एक थी...आरजू - 5 Satyam Mishra द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

एक थी...आरजू - 5




                   इसके बाद ये आरजू के रोज का रूटीन बन गया की वह शहजाद के साथ उसकी बाइक पर घूमने फिरने के लिए निकल जाती थी। शहजाद उसे कई जगहों पर फिराने के लिए लेकर जाता था। महंगे सिनेमाघरों,अव्वल दर्जे के होटलों,शॉपिंग मॉल में ले जाता था। वह दिल खोल कर आरजू पर पैसे खर्च करता था। जब आरजू उससे पूछती की वह कहीं जॉब नहीं करता है तो फिर उसके पास इतनी दौलत कहाँ से आती है,तो हर दफा इस बात का वह उसे नाकाबिलेयकीन जवाब ही देता था। अक्सर देर रात तक वो शहर के अलग अलग महंगे होटलों में वक्त गुजारते और मौज मस्ती किया करते।
                   "शहजाद मैं जल्द से जल्द तुम्हारी होना चाहती हूँ"--एक रात वह होटल के बुक किये गए एक रूम में बेड पर शहजाद की बाहों में लिपटी हुई बोली-"इस तरह से घरवालों से छुप छुप कर मिलना अब मुझे अच्छा नहीं लगता है। ये डर भी रहता है की अगर किसी दिन किसी ने-या मेरे डैड ने ही-मुझे तुम्हारे साथ देख लिया तो क्या होगा?"
                   "कुछ नहीं होगा बेबी"--शहजाद उसे समझाते हुए बोला-"ये दिन हमारी मौज मस्ती के हैं। जब तक जवानी है कर लो थोड़ी मौज। आखिर में निकाह तो तुम्हीं से करना है मैंने-तुमसे सच्ची वाली मोहब्बत जो की है मैंने। और फिर निकाह आज हो या कल इससे हम दोनों को फर्क ही क्या पड़ता है-मजे तो हम लूट ही रहे हैं न?"
                   "बात मजे की नहीं है"-वह तल्ख लहजे में बोली-"बात है इस तरह से चोरी छिपे मिलने की। मैं पूरी तरह से तुम्हारी हो जाना चाहती हूँ। मैं तुमसे मिलने के लिए किसी किस्म का डर अपने सीने में नहीं रखना चाहती हूँ। कई बार तो मुझे लगता है की तुम ही मुझसे दूर न चले जाओ....।"
                   शहजाद सचेत हुआ।
                   बेड पर सीधा बैठ गया।
                   "ऐ पगली...कैसी बातें कर रही हो तुम। मैं तुमसे एक पल के लिए भी दूर होता हूँ तो ऐसा महसूस करता हूँ की मेरे जिस्म से मेरी रूह अलग हो गई है,तुमसे जुदा होकर मैं जिंदगी का तसव्वुर भी नहीं कर सकता और तुम मेरे बारे में ये अनर्गल बातें सोच बैठी की मैं तुम्हें छोड़ कर चला जाऊंगा। मैं मर जाऊंगा लेकिन तुम्हे छोड़कर कभी नहीं जाऊंगा। मैंने तुम्हारे जिस्म से नहीं तुम्हारी रूह से प्यार किया है। उस रात अगर तुम न बहकती तो मैं सुहागरात से पहले तुम्हे हाथ तक टच न करता। स्वीट हार्ट मैं तुम्हें दिलोजान से चाहता हूँ और तुम मेरे बारे में इतने घटिया ख्यालात पाल बैठी।"
                   "आयम सॉरी जान। आय लव यू। मैं तुमसे बेइंतहा प्यार करती हूँ। जाने क्या क्या सोच गई। मैं भी एक पल के लिए तुमसे जुदा नहीं होना चाहती हूँ। इसी तरह से जिंदगी भर तुम्हारी बाहों में खो कर दुनिया भुला देना चाहती हूँ।"
                   "मैं भी तो वही चाहता हूँ डार्लिंग,लेकिन आज तुम्हारी बातों ने मुझे हार्ट कर दिया।"
                   "कहा न सॉरी,आइंदा से ऐसा नहीं होगा।"
                   "वादा?"
                   "पक्का वादा।"
                   "मुझे यकीन नहीं आता।"
                   "तो कैसे यकीन आएगा तुम्हें जो बोलो कर के दिखा दूं?"
                   "ये बात"--वह धूर्ततापूर्वक मुस्कराया-"तो फिर हो जाओ शुरू।"
                   कहकर उसने आरजू के इर्द गिर्द अपनी बाहों का घेरा कस लिया। उसके मजबूत बाहों के जाल में भिंचते ही वह कसमसाई फिर उस पाश से निकलते हुए बोली-"अभी नहीं जान। मैं अभी परेशान हूँ,टेंशन में हूँ।"
                   "डोंट वरी माय बेबी"-उसने आरजू को छोड़ दिया और उसके चांद से चेहरे को चूम कर बोला-"तुम्हे टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है और आखिर किस बात से तुम इतना टेंशनाइज्ड हो?"
                   "डैडी"-उसके चेहरे पर आतंक के भाव फैल गए-"मेरी फैमिली। अगर उन लोगों को तुम्हारे बारे में पता चल गया तो वो तुम्हे अपने घर के दामाद के तौर पर कभी एक्सेप्ट नहीं करेंगे। मेरे डैडी जो मुझे बेहिसाब प्यार करने का दम भरते हैं-या शायद करते भी हैं-वही मेरी खुशियों के दुश्मन बन जाएंगे। हो सकता है तुम्हे मेरी जिंदगी से दूर करने के लिए वो तुम्हारे साथ भी कुछ नाजायज कर बैठें। मैं अगर तुम्हारी बाबत उनसे बात करने बैठी तो वो मुझे साफ तौर पर मना कर देंगे और मेरी आजादी पर पहरे लगा देंगे।"
                   "बट व्हाय बेबी? मुझमें कमी ही क्या है?"
                   "तुममें कोई कमी नहीं है।"
                   "तो फिर क्यों?"
                   "कमी शायद हमारी किस्मत में है।"
                   "ये पहेलियाँ बुझाना बन्द करो आरजू और साफ साफ लफ़्ज़ों में अपनी बात बताओ की आखिर तुम्हारे डैडी क्यों नहीं कुबूल करेंगे मुझे?"
                   "तुम मुस्लिम हो और मैं हिंदू लड़की हूँ और मेरे डैडी कभी नहीं चाहेंगे की उनका दामाद एक मुस्लिम लड़का हो।"
                   "लेकिन आरजू मोहब्बत ये सब नहीं देखती है। मैंने तुमसे सच्ची मोहब्बत ये देख कर नहीं की थी की तुम हिन्दू हो या मुस्लिम। मैंने तो बस प्यार किया है तुमसे-सिर्फ सच्चा प्यार। हमारा मिलन जरूर होगा।''
                   "लेकिन कैसे?"
                   "तुम्हारे डैडी हमारे प्यार को कभी एक्सेप्ट नहीं करेंगे इसलिए अब हमारे सामने सिर्फ एक ही रास्ता बचा है।"
                   "कौन सा रास्ता? मैं हर उस रास्ते पर चलने को तैयार हूँ शहजाद जिसकी मंजिल तुम हो?"
                   "कहीं तुम ये बात किसी भावावेश में तो नहीं कह रही हो आरजू। सोच लो।"
                   "सोच लिया मैंने। मैं हर उस रास्ते पर चलना कुबूल करती हूँ जिसपर तुम मुझे ले जाओ।"
                   "तो फिर ठीक है सुनो-तुम्हे मेरे साथ यहां से भागना होगा।"-वह चट्टान से सख्त लहजे में बोला था।
                   "व्हाट?"-आरजू चौंकी थी।
                   "हाँ आरजू मैं तुमसे सच्चा प्यार करता हूँ और हर कीमत पर तुम्हे अपनी शरीकेहयात बनाना चाहता हूँ,अपनी बीवी बनाना चाहता हूँ। और इस बात को अच्छी तरह से जानने के बाद की तुम्हारे घरवाले हमारी पाक साफ मोहब्बत को एक नहीं होने देंगे,हमे ये कदम उठाना ही होगा। जिस जगह पर हमारी मोहब्बत की कोई कद्र नहीं वहां हम नहीं रह सकते। मैं तुम्हे इस झूठे समाज और मोहब्बत की दुश्मन बनी दुनिया से दूर कहीं दूर ले जाऊंगा जहाँ सिर्फ हमारा आशियाना होगा। हमारा घर होगा,हमारी औलादे होंगी,एक हैप्पी फैमिली होगी और हम दोनों का एक मुकम्मल जहां होगा। बोलो चलोगी न मेरे साथ,दोगी जिंदगी के इस अहमतरीन फैसले में मेरा साथ? बोलो आरजू बोलो? मुझे तुमसे हजारों उम्मीदें हैं,उन उम्मीदों पर पानी मत फिरने देना। हमारी आने वाली खुशियों भरी जिंदगी का फैसला अब तुम्हारे हाथ में है आरजू। जवाब दो मुझे,चलोगी न तुम मेरे साथ?"
                   "चलूंगी,जरूर चलूंगी"-वह बोलती चली गई,उसकी नीली आंखों में झांक कर भविष्य के सपने देखती चली गई-"तुम जहाँ ले जाओगे मैं चलूंगी तुम्हारे साथ मेरे शहजाद। हमारी एक प्यार की दुनिया होगी। हमारे बच्चे होंगे। हमारा घर होगा। मैं दिन रात तुम्हारी बाहों में रहूँगी। मैं तुम्हारे साथ चलने को तैयार हूँ।"
                   शहजाद की आंखे चमक आयी थी।
                   खुशी की ज्यादती के मारे उसका चेहरा बनने बिगड़ने लगा था।
                   "ओह आरजू,आय लव यू,लव यू,लव यू....।"-कहते हुए उसने आरजू के गोरे मुखड़े पर चुम्बनों की बौछार कर दी। एक पल के लिए तो आरजू रोमांचित हो  गई। 
                   "तो फिर मुझे क्या करना होगा?"
                   "कल ही हम इस नामुराद जगह को छोड़ देंगे आरजू,जहाँ हमारी मोहब्बत की कोई कद्र नहीं। कल ही मैं तुम्हें यहां से दूर ले जाऊंगा।"
                   "कल? इतनी जल्दी?"-वह चिहुंक के बोली।
                   "हाँ आरजू,हमे जल्द से जल्द यहां से निकलना होगा। अगर तुम्हारे डैडी को हमारी मोहब्बत के बारे में पता चल गया तो वो कुछ भी कर सकते हैं। मैं तुम्हे कल ही यहां से दूर ले जाऊंगा। इसके लिए तुम तैयार तो हो न?"
                   "आयम रेडी?"
                   "ओके,कल तुम रात के ठीक ग्यारह बजे मुझे अपने घर के पास वाले ब्रिज पर मिलो। मैं अपने एक फ्रेंड से कार का इंतजाम कर लूंगा। उसी के जरिये मैं तुम्हे यहां से दूर ले कर चलूंगा।"
                   "बट हम जाएंगे कहाँ? नई जिंदगी का आगाज करना क्या इतना आसान होता है शहजाद?"
                   "हरगिज नहीं होता है आसान...लेकिन जहाँ मोहब्बत होती है वहां मुश्किलें भी आसानी में तब्दील हो जाया करती हैं आरजू। मैंने तुम्हे अपनी दूर के रिश्ते की एक मौसी के बारे में बताया था न आरजू,हम वहीं चलेंगे। मुझे पूरी उम्मीद है की वहाँ हमारे रहने का इंतजाम जरूर हो जाएगा पर एक प्रॉब्लम आ रही है...समझ नहीं आ रहा है किस मुंह से कहूँ ...।"
                   "क्या प्रॉब्लम है शहजाद तुम मुझसे शेयर करो। मैंने तुम्हारा हाथ सिर्फ सुख में साथ देने के लिए नहीं थामा है,बल्कि अब तुम्हारी सारी तकलीफें और दुश्वारियों पर मेरा भी बराबर का हक है। बताओ आखिर क्या प्रॉब्लम है तुम्हें?"
                   "आरजू मेरे पास इस टाइम बिल्कुल भी पैसे नहीं हैं। जितने थे वो पहले ही खत्म हो चुके हैं यहां तलक की एटीएम में भी बैलेंस निल हो चुका है। अगर तुम कुछ पैसों का इंतजाम....।"
                   "ठीक है शहजाद। तुम्हे पैसों को ले कर टेंशन होने की जरूरत नहीं है। मैं कल रात अपने घर से खासी रकम ले कर निकलूंगी। अपना एटीएम कार्ड भी रख लूँगी। पैसों की कोई दिक्कत पेश नहीं आएगी हमें। बस तुम मुझे कल ही यहां से ले चलो,मैं तुम्हारे साथ हूँ।"
                   "मेरी जान,तुम जानती नहीं की ये कह कर तुमने मेरी सारी टेंशन ही दूर कर दी। मैं एकदम रेडी हूँ,हम कल ही यहां से रुखसत कर जाएंगे। ओह मेरी डार्लिंग आय लव यू।"--कहते हुए शहजाद ने आरजू के हाथ अपने हाथों में ले लिए और उनपर बड़े ही प्यार से किस कर लिया।
                   "आय लव यू टू बेबी।"--आरजू ने अपनी बाहें उसकी गर्दन में डाल दी।
                   शहजाद शरारती होता चला गया।
                   अव्वल दर्जे का शरारती।
                   आरजू भी उसका साथ देने लगी।

                     क्रमशः................

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