द डार्क तंत्र - 1 Rahul Haldhar द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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द डार्क तंत्र - 1

पहली कहानी .......



योनिनिशा - 1


" लेकर आई हो ? "

" हाँ " लड़की ने किसी तरह अपना सिर हिला कर जवाब दिया ।

लड़की की उम्र शायद 22 - 23 होगी । शरीर का रंग लगभग सफेद ही है लेकिन इस वक्त उसके चेहरे का रंग धूमिल हो चुका है । केवल इतना ही नहीं उसके शरीर का तापमान भी स्वाभाविक से कई डिग्री ज्यादा है । वह लड़की जमीन पर बैठकर कांप रही थी ।

" जो कुछ भी बोला था सब कुछ लाई हो ? "

लड़की ने फिर हाँ में सिर हिलाया । इस वक्त उसके सामने एक बड़े से पात्र में कुछ काला तरल रखा हुआ है । उस पात्र के पास ही कुछ बड़े-बड़े मोमबत्ती जल रहे हैं । नहीं केवल मोमबत्ती ही नहीं , वह लड़की जिस अँधेरे कमरे में बैठी है वहां पर मोमबत्ती के साथ ही धूप व अगरबत्ती भी जल रहे हैं ।


उस लड़की से कुछ ही दूरी पर जो महिला बैठी है उसके चेहरे पर इस वक्त एक कुटिल मुस्कान खेल रही है । उस महिला की उम्र लगभग 60 होगी । महिला के चेहरे की चमड़ी झूल गई है । उसके पूरे शरीर पर कई सारे चोटों के निशान हैं । बाल बिखरे हुए तथा जटा के जैसे बँधी हुई ,माथे पर लम्बा सिंदूर का टीका और चेहरे पर भयानक हंसी है ।

उस महिला ने एक बार फिर पूछा ,
" जितनी सामग्रियों को बोला था सब कुछ लेकर आई हो ? काला खरगोश , काला कबूतर , सूअर की मल , अलसी बीज का चूर्ण , धतूरे के बीज , सफेद सरसों इन सभी चीजों को लेकर आई हो । "

" हाँ सब कुछ लाई हूं केवल ..... "

डरते हुए वह लड़की कुछ देर के लिए चुप हो गई फिर किसी तरह बोली ,
" केवल काला खरगोश नहीं मिला । "

वह महिला गुस्से में बोली ,
" रंडी कहीं की , यहां पर क्या गुड्डे - गुड़ियों की खेल हो रही है । नहीं मिला तो फिर आधी रात को यहां पर क्या करने आई हो । "

" नहीं ऐसा नहीं है । काले की जगह सफेद खरगोश मिला । "

" कहाँ है ? "

लड़की ने कांपते हुए अपने पास रखे एक बड़े बैग से एक प्यारा सा सफेद व सुंदर खरगोश को निकाला । बैग से निकालते ही खरगोश ने लड़की के हाथ पर प्यार पाने के लिए अपना सिर रगड़ना शुरु कर दिया । यह हाथ उसकी परिचित है । इसी हाथ ने पिछले 3 हफ्तों से खाना खिलाया , नहवाया व प्यार दिया है । खरगोश को विश्वास है कि यह हाथ कभी उसका कुछ बुरा कर ही नहीं सकती । उस महिला के हाथों में खरगोश को देते वक्त लड़की की धड़कन कांप उठी । इन कुछ दिनों में ही वह लड़की उस खरगोश को बहुत ज्यादा पसंद करने लगी थी ।

उधर महिला ने उस खरगोश को हाथ में लेकर उसके पेट को चेक करने लगी । खरगोश के पेट पर हाथ रखते ही उस महिला के चेहरे पर एक क्रूर हंसी खेल गई ।

" मादा खरगोश और पेट में बच्चा भी है । इससे बहुत ही अच्छा काम होगा । "

यह बोलकर एक मिनट का भी समय व्यर्थ किए बिना ही उस महिला ने खरगोश के गले को जोर से दबाकर पकड़ लिया । तुरंत ही वह खरगोश पागलों की तरह छटपटाने लगा । उसके पैरों की छटपटाहट से कमरे में रखे मोमबत्ती की लौ कांपने लगी । वह लड़की इस भयानक विभत्स दृश्य को देख नहीं पा रही थी इसीलिए आँख बंद करके तुरंत अपनी हाथों से चेहरे को ढक लिया । इसके बाद ही गर्दन की हड्डी टूटने की आवाज और फिर प्यारी सी सुंदर खरगोश की शरीर पूरी तरह शांत हो गई । लड़की के शरीर की कंपकपी अब और भी बढ़ गई थी । किसी तरह कांपते हुए उसने अपने चेहरे से हाथों को हटाया ।

उसने देखा , उसके सामने रखे बड़े से पात्र में अब काला नहीं ताज़ा लाल तरल रखा हुआ था ।

" जाओ और अपने सभी कपडों को खोल कर नग्न हो जाओ क्योंकि चक्र में बैठना है । जैसा मैंने कहा था वैसा किया या नहीं । उस जगह पर हाथ तो नहीं लगाया । "

लड़की कांपते हुए बोली ,
" नहीं "

" और उस लड़के के शरीर से जो लाने के लिए कहा था? "

लड़की ने अब एक रुमाल को खोला और वहाँ से मुड़े हुए कुछ कागज को निकाला । और फिर कांपते हुए हाथों से उसे महिला की तरफ बढ़ा दिया । महिला ने सावधानी से उस मुड़े हुए कागज को खोला और फिर वहाँ से एक बाल को निकाला ।

" कहीं यह सिर का बाल तो नहीं है ? "

" नहीं , नहीं , सीने की है । जैसा आपने कहा था । "

लड़की की आवाज मानो आतंक से बैठ गई है । वह बहुत बार कोशिश कर रही है उस तरफ ना देखने की लेकिन फिर भी उसकी आँखे जमीन पर मरे हुए खरगोश की तरफ देखने से खुद को रोक नहीं पा रही है । उफ्फ ! खरगोश की आंखें मानो उसे ऐसे ही देख रही है जैसे इतने दिनों तक खाते वक्त देखती थी ।

" जल्दी जाओ, अब देर मत करो । समय बीत गया तो चक्र नहीं खुलेगा । जाओ जल्दी अपने कपड़ों को खोलकर आओ । "

वह लड़की कांपते हुए ही खड़ी हुई । समय आ गया है । इतने दिनों की प्रतीक्षा के बाद सही समय आ गया है । लेकिन वह जो कर रही है क्या सही कर रही है ? अब भी पीछे हटने के लिए टाइम है । अभी टाइम है इन सभी चीजों को छोड़कर घर लौटने की और फिर सब कुछ भूल कर एक नई शुरुआत किया जा सकता है । लेकिन उसी वक्त फिर उस लड़के का चेहरा लड़की के आँखों के सामने घूमने लगी । ओह ! उसका चेहरा , उसकी आँखे , उसकी हंसी , उसका वो शरीर । नहीं कुछ भी हो जाए वह उसे छोड़ नहीं पाएगी । उसे भूलकर वह नहीं रह सकती । इसके लिए चाहे कुछ भी करना.... वह लड़की और आगे कुछ सोच नहीं पाई ।

कांपते हुए उसने महिला से पूछा ,
" मैं बस यही पूछना चाह रही थी कि क्या सच में वह मेरा हो जाएगा? "

अब वह महिला बहुत ही जोरों से हंसने लगी । उस वक्त महिला को देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो नर्क के अँधेरे से साक्षात कोई पिशाचिनी चली आई है ।


" सब कुछ हो जाएगा । वह केवल तुम्हारा होगा । इस पृथ्वी में किसी दूसरी लड़की की तरफ वह नहीं देखेगा । वह तुम्हारे कहने से खड़ा होगा तुम्हारे कहने से बैठेगा । वह तुम्हारी हाथों का पुतला बन जाएगा । और तुम्हारे इस प्रेम के रास्ते में जो भी आएगी वह जल कर राख हो जाएगी । लड़की तुम चिंता मत करो वह लड़का अब से केवल तुम्हारा ही है । " .

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" तुम्हारी फ्लैट में ऐसे जलने की बदबू क्यों आ रही है ? "
आराध्या की तरफ देखकर राहुल ने नाक सिकोड़ते हुए पूछा ।

" जलने की बदबू , कहां ? और वैसे भी पूरे दिन अगर सिगरेट पिओगे तो ऐसी ही जलने की बदबू आएगी । "

" अच्छा , सिगरेट क्या केवल मैं ही पीता हूं , डार्लिंग तुम भी मेरा साथ देती हो । "
यह बोलते हुए राहुल ने पीछे से आराध्या को अपनी बाहों में जकड़ लिया ।

फिर उसके कान के पास धीरे से बोला ,
" खाली फ्लैट में छुपकर बॉयफ्रेंड को इनवाइट करना अच्छी बात नहीं है मैडम । "

आराध्या खुद को राहुल से छुड़वाने की कोशिश करने लगी ।
" क्या कर रहे हो । छोड़ो राहुल हमेशा अच्छा नहीं लगता । "

" अच्छा नहीं लगता मतलब । अच्छा लगना चाहिए । घर बुलाकर अगर मुझे कोई ट्रीट नहीं मिला तो मैं बहुत गुस्सा हो जाऊंगा । "

बोलते हुए एक हल्के धक्के से राहुल ने आराध्या को बेड पर लिटा दिया । अच्छा नहीं लगता । अच्छा नहीं लगता केवल कहने से कोई मान लेता है । आराध्या की यह शैतानी राहुल अच्छी तरह जानता है । शुरू होने से पहले थोड़ा मना करेगी फिर शुरू होते ही.. । बेड के सामने खड़े होकर राहुल अपना शर्ट खोलता रहा । धीरे-धीरे शर्ट के नीचे से किसी भी लड़की को लुभा दे ऐसा सिक्स पैक वाला बॉडी दिखाई देने लगा ।
शर्ट खोलते वक्त ही राहुल ने ध्यान दिया की आराध्या के चेहरे में थोड़ा परिवर्तन हो रहा है । आंख बंद करके आराध्य खुद ही अपने होठों को काट रही है । देखकर ऐसा लग रहा है कि कोई वस्तु उसकी शरीर के अंदर से ही उसे काट रही है । नहीं , ऐसे ट्रिक और काम नहीं आने वाले । पिछले दो सप्ताहों से आराध्या ने ऐसा करके ही राहुल को रोक रखा है । उसे छूते वक्त , पास बैठते वक्त इसके अलावा उसे अपने बांहों में भरते वक्त भी आराध्या ऐसे ही दर्द से सिकुड़ जाती है । लेकिन एक महीने पहले तो ऐसा नहीं था , उस वक्त तो आराध्या ही इन सबके लिए इंसेंस्ट करती थी । अब अपना शौक खत्म हो गया तो दूर कर दें ऐसा तो नहीं चलेगा । शेर को एक बार खून का नशा करवाकर फिर उसे कभी खून नहीं दोगे ऐसा कैसे होगा । राहुल ने शर्ट को फर्श पर फेंक दिया और फिर से एक बार आराध्या के चेहरे को देखा । अब भी चेहरा वैसा ही मुरझाया हुआ है ।

" Let's do it , आज मैं तुम्हारी सारी दर्द को खत्म कर दूंगा । "

देरी ना करते हुए आराध्या की तरफ राहुल लपक पड़ा ।और इसके बाद जो हुआ उसे राहुल ने कभी सोचा भी नहीं था ।
राहुल के कूदने के लिए ही मानो वह तैयार थी । बेड पर चढ़ते ही राहुल के गले को आराध्या ने जोर से पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया । फिर उसे सीधा लेटाकर उसके सीने पर आराध्या चढ़ बैठी । ये कौन है ? ये कौन सी आराध्या है ? और वो राहुल के गले को क्यों दबा रही है ?

" छोड़ दो मेरे गले को , छोड़ो । तुम ऐसे क्यों हंस रही हो ।
तुम्हारी आंखों की पुतलियां सफेद कैसे हो गईं हैं ।.... "

अब राहुल ने स्पष्ट सुना कि एक अनजाने भयानक आवाज में आराध्या बोल रही है ,
" मैं तुझे सावधान कर रहा हूं कि कभी भी मेरे शरीर पर हाथ मत लगाना । हरामी साले अगर फिर से हाथ लगाया तो मैं तुझे मार डालूंगी । "

यह कौन सी आराध्या है ? आराध्या किसकी आवाज में बात कर रही है ? आखिर आराध्या को हुआ क्या है ?
उस टाइम वैसे भयानक आवाज में गाली - गलौज को सुनकर और आराध्या के इस रूप को देखकर कोई भी यह मान लेगा कि उसके ऊपर भूत या चुड़ैल आ गई है । उधर राहुल की सांसे जब लगभग बंद होने ही वाली थी तब उसके मुंह से किसी तरह एक धीमी आवाज निकली ,,

" आराध्या , आराध्या "

अब काम हुआ । अपना नाम सुनते ही आराध्या के पूरे शरीर में मानो एक बिजली दौड़ गई । किसी मिर्गी के रोगी जैसे तुरंत राहुल के सीने से उतर कर वह बेड के नीचे फर्श पर गिर पड़ी । फिर फर्श पर ही थर - थर करके कांपती रही । कांपते - कांपते ही उसके मुंह से झाग निकलने लगी और कमर के नीचे का कपड़ा क्रमशः लाल ताजे खून से भीगता रहा । तब तक बिस्तर पर राहुल उठ बैठा था । वह तेजी से सांसे ले रहा था और उसके गले पर 10 उंगलियों की छाप स्पष्ट थी । लेकिन यह क्या , आराध्या को आखिर क्या हुआ है ? फर्श पर पड़े आराध्या को देखकर राहुल का शरीर कांप उठा । आराध्या के इस भयानक अवस्था को देखकर वह कुछ देर के लिए पत्थर सा बन गया । क्या करना है ? कैसे करना है ? कुछ भी उसके पल्ले नहीं पड़ रहा । लेकिन कुछ देर बाद ही जब आराध्या की शरीर और तेजी से कांपने लगी तब उसे यह बात याद आई । तुरंत ही जेब से मोबाइल को बाहर निकाला । फिर कांटेक्ट लिस्ट से नंबर निकालने में कुछ समय लगा ।

" हैलो पंडित दयाराम महाराज बोल रहे हैं ? मैं राहुल बोल रहा हूं सिंह साहब का लड़का । हाँ पिछले महीने मिलने आया था । पंडित जी मैं इस वक्त बहुत ही बड़ी मुसीबत में हूं । केवल आप ही इससे मुझे बचा सकते हैं । प्लीज कुछ कीजिए पंडित महाराज । "

इसके बाद फोन पर कुछ बातें हुई । राहुल ने पूरी घटना को संक्षिप्त विवरण में बताकर पंडित जी को यहां पर क्या हुआ है समझाने की कोशिश करने लगा ।

और फिर इसके बाद मोबाइल के लाउडस्पीकर से पंडित दयाराम के आवाज में मंत्र पाठ सुनाई दिया ।
" ॐ ह्रीं......................... "

उस मंत्र की आवाज से किसी जादू की तरह काम हुई । मिनटों में ही आराध्या का शरीर शांत हो गया । इसके बाद एक वक्त आराध्या की कंपकंपी भी बंद हो गई । केवल फर्श पर उसकी खून से लतपथ शरीर पड़ी रही ।

" आप के मंत्र से कार्य हो गया है पंडित महाराज । शरीर की कंपकंपी बंद हो गई है । खून का स्राव भी शायद बंद हो गया है । "

" काम हुआ है लेकिन कुछ ही समय के लिए । "
उधर से पंडित दयाराम महाराज की गंभीर वाणी गूंजी ,


" मुझे ऐसा लगता है कि कुछ बहुत ही भयानक गड़बड़ हुआ है । और ज्यादा विलंब करने से कोई फायदा नहीं । आज उसे और कोई परेशानी नहीं होगी । और हाँ कल ही उस लड़की को लेकर मेरे पास चले आओ । उसके ऊपर जिसकी नजर पड़ी है शायद वह बहुत ही खतरनाक है । "

" हम कल ही आपके पास आ रहे हैं । पंडित महाराज सब कुछ ठीक तो हो जाएगा ? उसे कुछ होगा तो नहीं ? "

इसके उत्तर में कुछ देर तक उस तरफ से कोई आवाज नहीं आई ।फिर कठिन आवाज में सुनाई दिया ।


" चिंता मत करो राहुल , देवी माता सभी की रक्षा करेगीं ।
उसे कुछ नहीं होगा । कल तुम बेटी को लेकर आओ मैं देखता हूं क्या किया जा सकता है । "......



अगला भाग क्रमशः .....