उत्तेजना r k lal द्वारा क्लासिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

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उत्तेजना

उत्तेजना

आर0 के0 लाल


श्वेता का तो जवाब ही नहीं है इतनी सुंदर लड़की लाखों में एक होगी। उसकी लंबी टांगे, काले खुले बाल, काली आंखें और चाल ढाल मनमोहक हैं। उसका घर हमारे घर से तीसरे गली में है। बचपन से ही हम साथ हैं । साथ स्कूल जाते, एक दूसरे के घर आ जा कर खेलते, कूदते और पढ़ते-लिखते। वह कॉलेज में भी बहुत बन संवर कर आती थी। कपड़े भी हमेशा लेटेस्ट मॉडर्न डिजाइन वाली पहनती थी । क्लास में उसे सब कोई देखता ही रह जाता था। शुरू में तो हमारे अचरण एक घनिष्ट दोस्त की तरह ही थे मगर कंपटीशन की तैयारी के लिए साथ पढ़ते-पढ़ते अचानक न जाने मुझे क्या हो गया, मेरा नजरिया ही बदल गया, उसे फिल्मी स्टाइल से प्यार करने का मन करने लगा था। उसे सोच कर ही मेरे मन में एक अजीब सी उत्तेजना होने लगती थी।

यह बात उन दिनों की है जब उसके मम्मी-पापा चार-पांच दिन के लिए बाहर चले गए थे और वह अपनी बूढ़ी दादी के साथ अकेली घर पर थी। उसके पेरेंट्स ने हम दोनों को साथ रहकर पढ़ने और दादी का ख्याल रखने की बात कही थी इसलिए मैं उसके घर जाता और हम दोनों काफी समय तक बातें करते, उसके हाथ का टेस्टी खाना भी खाते। एक दिन वह तैयार होकर आई तोन्यू मिनी स्कर्ट में क्या गजब की लग रही थी। उसने मुझसे पूछा कि कैसी लग रही हूं तो मैंने कहा हॉट एंड सेक्सी । उसने थैंक्स दिया और अपना हाथ आगे बढ़ा दिया । हाथ मिलाते ही मुझे एक सिहरन सी हुई और मेरा रोम रोम उसके प्रति प्रेम से अभिभूत हो उठा। अब मैं कभी उसके बदन को देखता तो कभी उसके चेहरे को। उसको पकड़ कर अपनी ओर खींचने का मन होता। शायद उसको भी सब पता चल रहा था लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। मेरा पढ़ने में मन नहीं लगता था और जब भी मौका मिलता उसे स्पर्श करता। चौबीसों घंटे मेरे ख्वाबों में सिर्फ श्वेता ही होती। वह भी कुछ ना बोलती। मैं समझता कि यह उसकी मौन स्वीकृति है और मुझे आगे बढ़ जाना चाहिए।

लगभग एक महीने के बाद मैंने ध्यान दिया कि श्वेता अब मिनी स्कर्ट की जगह सलवार सूट में कॉलेज आने लगी थी और पहले से ज्यादा गंभीर हो गई थी। मैंने कारण जानना चाहा तो उसने कहा;- “कल हम स्कूल नहीं जाएंगे बल्कि किसी गार्डन में जाकर बैठेंगे और कुछ बातें करेंगे।” मन ही मन मैं झूम उठा। लगा,मेरी तो किस्मत ही खुल गई। मजा आएगा।

दूसरे दिन पार्क में कुछ देर चुप बैठने के बाद मैंने उसका हाथ अपने हाथों में लिया तो वह बोल पड़ी - आलोक! बचपन से हम बहुत अच्छे दोस्त हैं। हमारे पेरेंट्स भी हम पर नाज़ करते हैं और विश्वास भी। अब हम बड़े हो गए हैं। पिछले कई महीनों से तुम्हारी हरकतों का अंदाज बदल गया है जिसे मैं तुम्हारी आंखों में स्पष्ट रूप से महसूस करती हूं। तुम्हारी चाहत क्या है यह मैं समझ सकती हूं । श्वेता ने कहा कि जब मम्मी पापा बाहर चले गए थे तो तुमने कोई अंग्रेजी मूवी देखने चलने के लिए कहा था। शायद मुझे प्रेरित करने के लिए। पिक्चर हॉल में भी तुम मेरे बदन को स्पर्श करने की कोशिश करते रहे थे। श्वेता ने कहा- देखो दोस्त, मैं नादान नहीं हूं। तुम्हारी हरकतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। तुम्हारे मन में क्या चल रहा है यह समझ में आ रहा है । आलोक, तुम्हारी नियत बदल गई है जो हमारी दोस्ती के लिए अच्छा नहीं है। उसकी आवाज में एक आत्मविश्वास एवं सख्ती का आभास हो रहा था।

मैंने हिम्मत करके अपने दिल की बात कह डाली - श्वेता! मुझे क्या हो गया है मुझे पता नहीं। मुझे तुम अच्छी लगती हो और मैं तुम्हें प्यार करना चाहता हूं। प्यार करना कोई गुनाह नहीं है।श्वेता बीच में ही बोल पड़ी- अगर कोई गुनाह नहीं है तो क्या तुमने अपने पैरंट से पूछा या उन्हें बताया? मैंने उत्तर दिया- पगली! यह सब बातें भी किसी से शेयर की जाती हैं। अच्छा बताओ तुमने किसको बताया? श्वेता ने कहा - आलोक, ऐसा नहीं है कि मुझे अच्छा नहीं लगता। मैं भी चाहती हूं कि कोई मेरे साथ यह सब करें लेकिन एक सामाजिक रीत रिवाज के बंधन से हम लोग बंधे हैं, इसलिए हमें कुछ भी करने से पहले समझना चाहिए । फिर उसने बताया कि जिस दिन तुम्हारी आंखों में यह सब देखा, उसी दिन मैंने अपनी मां से सारी बातें बताई थी। मेरी मां मेरी एक अच्छी दोस्त है। मैं उससे कुछ भी नहीं छुपाती। मैंने उससे पूछा कि मां मुझे क्या करना चाहिए?

यह सब बताने के लिए मां ने पहले मेरी तारीफ की। कहा कि हमने जो संस्कार तुम्हें दिए हैं उसकी तुमने इज्जत रखी वरना आज के बच्चे तो उत्तेजना के आवेश में बह जाते हैं और न केवल अपना अनर्थ कर लेते हैं बल्कि अपने परिवार की इज्जत पर भी कालिख पोत देते हैं । फिर मां ने कहा- आलोक एक अच्छा लड़का है। बचपन से तुम्हारी उसकी दोस्ती है। मेरे कुछ कहने से अच्छा है कि तुम उससे खुलकर बातें करो और उसे समझाओ। साथ ही हिदायत दी कि अपने भावनाओं एवं कार्यकलापों को मर्यादित ढंग से करो। तुम्हें कपड़ा पहनने में भी सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अब तुम बड़ी हो गई हो। तुम्हें क्या करना चाहिए अच्छी तरह जानती हो। अपने मन की बातों को सुनो। अगर तुम्हारा मन कहता है कि यह गलत है तो उसे जरूर मानो। मां ने मुझे समझाया कि जो कुछ तुम दोनों के बीच महसूस हो रहा है वह शत प्रतिशत प्राकृतिक है। लड़के, लड़कियों का एक दूसरे के प्रति आकर्षित होना स्वभाविक है परन्तु अच्छे बच्चों को अनुशासित ढंग से ही जीवन बिताना होता है । मां ने उदाहरण देते हुए समझाया कि गर्मी लगने पर भी अपने कपड़े उतार के नहीं चलोगी क्योंकि यह हमारे सामाजिक व्यवहार के विपरीत होगा। उसके बाद सबसे पहले तो मैंने अपने को सुधारा और तुमने नोटिस किया होगा कि मैंने फूहड़ कपड़े पहनना बंद कर दिया। उसने अपनी बात रखी और कहा - आज हम इस बारे में खुलकर बात करेंगे कि हमें क्या करना चाहिए।

मैं कुछ बोलने की स्थिति में नहीं रह गया था। वह स्वयं बोली- अगर मैं तुम्हें रोकूंगी तब भी तुम मानोगे नहीं। यह मुझे समझ में आता है। लेकिन सोचो जीवन भर जबरदस्त अपराध बोध और दुख न होने के लिए अगर हम अपने पर नियंत्रण रखें तो क्या यह उचित नहीं होगा। आजकल युवा कुछ पढ़कर, इंटरनेट फिल्मों में देखकर अपनी बुद्धि को उन चीजों का गुलाम बना लेते हैं इसलिए सही बात का पता करना जरूरी है। अगर तुम हमें कन्विंस कर दोगे तो मेरी तरफ से हां है।

मैं बहुत देर तक सोचता रहा। श्वेता की हर बात सच लग रही थी। हम दोस्त हैं तो फिर हमारे दिमाग में अश्लील ख्याल क्यों आते हैं । मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था । मेरा सारा नशा जाने कहां हिरन हो गया था। मैंने कभी सोचा ना था कि श्वेता इतनी समझदार लड़की होगी। न चाहते हुए भी मेरे मुंह से निकल गया कि अच्छा श्वेता, तुम ही बताओ मुझे क्या करना चाहिए?

श्वेता ने कहा - मैं इतनी समझदार तो नहीं हूं फिर भी मुझे लगता है कि तुम्हें अगर किसी अन्य चीज में आनंद मिलने लगे तो इन घटिया बातों का महत्व स्वयं घट जाएगा। अगर तुममें जबरदस्त इच्छाएं होती हैं तो ऐसा मत सोचो कि तुम बहुत बुरे हो बल्कि फैसला तुम्हारे हाथ में होता है कि तुम उन खयालों के बारे में शुद्ध बने रहोगे अथवा अशुद्ध। हमें ही स्वयं प्रयास करना पड़ेगा कि ऐसी भावना ही हमारे मन में ना आए। अगर विचार आए तो कुछ ऐसा किया जाए कि अपना ध्यान किसी और तरफ केंद्रित हो सके।

फिर श्वेता ने मुझसे पूछा, “ अगर तुम नाराज न हो तो मैं तुम्हें एक फोटो दिखाना चाहती हूं।” उसने मेरी सहमति पर अपने बैग से एक फोटो निकालकर मेरे हाथ में थमा दी । मैंने देखा कि वह मेरी बहन की फोटो थी। उसने मुझसे कहा देखो यह मुझसे कहीं ज्यादा खूबसूरत है । इसे देख कर बताओ कि तुम्हारे मन में उत्तेजना के ख्याल आ रहे हैं या नहीं। उसने प्यार से मुझे अपने गुस्से पर नियंत्रण करने के लिए कहा और आगे बोली - “मैं नहीं चाहती कि तुम मुझे अपनी बहन समझो, मगर मुझे एक दोस्त तो समझो । वासना की बातें मानसिक होती हैं। अगर हम अपना नजरिया बदल दें तो हमें कोई ऐसा ख्याल ही नहीं आएगा। तुम हमें किस सोच के साथ मिलते हो यह बहुत ही महत्वपूर्ण है। अगर तुम हमें काम भावना से प्रेरित होकर के देखते हो तो इसका मतलब है कि तुम मेरा आदर नहीं कर सकते हो और न ही मेरे परिवार का आदर कर सकते हो। ऐसे में मैं अपना एक बहुमूल्य साथी खो दूंगी और मैं यह नहीं चाहती।

मेरा मानना है पुरुषों द्वारा दिए गए कामुक संकेतों को लड़कियां आमतौर पर केवल साधारण दोस्ती ही समझती है, जब कि पुरूष अक्सर गलत समझ लेते हैं। लड़की के ज़रा भी ढील पर उनका बहुत कुछ दांव पर लगा होता है यह बात तुम्हें समझनी चाहिए।”

बात मेरी समझ में आ गई थी। मैंने उससे वादा किया कि अब तुम्हें कोई शिकायत नहीं मिलेगी। चलो इसी बात पर तुम्हें कोई गिफ्ट दिलाते हैं। श्वेता ने तुरंत ही उस पर भी लगाम लगा दी। कहा कि हमारे लिए गिफ्ट से ज्यादा भावनात्मक लगाव मायने रखता है। हम एक दूसरे के लुक की तारीफ कर सकते हैं , अपने कैरियर की बातें कर सकते हैं और एक दूसरे को सम्मान की दृष्टि से देख सकते हैं। अगर ऐसा कर ले जाते हैं तो जीवन भर हम दोस्त रहेंगे। हो सकता है कि आगे चलकर हम दोनो जीवन साथी बन जाए लेकिन आज यह सोचने का विषय नहीं है।”

उसके बाद तो हमारा जीवन ही बदल गया। साथ पढ़ते हुए हम दोनो आईआईटी में प्रवेश पा गए थे। और अब हम अलग अलग कंपनी में मैनेजर हैं। हमें लगता है कि समाज सुधारने के लिए श्वेता जैसी सोच सभी लड़कियों में होना चाहिए।

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