस्पिटल गयी हुई थी उन्होंने ही देव की पहचान की !! और उसे अपने साथ अपने शहर के हॉस्पिटल लेकर आई..!! धारा, देव के बचपन की दोस्त थी..!!

धारा जानती थी कि देव की जान को हमेशा ही खतरा रहा है.!! लेकिन फिर भी वो हमेशा लापरवाह रहा ! कहता था,"मौत तो एक दिन सबको आनी ही है ! क्यों बेकार में रात दिन चिंता कर घुट-घुट के मरना !!"

जब धारा देव को अपने साथ लेकर आई तब भी उसने किसी को ये बात नही बताई की देव सीबीआई इंस्पेक्टर है। उसे डर था कि कहीं ये बात उस व्यक्ति को पता चल गई कि देव ज़िंदा है तो वो फिर से उसे मारने की कोशिश करेगा !! इसलिए सबसे उसने यही कहा कि देव उसका दोस्त है !!!

देव के लिए धारा ने हॉस्पिटल का एक प्राइवेट रूम ले लिया था !! जिसमे जाने की परमिशन किसी को नही थी !! सिर्फ एक सीनियर डॉक्टर के अलावा!!

डॉक्टर ने कहा था,"अगर इनसे बातें करते रहें..! इनके आसपास का वातावरण खुशनुमा होगा तो इनकी सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा !!"

तबसे ही धारा ने नियम बना लिया था रोज़ सुबह-दोपहर को आधा घंटा देव के वार्ड में ही बिताना और रात को डिनर भी देव के रूम में ही करना..!!

आज भी धारा हॉस्पिटल के उसी वार्ड में देव का हाथ अपने हाथ मे लेकर उससे बातें कर रही थी !!
"ओये चिंपांजी !! उठ जा ना ..!!कब तक इस तरह बेड पर पड़ा रहेगा यार..?? तेरी आवाज़ सुने कितना समय हो गया..!!उठ जा ना प्लीज़..!!!" हताश स्वर में धारा ने कहा।

डॉक्टर ने उसे दिलासा देते हुए कहा,"डॉक्टर धारा...! ईश्वर पर विश्वास बनाये रखिये इन्हें कुछ नही होगा..!!! पहले से काफी इम्प्रूवमेंट हुई है इनकी बॉडी में..!!! बस कुछ समय की ओर बात है। तब तक धैर्य रखना होगा आपको..!!"

धारा :: "लेकिन डॉक्टर, पिछले छह महीने से मुझे तो कोई इंप्रूवमेंट नज़र नही आया !!"

डॉक्टर :: "आपको नज़र नही आया !लेकिन हमें तो आ रहा है ना !! पिछले कुछ डेज से तो इनकी फिंगर में भी मूवमेंट हो रही है। आप जो भी कहती है वो सब इन्हें सुनाई देता है ! बस कुछ दिनों की बात है फिर ये आपकी हर बात का स्वयं ही जवाब भी देने लगेंगे..!!!"

धारा :: "लेकिन डॉक्टर, आपने तो कहा था कि कोमा से आने के बाद इसे शायद ही कुछ याद रहे..???"

डॉक्टर :: "हाँ कहा था !! फिफ्टी-फिफ्टी परसेंट चांसेस है..!! इन्हें सब याद आ भी सकता है और इनकी याददाश्त जा भी सकती है..!! क्यों चोंट इनके सिर के उस हिस्से में लगी है जहां पर किसी इंसान की मेमोरी स्टोर होती है। दिमाग के उस हिस्से में चोंट लगने के बाद भी व्यक्ति को सबकुछ याद रह जाता है !! और जबतक इन्हें होंश नही आ जाता हम कुछ नही कह सकते..!!"

धारा देव का चेहरा देखने लगी और डॉक्टर धारा का..!!!
डॉक्टर ने उससे कहा,"वैसे डॉक्टर धारा, बुरा ना माने तो एक प्रश्न कर सकता हूँ आपसे..?? एक डॉक्टर नही बड़े भाई के रूप में.!!"

"डॉक्टर धीरज..!! मैंने आपको हमेशा ही अपना आदर्श माना है, अपना बड़ा भाई माना है ! आप जो चाहे खुल के कह सकते हैं..!! इसमें परमिशन लेने की कोई जरूरत नही!जहाँ तक मुझे अंदाज़ा है, मैं जानती हूँ आप क्या पूछना चाहते है..??"

डॉक्टर ने कहा," तो बता दीजिए !!" धारा ने अपनी दोनो हथेलियों के बीच देव का हाथ लेकर कहना शुरू किया,"आप यही जानना चाहते हैं ना, मेरा और देव का क्या रिलेशन है..??"

डॉक्टर ने हाँ में सिर हिलाया।

"मैं और देव बचपन के दोस्त हैं !! देव और मैं दोनो ही डॉक्टर बनना चाहते थे ! लेकिन देव की किस्मत में कुछ और ही लिखा था..!! देव के पापा पुलिस लाइन में थे ! एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति !! पर उनकी ईमानदारी किसी को पसंद नही आई! कुछ नेताओं के काले कारनामे उजागर करवाये थे उन्होंने ! इसी खुन्नस में देव के पिताजी का मर्डर करवा दिया गया था !! देव की माँ सदमे में चल बसी !! एक झटके में ही पूरी दुनिया उजड़ गयी देव की !! उसके बाद ये यहां से बहुत दूर हिमाचलप्रदेश चला गया था! एकांत में, जहां इसे जानने वाला कोई भी ना हो..!!
और मैं एक अनाथ लड़की ! देव के पिताजी ने ही मुझे बचाया था बचपन मे.!! जब कुछ लोग मुझे बेचने के लिए लेकर जा रहे थे.!! उन्होंने ही मुझे पढ़ाया-लिखाया। डॉक्टर बनने के लिए जबलपुर भेजा !! आज मैं जो कुछ भी हूँ आपके सामने वो सब सिर्फ देव के पिताजी की वजह से !! तब उन्होंने मुझे बचाकर, मुझपर जो एहसान किया वो तो मैं चुका नही सकती लेकिन देव का ध्यान रखकर उस एहसान को कम तो कर सकती हूँ!!!"

"ओह !! तो तुम इससे प्यार नही करती..??" डॉक्टर धीरज ने फिर प्रश्न किया।

धारा ने एक फीकीं सी हंसी के साथ कहा,"प्यार और मेरी किस्मत में..?? हो ही नही सकता..!!"

"क्यों नही हो सकता..? अनाथ हो इसलिये...??? ऐसा नही है धारा !! तुम्हारे लिए भी कहीं न कहीं कोई न कोई तो बना ही होगा ! बस जब समय आएगा तब वो तुम्हारे सामने होगा..!!" डॉक्टर धीरज ने कहा।

"वो समय जब आएगा तब आएगा डॉक्टर..!! अभी तो मेरी लाइफ में सिर्फ मेरी ये नौकरी है और देव की ज़िम्मेदारी..!!! जिसे मुझे पूरी शिद्दत से निभाना है !!" बोलते हुए धारा खड़ी हुई और बाहर निकल गयी।