हिंदी मानवीय विज्ञान कहानियाँ मुफ्त में पढ़ेंंऔर PDF डाउनलोड करें

जादुई मन - 2
द्वारा कैप्टन धरणीधर

अध्याय एक उन व्यक्तियों का मन अधिक कमजोर होता है, जिनकी दिनचर्या अस्त व्यस्त रहती है, जो लोग अपनी पूरे दिन की कार्य योजना नहीं बनाते, जो अनुशासन ...

जादुई मन - 1
द्वारा कैप्टन धरणीधर

लेखक परिचय – कैप्टन धरणीधर पारीक, पुत्र श्री राधेश्याम पारीक जयपुर राजस्थान। धर्मगुरू भारतीय सेना (सेवा निवृत्त) शिक्षा – संस्कृत व हिन्दी से शास्त्री शिक्षा शास्त्री (एमए बी एड) ...

महिला पुरूषों मे टकराव क्यों ? - 8
द्वारा कैप्टन धरणीधर

केतकी का पिता समझ नही पा रहा था आखिर ऐसा क्या हुआ जो मेरी फूल सी बेटी सिसक सिसक कर रो रही है । केतकी की मा बोली ..मुझे ...

महिला पुरूषों मे टकराव क्यों ? - 7
द्वारा कैप्टन धरणीधर

सबसे पहले.. घर के सबसे बड़े ससुर ..आकर खड़े हो गये..बुआजी बोले ..बहु इनके पांव पकड़ लो ..केतकी ने वैसा ही किया ..बड़े ससुर नीचे झुका तो केतकी को ...

महिला पुरूषों मे टकराव क्यों ? - 6
द्वारा कैप्टन धरणीधर

केतकी मन में सोच रही थी.. खुशी की बात हो और खुशी न हो.. यह कैसे हो सकता है ..क्या अभय का नेचर ही ऐसा है ..या शादी की ...

महिला पुरूषों मे टकराव क्यों ? - 5 - सत्य घटना पर आधारित
द्वारा कैप्टन धरणीधर

लेखन तिथि - 01 मई 2022 सभी का ध्यान अभय के मित्र पर .. सीएच एम बोला .. अभय को बताना वह.. नायकी केडर में पास हो गया है ...

महिला पुरूषों मे टकराव क्यों ? - 4 - सत्य घटना पर आधारित कहानी
द्वारा कैप्टन धरणीधर

लेखन तिथि 28/4/2022 कहानी 1 पात्र - 01 केतकी - आधुनिक लड़की (फैशन डिजाइनर)02 अभय सिंह- केतकी का पति (सेना मे नायक)03 विजय - केतकी का पिता एक (व्यवसायी) ...

महिला पुरूषों मे टकराव क्यों ? - 3 - कवियों ने नारी को भोग्य वस्तु बन
द्वारा कैप्टन धरणीधर

अध्याय 3 नारी भोग्या क्यों ?नारी तुम पुरूषों के समान ही थी तुम्हारे पास सारे अधिकार थे तुम समाज मे आदरणीया रही । क्यों तम्हारे शरीर को आकर्षण का ...

कठपुतलियाँ
द्वारा Ranjana Jaiswal

मैं उस समय कक्षा में बच्चों को पढ़ा रही थी, जब दाई ने आकर कहा-बड़ी प्रिंसिपल बुला रही हैं। मैं अन्दर ही अन्दर काँप गई- हे ईश्वर, फिर बुलावा! ...

महिला पुरूषों मे टकराव क्यों ? - 2 - वैचारिक भिन्नता
द्वारा कैप्टन धरणीधर

भारतीय महिलाएं पश्चिमी देशों के तौर तरीके इस लिए अपनाने लगी क्योंकि उसे अपने रहन सहन से श्रेष्ठ मानने लगी इसी तरह पुरूष भी पश्चिमी संस्कृति को श्रेष्ठ मानकर ...

महिला पुरूषों मे टकराव क्यों ? - 1
द्वारा कैप्टन धरणीधर

आपने एक खेल कभी अपने बचपन मे खेला होगा दो दल बच्चो के बनाये जाते है एक दल घोड़ी बन जाता है दूसरे दल वाले उनकी पीठ पर बैठ ...

साहित्य के अंधेरे उजेले 
द्वारा Ranjana Jaiswal

लेखन की दुनिया बड़ी जटिल है |इस दुनिया में सबकी अपनी-अपनी महत्वाकांक्षाएँ हैं |सबके अपने लक्ष्य हैं |सब नंबर वन पर आना चाहते हैं ,जिसके लिए वे कई प्रकार ...

नौकरानी की बेटी - 50 - अंतिम भाग
द्वारा RACHNA ROY

आज आनंदी बहुत ही खुश हैं वो इसलिए कि अन्वेशा, चेतन, रीतू, शैलेश,शना सभी वापस आ रहे है।वो भी अन्वेशा की शादी होने वाली है।।अन्वेशा की एम डी की ...

निजी स्कूलों के अध्यापकों का दर्द - एक नजर 
द्वारा Ranjana Jaiswal

वर्तमान समाज में यदि कोई सबसे दयनीय प्राणी है तो वह है अध्यापक |और अगर वह किसी निजी स्कूल का हुआ तो और भी |वह इतना दबाव झेलता है ...

नौकरानी की बेटी - 49
द्वारा RACHNA ROY

आनंदी का लंदन में चार साल के ऊपर हो गया।अन्वेशा एम डी के साथ ही प्रेक्टिस भी करने लगी थी।आनंदी को अब वापस जाना था उसका एयर टिकट भी ...

नौकरानी की बेटी - 48
द्वारा RACHNA ROY

फिर रीतू स्टेज पर पहुंच गई और फिर एक बाक्स में दो अंगुठी लेकर अन्वेशा और चेतन को खड़े होने को कहा।फिर दोनों ने एक दूसरे को अंगूठी ...

नौकरानी की बेटी - 47
द्वारा RACHNA ROY

फिर सभी घर वापस आ गए और फिर सारा शापिंग का सामान एक अलमारी में रख दिया।अन्वेशा ने कहा हां मां कल देखना, मैं तो सोने जा रही हुं।आनंदी ...

नौकरानी की बेटी - 46
द्वारा RACHNA ROY

आज पुरे चार साल बीत गए और आज आनंदी की हर एक कोशिश का फैसला होगा हां आज अन्वेशा एक डाक्टर बन गई और उसे बहुत ही अच्छे से ...

नौकरानी की बेटी - 45
द्वारा RACHNA ROY

अन्वेशा ने कहा अरे नानी चेतन भी आया है क्या हम कुछ देर तक बातें करते हैं और फिर जल्दी से खाना दो ।कृष्णा ने कहा हां चलो अब ...

नौकरानी की बेटी - 44
द्वारा RACHNA ROY

चेतन को देख कर आनंदी को बहुत ही अच्छा लगा क्योंकि उसकी आंखों में सच्चाई थी।आनंदी ने खाना खाने के बाद कहा चेतन मैं कल तुम्हारे टुरलिप स्कूल में ...

वह अजीब सी लड़की
द्वारा Ranjana Jaiswal

कुछ महीने वह मेरे घर रही थी |उसके अम्मी-अब्बू के रिक्वेस्ट करने पर मैंने उसे अपने घर रख लिया था |सोचा था अकेली लड़की शहर में पढ़ने आई है ...

नौकरानी की बेटी - 43
द्वारा RACHNA ROY

आनंदी ने कहा हां दीदी मैंने अपनी कहानी का नाम समर्पण इसलिए रखा क्योंकि जो मैं जो कुछ भी हुं वो कहीं ना कहीं आपकी और मां की ...

दैनिक जीवन चर्चायाम् -अपेक्षितः श्लोकाः
द्वारा ramgopal bhavuk

दैनिक जीवन चर्चायाम् अपेक्षितः श्लोकाः सूक्तियश्च। ...

नौकरानी की बेटी - 42
द्वारा RACHNA ROY

फिर सभी के साथ आनंदी ने बहुत ही अच्छे से समय बिताया लंदन में।और फिर एक हफ्ते बाद आनंदी लोग अपने बंगले में लौट गए।कृष्णा ने कहा आनंदी किसी ...

साधन
द्वारा किशनलाल शर्मा

जब मैं समझदार हुआ तब मेरा ध्यान सड़क किनारे बैलगाड़ी पर छप्पर ताने लोगो पर गया।तब मुझे पता चला।ये गड़रिया लुहार है।महाराणा प्रताप को महलों को छोड़कर जंगलो ...

नौकरानी की बेटी - 41
द्वारा RACHNA ROY

आनंदी का सपना पूरा हो रहा था।।आनंदी ने कहा मैं हर एक चीज बहुत ही अच्छे से करूंगी।। कोई भी कमी नहीं होने दुंगी।।जुहू में एक बहुत ही ...

नौकरानी की बेटी - 40
द्वारा RACHNA ROY

दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर तैयार हो गई ।और फिर सैर को निकल गई।। वापस आ कर तैयार हो गई आनंदी और उसने मोबाइल पर तारिख देख कर कहा ...

नौकरानी की बेटी - 39
द्वारा RACHNA ROY

आनंदी का इंटरव्यू भी हुआ अगले दिन ही अख़बार की पहली हेड लाइन में आनंदी की फोटो और बहुत सारी बातें छापी गई थी।अन्वेशा बहुत ही खुश थी उसने ...

नौकरानी की बेटी - 38
द्वारा RACHNA ROY

अन्वेशा के बर्थडे पार्टी में बहुत ही खूबसूरत सा डोकोरेशन किया गया था बहुत ही शानदार लगा रहा था।अन्वेशा इधर उधर भाग रही थी। फिर उसकी कालेज की दोस्त ...

नौकरानी की बेटी - 37
द्वारा RACHNA ROY

जयपुर से आने के बाद आनंदी फिर अपने काम में व्यस्त हो गई।आनंदी ने कहा मां अब अन्वेशा के लिए सब कुछ करना है क्योंकि उसके अलावा कोई भी ...

जीवन के उजाले - भविष्य में भूतकाल
द्वारा राकेश सोहम्

भविष्य में भूतकालउपलब्ध साधनों के जरिए ही आपदाओं से निपटना पड़ता है । कई बार इनसे निपटने को साधन कम पड़ जाते हैं । कोरोना की दूसरी लहर के ...

नौकरानी की बेटी - 36
द्वारा RACHNA ROY

फिर अगले दिन सुबह आनंदी लोग तैयार हो कर राजू के शादी मंडप में पहुंच गए।राजू ने समीरा से सबका परिचय कराया और फिर समीरा बोली अरे आनंदी को ...