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वक्त अपनी रफ्तार से आगे बढ़ता गया और लिपि अब स्कूल जाने लगी थी। कबीर और अनिका का...
अगर मै नास्तिक हूं तो मेरा कर्म है खुद को पहचानूं अगर तुम खुद को पहचान ही नहीं र...
--(98)गणपति उपनिषद---यह उपनिषद के क्रम में 98 वेंस्थान पर आता है। गणपति उपनिषद्,...
रात गहरी हो चुकी थी। अग्निहोत्री हाउस में शादी की सारी रस्में पूरी हो चुकी थीं।...
भाग ११ — दूरियों के बीच रिश्तेनए शहर में मिहिर को आए हुए लगभग तीन महीने हो चुके...
Mr. & Ms. FakeEpisode 28 – माँ के सामनेअगले दिन सुबह से ही सान्वी के चेहरे पर बे...
नेपाल-तिब्बत सीमा में 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के ढहने या कहें कि हिमस्खलन स...
अरे बहू! ज़रा चाय तो बनाना, और हाँ, मलाई मत डालना," मालती जी ने अपनी जगह से ही आ...
बॉलीवुड में सफलता के समीकरण अक्सर तय माने जाते हैं। बड़ा नायक, करोड़ों का प्रचार...
अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 51: कहानी का नया नियम"प्र..."अधूरी किताब के अंतिम पन्...
बहुत पुरानी बात नहीं है, यह उस दौर की कहानी है जब लोग आँखों से दिलों का हाल पढ़ लिया करते थे। शहर के बीचों-बीच बसा पुराना कॉलेज, जिसकी दीवारों पर इतिहास की परतें जमी थीं और गलियारो...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
भाग १ — एक दिन, कई जिम्मेदारियाँ सुबह छह बजे अलार्म बजा। मिहिर ने आँखें खोलीं, लेकिन कुछ क्षणों तक बिस्तर पर ही पड़ा रहा। बगल में उसकी पत्नी निशा अभी सो रही थी। सामने की द...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...
नमस्कार दोस्तों मेरा नाम दिलखुश गुर्जर है और यह मेरी पहली कहानी है तो अगर कोई त्रुटी हो जाए तो क्षमा कर देना। { परिचय } भानपुर नाम का एक गांव था, यह गांव एक घाटी के पास बसा हुआ...
एक ऐसी दुनिया जहां कमजोरो की कोई जगह नहीं बस ताकतवर लोग ही हुकूमत चलते है और ताकत का मतलब है "पैसा" अगर तुम्हारे पास पैसा है तो तुम दुनिया की हर चीज हासिल कर सकते हो। लोग आ...
चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...
संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि कबीर जी हमें डरा रहे हैं या जीवन से निराश कर रहे हैं कि “जब अंत में मिट्टी ही होना है, तो मेहनत क्यों करें?” ल...
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