Ashwtthama ho sakta hai - 4 books and stories free download online pdf in Hindi

अस्वत्थामा (हो सकता है) - 4

फिर थोडे ही दिनो मे मालती अपने मिलनसार स्वभाव और पढाई करवाने की अपनी बहेतरिन और अनोखी रीत से वो यूनिवर्सिटी के स्टाफ और स्टुडण्ट के साथ घुलमिल गई । ईस दौरान जगदीशभाई और मालती की दोस्ती भी काफी मजबूत हो चुकी थी । एक दिन मालती अपने क्लासरूम में हिस्ट्री की पाठ ले रही थी। तभी उसने देखा की पहेली बेंच पे बैठी हुई किशनसिंहजी की बहेन अर्चना बैठी बैठी रो रही थी। मालती मेडमने पूछा क्या हुआ अर्चना ? तुम क्यू रो रही हो । क्या बात है ? तभी उसकी बगल मैं बैठी पल्लवी बोली मैडम उसे अपने भाई की बहोत याद आ रही है । इसलिए वो रो रही है ।ये सुन के ईस वक्त मालती ने अर्चना के दर्द को समजकर उसे थोडी देर तक यू ही रोने दीया । जब रोकर अर्चना का दिल हलका हो गया तब अर्चना बोली, मैडम आज ढाई महीने हो गए है लेकिन मेरे भाई की मौत के बारे में पुलिस अभी तक कुछ पता नहीं लगा पाई है, और नाहीं उनके आसीस्टंट कुमार को ढूँढ पाई है । ये बात करते करते अर्चना की आँखों में गुस्सा आ गया और वो गुस्से में बोली , मैडम , मैं मेरे भाई के हत्यारे को कभी भी माफ नहीं करूँगी । तभी वहा बैठा जिग्नेश रावल नाम का एक स्टूडण्ट बोला मेडम, न्यूज चेनलो में बता रहे थे की रामनगर गाव के लोग चावडा सर की मौत के पीछे अश्वत्थामा को कारनभूत बता रहे है । तो क्या अश्वत्थामां वाली बातमें कोई तथ्य हो सकता है ? ईस बारे मैं आप का क्या कहेना है ? मालती मैडम थोडी देर तक सोचती रही फिर बोली , मैं अर्चना के भाई की मौत के बारे मे तो कुछ नहि कहे सकती । पर अश्वत्थामा के बारे मे मेरी राई बताऊ तो मै तो कहेति हूँ सायद हो भी सकता है । मेरा तो मानना है की ईस दुनिया मैं किसी भी सक्यता को नकारा नहीं जा सकता है । सायद अश्वत्थामा अब तक जीवित भी हो सकता है । और सायद नही भी हो सकता । सदिओ पहेले ऐसा आदमी सायद हुवा हो और सायद ना भी हुवा हो । हम इतिहास के बारे मे जो ये महाभारत पढ़ते है उसके मुताबिक सायद इसमे दर्शाई हुई घटनाए घटी हो , ऐसा हो सकता है । और ऐसी कोई घटनाए ना घटी हो ऐसा भी हो सकता है । महाभारत में दर्शाए हुए सभी पात्र सायद उस जमाने में हो चुके हो ऐसा हो सकता है । और सायद ऐसा एक भी पात्र ना हुवा हो ऐसा भी हो सकता है । सायद महाभारत संपूर्ण सत्य आधारित ग्रंथ हो ऐसा हो सकता है । और होने को तो ये महागाथा महर्षि वेदव्यास की कल्पना मात्र भी हो सकती है । तभी जिग्नेश ने पूछा ये सिर्फ कल्पना कैसे हो सकती है मैडम ? ये सब हुवा हो इसके बारे में ढेर सारे प्रूफ पुरातत्वविदो को मिले है । तभी मालती ने बताया तुम सही कहे रहे हो जिग्नेश , की ये सब पौराणिक नगर और ऐसे लोगो के होने के तो बहोत सारे पुरावे मिले है । पर महाभारत मे दर्शाई गई सभी घटनाएँ वैसे ही घटी हो ये जरूरी नही है । इतिहास के बारे मे मेरा अब तक का अभ्यास ये कहेता है की इतिहास हंमेशा विजेता लिखते है । इसी वजह से वो एक तरफा होने की पूरी संभावनाएँ हो सकती है । और इसलिए ये महाभारत की गाथा भी कौरव और पांडवों के बिच हुए युद्ध में पांडवों की विजय के बाद उनकी इच्छा के अनुसार लिखी गई हो ऐसा भी हो सकता है । और ईस वजह से ईस ग्रंथ में कौरवों कों जितना बुरा बताया है उतने बुरे वो सायद ना भी हो । और पांडवों को जितना अच्छा बताया है उतने अच्छे और भले वो लोग सायद ना भी हो ऐसा भी हो सकता है । होने को तो कुछ भी हो सकता है । अभी मालती मैडम आगे और कुछ बोले उससे पहेले प्रियड पूरा होने की बैल बजी और ईस वजह से मालती मैडम ने कहा की चलो अभी ये सब बाते यहा तक ही रखते है फिर कभी इसपे विस्तार से चर्चा करेंगे । तभी जिग्नेश बोला मैडम महाभारत के बारे मे मेरे दिमाग में कुछ सवाल है आप हा कहे तो मैं पूछूँ ? तभी मालती मैडम बोली अभी नहीं जिग्नेश अभी प्रियड पूरा हो गया है । और मे जानती हूँ की तुम्हारे सवालों के जवाब देने मे मुजे घंटों लग जाएँगे । क्यूँकि पुराने इतिहास के बारे में जानने में तुम्हें औरो से ज्यादा ही दिलचस्पी लगती है । ये सून के अर्चना की बगल मे बैठी पल्लवी बोल पडी दिलचस्पी तो होगी ही ना मैडम । ये साहबजादे ओफिसियलि तो बायोलोजि के स्टूडण्ट है फिर भी यहा हिस्ट्री की क्लास मे अपनी चांच डूबाने जो आ जाते है । ये सुन के मालती मेडम आस्चर्यचकित हो गए । फिर उन्होंने जिग्नेश से पूछा क्या ये बात सही है ? जिग्नेश बोला हा मैडम ये बात सही है । क्यूँकि की मेरे पापा एक डॉक्टर है । जुनागढ मे हमारी बहोत बडी हॉस्पिटल है । इसीलिए मेरे पापा चाहते है की मे मेडिकल फिल्ड मे ही आगे बढ़ू । और हिस्ट्री के बारे मे जानना मेरा शौख (इच्छा) है । इसलिए मे यहा अपने पापा का सपना और मेरा शौख पूरा करने की कोशिश कर रहा हू । जिग्नेश की ये बात सुनकर मालती मैडम इम्प्रेस हो गए और उससे बोले जिग्नेश तुम एक काम करो , तुम यदी सच मे ही इतिहास को विस्तार से समजना चाहते हो तो कोलेज के बाद टाइम लेकर मेरे घर पे आ जाओ। इतिहास के बारे में तुम्हें बताने के लिए मेरे पास बहोत कुछ है । फिर क्लास रूम के बाहर निकलते निकलते मालती मैडम बोली जिग्नेश के अलावा और किसी को भी इतिहास को विस्तार से समजने की इच्छा हो तो उसका भी मेरे घर पे स्वागत है ।

प्रियड पूरा होने की थोडी देर बाद जिग्नेश और उसका फ्रेंन्ड सर्कल युनिवर्सिटी के कैम्पस में पैड के नीचे बैठे हुए थे। तभी उसके दोस्त आरव ने अपने पास बैठे हुए प्रितेश को बोला आजकल जिग्नेस अपने नाम के मुताबिक पढ़ाई मैं कुछ ज्यादा ही जिग्नाशा वृति दिखा रहा है। तभी जिग्नेश शरमाते हुए बोला नहीं यार ऐसा कुछ नहि है । ये तो सिर्फ जनरल नॉलेज बढ़ाने के लिए मैडम से युहि पूछता था । तभी जिग्नेश की गर्ल फ्रेन्ड पल्लवी हँसते हुए बोल पडी जब से मालती मैडम यहा पे आए है तब से ईस साहब के अंदर के पूरातत्वविद, जो अब तक सोए हुए थे अचानक से जाग गए है। और ईस बात पे अर्चना के अलावा वहा पे बैठे सारे फ्रेंन्डस जोर जोर से हँस पडे । फिर उनमे से अभिमन्यु बोला चलो सब लोग कैंटीन में चलते है । कुछ नास्ता करते है । ये सुन के सब लोग बारी बारी खडे होने लगे पर पल्लवी और जिग्नेश वैसे ही बैठे रहे । उन दोनो को यू हि बैठा हुआ देख के नताशा बोली तो अब आप दोनो महानुभावो के लिए नास्ता यहा लाना पडेगा क्या ? तभी वो दोनो एक साथ बोल पडे हमे भूख नहि है ? ये सुन के प्रितेश बोला इन दोनो को यहा ही रहेने दो नताशा , हम सब चलते है । वैसे भी ये दोनो प्यार के भूखे है । नास्ते से इनका पेट नहि भरेगा । और फिर पल्लवी और जिग्नेश को वहा अकेला छोड के सब लोग कैंटीन की ओर जाने लगे । जैसे ही वो लोग थोडे आगे बढे की ईस ओर तुरंत पल्लवी ने जिग्नेश के होठो को चूम लिया । चलते चलते पीछे मुडके अर्चना ने ये द्रस्य देख लिया और वो वहा ही खडी रहे गई । अर्चना को यू खडी रहेकर उन दोनो को ताकते हुए देखकर नताशा बोली अब तू क्यू पुतले की तरह यहा खडी हो गई ? चल चल जल्दी चल उन दोनो को ऐसे देख के हमारा पेट नहि भर जाएगा समजि ? और अर्चना का हाथ खिचके नताशा उसे अपने साथ ले गई ।

अहमदाबाद पोलिस कमिश्नर बिल्डिंग में डी.सी.पी. प्रताप चौहाण अपनी ऑफिस में बैठे बैठे अपने काबिल और बाहोस ऑफिसर पी. आइ. वसीम खान के आने का इंतजार कर रहे थे । तभी इन्सपेक्टर वसीम खान उसके सामने आकर सैल्यूट मारके खडे रहे । तभी प्रताप साहब ने एक फाइल उसके सामने टेबल पर रखी और वो बोले , देखो खान , मैं चाहता हूँ की मेरे दोस्त किशन का ये केस जल्द से जल्द सोल्व हो । कपूर ने ईस केस के बारे में वहा यूँ.पि. में सारी छानबीन कर के ईस फाइल को मेरे पास भेजा है । और ईस फाईल को पूरी तरह से पढने के बाद मैं और कपूर ईस नतीजे पे पहोचे है की कई ना कई ईस मर्डर के तार यहा अहमदाबाद में जुड़े हुए है ।क्युकि जी.पी.एस. लोकेशन के मुताबिक किशन का मोबाईल आखरी बार यहा अहमदाबाद में ही सक्रिय हुवा था । और कपूर का मानना है की किशन का मोबाईल सायद उसका लापता आसिस्टंट कुमार ही ले गया होगा । इस वजह से कुमार के यहा होने के चांस ज्यादा है । और कपूर ने एक महत्वपूर्ण बात ये बताई है की पुलिस को कुमार का जो मोबाईल मिला है उसकी जाँच से पता चला है की कुमार कोई रिचार्ड नाम के आदमी के संपर्क मे था । और ईस रिचार्ड के बारे मे आइबी (इंटेलिजंस ब्यूरो) से जानकारी मिली है की ये आदमी अमेरिकी गुप्तचर एजंसि CIA का एजंट है । और बिना कोई सबूत छोडे ह्त्या करवाने मे CIA वाले एक्सपर्ट है । इसलिए इसमे कही CIA का भी हाथ हो सकता है । तो मैं चाहता हूँ की हमारी ओर से ये केस तुम हैंडल करो । वसीम खान ने कहा ठीक है सर । फिर प्रताप साहब अपने टेबल पर पड़ी फाइल की ओर इशारा करके बोले इस केस कि सारी डिटेल्स ईस फाइल में है । एक बार तुम ये फाइल ध्यान से देख लो और जल्द से जल्द अपने सूत्रो को ईस केस को सोल्व करने के काम पे लगा दो । वसीम खान यस सर बोलके टेबल पे पड़ी फाइल उठाके अपने साहब को सेल्यूट मार के वहा से चला गया ।

जगदीशभाई के घर पे सुबह सुबह दूध वाला दूध देने आया । आज महीने का आखरी दिन होने के कारण संध्या खाली तपेलि और दूध के हिसाब के पैसे लेकर दूध लेने गई । उसका महीने का दूध का हिसाब पच्चीस सौ रुपिया होता था । पर संध्या के पास छुट्टे ना होने के कारण उसने हजार हजार की तीन नोट दूध वाले को दि । ये देख के दूध वाला बोला मैडम छुट्टा पच्चीस सौ रुपिया दो ना । इतनी सुबह सुबह मैं आपको पांचसो रुपये कहा से वापस दूंगा ? दूध वाले की बात सुनके वो वापस जगदीशभाई के पास गई और बोली आपके पास पाँच सौ रुपये खुल्ले होंगे ? जगदीशभाई नाइट ड्रेस मे खुर्सी पे बैठे बैठे न्यूज पेपर पढ रहे थे , वो बोले हा होगे । वहा रेफ्रिजरेटर पे बटवा पडा है उसमे से ले लो । संध्या वहा बटवे से पैसा निकाल ने लगी तभी उसने बटवे में ऐसा कुछ देखा जिसे देखते ही वो अपना मुँह दो बार नकार में हिलाकर स्वगत ही बबडी “ ये आदमी भी ना “ । फिर जडप से दूध वाले का हिसाब निपटाके बटवा लेकर जगदिशभाई के पास आइ और बटवे से कोंडॊम के दो पॉकेट निकाल कर बोली वैसे तो बड़े धर्मात्मा बनते फिरते हो । और बटवे में ये कोंडॊम के पॉकेट रखने में कोई लाज शर्म नहीं आती है ? क्यू ? फिर हँसते हुए बोली एक सच बात बताऊं , मैं आज तक आप को पूरी तरह से समज ही नहीं पाई हूँ की आप किस प्रकार के आदमी है । संध्या से बटवा और कोंडॊम के पैकेट लेते हुए जगदीशभाई रोमैंटिक अंदाज में बोले ये तो सुरक्षा कवच है मेरी जान । जो सौ परसेंट सुरक्षा की गेरेंटी देते है । उसी वक्त जगदीशभाई कि मां कमरे से बाहर निकलकर वहा आइ । उसे बाहर आते देखते ही जगदीशभाई जडप से कोंडॊम और बटवा जेब मैं डालके न्यूज पेपर पढ़ने लगे । और संध्या भी अपनी साडी के पल्लू से अलमारी की सफाई करने का दिखावा करने लगी । तभी उसकी सासुमाँ संध्या के पास जाकर बोली , बेटी , घर मे मसोते (पोछा) का अकाल पडा है क्या ? ईस बात का जवाब देते वक्त संध्या की जुबान लड़खड़ाने लगी और वो बोली जी वो नहीं मां वो तो यहा थोड़ी सी धुल जमी देखी तो साडी के पल्लू से , ऐसा बोलते हुए वाक्य अधूरा छोड़ के जल्दी से वो किचन में भाग गई । फिर माँ ने जगदीशभाई से पूछा तू बहु से जान की गेरेंटी के बारे में क्या बात कर रहा था ? ये सुन के जगदीशभाई के तोते उड़ गये और वो लड़खडाती हुई जुबान से बोले जी, वो, मां , जी, वो, मां, मैं संध्या को बता रहा था की हमारे शहेर के पुलिस वाले नागरिकों की जान की हिफाजत करने की गेरेंटी देते है । एसा बोलके वो जल्दी से अपने कमरे में चले गए । तभी जगदीशभाई की माँ आस्चर्यचकित हो के अकेली अकेली बोल पडी ये पुलिस वाले भी गेरेंटी कब से देने लगे ?

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