अस्वत्थामा ( हो सकता है ) - 10 Vipul Patel द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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अस्वत्थामा ( हो सकता है ) - 10

फिर शाम को जगदीशभाई अपनी कार लेकर अपने घर पहोचे । फिर अपनी गाडी से बाहर निकल के अपने घर मे जाने लगे । उस वक्त उसके हाथ मे एक सुटकेश था । घर के अंदर जाके उसने देखा की संध्या किचन मे रसोई बना रही है और मां टीवी पे सीरियल देखने मे व्यस्त है । फिर वो सीधे अपने बेडरूम मे चले गए । वहा बेडरूम में जाके उन्होंने अपनी जेब से चाबी निकाली और बेडरूम मे कोने में रहे बंद दरवाजे के ताले मे लगा के दरवाजा खोल के अंदर गए । यहा अंदर के कमरे मे जगदीश भाई ने अपनी पर्सनल लेब बनवाई थी । जहा उसके अलावा किसी को जाने की परमिशन नही थी । हा हर महीने मे एकाद बार संध्या वहा जाके साफ सफाई कर देती थी । बाकी वो कमरा बंद ही रहेता था और उसकी चाबी जगदिशभाई के पास रहेति थी । जगदीशभाई ने वहा जाके वो सूटकेश टेबल पे रख दी और फिर अपनी पेंट की जेब से वो कोंडॊम निकाला और उसमे से वीर्य का सारा प्रवाही निकालकर एक काँच की छोटी सी बॉटल में ले लिया । फिर उस बॉटल में से एक दो बूँद चोरस काँच के टुकडे पे गिरा के उसे माइक्रोस्कोप में ओबजर्व करने लगे । ईस तरह जगदीशभाई अपनी लेब में ही थे की संध्या ने आवाज दी की खाना लग गया है आ जाइये । और जगदीशभाइ थोडी देर के बाद वहा से बाहर निकले और फिर से वहा ताला लगा के खाना खाने के लिए चले गए । फिर रात मे जगदिशभाई और संध्या अपने बेडरूम मे बेड पे लेटकर बाते कर रहे थे । तभी संध्या जगदीशभाई के शर्ट के बटन खोलने लगी । ये देख के जगदीशभाई बोले आज रहेने देते है । आज मै बहोत थक गया हूँ । ये सून के संध्या बोली तुम ऐसा कैसे कर सकते हो जगदीश ? हम दोनो ने मिलके ये फैसला किया था ना की ये पूरा महीना हररोज हमारा मिलन होगा । और आज तो तेरवा दिन है । और तुम ही तो कहेते थे ना की पीरियड के पहेले दिन से गिनती सुरू करके उसके गयारवे दिन से अठारवे दिन के बिच स्त्री बीज छुट्टा पडने की अधिक संभावना होती है । और इन दिनो के बिच समागम करने से बच्चा रहेने कि संभावना बढ जाती है ।फिर वो हँसने लगी और बोली सो प्लीज मेरे वीर योद्धा खडे हो जाव । फिर संध्या जगदीशभाई के अंगो की मालिश करने लगी और अपने हाथो से उसके बदन को सहेलाने लगी । ईस वजह से जगदीशभाई उत्तेजित हुए और दोनो पति पत्नी के बिच समागम हुआ । समागम के बाद बेड पे लेटे हुए जगदीशभाई के हाथ पे अपना माथा टेक के संध्या भी लेट गई । फिर जगदीशभाई से बोली मान लो की आज ही मेरे अंडबीज और तुम्हारे सुक्राणू का मिलन हो जाएँ तो क्या इसी वक्त मेरे गर्भाशय मे अति छोटे से रूप मे बच्चा उत्त्पन्न हो जाएगा ? जगदीशभाई हँसते हुए बोले नहि ऐसे अचानक बच्चा प्रकट नही हो जाता । फिर संध्या को समजाते हुए जगदीशभाई बोले की अंडबीज और सुक्राणू के मिलन से गर्भ बनने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है । ये सुनके संध्या बोली तो ये गर्भ ही तो आगे जाके बच्चा बनता है ना । जगदीश भाई उसकी बात का जवाब देते हुए बोले हा ये सही बात है की ये गर्भ ही आगे जाके बच्चा बनता है । पर शुरुआत के दौर मे ये सिर्फ मांस का गोला होता है । इसमे जीवन तो चार पांच सप्ताह के बाद पनपता है । और गर्भ मे जीवन की शुरुआत होने की ये प्रक्रिया बहोत ही रोचक विषय है । ईस दौरान माता के शरीर मे बहोत सुक्षम पैमाने पे बहोत बडे बदलाव होने लगते है । जो हमारी समज से परे होते है ।एसि बाते करते करते जगदीशभाई ने संध्या की ओर देखा तो वो सो गई थी । ये देख के जगदीशभाई ने बेड के पास टीपाई पे रखा नाइट लेम्प बंध किया और वो भी आंखें बंध करके सोने की कोशिश करने लगे । पर आज उसे नींद नही आ रही थी । फिर वो यू ही अंधेरे मे आंखें खुली रखके ऊपर छत की ओर ताकते हुए बेड पे लेटे रहे । ईस हालत मे फिर धीरे धीरे उसे कब नींद आ गई उसे भी पता नही चला।

सुबह जगदीशभाई भगवदगीता का पठन करके अपने कमरे से बाहर निकले तभी उसके मोबाईल फोन की घंटी बजी | उसने स्क्रीन पे देखा तो डी.सी.पी. प्रताप का फोन था । जैसे ही जगदीशभाई ने फोन उठाया की प्रताप ने उससे कहा की यूनिवर्सिटी में बायोलोजि की लेब में ईश्वर की मृत्यु हो गई है । तु जल्दी से यूनिवर्सिटी आजा मैं यूनिवर्सिटी में ही हूँ । ये सून के जगदीशभाई के होश उड गए । वो अपनी बीबी और माँ को लेके तुरंत ही यूनिवर्सिटी जाने के लिए निकल गए । वहा पहोचके उन्होने देखा की वहा पुलिस के अलावा और भी बहोत सारे लोग जमा हो गए थे । जगदीशभाई ने देखा की ईश्वर पटेल की डेड बॉडी नीचे पडी हु़ई थी । ये देख के अचानक से जगदीशभाई की आंखों से आंसू बहेने लगे । पुलिस वाले किसी को भी बॉडी के पास नही जाने देते थे। फिर जैसे जैसे लोगो को प्रो. ईश्वर पटेल की मृत्यु की खबर मिलती गई वैसे वैसे लोग वहा जमा होते गए । जगदिशभाई वहा पहोचे ही थे तभी फोरेंसिक डिपार्टमेन्ट वाले भी वहा पहोच गए और पूरी लेब की जाँच सुरू कर दी । डि.सि.पी. प्रताप अपने ओफिसरो को इंस्ट्रक्शन देने मे व्यस्त थे । फोरेंसिक वाले एक ओफिसर ने देखा की लेब के वॉशरूम के कमरे की वॉशबेशिन मे तांबे की धातु के कुछ पत्र धुले हुए वॉशबेसिन मे ही पडे है । एसे विचित्र पत्र देख के उसने अपने पास खडे इन्सपेक्टर वसीम खान को बुलाके कहा ये देखिए सर ये क्या है ? वसीम खान ने भी वो ताम्रपत्र देखे । उसे भी उन पत्रो पे अंकित किए गए चिन्ह अजीब से लगे । फिर वसीम खान ने वो सारे पत्र फोरेंसिक लेब मे जाँच करवाने के लिए उस ओफिसर को अपने साथ ले जाने के लिए कहा । थोडी देर बाद पुलिस ओफिसरो ने स्थल पे प्राइमरी इंकवायरी कर ली उसके बाद डी.सी.पि. प्रताप के आदेश से इश्वरभाई की बॉडी को पोस्ट मोर्टम के लिए एम्ब्युलंस में रख के ले गए । एम्ब्युलंस मे ईश्वरभाई का छोटा भाई उत्तम , प्रो. जगदीशभाई और वाइस चानसेलर जादव सर भी बैठ गए । डी.सि.पि. प्रताप चौहाण भी एम्ब्युलंस के साथ ही होस्पिटल जाने के लिए अपनी पुलिस की गाडी लेकर के निकल गए । इधर संध्या और उसकी साँस इश्वरभाई की बीबी निरूपा बहेन को आश्वासन देने मे लगे थे । ईश्वरभाई की चार साल की छोटी सी बच्ची क्रिशा ये सब देख के घबरा गई थी। उस वक्त वहा यूनिवर्सिटी का सारा स्टाफ और सारे स्टूडण्ट एकत्रित हो चुके थे। पूरी यूनिवर्सिटी मे मातम छाया हुआ था । डि.सि.पि. के आदेश से यूनिवर्सिटी मे इन्सपेक्टर वसीमखान पूरजोश मे छानबीन कर रहे थे । ईस वक्त वो बायोलॉजी की लेब और उसके आसपास मे लगे हुए सारे सि.सि.टी.वी. केमेरो की फुटेज चेक करवा रहे थे । दूसरी ओर हॉस्पिटल मे इश्वरभाई की बॉडी का पी.एम. रिपोर्ट आ गया था जो उनकी मृत्यु कैसे हुई ये पता लगाने मे असमर्थ रहा था। और ये रिपोर्ट देख के हॉस्पिटल के बाहोश डॉक्टरो के दिमाग चकरा गए थे । पी.एम. की लीगल प्रोसेस पूरी करके इश्वरभाई के पार्थिव देह को उनके घर पे लाया गया । उस वक्त यूनिवर्सिटी से सब लोग उसके घर पे आ चुके थे। फिर इश्वरभाई के अंतिमसंस्कार की तैयारी होने लगी । जब उनकी अंतिम यात्रा निकली तब यात्रा के साथ बहोत सारे लोग थे उस वजह से रास्ते मे ट्राफिक जाम की स्थिति पैदा हो गई थी । फिर अंत मे स्मशान मे चिता पे लेटाया हुआ इशवरभाई का पार्थिव शरीर पंच महाभुतो मे विलीन हो गया । और धीरे धीरे लोग बिखरने लगे थे । आखिर मे जब इश्वरभाई की चिता की राख ठंडी पडने लगी तब वहा सिर्फ दो ही आदमी बैठे थे । वो थे प्रो. जगदीशभाई और बायोलोजि का स्टूडन्ट जिग्नेश ।

इधर युनिवर्सिटी मे लगाए गए सीसीटीवी केमेरो की फुटेज मे इन्सपेक्टर वसीमखान ने देखा की सुबह साडे छे बजे के आसपास यूनिवर्सिटी मे सबसे पहेले प्रो. ईश्वर पटेल दाखिल हुए । उसके आने से वोचमैन ने जैसे ही मेइन गेट खोला की सीधा वो अपनी कार लेके बायोलॉजी की लेब के पास पहोचे और वहा अपनी कार पार्क करके लेब का ताला खोल के लेब के बाहर अपने चप्पल उतारके लेब मे दाखिल हुए । इश्वरभाई के आने के लगभग बीस मिनिट बाद शिर से पाव तक ढका हुआ एक बुरखाधारी व्यक्ति लेब के बाहर लगे केमेरे मे दिखाई दीया । बुरखे की वजह से ये पता लगाना मुस्किल था की वो आदमी है या औरत है । उसके हाथ मे कुछ चीजे थी जो उसने उस लेब के मेइन डोर के बाहर रखी और दरवाजा खटखटाया । ईस तरह दो तीन बार दरवाजा खटखटा के वो बहोत तेजी से वहा से चला गया । दूसरी ओर उसके जाने के बाद दरवाजा खुला और प्रो. ईश्वर पटेल बाहर निकले । पर बाहर निकलते ही उनका दाया पैर वहा रखी गई उस चीज पे पडा । उस चीज से जडप से पैर हटा के उन्होने देखा तो वो वही गुम हो गए हुए ताम्रपत्र थे । लेकिन अभी ईश्वरभाई उन पत्रो को देख ही रहे थे की तुरंत कुछ ही देर मे उसके शरीर से बहोत सारा पसीना छूटने लगा । ये देख के उन ताम्रपत्रो को वैसे ही पडे रहेने देके वो सीधे ही दौडते हुए लेब से बाहर निकले और लेब की चारो और ऐसे घूमने लगे जैसे कोई छिपा हुआ हो उसे ढूंढ रहे हो । फिर थोडी देर ऐसे छानबीन करके वापस वो लेब के मेइन डोर के पास आए और वो सारे ताम्रपत्र उठा के लेब मे चले गए । फिर लेब के अंदर लगे केमेरे की फुटेज मे वसीमखान ने देखा तो लेब के अंदर ईश्वर पटेल वो सारे ताम्रपत्र लेके त्वरा से वोशरूम मे दाखिल हुए । फिर वॉशरूम मे क्या हुवा होगा उसके बारे मे तो वसीम खान को अंदाजा लगा के ही पता लगाना था । क्यूकी वॉशरूम केमेरे के कवरेज से बाहर था । फिर थोडी देर बाद ईश्वर पटेल खाली हाथो ही वॉशरूम से बाहर निकले । और वहा लोबी मे ही लेब की दीवाल से दोनो हाथ टेका के धडाम से एसे नीचे बैठ पडे मानो गिर पडे हो । ये देख के ऐसा लगता था मानो ईश्वरभाई का अपने शरीर पे कोई कंट्रोल ही ना रहा हो । फिर बैठे बैठे उन्होने किसी को फोन लगाया । और फोन पे ही लगभग पंदरा मिनिट तक बात की होगी तभी अचानक उनके हाथ से फोन गिर गया और वो वहा ही फर्श पे लंबे होके गिर गए । वसीमखान जानते थे की ईश्वरभाई ने आखरी फोन कोल अपनी बीबी निरूपा को किया था । और ईश्वर पटेल की मौत के तुरंत बाद निरूपा ने ही यूनिवर्सिटी पहोच के प्युन लालजी को ये बात बताई थी । ईस वक्त केमेरे मे वसीम खान ने देखा तो निरूपाबहेन और प्युन लालजी लेब मे दाखिल हो रहे थे । फिर लालजी ने सबसे पहेले पुलिस स्टेशन फोन करके पुलिस को बताया और बाद मे सबको बारी बारी फोन करके वहा पे बुला लिया था । इन्सपेक्टर वसीम खान ने युनिवर्सिटी मे लगे सारे केमेरौ की फुटेज चेक करवाई पर वो बुरखाधारी व्यक्ति सिर्फ लेब के बाहर लगे केमेरे मे ही दिखाई दी थी । ये देख के वसीम खान ने अपने ओफिसर जाडेजा से कहा की ये जो कोई भी है वो ईस यूनिवर्सिटी कैम्पस से पूरी तरह वाकेफ है । इसलिए यहा लगे सारे केमेरो से अपने आप को बचा के यहा तक पहोचा है । और उसे पहेले से हि मालूम था की ईस काम को अंजाम देने के लिए उसे कम से कम लेब के बाहर लगे केमेरे के सामने तो आना ही पडेगा इसलिए पहेले से ही बुरखे मे सज्ज होके आया है । फिर जाडेजा को समजाते हुए वसीम खान बोले एक बात तो तै है की मेइन गेट पे सिक्युरिटी होने के कारण ये बुरखाधारी वहा से तो दाखिल नही हुआ है । फिर जाडेजा को आदेश देते हुए वसीम खान ने कहा तुम ये पता लगाओ की मेइन गेट के अलावा यूनिवर्सिटी कैम्पस मे आसानी से कहा से दाखिल हुआ जा सकता है । ये सुन के जाडेजा और दो कॉन्स्टेबल पूरा यूनिवर्सिटी कैम्पस छान मार ने के लिए वहा से निकल पडे । और वसीम खान और दूसरे ऑफिसर सि.सि.टी.वी. केमेरो का सारा डेटा लेकर के पुलिस डिपार्टमेंट की डेटा एनालिसिस विंग की ओर रवाना हुए ।

उसी दिन पी.एस.आइ. सावंत ने किशनसिंहजी के आसिस्टंट कुमार को अहमदाबाद एयरपोर्ट से अरेस्ट कर लिया । कुमार नकली पासपोर्ट बनवाके अपनी बीबी और बच्चे को लेकर ये देश छोड के श्रीलंका भाग जाना चाहता था । इसलिए उसने कोलोंबो की फ्लाइट की टिकिट भी बुक करवा ली थी । पर वो अपने प्लान मे सफल हो पाए उससे पहेले पुलिस ने उसे ढूंढ निकाला । अब वो इन्सपेक्टर वसिम खान के सामने जैल में बैठा कांप रहा था । तभी वहा खडे पी.एस.आइ. जडेजा ने कुमार को दो चार लाते लगा दी । और बोला क्यू बे लौंडे पुलिस वालो के साथ लुपा छूपी खेलेगा हा.. ? कुमार को यू पीटता देख जेल के बाहर बैठे उसकी बीबी और बच्चा रोने लगे । तभी वसीम खान ने जाडेजा को बाहर भेज दीया और कुमार से कहा किशनसिंहजी की मौत क़े बारे मे तू जो कुछ भी जानता है वो सब सही तरीके से बता दे वरना ईस वक्त तो मैने जाडेजा को रोक लिया पर दोबारा मै भी नही रोक सकूगा समजा ? तभी कुमार कांपता हुआ बोला मे आप को सब सच सच बताऊँगा पर आप पहेले मुजसे वादा कीजिए की आप मेरी बीबी और बच्चे को कुछ नही होने देंगे । वसीम खान बोला ठीक है हम तुम से वादा करते है की तुम्हारी बीबी और बच्चे की सुरक्षा की जिम्मेदारी अबसे हमारी है हम उसे एक खरोच तक नहि आने देंगे अब बताओ क्या हुआ था उस दिन । कुमार ने वसीम खान को बताया की उसने चावडा सर को नहि मारा है । ये सुन के इन्सपेक्टर वसीम खान ने उससे पूछा की तो फिर तुम उस रात वहा से क्यू भागे थे ? कुमार ने बताया उस वक्त मेरी जान भी खतरे मे थी इसलिए मुजे चावडा सर ने ही वहा से भाग जाने के लिए कहा था । ये सुन के वसीम खान को कुछ समज मे नही आया । और वो कुमार को देखता रहा । ये देख के कुमार बोला मे आपको पूरी बात सुनाता हू सर । सुनिए ...