दस दरवाज़े - 20

दस दरवाज़े

बंद दरवाज़ों के पीछे की दस अंतरंग कथाएँ

(चैप्टर - बीस)

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सातवां दरवाज़ा (कड़ी -2)

जैकलीन : यह कैसा मुकाबला

हरजीत अटवाल

अनुवाद : सुभाष नीरव

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जब भी वक्त मिलता है, रोजमरी बातें करने लग पड़ती है। मेरी पत्नी को तो मानो वह बातें करने के लिए तलाशती ही रहती है। परंतु पत्नी की अंग्रेजी कुछ कमज़ोर है इसलिए वह झिझकती रहती है। रोजमरी वूलवर्थ में काम करती है। वे दोनों माँ-बेटी अकेली ही रहती हैं। माइको शुरु-शुरू में जब कभी वह लंदन से होकर गुज़रता था तो मिलने आ जाता था, परंतु अब बहुत वर्षों से रोजमरी उसको मुँह नहीं लगाती। जैकलीन भी रोजमरी की तरह बातूनी-सी है। दोनों में से कोई एक भी यदि राह में मिल जाए तो कुछ देर खड़ी होकर बातें किए बिना आगे नहीं बढ़ती।

यह जगह हालाँकि हमारे लिए नई है, पर इलाका नया नहीं। बच्चों के स्कूल के कारण हम घर बदलते हैं। अब दोनों बच्चियाँ स्कूल जाने लग पड़ी हैं। पहले वाला घर स्कूल से काफ़ी दूर था। अब घर से सिर्फ़ पाँचेक मिनट का पैदल रास्ता है। मध्य में एक पॉर्क पड़ता है। पॉर्क पार करो तो स्कूल आ जाता है। मेरा काम लंदन में डिलीवरी करने का है। कई बार ऐसा भी होता है कि मैं अट्ठारह-अट्ठारह घंटे काम करता हूँ और कई बार आधा दिन खाली बैठे भी निकल जाता है। पत्नी को घर से दसेक मिनट की दूरी पर कपड़े की एक फैक्टरी में पार्ट टाइम काम मिल जाता है, दस से तीन। मैं घर में होता हूँ तो बच्चों को स्कूल छोड़ आता हूँ और ले भी आता हूँ। पत्नी के काम के घंटे भी ऐसे हैं कि वह भी ला सकती है। मैं फुर्सत में होऊँ तो बच्चों को छोड़कर कुछ देर पॉर्क में बैठ जाया करता हूँ। धूप हो तो मैं किसी बैंच पर बैठकर किताब पढ़ने लगता हूँ।

एक दिन जैकलीन अचानक मेरे पास बैंच पर आ बैठती है। मैं पूछता हूँ -

“आज कालेज नहीं गई?”

“गई थी, पर लौट आई हूँ। एक ही क्लास थी आज।”

“जैकलीन, सच तू अपनी उम्र से बहुत छोटी लगती है। कितने साल की हो गई है अब तू?”

“मिस्टर सिंह, तुम्हें मालूम होना चाहिए कि सुन्दर लड़की से उसकी उम्र नहीं पूछा करते, पर मैं फिर भी बता देती हूँ। मैं स्वीट सेवनटीन हूँ।”

“तू वाकई बहुत स्वीट लग रही है! ”

कहते हुए मैं जैकलीन की ओर देखता हूँ। वह लजाकर गर्दन झुका लेती है। कुछ देर और बातें करके वह उठ खड़ी होती है।

आज मौसम बहुत खराब है। मूसलाधार पानी बरस रहा है। मैं काम पर से जल्दी ही लौट आता हूँ। मुझे देखकर रोजमरी छतरी लिए बाहर निकलती है और कहती है -

“मिस्टर सिंह, मुझे तेरी हैल्प की ज़रूरत है, प्लीज़! ”

“क्या हो गया रोजमरी? ”

“मेरी रसोई की छत चूने लगी है। लगता है कि गटर में कुछ फंस गया है और उससे बारिश का पूरा पानी संभाला नहीं जा रहा। प्लीज़, अगर कुछ कर सके तो...। ”

मैं उसके घर में जाकर देखता हूँ। सचमुच ही उसके गटर में पतझड़ के पत्ते फंसे हुए हैं। पत्तों ने सारा गटर ही बंद कर रखा है। बारिश का सारा पानी एक जगह जमा हुआ पड़ा है। मैं डंडा लेकर गटर साफ कर देता हूँ। पानी तेज़ी से बहने लगता है, पर मेरे सारे कपड़े भीग जाते हैं। रोजमरी मेरा शुक्रिया अदा किए जा रही है। मैं चलने लगता हूँ तो वह कहती है -

“मिस्टर सिंह, बैठ, तेरे लिए कॉफ़ी बनाती हूँ।”

“नहीं रोजमरी, मैं पहले अपने कपड़े बदलूँगा, काम पर भी बाहर घूमते समय मैं भीग चुका हूँ।”

“बरांडी का एक पैग बना दूँ?”

“नहीं रोजमरी, शुक्रिया, फिर कभी सही।”

रोजमरी की आँखों में मुझे कुछ ओर ही नज़र आने लगता है, पर मैं अब किसी भी पराई औरत के करीब नहीं जाना चाहता। बड़ी कठिनाई से तो जीने का ढंग मिला है।”

अब रोजमरी के साथ प्रायः ‘हाय-हैलो’ होने लगती है। मैं देखता हूँ कि कई बार तो वह ‘हैलो’ कहने के लिए पहले से ही प्रतीक्षा कर रही होती है। एक दिन कहती है -

“सिंह, कल मैं तेरी पत्नी से मिलने तेरे घर आई थी। तेरे पास तो बहुत सारी किताबें हैं।”

“हाँ, रोजमरी, किताबें मुझे अच्छी लगती हैं।”

“अगर कोई विशेष किताब चाहिए हो तो बताना, मुझे वूलवर्थ में डिस्काउंट पर बहुत सस्ती मिल जाती हैं।”

“थैंक्यू! ज़रूर बताऊँगा।”

“किस तरह की किताबें अच्छी लगती हैं?”

“मैं ज्यादातर फिक्शन पढ़ता हूँ।”

“किस तरह की फिक्शन, जासूसी, डरावना या रोमांटिक?”

“इनमें से कोई भी नहीं। मैं ज़िन्दगी के करीब की फिक्शन पढ़ने की कोशिश करता हूँ। लेकिन पहले उनके रिव्यू पढ़ता हूँ, तब किताब का चयन करता हूँ।”

एक दिन मुझे नॉवल ‘लस्ट फॉर लाइफ़’ पढ़ने की इच्छा होती है। मैं रोजमरी से पूछता हूँ कि क्या उसे यह नॉवल वूलवर्थ में मिल सकता है और यदि हाँ तो क्या वह मेरे लिए उपलब्ध करवा सकती है। रोजमरी मुझे सिर्फ़ नॉवल ही नहीं लाकर देती, अपितु इस पर बनी फिल्म भी ला देती है और कहती है -

“मैंने नॉवल तो नहीं पढ़ा, पर यह फिल्म देखी है। किर्क डगलस को इसके लिए ऑस्कर भी मिला था।”

वह अक्सर किताबों के बारे में मेरे से बात करती रहती है। उसको पढ़ने का अधिक शौक नहीं है, पर मेरे साथ बातें करने के लिए उसने कुछ न कुछ जानकारी हासिल कर रखी है। रोजमरी के साथ बात करता मैं सदैव एक दूरी बनाए रखता हूँ, एक बाड़ की तरह। मैं अब यह बाड़ बिल्कुल नहीं फांदना चाहता।

गर्मियों के दिन हैं। सूरज देर तक खड़ा रहता है। मैं बाहर गार्डन में निकलता हूँ। रोजमरी गुलाब के बूटों पर दवा छिड़क रही है और जैकलीन समीप खड़ी बहस-सी कर रही है। मैं पूछता हूँ -

“जैकी, इतनी खफ़ा क्यों है?”

मेरी बात सुन रोजमरी अपना काम बीच में ही छोड़ साझी बाड़ के पास आकर कहती है -

“कल इसको कनूइंग जाना है, पर मुझे काम से छुट्टी नहीं मिली। हमारे यहाँ नया स्टॉफ रखा गया है। मुझे उसे ट्रेंड करना है। मैं तो इतनी बिजी हूँ कि कल तो मुझे फुर्सत भी आठ बजे मिलेगी। मैं कह रही हूँ कि फिर किसी दिन चले जाना, पर यह मान ही नहीं रही।”

“सिंह, मैंने कल की बुकिंग की हुई है। एक तो पैसे व्यर्थ जाएँगे और दूसरा मौसम अभी बहुत सुहावना है। फिर पता नहीं ऐसा दिन मिले कि नहीं।”

“कहाँ जाना है? मेरा मतलब टूर है कहीं?”

“एसफ्रोड... वहाँ कोई बस भी सीधी नहीं जाती।”

मेरे पूछने पर जैकलीन रुआँसी-सी होकर बताती है। मैं फिर कहता हूँ -

“रोजमरी, वैसे तो कल मैं भी खाली हूँ, मैं जैकी को छोड़ सकता हूँ।”

“छोड़ना नहीं, दो-तीन घंटे ठहरना भी पड़ेगा।”

“ठीक है, मैं ले जाऊँगा।”

अगली सुबह मैं जैकलीन को लेकर एसफ्रोड के लिए रवाना होता हूँ। वह बहुत खुश है। मुझसे कहती है -

“थैंक्स सिंह, नहीं तो आज मैं बहुत उदास होती। मैं इस दिन की बहुत दिनों से प्रतीक्षा कर रही थी।”

“कनूइंग के लिए।”

“नहीं, कनूइंग करने तो मैं पहले भी गई हूँ, पर आज ख़ास दिन है।”

“आज क्या है? ”

“आज तेरह अगस्त है, तुम्हें नहीं पता?”

“हाँ, तेरह अगस्त का तो मुझे पता है।”

“ओह, सॉरी सिंह, तुम्हें भी कैसे पता हो सकता है। असल में, आज मेरा जन्म दिन है। आज मैं अट्ठारह की हो गई हूँ, आज मैं आज़ाद हूँ, पब जा सकती हूँ, ब्वॉय फ्रेंड के साथ सो सकती हूँ, आज मैं बच्ची नहीं, पूरी औरत हूँ। इसलिए आज मैं बहुत खुश हूँ।”

“हैप्पी बर्थ डे जैकी, स्वीट ऐटीन!”

कहता हुआ मैं जेब में से दस पौंड निकालकर उसको देता हूँ। वह कहती है -

“सिंह, ये पैसे अपने पास ही रख। यदि तुम मुझे बर्थ-डे का कुछ देना ही चाहते हो तो मुझे किसी दिन पब में ले चलना। पब जाने को मेरा बहुत दिल करता है। पब में बैठकर वाइन पीने और बातें करने को।”

मैं वैन दौड़ाते हुए सोचता जा रहा हूँ कि उसको पब लेकर जाऊँ अथवा नहीं। वह बहुत खुश है, कभी सीटी बजाने लगती है और कभी रेडियो में बजते गीत के साथ गाने लग जाती है। मैं पूछता हूँ -

“यहाँ एसफ्रोड में कोई रिवर है कनूइंग के लिए?”

“नहीं, वॉटर स्पोर्ट्स सेंटर है यहाँ। नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिताएँ होती हैं यहाँ। मैंने तो अपने फन के लिए मॉम के साथ बुक करवाया था। अब तुम आ गए हो तो और भी ज्यादा मज़ा आएगा।”

“पर जैकी, मुझे तो अच्छी तरह तैरना भी नहीं आता।”

“मेरे साथ होते हुए क्यों डरते हो सिंह? मैं मछली हूँ मछली! तुम्हें अपनी पीठ पर बिठाकर तैर सकती हूँ।” कहती हुई वह खिलखिलाकर हँसने लगती है।

हम करीब घंटेभर में वॉटर स्पोर्ट्स सेंटर पहुँच जाते हैं। बाहर गेट पर सिक्युरिटी वाले खड़े हैं। हम अपने टिकट दिखाकर अन्दर चले जाते हैं। पानी वाले खेलों के लिए विभिन्न प्रकार के पूल बने हुए हैं। एक बड़ी-सी झील भी है जिसमें किश्तियों दौड़ रही हैं। ऊँची-नीची नहरें-सी भी हैं जिनमें पानी बहुत तेज़ी से बह रहा है। एक पूल में लोग तैरने की रेस लगा रहे हैं। हम रिस्पेशन पर जाकर अपने टिकट दिखाते हैं। हमारी बारी का समय ग्यारह बजे का है। हम चेंजिंग रूम में जाकर फोम जैसी वस्तु के ओवरआल अपने कपड़ों के ऊपर पहन लेते हैं ताकि हमारे कपड़े गीले न हों। डूबने से बचने के लिए लाइफ़ जैकेट भी, चोट से बचने के लिए सिर पर हैलमेट भी। एक व्यक्ति हमारे ग्रुप के दसों व्यक्तियों के नाम बोलकर उन्हें एक स्थान पर एकत्र करके बताता है कि वह हमारा आज का इंस्ट्रक्टर है। सबसे पहले पानी के साथ दोस्ती बनाने के लिए झील में छलांगें लगानी पड़ेंगी। मैं डरने लगता हूँ, पर जैकलीन मेरा हाथ दबाती है। हम पानी में छलांगें मारने लगते हैं। मुझे तैरना अच्छा लगता है। लाइफ़ जैकेट तैरने में मेरी मदद कर रही है। जैकलीन भी मेरा पूरा ध्यान रख रही है। फिर हम झील में खड़ी दस आदमियों वाली किश्ती में जा बैठते हैं। यह हवा भरने वाली रबड़ की किश्ती है। हमारा इंस्ट्रक्टर किश्ती के पीछे बैठा हमें आदेश देने लगता है और समझाने भी। हम चप्पू चलाते हुए किश्ती को आगे बढ़ाते हैं। किश्ती एक बैल्ट पर जा चढ़ती है। बैल्ट किश्ती को ऊपर वाली झील की तरफ ले चलती है। जैकलीन बार-बार मुझसे पूछती जा रही है कि मैं ठीक हूँ न। वैसे मैं अब तक पूरी तरह सहज हो चुका हूँ। ऊपर वाली झील से हमें नहर के रास्ते नीचे उतरना है। वास्तव में यह नहर तेज़ बहती नदी की तरह बनाई गई है। हमारी किश्ती बड़ी-बड़ी लहरों में से गुज़रने लगती है। किश्ती के ऊपर-नीचे उठने-गिरने से हम डर और रोमांच में चीखने लग पड़ते हैं। करीब पंद्रह मिनट बाद किश्ती फिर एक झील में आ जाती है। इस प्रकार हम पाँच चक्कर लगाते हैं। जैकी बहुत प्रसन्न है। किश्ती में से उतरते ही वह मेरा हाथ पकड़कर कहती है -

“सिंह, अब हम स्विमिंग करेंगे।”

हम चेंजिंग-रूम में आ जाते हैं। जैकलीन मेरे लिए कहीं से स्विमिंग ट्रैक का इंतज़ाम करती है। वह खुद भी स्विमिंग सूट पहनने चली जाती है। जब वह तैयार होकर लौटती है तो मैं उसे देखकर आश्चर्यचकित रह जाता हूँ। गोल ठोस टांगें, गोलाईदार बांहें। मैंने तो कभी सोचा भी नहीं कि कपड़ों में छिपी जैकलीन इतनी खूबसूरत होगी। मेरे मुँह से अकस्मात् निकलता है -

“जैकी, बहुत सुन्दर! ऐसी शानदार देह मैंने पहले किसी औरत की नहीं देखी।”

“थैंक्स सिंह!”

“तेरा ब्वॉय फ्रेंड तेरे पर पूरा रश्क करेगा।”

“ब्वॉय फ्रेंड अभी मेरे पास है नहीं।”

कहती हुई वह मेरा हाथ पकड़कर चल पड़ती है। हम स्विमिंग पूल में जा घुसते हैं। जैकलीन सच ही मछली की भाँति तैरती है। मैं डरा-डरा सा तैर रहा हूँ। वह दो चक्कर लगाकर मेरे पास आ जाती है और मुझे तैरने के ढंग बताने लगती है। जब भी मेरा जिस्म उसके जिस्म को स्पर्श करता है तो मुझे कुछ होने लगता है।

वापस लौटते समय जैकलीन कहने लगती है -

“सिंह, घर पहुँचने से पहले मुझे किसी पब में लेकर चल।”

मैं उसकी ओर देखने लगता हूँ। वह कहती है -

“डार्लिंग, मैं अट्ठारह की हो गई हूँ।”

मैं अपने इलाके में पहुँचकर एक पब के सामने वैन रोकता हूँ। मैं अपने लिए बियर और उसके लिए वाइन लेता हूँ और खाने के लिए एक-एक सैंडविच भी। जैकलीन आज के सारे कारनामों के बारे में बातें किए जा रही है। वह अपने दास्तों के बारे में, अपनी पढ़ाई के बारे में भी बातें करती है। ए-लेवल उसने कर ली है, अब एक वर्ष ब्रेक के बाद वह यूनिवर्सिटी जाएगी। अधिकांश विद्यार्थी ऐसा ही किया करते हैं। आजकल वह नौकरी की तलाश में है। वाइन के दो गिलास से उसकी जीभ ज़रा मोटी होने लगती है। वह कहती है -

“सिंह, तू बहुत हैंडसम है। मैं तुझे बहुत पसंद करती हूँ।”

“जैकी, मैं तेरे से बहुत बड़ी उम्र का हूँ।”

“इसीलिए तो मैं पसंद करती हूँ। मुझे अपने पिता से कोई प्यार नहीं मिला। पता नहीं वह कहाँ दौड़ा फिरता है।”

वह अपनी वाइन खत्म कर लेती है। मैं नहीं चाहता कि वह और पिये। मैं कहता हूँ -

“जैकी, चल अब हम चलें।”

“सिंह, मैंने ज्यादा नहीं पी, इतनी तो मैं अपनी मॉम के साथ पी लिया करती हूँ। मेरा तो बस पब में बैठकर पीने को मन करता था।”

मैं उसको घर के सामने उतार देता हूँ। वह मेरा हाथ पकड़ते हुए कहती है -

“सिंह, मेरे घर वाइन भी है, बियर और वोदका भी। चल, एक एक ड्रिंक ले लें।”

“नहीं जैकी, मेरे से और नहीं पी जाएगी। तू भी अब जाकर आराम कर, थक गई होगी।”

वह कुछ बोले बग़ैर मेरा हाथ पकड़कर खींचने लगती है और लगातार मेरी ओर देखे जा रही है। उसकी हरी-हरी आँखों के बीच के लाल डोरे मुझे आमंत्रित करने लगते हैं। मैं उसके संग चल पड़ता हूँ। मैं जानता हूँ कि इस वक्त रोजमरी काम पर होती है। मैं अपने आप को रोकना चाहता हूँ, पर रोक नहीं पाता। वह ओरेंज जूस डालकर वोदका के दो ड्रिंक बनाती है और कहती है -

“शैकल्टन हॉल में हर शनिवार डिस्को होता है, किसी दिन चलेगा मेरे साथ?”

“नहीं जैकी, मुझे डांस करना नहीं आता।”

“यह तो बहुत ही सरल काम है। मैंने स्कूल में सीखा है। सालसा डांस में ज़रा दौड़भाग अधिक होती है, पर बाल डांस सरल होता है। सिर्फ़ चार स्टैप!”

वह मुझे स्टैप करके दिखाती है और साथ ही साथ कहती जाती है -

“मेरी तरफ देख, एक, दो, तीन, चार, फिर चार, तीन, दो, एक। इस डांस की एक बात ख़ास है कि जोड़े को एक दूसरे की आँखों में देखना होता है। रोमांटिक डांस जो हुआ... तू मेरे साथ चलेगा तो मैं सिखा दूँगी।”

वह मस्त हुई पड़ी है। मुझे बहुत प्यारी लग रही है। मैं एडविना और ऐनिया के साथ प्रायः डिस्को जाता रहा हूँ। इतना भर डांस करना मुझे आता ही है। पहले वाले हालात होते तो मैं उसकी यह पेशकश झट मंजूर कर लेता, पर अब मैं एक पति हूँ और एक पिता भी। जैकलीन मेरे सामने खड़ी होकर दोनों बांहें फैलाकर कहती है -

“तूने आज देखा ही है मुझे, कैसी लगती हूँ तुझे?”

“बेहद खूबसूरत! कोई जवाब ही नहीं।”

“सिंह, फिर दूर क्यों खड़ा है? मेरे नज़दीक आ, झिझकता क्यों है?”

बात करती हुई वह मेरा हाथ पकड़ लेती है। मैं उसकी तरफ देखता हूँ, उसकी आँखें सरूर से भरी पड़ी हैं।

(जारी…)

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Sunhera Noorani 4 सप्ताह पहले

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F.k.khan 1 महीना पहले

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Geeta 1 महीना पहले

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Sonam Trivedi 1 महीना पहले

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Balkrishna patel 1 महीना पहले