अस्वत्थामा ( हो सकता है ) - 6 Vipul Patel द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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अस्वत्थामा ( हो सकता है ) - 6

इन्सपेक्टर वसीम खान पोलिस चौकी मैं अपनी ओफिस मैं अकेले बैठे बैठे किशनसिंहजी की मृत्यु के केस की फाइल सातवी बार पढ रहे थे । और पढने के साथ साथ कागज पे कुछ टपका रहे थे । थोडी देर बाद फाइल को पूरा पढ़ने के बाद उसने अपने पी.एस.आइ. सावंत को ऑफिस मैं बुलाया । और जिस कागज पे फाइल पढ़ने के साथ साथ वो कुछ लिख रहे थे वो कागज सावंत को देते हुए बोले देखो सावंत ईस कागज में मैंने कुल १७ लोगों के नाम लिखे है । और ये सभी किसी ना किसी तरह से किशनसिंहजी से जुडे हुए है । तो मैं चाहता हु की तुम हरेक के बारे मे उनके जन्म से लेकर के अब तक की उनकी सारी करम कुंडली निकालो । हमारे सारे स्टाफ को और हमारे सभी बातमिदारो को तुम अभी ईस काम पे लगा दो । सावंत इन्सपेक्टर वसीम खान के सामने खुर्शी पे बैठकर कागज पे लिखे सारे नाम देखने लगा । फिर सारे नाम देखने के बाद उसने इन्सपेक्टर वसीम खान को कहा सर इनमें मे से एक नाम को छोड के बाकी के सबकी करम कुंडली निकाल के , मैं कुछ ही दिनों में आपको सौप दूंगा । वसीम खान बोला तुम जिस नाम को छोडने की बात कर रहे हो ना सावंत , मैं चाहता हूँ की तुम सबसे पहेले उसी की करम कुंडली निकालो । ये बात सुनके सावंत के मुँह पे पसीना आ गया और वो घबराकर बोला, क्यू साहब आप मेरी नौकरी कि छूट्टी करवाने पे तुले है । वसीम खान गंभीर होकर बोला तुम्हारी नौकरी को कुछ नहीं होगा ये मेरा वादा है । फिलहाल तुम मैं जो कहेता हूँ इतना करो , ठीक है ? सावंत खड़ा होके बोला ठीक है सर । आप कहेते है तो मैं इन सबकी इन्फॉर्मेशन कलेक्ट करके आप से फिर मिलता हूँ । और वो अपने साहब को सैल्यूट करके वहा से चला गया ।

ईश्वर पटेल अपनी बायोलोजि की लेब मैं घंटों तक बैठ के उस अजनबी आदमी ने दिए हुए ताम्रपत्रो का अध्ययन करने लगे । वो उस ताम्रपत्रो पे उपसाए हुऐ छोटे छोटे चित्र और अक्षरो जैसे उस संकेतों को समजने की कोशिश करते थे । अब उनका ध्यान विध्यार्थिओ की पढाई पे कम और इन ताम्रपत्रो पे ज्यादा रहेने लगा था । और ईश्वर सर में आया हुआ ये परिवर्तन ओर किसी को दिखता हो या ना दिखता हो पर जिग्नेश को साफ साफ दिखता था । खिडकी से उसने देखे हुए उस ताम्रपत्रो के बारे मे जानने के लिए जिग्नेश की दिलचस्पी भी धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी। एक दिन प्रो. ईश्वर पटेल अपनी हररोज की प्रणाली के मुताबिक सुबह साडे छे बजे सबसे पहेले यूनिवर्सिटी पहोच गए । जब की यूनिवर्सिटी का ओफिसियल टाइम आठ बजे का था । लेकिन प्रो. ईश्वर पटेल ने जब से नौकरी जोइन की थी तबसे उसका यही क्रम रहा था की सुबह यूनिवर्सिटी मे वो सबसे पहेले दाखिल होते थे । ईस वजह से कई प्रोफेसर उसे यूनिवर्सिटी फर्स्ट कहेके भी बुलाते थे । आज भी वो लेब में अकेले बैठे बैठे मूल संस्कृत स्लोक और उसके नीचे उसका हिन्दी भाषान्तर किया हुआ था ऐसी महाभारत की किताब पढ रहे थे। और उसके टेबल पर वो ताम्रपत्र पडे थे। ऐसे महाभारत की पढाई करते करते लगभग तीन चार घंटे पसार हो गए थे । तभी अचानक लेब के डोर को बिना नोक किए और बिना परमिशन लिए जिग्नेश एकदम अचानक से लेब में दाखिल हो गया । जिग्नेश को यू अचानक लेब मै आया हुआ देख के ईश्वर सर टेबल पे पडे उस ताम्रपत्रो को छुपानेकी कोशिश करने लगे। उसने उन पत्रो को जल्दी से महाभारत की किताब के नीचे छिपा दीया । लेकिन जिग्नेश ने उसे वो ताम्रपत्र छिपाते देख लिया था । वो ईश्वर सर के पास आया और बोला सर यदी हमारे दिमाग मे किसी चीज के बारे मैं जानने की जिग्नाशा जन्मे तो हमे क्या करना चाहिए ? ईश्वर सर ने जवाब दीया अवश्य ही हमे उसके बारे में जानने की कोशिश करनी चाहिए । ये सून के जिग्नेश बोला तो फिर सर प्लीज आप मुजे बताईये ना की इस किताब के नीचे वो धातु के पन्नो में ऐसा क्या है जो आप उनमें इतने डूबे रहेते है । तभी ये बात सून के ईश्वर सर चमके और गुस्सा होकर बोले । देखो जिग्नेश मै तुम्हारी जिग्नाशा को समजता हूँ पर तुम ईस ताम्रपत्रो से जीतने दूर रहोगे उतना ही तुम्हारे लिये अच्छा रहेगा समजे ? ईस बारे में मैं तुमसे ओर कुछ बात नहीं करना चाहता । और दोबारा तुम भी ईस बात का जिक्र किसी के भी सामने मत करना । इसी मे तुम्हारी भलाई है । अब तुम जाओ यहा से । ईश्वर सर को ईस तरह गुस्सा होते जिग्नेश ने पहेली बार देखा । और वो चुपचाप वहा से चला गया ।

स्टाफ रूम में प्रो. ईश्वर पटेल को छोड़कर यूनिवर्सिटी के सारे प्रोफ़ेसर वहा एक्ठठा हुए थे । तभी वाइस चांसेलर जादव सर के कहेने पे लालजी प्युन ईश्वरसर को बुलाके अपने साथ लेकर आया। और जादव सर ने प्युन को बोलके सबके लिए नास्ता मंगवाया । थोडी देर बाद प्युन सबके के लिए नास्ता लेके आ गया । नास्ते में खमण , पकौडे , दालवडा , सैंडविच और दाबेलि वगेरे था । जिसको जो जो पसंद था उसने वो चीजे खाने के लिए लेली । सब बडे से मीटिंग टेबल के आसपास खुर्सिओ में बैठ के नास्ता कर रहे थे। स्टाफ रूम में सामने दीवार पे लगी टीवी पे न्यूज चैनल चल रही थी । उसमे केरल के थिरुवंतपुरमस्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर में निकले बेश किमती खजाने के बारे मे लगातार समाचार आ रहे थे । और मंदिर मैं स्थित कई सारे वॉल्ट मैं से वॉल्ट B के दरवाजो पे दौरे गए सापो के चित्र न्यूज चैनल की चर्चा का विषय बने थे । न्यूज चैनल की एंकर बता रही थि की अस्ठ्ठमंगल देवप्रस्थानम (हिंदु ज्योतिषीओ की कमिटी की एक शाखा) मंदिर के इस वोल्ट को खोलने के खिलाफ है । और उनकी मान्यता है की ईस वोल्ट को खोलने से बहोत बड़े संकट का सामना करना पड़ेगा । और वॉल्ट के दरवाजो पे दौरे गये भयंकर साँप के चित्र इसकी ओर ही इसारा करते है । न्यूज एंकर बता रही थी की अभी तक तो प्रसाशन ने ईस वॉल्ट को ऐसे ही रहेने दीया है । आगे कोर्ट के आदेश के अनुसार कार्यवाही होगी। और फिर ईस वोल्ट को लेकर के यहा गुजरात यूनिवर्सिटी के स्टाफ रूम मैं भी चर्चा शुरु हो गई। प्रोफैसर भट्ट बोले सायद उस वॉल्ट में कोई पुराण कालिन घातक सस्त्र भी हो शकते है । तभी जादवसर बोले अब तक जितना भी खजाना मिला है उससे कई ज्यादा कीमती खजाना सायद ईस वॉल्ट में हो सकता है। तभी वहा कोने मैं टेबल पे बैठा प्युन लालजी अपने एक हाथ को फण चढ़ाए हुए नाग की तरह रख के बोला, सर उस वॉल्ट में सायद नागमणि होगा । मैंने नागिन सीरियल मे देखा है की जहां नागमणी होता है वहा एसे ही नाग का चित्र दौरा होता है । ये सुन के वहा बैठे सभी हँसने लगे । तभी गुजराती की प्रोफ़ेसर मिसिस डाभी बोली ज्योतीष यदी उस वॉल्ट को खोलने से मना कर रहे है तो उसके खिलाफ जाके उस वॉल्ट को खोलने का खतरा नही उठाना चाहिए । उसकी बात सुनके प्रो. ईश्वर पटेल अपने अनोखे अंदाज में बोले जब तक मैं जानता हूँ तब तक दरवाजे खोलने के लिए ही बनाए जाते है । जिसने भी ईस वॉल्ट का निर्माण किया होगा उसने इसी आसय से ये दरवाजे बनाये होगे ताकी कभी ये खोले जाए । यदी वो चाहते की कभी ये वॉल्ट खुले ही नहि और उसमे जो भी है वो किसी के सामने ही ना आए तो सायद उस वॉल्ट के अंदर जो भी है उसे या तो नष्ट कर दीया होता या दफना दीया होता ईस तरह वॉल्ट बना के हिफाजत से ना रखा गया होता । और फिर जादव सर की ओर देख के इश्वरभाई बोले आप सायद सही कहे रहे है । उस वॉल्ट में सायद बेश कीमती खजाना हो शकता है । पर वो सोने , चांदी जैसी कीमती धातुओ के रूप मैं हि हो ये ज़रुरी नही है । वो सायद प्राचीन कागजो पे लिखा हुवा भी मिल सकता है । पर हमारी कमनसिबि से हम सिर्फ कीमती धातुओ के रूप मे ही खजाने को पहेचानते है । और यदी किसी ओर रूप में खजाना हमारे हाथ लगे तो हमे उसका मुल्य समजमे नही आता । और रही बात सापो के चित्र की तो वो भी यही कहेना चाहते है की अंदर जो भी है वो सबके काम का नही है । क्यूकि सामान्य आदमी के लिए साप का विष घातक और प्राण लेवा साबित हो सकता है । पर साप के जहेर के बारे मे जो सब कुछ जानता है उसके लिए वो जहेर जडीबुट्टी बनाने के काम मैं आता है । मतलब की उस वॉल्ट में जो कुछ भी है यदी सही हाथों में जायेगा तो जडीबुट्टी की तरह उपयोगी होगा और यदी गलत हाथो में गया तो घातक विष की तरह खतरनाक साबित होगा । प्रो ईश्वरभाई की ये बात सुनके वहा बैठे सभी लोग तालीया बजाने लगे और कहेने लगे वाह वाह क्या खूब बात कही है । फिर धीरे धीरे सब बिखरने लगे और अपने अपने डिपार्टमेन्ट की ओर जाने लगे ।