एक थी...आरजू - 4 Satyam Mishra द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

एक थी...आरजू - 4



उस दिन सारा टाइम आरजू शहजाद की बाइक पर उसके गले में अपनी बाहों का फंदा डाले घूमती फिरती रही। सबसे पहले शहजाद उसे सिनेमा दिखाने ले गया,फिर लवर्स प्वाइंट पर दोनो ने बेहद खूबसूरत पल बिताए। इसके बाद दोनो शहर के फाइव स्टार होटल में रात के डिनर के लिए पहुंचे।
आरजू ने नैना को कॉल करके यह बता दिया की इस वक्त वह अपनी फ्रेंड रंजना के साथ है इसलिए वह रात में घर लौटने में लेट हो जाएगी।
शहजाद ने अब तक होटल में एक रूम भी बुक करवा लिया था।
डिनर से फारिग हो कर दोनों रूम में पहुंचे। आरजू को अब तक शहजाद का सामीप्य अच्छा लगने लगा था। शहजाद था ही ऐसा लड़का की कोई भी नौजवान लड़की वेसाख्ता उसकी ओर आकर्षित हो जाए।
दोनो बेड पर पसर गए।
आरजू ने उसकी जांघो पर अपना सिर रख दिया,जिस पर बड़े ही प्यार से शहजाद अपनी उंगलियां फिराने लगा। उसके हाथों में वो जादू था जिसे महसूस करके आरजू एक दूसरी ही दुनिया में जा पहुंची थी।
"क्यों न इस हसीन रात के नाम एक ड्रिंक हो जाए बेबी?"--शहजाद ने उससे ड्रिंक की पेशकश की जिसे वह इनकार न कर सकी--उसे भी काफी देर से स्मोक और ड्रिंक की तलब लगी हुई थी,सो उसने भी स्वीकृति दे दी।
शहजाद ने टेलीफोन उठा कर रूम सर्विस का नम्बर डायल किया और रेड लेबल का ऑर्डर दे दिया। इसी बीच आरजू रूम से ही अटैच्ड बाथरूम में फ्रेश होने चली गई। जब वह वापस लौटी तब तक रूम सर्विस वाला शराब की बोतल और ग्लास के साथ स्नेक्स और नमकीन ला कर दे चुका था और शहजाद पैग बनाने में मशगूल था।
आरजू जब बाथरूम से वापस आई थी तो उसके बदन पर ऐसे कपड़े थे जिसमे उसके जिस्म का ऐसा हिस्सा काफी हद तक नुमाया हो रहा था जिसे आम तौर पर ढका रखा जाता था। उसके कन्धे खुले हुए थे और घुटनो के काफी ऊपर तक नग्न टाँगे नजर आ रही थी। शहजाद की नजर उसपर पड़ी तो वह उसे देखता ही रह गया। आरजू के गीले बाल उसे और भी हसीन,कमसिन बना रहे थे।
अब तक वह पैग बना चुका था।
आरजू उसके पास आई और एक अदा के संग अपना हाथ उसकी ओर बढ़ा दिया। शहजाद ने कंपकपाते हुए हाथों से उसे शराब का ग्लास पकड़ा दिया जिसे एक ही सांस में आरजू ने पी कर खत्म कर दिया। शहजाद ने भी अपने ग्लास की शराब खत्म की। इसके बाद आरजू ने प्लेट में सजे स्नेक्स और नमकीन खाई और शराब की बोतल उठा कर मुँह से लगा ली। थोड़ी देर तक वह इसी अंदाज में शराब पीती रही और शहजाद हतप्रभ सा उसे देखता रहा। जब तक आरजू ने शराब पूरी तरह से उदरस्थ न कर ली उसने बोतल अपने मुँह से हटाई नहीं--और जब हटाई तो वह अपने होशोहवास पूरी तरह से खो चुकी थी। उसकी आंखों में नशे की किश्तियाँ तैर रही थी।
वह बार बार हिचकियाँ ले रही थी।
उसके बाल बिखर कर चेहरे पर जाल सा बना रहे थे। उसकी आंखों में एक भूख सी जाग गई थी। वह बोतल को बेड पर पटक कर शहजाद के समीप आ गई इतना करीब की उसके नथुनों से निकलती गर्म सांसे शहजाद के पत्थर सीने से टकरा रही थी।
खुद शहजाद का भी यही आलम था। उसके जिस्म में भी गर्दिश करता सारा लहू तेजी के साथ एक खास दिशा की ओर उबलने लगा-प्रवाहित होने लगा। वह भी अपनी इन्द्रियों से समस्त सम्पर्क खो बैठा। दोनो ने एक दूसरे को कसकर बाहों में भींच लिया। आरजू उसके शर्ट को उतार कर उसके चेहरे और सीने को चूमने लगी,चाटने लगी। खुद शहजाद भी इस खेल में पीछे न रहा--कुछ ही देर में उसने भी आरजू को इस बात का अहसास दिला दिया की वह भी इस गेम का कोई कच्चा खिलाड़ी नहीं था।
हसीन पल कब गुजर जाते हैं पता ही नहीं चलता।
काफी देर तक रूम में हुई हाहाकारी जंग जब खत्म हुई तो दोनों थके हुए खिलाड़ियों की मानिन्द ही बेड पर लुढ़क गए। दोनों के चेहरे पर परम् सन्तुष्टि के भाव फैले हुए थे। अपनी आबरू को रौंदाने के बाद आरजू के चेहरे पर शिकन नाम की एक चीज भी नहीं नजर आ रही थी बस एक संतुष्टि थी जो किसी बिल्ली के चेहरे पर उस वक्त होती है जब वह मलाई से भरा कटोरा चट कर जाती है।

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"आय लव यू डार्लिंग"--आरजू उसके सीने पर उग आये बालों के गुच्छों में उंगलियां फिराती हुई प्यार भरे अंदाज में बोली--"तुमने मुझे खुश कर दिया। तुम मुझसे कितना लव करते हो जान,कभी मुझे छोड़ कर मत जाना।"
"कैसी बातें कर रही हो स्वीट हार्ट"--वह उसके माथे पर चुम्बन अंकित करके बोला--"पागल हुआ हूँ मैं,जो तुझ जैसी हसीना को छोड़ जाऊंगा। तुम्हे तो मैं अपने ख्वाबों की,अपने दिल की शहजादी बना कर रखूंगा। मैने तुमसे मोहब्बत की है डार्लिंग,सच्ची मोहब्बत। यकीं न हो तो जब चाहो मेरा इम्तिहान ले लो। खुदा कसम तुम्हारे लिए तो मैं हंसते हंसते अपनी जान भी कुर्बान कर दूंगा लेकिन कभी तुम्हारे बगैर जिंदा रहने की सोच भी नहीं सकता।"
इसके बाद वह एक बार फिर से उसे बेतहाशा चूमने लगा। आरजू ने भी खुद को ढीला छोड़ दिया,एकाएक...
"शहजाद मैं तुमसे शादी करना चाहती हूं"--उसके जोश पर ब्रेक लगते हुए बोली आरजू--"तुम्हें अपना हसबैंड बना कर तुम्हारे साथ ही अपनी मुकम्मल जिंदगी बसर करना चाहती हूँ। क्या तुम मेरे हमसफ़र बनोगे?"
"ऑफकोर्स डार्लिंग। तुम्हे दिलोजान से चाहा है मैंने,और तुम्ही से शादी करूँगा मैं।"
"सच कह रहे हो?"
"तुम्हे मुझपर यकीं है न मेरी जान?"
"खुद से भी ज्यादा?"
"तो फिर बस इसी तरह से अपना यकीन मुझपर कायम रखना, फिर देखना हमारी आने वाली जिंदगी कितनी हसीनो-तरीन और लाजवाब होगी।"
"ओह शहजाद...आय लव यू।"
"लव यू डार्लिंग,माय स्वीट हार्ट,माय सेन्योरीटा।"-वह बिना रुके सिलसिलेवार उसके बदन को चूमते हुए बोला।
आरजू उसकी बाहों के झूले में अपने सुनहरे भविष्य की कल्पना करने लगी। धीरे धीरे शहजाद का गुस्ताख़ हाथ आरजू के बदन के खास हिस्से की ओर फिसलने लगा।

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उस रात काफी देर आरजू अपने घर पहुंची थी। जब वह घर पहुंची तो हरिओम और नैना जी को अपना इंतजार करता हुआ पा कर चौंकी थी वह। तब जा कर उसे रियलाइज हुआ की शहजाद की बाहों में उसे समय का पता ही न चला था। हरिओम आरजू के लिए परेशान हो चले थे। उसकी दोस्त रंजना को ही नहीं बल्कि फ्रेंड सर्किल के हरेक लड़के लड़कियों को फोन खड़का चुके थे लेकिन आरजू की बाबत कोई खबर न मिली थी। तो फिर वह गई कहाँ होगी? यह सोच सोच कर पति पत्नी की जान निकली जा रही थी। जब आरजू घर में दाखिल हुई तो उनके मुरझाये हुए चेहरे पर रंगत पुनः लौट आई।
हरिओम ने आगे बढ़ कर आरजू को गले से लगा लिया और उसके लेट आने का कारण पूछा। एक पल के लिए तो आरजू को फौरन कोई जवाब देते न बना फिर उसने आत्मसंयत होने के बाद बहाना बना दिया की उसके कॉलेज टाइम के एक पुराने दोस्त का एक्सीडेंट हो गया था जिस कारण उसे देर रात तक उसके साथ हॉस्पिटल में ही रुकना पड़ा।
नैना को तो एकबारगी उसकी बात पर यकीन न हुआ,जब वह आरजू से उसके पुराने दोस्त की बाबत पड़ताल करने लगी तो खुद हरिओम ने ही अपनी बीवी का मुंह बन्द कर दिया और बोले--"तुम भी नैना,बेवजह हमारी बिटिया को परेशान करने लग जाती हो। देखती नहीं कितनी थकी हुई लग रही है मेरी बेटी। जाओ बेटी अपने रूम में जा कर रेस्ट करो।"
"ओके डैडी-गुड नाईट"--कहकर उसने अपने पापा को गले से लगाया और अपने रूम की ओर बढ़ चली।
अपने रूम में पहुंच कर उसने सीधे बिस्तर का रास्ता पकड़ा। उसके जिस्म का पोर पोर दर्द के मारे टूट रहा था। पर आज उसे ये दर्द मीठा लग रहा था-अच्छा लग रहा था। ये प्यारा सा दर्द उसे अपने नए नवेले आशिक शहजाद की याद दिला रहा था। बिस्तर के हवाले होते ही उसे नींद ने आ घेरा और वह घोड़े बेच कर सो गई।
आरजू के जाने के बाद नैना ने हरिओम से शिकायती लहजे में कहा था-"आपने इसे बहुत सिर पर चढ़ा रखा है देखना एक दिन आपकी ये छूट और लापरवाही उसके और अपने लिए बहुत बुरी साबित होगी।"
"तुम भी नैना ख्वामख्वाह की बातों को लेकर इतना परेशान हो जाती हो। आरजू हमारी बेटी है,हमारा खून गर्दिश कर रहा है उसकी नसों में। वो ऐसा कोई काम नहीं करेगी जो उसकी और हमारी शर्मिंदगी का सबब बनें। अब इस उम्र में इंज्वाय और मौज मस्ती नहीं करेगी तो कब करेगी। उसे अपनी लाइफ खुल कर जीने का पूरा हक है। हम उसपर आँख बन्द करके यकीन करते हैं,हमें पूरा विश्वास है की हमारी बेटी हमारे यकीन का कत्ल नहीं करेगी,हमारे विश्वास की हत्या नहीं करेगी।"--हरिओम पूर्ण भरोसे के संग बोले थे।
नैना उस वक्त भले ही खामोश गई थी लेकिन उसकी आंखों में अपनी बेटी आरजू की आने वाली जिंदगी के बारे में सोचकर हजारों लाखों चिंताएं उभर आयी थी।

क्रमशः..................

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Vishwa

Vishwa 10 महीना पहले

Satyam Mishra

Satyam Mishra 1 साल पहले