हिंदी मानवीय विज्ञान कहानियाँ मुफ्त में पढ़ेंंऔर PDF डाउनलोड करें

नौकरानी की बेटी - भाग 11
द्वारा RACHNA ROY

रात को डिनर के बाद विडियो कालिंग करेंगे। और अब आगे।।आनंदी ने कहा हां दीदी जरूर।।फिर रात को डिनर के बाद रीतू ने मम्मी को विडियो कालिंग किया और ...

नौकरानी की बेटी - भाग 10
द्वारा RACHNA ROY

इसी तरह मैथ लेकर पढ़ेंगी तो आगे आई एस की तैयारी कर पायेगी और अब आगे।।आनंदी के बोर्ड परीक्षा अगले महीने ही होने वाले थे। स्कूल में भी डेट ...

औरत-ऐ-औरत
द्वारा Ramnarayan Sungariya

कहानी-   औरत-ऐ-औरत                                                     ...

संग विज्ञान का - रंग अध्यात्म का - 1
द्वारा Jitendra Patwari

 मेटाफिजिक्स   इस लेख श्रृंखला में , हम एक ऐसे विषय से परिचित होने की कोशिश करेंगे जो बहोत ही मौलिक एवं सहज होने के साथ साथ प्रत्येक मनुष्य ...

बुंदेलखंड के लोक-जीवन में समय बोध
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय

बुंदेलखंड के लोक में समय बोधमनुष्य ने काल के निरवधि विस्तार को अपने बोध की दृष्टि से खंडों में विभाजित कर लिया । आदिम मनुष्य ने भी प्रभात, दोपहर, ...

नौकरानी की बेटी - भाग 9
द्वारा RACHNA ROY

आनंदी को सरकार द्वारा स्कालरशिप भी प्राप्त हो गया और अब आगे।रीतू बोली आनंदी मै आज इतनी खुश हुं कि क्या बताऊं मैं विक एंड में एक पार्टी दूंगी ...

प्रेमचन्द का समाज
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय

कृष्ण विहारी लाल पाण्डे लेख- प्रेमचन्द का समाजहिंदी कथा साहित्य के प्रतीक रचनाकार प्रेमचंद के अन्य प्रदेशों के साथ उनकी प्रासंगिकता का विशेष उल्लेख किया जाता है । प्रासंगिकता ...

शिक्षण संस्थान क्यों आज़ाद हों
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय

कृष्ण विहारी लाल पाण्डेय शिक्षण संस्थान क्यों आज़ाद हों   कुछ बरस पहले हिंदी उच्चतम न्यायालय के एक फैसले की काफी चर्चा हुई थी । पी.ए. इनामदार बनाम महाराष्ट्र ...

नौकरानी की बेटी - भाग 8
द्वारा RACHNA ROY

नौकरानी की बेटी भाग सात में पढ़ा कि आनंदी मैथ के सारे सवालों के नौकरानी की बेटी भाग सात में पढ़ा कि आनंदी मैथ के सारे सवालों के जवाब ...

शिक्षा से कुछ शिक्षेत्तर सवाल
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय

आज शिक्षा की निरर्थकता और व्यवसाय विहीन शिक्षा के बारे में उमड़ती शिकायतों से जाहिर है कि जिस तरह की आदर्श अपेक्षाएं शिक्षा से की जाती हैं उतनी अन्य ...

सामाजिक बदलाव-खुली आँखों सूरज देखने का अनुभव
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय

खुली आँखों सूरज देखने का अनुभव प्रायः अपने वर्तमान समय की अपेक्षा, गुजरा हुआ समय अधिक अच्छा अधिक सुखद लगता है । कुछ तो स्थितियों की भिन्नता के कारण ...

बाजार में गुम होती शिक्षा
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय

आज शिक्षा की निरर्थकता और व्यवसाय विहीन शिक्षा के बारे में उमड़ती शिकायतों से जाहिर है कि जिस तरह की आदर्श अपेक्षाएं शिक्षा से की जाती हैं उतनी अन्य ...

नौकरानी की बेटी - भाग 7
द्वारा RACHNA ROY

नौकरानी की बेटी भाग छः में आपने पढ़ा कि आनंदी और रीतू तैयार हो गई। और अब आगे।रीतू बोली चल अब वाक् करने चलते हैं। फिर आनंदी और रीतू ...

महाकवि निराला कोमल फूल पर तलवार का पानी
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय

संस्मरण ० महाकवि निराला जयन्ती "कोमल फूल पर तलवार का पानी" (महादेवी वर्मा) के0बी0एल0 पाण्डेय वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मदन मोहन मालवीय हॉस्टल (हिन्दू हॉस्टल) में महाकवि निराला की ...

नौकरानी की बेटी - भाग 6
द्वारा RACHNA ROY

नौकरानी की बेटी भाग पांच में यहां तक पढा था कि रीतू बोली आनंदी चल फैश हो जाते हैं । और अब आगे..... दोनो एक दम गहरी नींद सो गए। ...

क्रेडिट कार्ड - डेविट कार्ड
द्वारा ramgopal bhavuk

मैनें पाँचवी कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण कर ली थी। कक्षा छह में नियमित पढ़ने जाने लगी। इन दिनों मुझे याद आ रही है जब मैं कक्षा तीन में ...

नौकरानी की बेटी - भाग 5
द्वारा RACHNA ROY

नौकरानी की बेटी भाग चार में पढ़ा था कि आनंदी हवाई जहाज में सवार होकर उड़ान भरने को तैयार थी और अब आगे।।। रीतू बोली आनंदी पहले अपना फोन को ...

नौकरानी की बेटी - भाग 4
द्वारा RACHNA ROY

नौकरानी की बेटी भाग तीन में आपने पढ़ा कि कृष्णा बोली जल्दी से समोसे जलेबी बनाती हुं अब आगे।।कृष्णा ने जल्दी से आलू उबालने कुकर में दे दिया और ...

स्वतन्त्र  सक्सेना के विचार बुंदेलखण्‍ड
द्वारा बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

बराबरी का सपना                                                                                                                                                                                               स्‍वतंत्र कुमार सक्‍सेना भारत के मध्‍य में बसा बुं

नौकरानी की बेटी - भाग 3
द्वारा RACHNA ROY

नौकरानी की बेटी भाग दो मे आपने पढ़ा था कि आनंदी बोली हां दीदी सब तैयारी हो चुकी है। अब आगे।आनंदी मन में मुस्कुरा रही थी कि अब रविवार ...

नौकरानी की बेटी - भाग 2
द्वारा RACHNA ROY

नौकरानी की बेटी भाग एक में आपने पढ़ा था कि आनंदी के लिए खुशखबरी लाई थी उसकी मां -अब आगे।आनंदी ये सुनकर कर खुशी से झूम उठी और बोली ...

बिटिया के नाम पाती... - 6 - एक पाती मेरी अभिलाषा के नाम
द्वारा Dr. Vandana Gupta

मेरी प्यारी अभिलाषातुम मुझे बहुत अज़ीज़ हो, शायद खुद से भी ज्यादा... और इसीलिए तुम्हें अब तक दिल में महफूज़ रखा है। तुम्हें पाने की ज़िद में खुद को ...

नौकरानी की बेटी - भाग 1
द्वारा RACHNA ROY

राजू दसवीं में पढ़ता था और सबका बहुत ही दुलारा था।राजू को किसी तरह की कोई कमी नहीं थी। उसके घर में दो काम करने वाले थे एक था ...

कालप्रियनाथ के मन्दिर के शिलालेखों का निहितार्थ
द्वारा रामगोपाल तिवारी

कालप्रियनाथ के मन्दिर के शिलालेखों का निहितार्थ         इतिहासकारों का कहना है कि यह नगरी ईसा की पहली शताब्दी से आठवीं  शताब्दी   तक फली-फूली है । (पद्मावती - डॉं0 ...

नई मज़िल
द्वारा Chaitali Parekh

तुम अभी इस होद्दे के लिए तैयार नहीं हो !!  अगर हम अपनी किताब की शुरुआत कुछ इस तरीकेसे करेंगे तो आपके मन पे पहले क्या विचार आयेगा? लेखक ...

मृत्युयात्रा - शमशान पथ
द्वारा S Choudhary

हम सब एक यात्रा पर है।जन्म से मृत्यु तक कि यात्रा।जिस क्षण जन्म होता है उसी क्षण से यह यात्रा शुरू हो जाती है। जब तक व्यक्ति शमशान में जलकर ...

इंसान और उसकी भावनाएं
द्वारा Arjuna Bunty

इंसान और उसकी भावनाएं इंसान और उसकी भावनाएं इंसान अपनी भावनाओं को लिखकर बोलकर और इशारों से दूसरों के सामने प्रकट करता है मगर कभी-कभी इंसान की कुछ भावनाएं ...

आलेख - नेचर मांगे मोर स्पेस
द्वारा S Sinha

   इस आलेख में यह दिखाने का प्रयास किया गया कि दुनिया में बढ़ती जनसँख्या की मांग को पूरा करने के लिए हम किस तरह प्रकृति का दोहन कर ...

कंजी आंखें
द्वारा Shubhra Varshney

कंजी आंखें "विभु तुमने स्कूल बैग लगा लिया? तुम्हें और तान्या को आज मैं ऑफिस जाते पर स्कूल छोड़ दूंगी।" टीवी कैबिनेट से पर्स उठाती गरिमा ने बेटे विभु ...

मुर्गी
द्वारा rajendra shrivastava

लघु-कथा--   मुर्गी                                                     ...

रस्साकशी
द्वारा Alka Pramod

                       सुबह के नौ बज गए थे ,पर रामी का कहीं अता पता न था ‘आज लगता है फिर ...

साहित्य और लोकप्रियता की कसौटी
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय

साहित्य और लोकप्रियता की कसौटी          साहित्य के मूल्यांकन के अनेक मानदण्ड रहे हैं। सौष्ठववादी मूल्यांकन में कृति की आन्तरिक संरचना ही उसके विमर्श का आधार है। इसके ...