नौकरानी की बेटी - 20 RACHNA ROY द्वारा मानवीय विज्ञान में हिंदी पीडीएफ

नौकरानी की बेटी - 20

शैलेश का भी हल्दी हो गया अब आगे।।

रात को रीतू दुल्हन बन कर मंडप में बैठी थी। अमर, राजू और बाकी जेंस लोगों ने सफ़ारी पहना था।लेडिस साड़ियां पहनी थी।

आनंदी भी सुन्दर सा लांचा पहना था। बाकी सब खुश नजर आ रहे थे।
आनंदी का ये ड्रेस किसी और ने नहीं बल्कि रीतू ने खरीदा था।


कुछ देर बाद आनंदी के दोस्त आ गए। फिर सब बातचीत करने लगे।


रीतू के आफिस के दोस्त सब आ गए। और उसके अपार्टमेंट के लोग भी आ गए।


फिर रीतू और शैलेश की शादी हो गई और सब ने नये वर वधू को बधाई दे रहे थे।।

आनंदी ने कहा दीदी आप दोनों की जोड़ी हमेशा बनी रहे।

रीतू ने आनंदी को गले लगाया और एक लिफाफा दे दिया। और बोला कि इसमें चेक है बैंक एकाउंट से निकाल लेना। तेरी ट्रेनिंग के लिए काम आयेगा।
फिर सभी मेहमानों की आवभगत की गई और सभी डिनर खाने चले गए।

कुछ देर बाद वर वधू को भी खाना खाने के लिए बैठा दिया गया।


फिर दूसरे दिन अमर ने रीतू और शैलेश को यूरोप की एयर टिकट,होटल बुक करवा कर दिया और कहा जाओ दोनों घुम कर आओ।
फिर रीतू आनंदी को ओल दी बेस्ट बोल कर चली गई यूरोप की सैर को।



दो दिन बाद आनंदी और बाकी सब के वापसी का एयर टिकट था।सबकी पैकिंग भी हो गई थी।
और सभी समय पूर्वक एयरपोर्ट पहुंच गए और फिर हवाई जहाज पर बैठ गए।

दिल्ली वापस आते ही आनंदी को बहुत ही व्यस्त जीवन शुरू हो गया।

आनंदी को ट्रेनिंग के लिए लाल बहादुर शास्त्री नेशनल अकैडमी आफ ऐडमिनिस्ट्रेशन में बुलाया गया। यह एकेडमी उत्तराखंड के मसूरी में स्थित है।

आनंदी को तुरंत मसूरी के लिए निकलना पड़ा।
वहां पहुंच कर आनंदी को बहुत सारे नियमों का पालन करना पड़ा।

पहले दिन ही आनंदी को काफी सख्त प्रशिक्षण दिया गया। आनंदी और बाकी सारे छात्र और छात्राओं को विभिन्न विषयों में प्रशिक्षण दिया गया ताकि वे अलग-अलग जिम्मेदारियों को ढंग से अंजाम दे सके।
इसी तरह आनंदी का आईएएस अफसर बनने का सफर शुरू हुआ।
ट्रेनिंग के दौरान आनंदी को बहुत कुछ सीखने का मौका मिला।

आनंदी को दिन ६०मिनट के अभ्यास के साथ सुबह ६बजे शुरू होता उसके बाद १० बजे से क्लास रुम सेशन शुरू हो जाता था।


शाम को सभी ट्रेनी एक साथ बैठकर कर बातें करते हैं।


ट्रेनिंग के दौरान आनंदी को देश भर यात्रा करने के लिए बोला गया और इससे समिद सांस्कृतिक विविधता को करीब से महसूस करने की बात बोली गई।

आनंदी को एक हफ्ते के लिए जयपुर जाना पड़ा वहां ट्रेनिंग ब्यूरो आफ पाल्यामेटी स्टडीज शुरू हो गया।
आनंदी को देश की हस्तियां के साथ मिलने का मौका भी मिल गया जैसे राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति,प्रधानमंत्री।।


आनंदी को ये एक खुली आंखों का सपना जैसा लग रहा था।

फिर इसी तरह आनंदी को आगे ट्रेनिंग के दौरान एक साल तक जिला प्रशिक्षण के दौरान से गुजरना होगा।


इसी तरह आनंदी एक -एक करके सभी चरणों को पार करती जा रही थी और फिर दूसरे चरण में आनंदी को फिल्ड हालिया अनुभव को साझा करने के लिए मंच मुहैया कराया गया।

इसी तरह आनंदी का ट्रेनिंग दो साल तक चला और फिर उसके बाद आनंदी को सारे ट्रेनिंग में अव्वल दर्जे का अधिकार मिल गया। सभी अफसरों को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त MA इन पब्लिक मैनेजमेंट की डिग्री प्रदान किया गया।


आनंदी को केबिनेट सचिव पद दिया गया और उसका वेतन २,५०,०००/- प्रति माह के रूप में दिया गया।

आनंदी को उसके पोस्ट का दस्तावेज भी मिल गया। मसूरी में प्रशिक्षण पूरा होने के बाद आनंदी दिल्ली वापस आ गई।


आनंदी ने अपनी खुशी जाहिर सबके सामने एक इंटरव्यू में किया। ये इन्टरव्यू सिर्फ आई एस टापर्स के लिए था और फिर आनंदी की पढ़ाई लंदन जैसे शहर में हुईं थीं।


आनंदी ने अपने इंटरव्यू में वो हर एक बात बताया जो आनंदी के जीवन से जुड़े हुए थे और ये भी बताया कि एक नौकरानी की बेटी आनंदी को उसकी रीतू दीदी ने कितना साथ दिया और आज आनंदी इस मुकाम तक पहुंच पाई।

आनंदी ने रोते हुए कहा रीतू दीदी आप जहां भी हो मेरी बात सुन कर जल्दी से आ जाओ।
आज मैं जो कुछ भी हुं वो रीतू दीदी की वजह से हुं।


फिर तालियों की गूंज उठी और शायद लंदन तक पहुंच गया।


अमर,अनु, राजू, आनंदी की मां सब आनंदी का इन्तजार कर रहे थे।

फिर आनंदी ने सबका पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

राजू ने आनंदी के सर पर हाथ रख कर कहा आनंदी तुने कर दिखाया।


फिर आनंदी की पोस्टिंग सबसे पहले केरल में हुई। अगले महीने आनंदी का एक नया सफर शुरू होने वाला था।

लंदन में जब रीतू ने एक न्यूज चैनल में देखा तो उसने आनंदी को विडियो कालिंग किया और बहुत सारी बधाइयां दी।

आनंदी ने कहा दीदी मैंने आपको बहुत याद किया हर बार।


रीतू ने कहा अब आनंदी से मिलने के लिए एपोरमेन्ट लेना होगा।

आनंदी ने कहा क्या दीदी रूला दिया। रीतू ने कहा कृष्णा वाई अब आपको आपकी अफसर बेटी आनंदी के साथ जाना होगा।


कृष्णा ने कहा अरे यहां कैसे काम होगा। रीतू ने कहा अरे कृष्णा वाई आप आनंदी की मां हो अब आपको ही सोचना होगा ,

आप किसी और को काम पर लगा दिजिए। मैं मम्मी से बात कर लुंगी।

रीतू ने विडियो कालिंग बन्द कर दिया और फिर अनु को फोन पर सब कुछ समझा दिया।


अनु ने कहा ठीक है कृष्णा तू जा फिर कल से किसी को लगा देना।

कृष्णा वाई रोने लगी क्योंकि सालों से वह ही काम कर रही थी।

दूसरे दिन सुबह कृष्णा वाई ने एक चंदा नाम की बाई को लेकर आईं और सारा काम समझा दिया। और फिर कृष्णा ने राजू को और बाकी सब को बोली की अब चलती हूं मैं।।

अनु बोली हां कभी मिलने आना।


कृष्णा वाई वहां से सीधे आनंदी के साथ डुल्कस आवास में जाने के लिए एक बड़ी सी गाड़ी में बैठ गए और फिर आनंदी के आवास में पहुंच गए।
कृष्णा को अपने आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि एक सपना जैसा लग रहा था।
आनंदी ने कहा मां तुम अब से सिर्फ आराम करोगी। अगले महीने हमें केरल जाना होगा।

कृष्णा ने कहा हां बेटा अब मैं सिर्फ आराम ही करूंगी।
आनंदी ने कहा हां मां ये सब कुछ रीतू दीदी की वजह से हो पाया।


आनंदी ने कहा अब मैं और तुम खुब घूमेंगे।
कृष्णा ने कहा हां बेटा।

फिर दो खाना बनाने वाले भी आ गए बहुत सारी सुविधाएं आई ए एस आनंदी को उपलब्ध कराई गई।

क्रमशः

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कैप्टन धरणीधर मातृभारती सत्यापित 4 महीना पहले

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Mina Tulsiyan 1 साल पहले