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Narendra Modiji Ke Prernadai Vaktavya

श्रीराम कॉमर्स कॉलेज, नई दिल्ली

नरेन्द्र मोदीजी के

प्रेरणादाई वक्तव्य

—ः लेखक :—

विरेन्द्र बघेल

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नरेन्द्र मोदीजी के प्रेरणादाई वक्तव्य

श्रीराम कॉमर्स कॉलेज, नई दिल्ली

9 फरवरी, 2013

श्रीअवस जी श्रीमान जैन और सभी नौजवान दोस्तो, मैं गुजरात की धरती से आ रहा हूँ, महात्मा गांधी की भूमि से आ रहा हूँ और मैं सरदार पटेल की भूमि से आ रहा हूँ। आजादी के आंदोलन की तरफ अगर देखा जाए तो देश की आजादी के आंदोलन को दो मुख्य धाराओं ने प्रभावित किया था। एक, महात्मा गांधी के नेतृत्व में जन—आंदोलन के माध्यम से अहिंसक क्रांति के माध्यम से देश को आजादी दिलाने का प्रयास और दूसरा, सशस्त्रा क्रांति से देश को आजादी दिलाने का प्रयास। और मित्रो, दोनों धाराओं का नेतृत्व किसी—न—किसी गुजराती के पास था। श्याम जी कृष्ण वर्मा जो क्रांतिकारियों के गुरु माने जाते थे, जिन्होंने लंदन में इंडिया हाउस की स्थापना की थी, जिन्होंने देश में क्रांतिकारियों को दिशा देने का कार्य किया था और महात्मा गांधी भी गुजरात से थे जिन्होंने देश को आजादी दिलाई थी। मित्रो, अनेक महापुरुषों ने त्याग किया, तपस्या की, जीवन खपा दिया, जवानी जेल में बिता दी ताकि देश को स्वराज्य मिले। और इन लोगों के लगातार प्रयासों के कारण आखिर वो सपना साकार हुआ।

हमें स्वराज्य मिला लेकिन स्वराज्य के बाद छः दशक से भी ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन देश स्वराज्य के लिए चिंतित है, उसकी अपेक्षा है कि स्वराज्य कब मिले और इसलिए दोस्तो, अगर विश्व की प्रगति की जो भी यात्राा है उस यात्राा में हिन्दुस्तान को अपनी जगह बनानी होगी। तो पहली आवश्यकता है कि हम स्वराज्य पर बल कैसे दें और अगर मैं स्वराज्य कहता हूँ तब जिस भाषा को आप समझते हैं और मैं कहूँ तो गुड गवर्नेंस। आज सारी समस्याओं की जड़ में एक प्रमुख बीमारी है तो यह है मित्रो, आज पूरे देश में दुनिया में गुजरात विकास यात्राा की चर्चा हो रही है, उस विकास यात्राा के मूल में अगर कोई गहराई से देखेगा तो एक बात पर बल दिया

है और वो है गुड गवर्नेंस, लेकिन हम एक कदम आगे हैं। मैं तब अपने गुड गवर्नेंस की चर्चा करता हूँ तो मैं अपने मॉडल की बात करता हूँ तो कहता हूँ च्तवचमवचसम ळववक ळवअमतदंदबमण् आमतौर पर हमारे यहाँ शासन थ्पअम तपहीजमत काम करता है, समस्याएँ हुर्इं शासन उसे थ्वससवू करता है, उस पर दौड़ता है। मित्रो, शासन का काम है स्थितियों की विजुलाइज करे, नए आयामों की खोज करे। स्थितियों को बदलने का संकल्प करे और उसके अनुकूल नई व्यवस्थाओं को विकसित करे। लेकिन हम छः दशक से ज्यादा समय से देख रहे हैं कि हम उन कामों को करने में विफल रहे हैं और उसका नतीजा यह हुआ है कि आज देश के अंदर एक निराशा का माहौल है। देश निराशा की गर्त में डूब चुका है। हर किसी को लगता हैयार, छोड़ो! क्या होना है, सब चोर हैं, सब बेकार हैं। पता नहीं ईश्वर की क्या इच्छा थी कि हमें इस देश में पैदा किया, भाई मैं तो पढ़ाई करके भागना चाहता हूँ, मैं जा रहा हूँ कैरियर के लिए सोचता है।

मित्रो, यह बात चारों ओर सुनाई दे रही है पर मेरी सोच अलग है। मेरा गुजरात में यह चौथा टर्म है और मैं अनुभव के आधार पर कह रहा हूँ कि यही कानून, यही संविधान, यही नियम और कानूनए यही मुलाजिम, यही फाइलें, यही दफ्तर, यही लोग इसके बावजूद हम आगे बढ़ सकते हैं। बहुत कुछ कर सकते हैं और यह मैं गुजरात के उदाहरण के आधार पर कह सकता हूँ।

मित्रो, यहाँ आप लोग बैठे हैं। एक ही चीज को देखने का अलग—अलग नजरिया होता है। मान लीजिए मैं आप को दिखाऊँ, आप में से जो आशावादी होंगे वो कहेंगे आधा गिलास भरा हुआ है। जो निराशावादी हैं वो कहेंगे आधा गिलास खाली है। मित्रो मैं इन दो रास्तों में से एक अलग रास्ते का इंसान हूँ, मेरी तीसरी सोच है और मेरी सोच यह है कि यह गिलास भरा हुआ है, आधा पानी से आधा हवा से।

मित्रो, मैं आशा ;भ्वचमद्ध के सम्बन्ध में इतना विश्वस्त हूँ कि हम स्थितियों को पलट सकते हैं। मुझसे अभी एक देश के राजदूत मिलने आए थे। काफी औपचारिक बात होने के बाद धीरे—से राजनीति की तरफ जाने की बात हुई और उन्होंने मुझसे पूछा कि आप को क्या लगता हैहिन्दुस्तान के सामने दो प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं। मैंने उन्हें सहज जवाब दिया। मैंंने कहा, हमारे लिए सबसे बड़ा चैलेंज यह है कि हम अवसर का इस्तेमाल कैसे करें। उन्होंने मुझसे पूछा, कैसे, मैंने कहा मेरा देश पूरी दुनिया का सबसे नौजवान देश है। यहाँ की 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से नीचे की है। पूरा यूरोप बूढ़ा हो चुका है, चीन बूढ़ा हो चुका है। यह दुनिया का सबसे जवां देश है। 60 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से नीचे की है। लेकिन मेरा दुर्भाग्य यह है कि इतने बड़े अवसरए इतने बड़े गणतंत्रा का हम उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। वह सबसे बड़ी चुनौती है। दूसरा चैलेंज उन्होंने पूछा मेरा देश गरीब नहीं है। हमारे पास अपार भू—सम्पदा है, हमारे पास इतने प्राकृतिक संसाधन हैं। हमारा पूरा पूर्वी भारत को देख लीजिए, प्राकृतिक संसाधनों से भरा पड़ा है लेकिन हम उसका सही इस्तेमाल न करके समृद्धि की ओर जा नहीं पा रहे हैं और इसलिए हम अवसर को खाते चले जा रहे हैं। अवसर को कैसे पकड़ना है, उसे कैसे सामान्यीकृत करना है उसे दूसरों से कैसे अच्छा से अच्छा बनाना है, दूसरों से कैसे विकसित करना हैउस चैलेंज को हमने पूरा किया है।

भाइयो—बहनो, इन दिनों गुजरात की बड़ी चर्चा हो रही है। मेरे गुजरात ने विकास की यात्राा के मॉडल में एक बात का ध्यान रखा है। हम एकल स्तंभ (सिंगल पिलर) पर अपना टैंक खड़ा नहीं करना चाहते और इसलिए हमें पूरे विकास मॉडल को तीन आधार पर विकसित किया है। 1/3 कृषि, 1/3 उद्योग और 1/3 सेवा क्षेत्रा और हमारी कोशिश यह है कि हमारे इन तीनों क्षेत्राों का विकास एक समान हो और अगर एक में भी कठिनाई या रुकावट आ जाए तो अगले दो उसे सहायता करें और इसके कारण राज्य की अर्थव्यवस्था कभी चरमरा न जाए, कभी संकट में न आ जाए और मित्रो, आज मैं गर्व से कह सकता हूँ कि हमारे देश का कृषि विकास दर, आप तो इस क्षेत्रा के विद्यार्थी हैं, गूगल ;ळववहसमद्ध गुरु के शिष्य हैं। आपके पास हर सूचना अपनी उँगली पर होती है। 20 साल से यह देश कृषि विकास की दर का लक्ष्य 4ः तय करता है लेकिन 2 या 2ण्5ः पर आकर लुढ़क जाता है। मित्रो, गुजरात कभी कृषि राज्य नहीं रहा। गुजरात के मायने रेगिस्तान। और हमारी तो हालत ही यही है कि एक तरफ राजस्थान तो दूसरी तरफ पाकिस्तान, बारिश पर हमारी पूरी दुनिया आश्रित है। उसके बावजूद मित्रो जो राज्य 10 में से 7 वर्ष पानी की किल्लत से गुजरता था। वह राज्य पिछले दशक में 10÷ से अधिक की कृषि विकास दर एक इतिहास रचा है और यह अचानक नहीं हुआ है दोस्तो, इसके लिए कड़ी मेहनत की गई है। आप मीडिया के अन्दर देखते हो कि मोदी का वाइबे्रंट गुजरात समित (सम्मेलन) होता है।

बहुत बड़ा होता है। अभी—अभी एक समिट हुआ जिसमें दुनिया के 121 देशों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे। मित्रो, मेरा जो वाइब्रेंट समिट होता है वह केवल दो दिन होता है और वो भी दो साल मेंं एक बार होता है, लेकिन मैं प्रत्येक वर्ष मई—जून के महीने में जब तापमान 44ह्ब् होता है तब मैं एक महीने का कृषि महोत्सव करता हूँ। मेरी सरकार के 1 लाख स्थायी कर्मचारी गाँव जाते हैं, खेतों में जाते हैं और सर से पाँव तक ज्ञान हस्तांतरण कैसे करना है। नए अन्वेषण की खेतों तक कैसे पहुँचाना है, उसके लिए भी जान से जुटे रहते हैं।

मित्रो, हिन्दुस्तान के अन्दर मनुष्य के पास स्वास्थ्य कार्ड नहीं लेकिन गुजरात एक ऐसा राज्य है जहाँ किसानों के पास मृदा स्वास्थ्य कार्ड है और उसके कारण उसे पता चलता है कि उसके जमीन में क्या ताकत है, क्या नहीं है क्या कमी है कौन—सा उर्वरक चाहिए, कौन—सी कृषि फसल को किस अनुसार किस मौसम के लिए अनुकूल है, वह भली—भाँति जानता है। हमने जल संयम के लिए अभियान चलाकर छोटे—छोटे बाँध बनाए और पूरे देश में जहाँ जल स्तर नीचे जा रहा है वहीं गुजरात में जल का स्तर काफी बढ़ा है।

मित्रो, मेरा राज्य कॉटन बियर स्टेट है, मुझे स्मरण है जब वर्ष 2001 में मैं पहली बार मुख्यमंत्राी बना था तो मेरे यहाँ केवल 23 लाख गाँठ कपास का कॉटन उत्पादन होता था, इस समय हमारे यहाँ 1 करोड़ 25 लाख कॉटन गाँठ का उत्पादन होता है। मित्रो, लेकिन अगर हम वहीं अटक जाएँगे, ये स्थिति ऐसी मानी जाएगी कि हमारे किसान को जो मिलना चाहिए वह नहीं मिलेगा, किसान के परेशान होने की स्थिति आएगी तो निश्चय यह होना चाहिए कि वैल्यू एडिशन ;टंसनम ।ककपजपवदद्ध कैसे करें और हमने वैल्यू एडिशन ;टंसनम ।ककपजपवदद्ध पर बल देने का प्रयास किया है मित्रो, हम एक टैक्सटाइल पॉलिसी लाए हैं, कपास बेचने के लिए दर—दर न भटकता रहे। इसलिए यहाँ मेरा पंच मार्गीय सूत्रा ;थ्पअम ूंल वितउनसंद्ध है। थ्ंतउ जव पिइमतए पिइमत जव मिइतपबए थ्मइतपब जव िेंपवदए थ्ेंपवद जव वितमपहदण्

जहाँ कॉटन होगा वहीं धागा बनेगा, जहाँ धागा है वहीं कपड़ा बनेगा, जहाँ कपड़ा है वहीं रेडिमेड गारमेंट बनेगा और वहीं से उस गारमेंट को दुनिया में म्गचवतज करूँगा। इससे मेरे किसान की आय बढे़गी।

और इसलिए मित्रो, अगर हम एकीकृत एप्रोच नहीं लेते, अब मैं उद्योगों के नवीकरण के सुधार की दिशा में जा रहा हूँ जो मेरे किसान को मजबूत करेगा किसान की ताकत को बढ़ाएगा और हम उस दिशा में काम कर रहे हैं और आम मेरे राज्य की अर्थव्यवस्था में 1/3 हिस्सा कृषि के द्वारा आता है मित्रो, कृषि के साथ जुड़ा हुआ पशुपालन है। मित्रो, यहाँ बैठा हुआ कोई नौजवान दोस्त ऐसा नहीं होगा जिसको अगर चाय पीने की आदत हो तो गाय में दूध गुजरात का न हो, आप दिल्ली वाले जो दूध पीते हैं वो गुजरात से आता है।

मित्रो आप यूरोप जाओ और भिण्डी की सब्जी खाओ तो याद रखना वह भिण्डी गुजरात से आई है। आप सिंगापुर जाइए दूध माँगेंगे तो मित्रों मैं विश्वास से कहता हूँ कि वह दूध गुजरात से आया है। आप अफगानिस्तान जाएँ और टमाटर खाएँ तो लिख लेना, वह टमाटर गुजरात से आया है। मित्रो, हम इस कृषि क्षेत्रा में किस प्रकार बदलाव ला सकते हैं। इस सम्बन्ध में एक छोटा—सा उदाहरण देना चाहता हूँ। महाराष्ट्र की सीमा पर (घड़ी को देखते हुए) समय सीमा पर भाई आप पर भरोसे है क्योंकि मैं कभी टीचर नहीं रहा इसके कारण मेरा 45 मिनट का मेरा.....क्योंक टीचर के कम्प्यूटर में चिप होता है। 45 मिनट का कार्यक्रम होता है। मित्रो, हमारे यहाँ महाराष्ट्र से सटा हुआ ट्रैवल वे है कुछ किसान मुझसे मिलने आए। मैं बहुत साल पहले जब राजनीति में नहीं था ट्रैवल पर बहुत काम करता था। इस इलाके से परिचित था, उन्होंने कहा, साहब! आप कुछ रोड पर करिए। मैंने कहा आपके यहाँ रोड तो बहुत अच्छे हैं, डामर की सड़क है और तुम्हें क्या चाहिए। और आगे मैंने कहादो लेन की रोड है। उन्होंने कहारोड तो है, अच्छी रोड है लेकिन हमारी कुछ कठिनाइयाँ हैं और हमें कुछ इसमें सुधार चाहिए। मैंने कहा, इन जंगलों में सड़क का क्या करोगे? किसान बोलेअब हमने फिनलैंड के साथ अनुबंध किया है और अब हम केले की खेती करेंगे।

हमारा केला निर्यात होगा लेकिन जब ट्रक पर केला लेकर जाते हैं तो आज जो रोड है उसमें बीच—बीच में गड्‌ढे होने के कारण हिचकोले लगते हैं तो हमारे 20÷ केले दब कर खराब हो जाते हैं और इसलिए हमें वैबर रोड चाहिए। मित्रो, दिल्ली के सभी इलाकों में वैबर रोड नहीं होगी। देखिए, मेरे देश के नागरिक की सोच का दम देखिए, एक जनजातीय सोच देखिए, वह कहता है दुनिया के बाजार में मुझे अपना उत्पादित केला पहुँचाना है। मेरे केले का कोई खराब न हो, इसलिए मुझे वैबर रोड की जरूरत है। मेरे मित्रो अगर यह अभिप्रेरणा मेरे देश के नागरिकों के अन्दर हो तो मेरे देश का भविष्य उज्ज्वल है। मैं साफ देख रहा हूँ।

मित्रो, जब मैं गुड गवर्नेंस की बात करता था तब से हम एक पशुपालन मेडिकल कैम्प कर रहे हैं। रैग्यूलर कैटल पर हर वर्ष 2500 से 3000 कैटल कैम्प लगते हैं, कैटल का मेडिकल चेकअप। किसी तरह का ऑपरेशन व्यापक स्तर पर चलता है। उसका परिणाम क्या है मित्रो, उसके छः साल में रैग्युलर मैडिकल कैम्प का परिणाम यह आया है कि मेरे यहाँ जो कैटल हैं उनको छोटे—मोटे रोग हो जाते थे जैसे बारिश में अधिक पानी, कुछ खाने में आ गया तो रोग हो जाता है। बहुत धूप हो गई तो रोग हो जाता है। मित्रो, आज छः साल की लगातार कोशिश का परिणाम यह है कि कैटल के कुल 120 रोग पूर्ण रूप से खत्म हो गए हैं और उसका परिणाम यह आया है कि मेरे दुग्ध उत्पादन में 80÷ वृद्धि हुई है और अगर मेरे मिल्क में 80÷ की वृद्धि हुई है तो अगर एक गरीब किसान एक घर में एक पशु रखता है तो उसकी आय में कितनी वृद्धि हुई होगी, इसका अनुमान आप लगा लो और गाँव के अन्दर अगर आय में वृद्धि होती है तो गाँव की खरीद शक्ति बढ़ती है, और अगर गाँव की खरीद शक्ति बढ़ती है तभी राज्य की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती है। इसलिए हमारी कोशिश है उसकी क्रय शक्ति कैसे बढ़े और अब उस पर हम बल दे रहे हैं और क्रय शक्ति तब तक नहीं बढ़ती है जब तक कि आर्थिक विकास का चार्ट समावेशी नहीं करता है। अगर वह लचीला है, ऊपर—नीचे होता है तो स्थिति बराबर नहीं आती है। इसमें स्थिरता होनी चाहिए, लगातार ऊपर उठना चाहिए और इसे लगातार 10 सालों से निगरानी करके कर रहे हैं।

मित्रो, सेवा क्षेत्रा में हम गुजरात के लोग आगे नहीं थे। सेवा क्षेत्रा का एक बड़ा क्षेत्रा होता है। हॉस्पिटैलिटी क्षेत्रा सबसे बड़ा क्षेत्रा होता है। एक गुजराती दुनिया का सबसे अच्छा पयर्टक है। आप दुनिया में कहीं भी जाओ वो एक न एक गुजराती मिल ही जाएगा और पाँच सितारा होटल में भी डब्बा निकालकर, त्रिफला निकालकर खाता नजर आएगा। लेकिन 10 वर्ष पूर्व गुजरात कभी भी पयर्टक राज्य नहीं रहा है। लेकिन मित्रो, पिछले पाँच सालों से हमने लगातार कोशिश की, और आज हिन्दुस्तान के पिछले तीन सालों के पयर्टक ग्राफ में गुजरात में पर्यटक वृद्धि तीन—गुना अधिक बढ़ी है।

अब अमिताभ बच्चन स्वयं घर—घर जाकर कहते हैं कि कुछ दिन गुजारो गुजरात में और मुझे विश्वास है आप कभी—न—कभी गुजरात आओगे और हो सकता है रहने को पसंद करोगे। तो मित्रो सर्विस सेक्टर में भी हमने काफी बल दिया है और उसका परिणाम दिखलाई दे रहा है।

मित्रो अब एक एजुकेशन का क्षेत्रा देख लीजिए। जब 2001—2002 का काल था तब मेरे राज्य में 11 विश्वविद्यालय थे आज 42 विश्वविद्यालय हैं और जब मैं यूनिवर्सिटी कहता हूँ तब हमने विश्व की सर्वप्रथम फॉरेंसिक विज्ञान यूनिवर्सिटी।

मित्रो, आज पूरी दुनिया का विश्व अपराध ने रूप बदल दिया है। नीदरलैंड में बैठा हुआ एक बच्चा हैकिंग करके आपके बैंक से सारे रुपये उठाकर ले जा सकता है। साइबर क्राइम बढ़ता चला जा रहा है। आर्थिक धोखाधड़ी बढ़ती जा रही है। अगर दुनिया की सभी व्यवस्था में से कोई व्यवस्था खड़ी करनी है तो फॉरेंसिक विज्ञान ही एक रास्ता है और दुनिया में कहीं भी फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी नहीं है और आज इजराइल, जो सिक्योरिटी की दुनिया में बहुत माना हुआ नाम है, आस्ट्रेलिया है, कनाडा है, दुनिया के समृद्ध देश हमारी फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी से जुड़कर हमारे हिस्सेदार हैं और हमने वैश्विक स्तर प्राप्त किया है। मित्रो, हिन्दुस्तान में गुजरात एक पहला राज्य है जिसने रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी बनाई है।

मित्रो, आप दिल्ली के अंदर काफी गुस्से में हैं, काफी आक्रोशित हैं। मैं कानून—व्यवस्था को लेकर हर कोई चिन्ता जताता है। मैं इसकी आलोचना करने नहीं आया हूँ, लेकिन मित्रो, क्या रास्ते खोज सकते हैं, क्या है आज कानून व्यवस्था की स्थिति में ज्यादातर क्या होता है। हमारे यहाँ जो पुलिस की भर्ती होती है वह शरीर की साइज में होता है। अगर वह छह फुट का है तो उसकी भर्ती हो गई। 6—8 महीने उसे इधर—उधर दौड़ाते हैं, उसे बंदूक पकड़ा देते हैं। वर्दी में आते ही उसके हाथ में कानून आ जाता है। मित्रो, उसमें बदलाव की जरूरत है। गुजरात में एक परिवर्तन आया है, हमने रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी बनाई है। उस रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी में जो भी सुरक्षा क्षेत्रा में जाना चाहता है वो 10वीं के बाद, 12वीं के बाद वह यह यूनिवर्सिटी को ज्वॉइन कर सकता है और रेग्युलर 3 साल के, 5 साल के कोर्स के विषय पढ़ाए जाते हैं। उसे मॉक मनोविज्ञान भी पढ़ाई जाती है। उसे कानून भी बताया जाता है, उसे संविधान भी पढ़ाया जाता है और वह यहाँ से निकलने के बाद पुलिस सर्विस की भर्ती में जाकर खड़ा होगा। आज गुजरात का जो पुलिस बल है वह हिन्दुस्तान का सबसे नौजवान पुलिस बल है।

हमने बड़ी मात्राा में 20, 22, 25 साल के नौजवानों को भर्ती किया है और उसमें प्रौद्योगिकी हुनर भी है। मेरे यहाँ का कांस्टेबल स्तर का पुलिस वाला टेक्नो के लोग भी दक्षता प्राप्त हैं। मेरी पुलिस टीम तकनीकी दक्षता प्राप्त है।

यानी हम किस प्रकार से बदलाव लाते हैंमित्रो हमने सबसे पहले देश में एक यूनिवर्सिटी शुरू की है, वह है प्दकपंद प्देजपजनजम वज्मिंबीमत म्कनबंजपवदण् मित्रो, आज हमारे देश में से प्प्ड हैं, यहाँ से ब्म्व् निकलते हैं और कैम्पस इंटरव्यू होकर दुनिया की तमाम कंपनियों में नियुक्त किए जाते हैं। लेकिन आज आप किसी भी परिवार को पूछोगे कि आप की एक इच्छा बता दीजिए कि क्या है, कितना ही धनी इंसान क्यों न हो, उसकी एक ही इच्छा होती हैमेरे बेटे और बेटी की अच्छी शिक्षा चाहिए, अच्छा शिक्षक चाहिए। हर माँ—बाप अरबों—खरबों का मालिक क्यों न हो, उसे अपने बच्चे के लिए अच्छा शिक्षक चाहिए, मित्रो, क्यों न हम वैज्ञानिक ढंग से अच्छे शिक्षक तैयार करें। हमने इस प्रकार की यूनिवर्सिटी शुरू की है कि अगर कोई शिक्षक बनना चाहता है तो उसकी 12जी के बाद पूरी तरह शिक्षक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिक्षक बनकर आएगा। मित्रो आज पूरी दुनिया को मिलियनों शिक्षक की आवश्यकता है। हिन्दुस्तान के पास नौजवानों की फौज है। हम सबकुछ निर्यात करते हैं, क्यों न हम शिक्षक निर्यात करें। मित्रो, मैं साफ कहता हूँ। एक व्यापारी आता है, दुनिया को माल निर्यात करता है या व्यापार करता है तो वह डॉलर व पाउंड पर कब्जा करता है, लेकिन अगर एक शिक्षक जाता है तो पूरी पीढ़ी पर कब्जा करता है। ये ताकत है। मित्रो, भारत को उस रूप में देखना चाहिए। इस विजन के साथ हमें अपने एक कोने में फँसाए रखने की आवश्यकता नहीं है। उसी प्रकार से मित्रो, औद्योगिक विकास में हम इसलिए पिछड़ रहे हैं कि हमने तकनीक पुनर्नवीनीकरण में ध्यान नहीं दिया। मित्रो, एक समय था गुजरात में अहमदाबाद मानचेस्टर ऑफ इंडिया कहलाता था। कपड़े की मिलें इतनी ज्यादा मात्राा में थीं, जहाँ कपड़े के मिलों की बड़ी—बड़ी चिमनियाँ दिखती थीं कुछ दशकों पूर्व वह पूरा उद्योग नष्ट हो गया, आज से 30—40 साल पहले। कारण क्या कि लोगों को कपड़े की जरूरत नहीं थी क्या? जरूरत तो थी, बाजार बहुत बड़ा था लेकिन तकनीक पुनर्नवीनीकरण न करके विश्व प्रतियोगिता के सामने जो करने की जरूरत थी वह न कर पाए। मित्रो, हिन्दुस्तान को बदलती दुनिया में अपनी जगह बनानी है तो मित्रो तकनीकी पुर्ननवीनीकरण अति आवश्यक है।

आज सारे विश्व का ध्यान हिन्दुस्तान की तरफ है क्योंकि उन्हें लगता है हिन्दुस्तान एक बहुत बड़ा बाजार है। तभी देशों को लगता है कि हम अपनी चीजें यहाँ खपा सकते हैं। हम हिन्दुस्तान के अन्दर आसानी से माल बेच सकते हैं। मित्रो, समय की माँग है कि हम तय करें कि हम पूरे विश्व को बाजार बनाएँगे और हम उत्पाद क्षेत्रा की दुनिया का नेतृत्व करेंगे और दुनिया के बाजार में अपना माल खपाएँगे और इसके लिए मित्रो, ब्रांडिंग जरूरी होता है। आप तो मित्रो शायद आपके वो नसीब नहीं आया लेकिन हम जिस आयु के हैं, हम जब छोटे थे तब बाजार में डंकम पद श्रंचंद सुनते ही समझ लिया करते थे कोई पूछता नहीं था किस कम्पनी का उत्पाद है। कभी कम्पनी का नाम नहीं था, क्यों न मित्रो हम दुनिया के बाजार में डंकम पद प्दकपं का ढोल पीट दें। लेकिन ये ब्रांडिंग करने के लिए एकाध विषय नहीं होते, कई प्रकार के विषय होते हैं। अब देखिए आप में से किसी को इन दिनों जापान जाने का अवसर मिला हो, मैं अभी मेरे गुजरात में विधानसभा चुनाव के पहले (अगस्त—सितम्बर, 2012) जापान सरकार के निमंत्राण पर जापान गया था। मैं हैरान था, होटल गए तो क्रॉकरी में भी एक स्लोगन लिखा है। बिस्किट आते हैं तो उस पर भी ैसवहंद लिखा है। घूमने का टिकट लेते हैं तो उस पर भी एक स्लोगन है। कोई ऐसी जगह नहीं होगी जहाँ एक स्लोगन न लिखा हो। स्लोगन क्या है आज से आठ साल बाद ओलंपिक

का आयोजक जापान है। आठ साल बाद ओलंपिक होने वाले है। उसकी तैयारी करने के लिए हर जगह पर लिखा है ॅम ंतम ूंजपदह वित व्सलउचपबण् ॅम ंतम त्मंकल वित व्सलउचपबण् (हमें ओलंपिक का इंतजार है, हम ओलंपिक के लिए तैयार हैं।) क्या माहौल खड़ा किया है। ओलंपिक जब आए तब आए लेकिन ओलंपिक के माध्यम से देश में एक खेल का माहौल पैदा किया जा रहा है। हमारा उल्टा क्या हुआ! मित्रो, दुनिया इन अवसरों को किस प्रकार से उठाती है। जिन लोगों ने दक्षिण कोरिया के विकास का अध्ययन किया होगा। मैं मानता हूँ मित्रो आप लोग जिस क्षेत्रा में पढ़ते हैं, मैं आप लोगों से आग्रह करूँगा कि आप समय लेकर के दक्षिण कोरिया के विकास पूरे वातावरण का अध्ययन करें। जैसा, मित्रो, वह देश जिसे हमारे बाद में आजादी मिली है। तृतीय विश्व में सबसे नीची श्रेणी का देश था उसने दुनिया में ओलंपिक को होस्ट किया था और मित्रो, जब साउथ कोरिया ने जब ओलंपिक का आयोन किया, सारी दुनिया की आँखें फट गई थीं और वह ज्नतदपदह च्वपदज था। सारे विश्व के लोगों ने दक्षिण कोरिया के लोहे को स्वीकार कर लिया और बाकी सब चीजें दुनिया के अंदर प्रवेश कर गर्इं। मित्रो, हमारे यहाँ कॉमनवेल्थ गेम्स हुए। इसका आयोजन क्यों किया, करने वालों को मालूम नहीं। यह 100 करोड़ का देश एक आयोजन से पूरे देश का कैसे ब्रांडिंग कर सकता है और मित्रो अगर वैश्विक तौर पर देखना है तो करना पड़ेगा। और उस अर्थ में मैं कहना चाहता हूँ मेरे गुजरात का वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन एक प्रयास है।

आज जब मैं आपके बीच आ रहा था तब इस हाल में अन्दर आते वक्त मैंने जैन साहब से पूछा, यहाँ उपस्थित युवा छात्रा क्या सुनना चाहेंगे? जो विषय उन्होंने कहा वह भी मैं यहाँ चाहता हूँ। उन्होंने मुझसे कहा कि आप हमें अपना ग्लोबल रिवेलेन्स समझाइए। मित्रो, आपको यह जानकर खुशी होगी कि मैं दिसमब्र माह के अंत तक चुनाव में व्यस्त था। दिसम्बर के आखिरी हफ्ते में मेरा शपथ हुआ और 11 जनवरी 2013 को मैंने वाइब्रेंंट समिति आयोजित की। मेरे पास 10 दिन थे और मित्रो, मुझे उस मेरी टीम की दक्षता पर भरोसा था। गर्व से कहता हूँ 121 देश इसमें सम्मिलित हुए। मित्रो, दुनिया के 121 देश एक ही छत के नीचे हों और हिन्दुस्तान के सभी के सभी उद्योगपति वहाँ उपस्थित हों। एक प्रकार से देश के सकल घरेलू उत्पाद का 50÷ एक छत के नीचे हो और जब यह दृश्य दुनिया देखती है तो उन्हें विश्वास होता है, उन्हें भरोसा होता है कि हममें दम है। वे हमसे जुड़ सकते हैं। और एक बार हमारा प्रभाव चल पड़ता है, हमें कोई रोकने वाला नहीं है। मित्रो, आज यह लाभ गुजरात को मिल रहा है और गुजरात हिन्दुस्तान का एक वह इलाका है जो देश की सेवा कर रहा है। यह कोई गुजरात की जेब में नहीं जा रहा, यह देश की जेब में जा रहा है। अगर हम मेहनत करके नमक पैदा करते हैं तो आपमें से कोई नहीं होगा जिसने गुजरात का नमक न खाया हो। काम भले ही होता गुजरात में हो भला पूरे देश का होता है वैसे भी हमारा मंत्रा है‘भारत के विकास के लिए गुजरात का विकास' और उसी तर्क पर हम कार्य कर रहे हैं।

मित्रो, हमने एक और चीज पर गुजरात में बल दिया है और वो है उत्पाद क्षेत्रा में दो चीजों पर सबसे पहले काम करना चाहिए। हम जो भी उत्पादन करें व शून्य खराबी आग्रह होना चाहिए और अगर हमें वैश्विक स्तर का खड़ा करना है तो शून्य खराबी हमारी पहली शर्त होगी और दूसरी शर्त होती है पैकिंग।

मित्रो, कभी—कभी अच्छी चीज भी पैकिंग की खराबी के कारण बाजार में पिछड़ जाती है। पैकिंग कभी—कभी ऐसी होती है जब तक पहुँचाई जाए तब तक बक्सा टूट गया होता है। मित्रो, आप को जानकर हैरानी होगी, पंडित नेहरू के जमाने में एक कमीशन बैठा थाहाथी कमीशन। इस कमीशन के अध्यक्ष जय शुक्ला हाथी थे इस कमीशन का मुख्य कार्य इस बात का अध्ययन करना था कि किस प्रकार से आयुर्वेद उत्पाद को कैसे प्रचारित किया जाए। इतनी बढ़िया हमारी प्राकृतिक औषधि है, उसको प्रचारित कैसे किया जाए। मित्रो, देखो आज हर्बल दवा के उत्पादन में चीन सबसे अग्रणी उत्पादक है। जबकि हमारे पूर्वजों का आयुर्वेदिक दवाइयों में बहुत बड़ा योगदान है पर विश्व व्यवस्था में आज हमारा कोई स्थान नहीं है। लेकिन हाथी कमीशन की रिपोर्ट बहुत रोचक है। उसके पहले पेज पर लिखा है कि आयुर्वेद तब तक लोकप्रिय नहीं होगा जब तक कि आयुर्वेद उत्पाद के पैकेजिंग में कोई वैज्ञानिक परिवर्तन नहीं लाते। पहले क्या होता था आयुर्वेद की दवाई एक पुड़िया में होती थी पर अब आयुर्वेद की दवाइयाँ एक टैबलेट के रूप में हैं। पैकेजिंग के साथ जब से बदलाव के साथ बाजार में आई हैं। हमारे देश में भी आयुर्वेद चर्चित हो गया। मित्रो, हमें पूरे विश्व की जो एक उपभोक्ता का मनोविज्ञान है एक खरीदार का मनोविज्ञान है। उस मनोविज्ञान का अध्ययन करके हमने हमारे उत्पाद को विकसित किया है।

मित्रो, मैं मानता हूँ सारी दुनिया के हमारी ओर आकर्षित होने की सम्भावना है और उसको लेकर हम आगे बढ़ सकते हैं। भाइयो—बहनो, यह वर्ष 2013 को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती का 150वाँ वर्ष है। इसे सारा देश मना रहा है। गुजरात सरकार भी विवेकानंद जी की 150वीं जयंती को मना रही है। हमने इसे युवा वर्ष के रूप में घोषित किया है। मित्रो, हमें यह तय करना है कि हम युवाओं को किस नजरिये से देखते हैं। मुझे चिन्ता हो रही है कि हमारे देश का एक तबका और ज्यादातर राजनीतिक दुनिया के लोग उनके दिमाग में हमारे देश का युवा सिर्फ एक नई उम्र का मतदाता है और अगर यही सोच रही, मैं नहीं मानता हूँ हम स्थितियों को पलट सकते हैं। मैं उसी परम्परा से आ रहा हूँ राजनीति के उसी अखाड़े से आ रहा हूँ, लेकिन मेरी सोच भिन्न है। मैं चाहूँ मेरा देश मेरे इन नौजवानों को सिर्फ नई उम्र का मतदाता न माने।

वो स्वीकार करे कि ये हमारे युवा नई उम्र की शक्ति हैं, अगर नई उम्र की शक्ति हैं तो फिर उनकी तरफ देखने का, उनकी शक्तियों का उपयोग करने का दृष्टिकोण पलट जाएगा।

मित्रो, स्वामी विवेकानंद ने जो सपना देखा था मैं उसे साफ तौर पर देख रहा हूँ कि मेरी भारत माता, एक दिन जगद्‌गुरु के स्थान पर विराजमान होगी, विश्वगुरु के रूप में मैं अपनी माँ को देख रहा हूँ और एक बार मेरी भारत—माता पूरी शक्ति के साथ, समृद्धि के साथ, समर्थ के साथ विश्व का नेतृत्व करे।

नौजवान दोस्तो मेरी विवेकानंद के शब्दों के प्रति बड़ी श्रद्धा है। उन्हें यह बात कहे 125 वर्ष हो गए। उनका आज हम 150वाँ जन्म वर्ष मना रहे हैं। उन्होंने 25 वर्ष की आयु में यह विचार प्रकट किया था, मित्रो, उनके प्रति हमारा दायित्व नहीं है कि हम उनकी 150वीं जयंती पर उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प करें। क्या हम लोगों का दायित्व नहीं है कि पूरे विश्व में डंका बजाने वाले इस महापुरुष ने जो कहा है कि उसको चरितार्थ करने के पीछे जो थोड़ी मेहनत करें तो हम दुनिया को पलट सकते हैं। मित्रो, आज समय की माँग है कि जब हम स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती मना रहे हैं तब और भारत की युवा शक्ति के भरोसे हम भव्य दिव्य भारत के निर्माण का सपना देख करके आगे बढ़ सकते हैं और मित्रो, आगे बढ़ने के लिए जिन बातों पर बल देने की आवश्यकता उस पर पूर्ण ध्यान केन्द्रित करें। मुझे लगता है, सारा विश्व कहता है 21वीं सदी हिन्दुस्तान की सदी है, कोई कहता है 21वीं सदी एशिया की सदी है, कोई कहता है 21वीं सदी चीन की सदी है। मित्रो! मैं कहता हूँ 21वीं सदी हिन्दुस्तान की सदी है। इस बात पर हमारा भरोसा इसलिए है कि जब—जब मानव ने ज्ञान युग में प्रवेश किया है तब—तब भारत ने मानव समाज का नेतृत्व किया है और 21वीं सदी ज्ञान की सदी है और इस पर मेरा पूरा भरोसा है कि 21वीं सदी हिन्दुस्तान की सदी बन सकती है। मित्रो, 21वीं सदी को बनाने का सामर्थ्य हमारे युवाओं में है।

हम भाग्यवान हैं कि 21वीं सदी में हमारे पास विश्व के सर्वाधिक नौजवानों की फौज वाला हिन्दुतान है, यह दूसरा मंत्रा था। तीसरा मंत्रा है हम लोगों की पहचान क्या थी, पूरा विश्व हमको क्या मानता था और अभी नहीं मित्रो, 10—15 साल पहले तक दुनिया की यही मान्यता थी कि हिन्दुस्तान यानी साँप—सपेरों का देश, हिन्दुस्तान यानी भूत—प्रेत की जमात, हिन्दुस्तान यानी काला जादू। यही थी हिन्दुस्तान की पहचान। मित्रो, हमारे नौजवानों ने, 20, 22, 24 साल के नौजवानों ने विश्व के पटल पर हिन्दुस्तान की छवि को बदल दिया। एक बार मैं ताइवान गया। ताइवान में मेरे साथ एक ताइवानी साथी उद्योगपति था। यह बात मैं 15 साल पहले की कर रहा हूँ जब मैं मुख्यमंत्राी नहीं था। वह मेरे साथ रहता था। मेरा 5—6 दिन का दौरा था। आखिरी दिन जब उसका मेरे से परिचय बढ़ गया तो उसने मुझसे पूछा कि अगर आप को बुरा न लगे तो एक सवाल पूछ सकता हूँ? मैंने कहा, पूछिए। उसने कहा, आज भी आपके देश में साँप—सपेरों वाली दुनिया है? क्या अभी भी आपके यहाँ भूत—प्रेत की दुनिया चल रही है? क्या अभी भी आपका देश काले जादू में डूबा हुआ है? वह बेचारा उन्हीं चीजों को जानता था। मैंने कहा, नहीं, अब हम सपेरे नहीं रहे। हमारा काफी बदल गए हैं। उसने कहा, मतलब। मैंने कहा हमारे पूर्वज तो सपेरे हुआ करते थे। लेकिन आज हम चूहे पकड़कर घुमाते हैं। और नौजवान मित्रो, आज मेरे भारत का नौजवान कम्प्यूटर के माउस पर हाथ रखकर पूरी दुनिया को हिलाने की ताकत रखता है। ये ताकत मेरे देश के नौजवान में है। मित्रो, अंगुली के भरोसे पूरे विश्व में पहचान बनाने का काम मेरे देश के 20—22—24 साल के नौजवानों ने किया। यह किसी नेता ने नहीं किया है। विश्व को नए नजरिये से भारत को देखने को मजबूर किया है।

मित्रो, अगर आप को याद हो जब अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन यहाँ आए थे, यहाँ से उनका एक टूर जयपुर के लिए बना था। वे जयपुर के एक गाँव में गए और उस गाँव में महिलाएँ किस प्रकार एक कॉ—आपरेटिव सोसाइटी चलाती हैं। कैसे घूँघट डालकर कम्प्यूटर चलाती हैं। घूँघट डालकर कारोबार चला रही थी क्लिंटन को उस गाँव में ले जाया गया और उसका टेलीविजन में सीधा प्रसारण चल रहा था। वैसे भी जब विदेश के लोग आते हैं तो हम लोग ज्यादा ही जज्बाती हो जाते हैं। वहाँ सुरक्षा के बड़े व सख्त इंतजाम थे। उस गाँव के भी चुने हुए पंच को आई—कार्ड दिए गए। वही लोगों के साथ—साथ चलते थे। और सबको कड़े निर्देश थे कि क्लिंटन इस मिनट यहाँ जाएँगे। इस मिनट वहाँ जाएँगे। अगर आपने सीधा प्रसारण देखा होगा तो आपको ध्यान में होगा। मित्रो, यह घटना बड़ी प्रेरणा देने वाली है। जब क्लिंटन वहाँ गए, उन्होंने कम्प्यूटर पर महिलाओं को अपना हिसाब—किताब करते देखा। उन महिलाओं ने घूँघट ओढ़ा हुआ था। वहाँ का पंच दलित माँ का बेटा था। पंचायत में चुना हुआ एक व्यक्ति, वो लपक के क्लिंटन के पास पहुँच गया। गाँव वाले बड़े नाराज हो गए। यह कैसे वहाँ पहुँच गया और वह क्या बात करेगा। उसे अंग्रेजी तो आती नहीं और वह इज्जत खराब कर देगा और यह व्यक्ति क्लिंटन के सामने खड़ा होकर उनकी आँखों से आँखें मिलाकर बोलने लगा। सारे गाँव के लोगों के आँख—कान खड़े हो गए थेक्या कह रहा है। लोगों को लगा यह वीजा—वीजा माँगता होगा। किसी को लगा, बेटे के लिए नौकरी माँगता होगा, किसी को लगा, गाँव के लिए पैसे माँगता होगा।

मित्रो, यह गरीब दलित माँ का अनपढ़ बेटा विश्व की सत्ता के महानायक के सामने खड़ा होकर कहता है और पूरे विश्व ने इसे टीवी के माध्यम से देखा था, उनसे पूछता है कि मि. क्लिंटन, क्या आप अभी भी मेरे देश को पिछड़ा हुआ मानते हो? गरीबी में डूबा हुआ मानते हो? अंधश्रद्धा में लिप्त मानते हो?

उन्हें जब दुभाषिये ने अंग्रेजी में बताया कि वह क्या कह रहा है। क्लिंटन का चेहरा इधर—उधर हो गया और उन्होंने कहानहीं, मैं अब ऐसा नहीं मानता हूँ और मैं दुनिया में जहाँ जाऊँगा, मैं हिन्दुस्तान क्या है दुनिया को बताऊँगा।

मित्रो, हमारे नौजवानों में एक सामर्थ्य है। मित्रो, हमारी चमड़ी का रंग कुछ भी हो हम दुनिया से कम नहीं हैं। यहाँ आप को विश्वास की आवश्यकता है और विश्व के सामने आँख से आँख मिलाकर काम करने की आवश्यकता है। मित्रो, तीन चीजों पर बल देने का मंत्रा मेरा रहता है, अगर 21वीं सदी में हमें चीन से प्रतियोगिता करनी है, अगर हमें 21वीं सदी के अवसरों पर कब्जा करना है और दुनिया में पूरी ताकत के साथ खड़ा होना है तो मित्रो, मेरा मत है कि हमें क्षमता—विकास बल देना होगा। दूसरा मित्रो हमारा माप या मापन बड़ा होना चाहिए और तीसरी बात हमारी गति ;ैचममकद्ध तेज होनी चाहिए। ैापससए ैबंसम ंदक ैचममक इन तीन चीजों को हमें आत्मसात करने की आवश्यकता है। मित्रो, आज हमारे नौजवानों के पास मस्तिष्क है, इरादा है, भुजाएँ हैं लेकिन क्षमता ;ैापससद्ध के अभाव में वो विकास की यात्राा में हिस्सेदार नहीं बन सकते। हमने गुजरात के अंदर क्षमता विकास ;ैापसस कमअमसवचउमदजद्ध का अभियान चलाया है। लाखों नौजवानों के क्षमता विकास के लिए बजट में फंड रखा है और यह भारत में इतनी बड़ी मात्राा में कहीं नहीं हो रहा है जितना गुजरात में हो रहा है। और क्षमता विकास का नजरिया भी देखिए। हमने अपने अफसरों को कहा ऐसा करो, जन्म से मृत्यु तक मनुष्य को किन—किन चीजों की आवश्यकता होती है उसकी सूची बनाइए तो ध्यान में आया एक हजार चीजें ऐसी हैं जिसकी हर व्यक्ति को जरूरत होती है। यह तो ऊपरी वा सरसरी नजर से बनाया है। मैंने कहा, अगर एक हजार चीजों की जरूरत है तो मतलब एक हजार क्षमता की जरूरत है तो हमने उन हजार प्रकार की क्षमता विकास चाहिए। मित्रो, आज हम अपने राज्य में अलग—अलग प्रकार के अनेक क्षमता विकास कार्यक्रम को लेकर चल रहे हैं। फिर मित्रो, गति हम ऐसे काम कर रहे हैं। कागज पर दो—दो साल निकाल देते हैं।

मित्रो, आप सब लोग इस क्षेत्रा के विद्यार्थी हो और मेरी एक सोच है गवर्नमेंट का काम व्यापार करना नहीं है। मित्रो, कम—से—कम सरकार अधिक—से—अधिक कार्यए इसके बिना कोई चारा नहीं है। मित्रो, आप नैनो कार की घटना से परिचित हैं। आपने घटना अध्ययन के विषय में जाना होगा। लोग कहते हैं रतन टाटा कहते हैं कि हम गुजरात गए मिनटों में हमारा काम हो गया। मैं एक और घटना बतलाना चाहता हूँ। मैं ज्यादा समय नहीं ले रहा हूँ। आप लोग बतलाइए तो आगे बढ़ूँ । मित्रो, एक दिन मेरे ऑफिस में एक नौजवान आया। बड़ा प्रेजेन्टेबल भी नहीं था, अपनी बात रख पाने में भी कमजोर था और वह वास्तविक भारतीय था, लेकिन उसका जन्म अफ्रीका में हुआ था। बाद में वह कनाडा शिफ्ट कर गया था। वहीं पर बड़ा हुआ था।

मूलरूप से गुजराती था। मुझे मिलने आया। पाँच—छः मिनट से अपनी बात बता रहा था। लेकिन मुझे कुछ जम नहीं रहा था। मेरी उसकी कैमिस्ट्री मैच नहीं हो रही थी। मुझे लगा यह मेरा समय बरबाद कर रहा है। मैं बिल्कुल सही बात बता रहा हूँ। दोस्तो, आपसे झूठ क्यों बोलूँ। दोस्तो, मैंने कहा यह जल्दी जाए तो अच्छा हो। मैंने कहा ऐसा करो भाई, आप को जो काम है आप बड़ोदरा आओ वहाँ के कलेक्टर को मिलो और उसके लेबल पर यह काम हो जाए। अगर कोई परेशानी हो तो मुझे बता देना। एक प्रकार से मैंने उसे टाल करके निकाल दिया चूँकि मेरे राज्य में प्रोफेशनलाइजेशन होने के कारण उस कलेक्टर को सूचना दे दी थी कि एक ऐसा नौजवान आएगा। उसे कुछ काम है, देख लेना लेकिन मैंने हाय—तौबा करके उससे छुट्‌टी ली। 13 महीने के बाद एक दिन एक सज्जन मेरे ऑफिस में फिर आए और मेरे च्। ने मुझसे आकर कहा कि इस नाम का कोई व्यक्ति मुझसे मिलने आया है। मैंने सोचा यह वही व्यक्ति होगा। मैंने च्। से कहा, पूछो यह पहले भी आया था। मैंने च्। से कहा यह समय खराब करोगा। तभी मेरे च्। ने कहा, वह निमंत्राण देने आया है। मैंने कहा, निमंत्राण। और च्। को उसे बुलाने को कहा तो मुझसे आकर उसने कहा, साहब, मैं आपके कहने पर कलेक्टर साहब से मिला था। अब मेरी फैक्ट्री बन गई है, आपको उद्‌घाटन करना है। मित्रो, मैं हैरान था जो व्यक्ति मुझे मिला, मुझे उसमें कोई दम नहीं लगा, वह कह रहा है मेरी फैक्ट्री बन गई है। उसका मेरे मन पर इतना प्रभाव पड़ा कि मैंने उससे कहादोस्त मैं तेरी फैक्ट्री के उद्‌घाटन में अवश्य आऊँगा। उसने मुझे कहासाहब, आपको छः महीने बाद दुबारा आना पड़ेगा। मैंने कहा, क्यों? उसने कहा अभी तो फैक्ट्री का उद्‌घाटन है। छः माह बाद हम अपना पहला उत्पाद लांच करेंगे तब भी आपको आना है। मैंने कहा मेरा आने का क्या मतलब है? पर तुम कह रहे हो तो आ जाऊँगा। मेरे नौजवान मित्रो, आप को जानकर आश्चर्य होगा। एक व्यक्ति जो मुझे पहली बार मिलता है वह 13 माह बाद अपनी फैक्ट्री के उद्‌घाटन पर निमंत्राण देने आता है और छः माह बाद उत्पाद लांच करने का वादा करने आता है और मैं उद्‌घाटन करके आया फिर छः माह बाद दुबारा गया और मित्रो, मैंने क्या उत्पाद लांच किया आप दिल्ली में जिस चीज पर गर्व करते हैं उस मैट्रो ट्रेन का कोच मैंने भेजा था। आप कल्पना कीजिए गति की एक व्यक्ति मैप देख रहा है कि किस इलाके में जाऊँ वहीं दूसरा 19 महीनों में मैट्रो ट्रेन का कोच बनाकर दिल्ली को भेज देता है और आज जो मैट्रो के जितने कोच बनकर आ रहे हैं वे सभी गुजरात से बनकर आ रहे हैं। मित्रो, जब तक हम गति पर काम नहीं करेंगे। होती है, चलती है, देखेंगे, करेंगे, दुनिया हमारा इंतजार नहीं करेगी।

दुनिया आगे चली जाएगी और इसलिए हमारी पूरी शासन व्यवस्था में सोच में बदलाव लाना होगा और मापन भी छोटे स्तर पर काम नहीं होगा बहुत बड़े मापन पर अगर आप को मौका मिले तो गांधीनगर आप वहाँ एक महात्मा मंदिर बना है, हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा कम्वेन्शन सेंटर बना है और उसे मुझे बनाने में 162 दिन लगे। यह हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर है। मित्रो, मापन ;ैबंसमद्ध इतना बड़ा होना चाहिए कि आप अंदाज कर सकते हैं। इसके लिए आवश्यकता है कि हम इन चीजों पर बल देते हुए विकास की यात्राा को आगे बढ़ाएँ। और एक बात निश्चित है मित्रो, सभी समस्याओं का समाधान विकास के पथ पर चलेंगी तो इस देश में बहुत बड़े बदलाव आ सकते हैं। मित्रो, मैं फिर से कहता हूँ मैं उन इंसानों में हूँ जिसको यह गिलास पूरा भरा हुआ दिखता है, आधा पानी से भरा हुआ आधा हवा से भरा है। मैं उन आशावादी इंसानों में हूँ और मैं साफ देख रहा हूँ जो सपना स्वामी विवेकानंद जी ने देखा था वह सपना जरूर साकार होगा, इसी नौजवान पीढ़ी के माध्यम से होगा और फिर एक बार भारत माता जगत गुरु के स्थान पर विराजमान होंगी। आप सबके बीच आज मुझे मौका मिला। सब नौजवानों से बात करने का अवसर मिला। मैं आपका बहुत—बहुत आभारी हूँ। धन्यवाद।

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