कजरी Dharm द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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कजरी

कजरी

शहर के किनारे एक कालोनी में एक पांडे जी नाम एक आदमी रहता था, वो जाति से पांडे नही था लेकिन लोगों ने ये पांडे नाम उसका उपनाम रख लिया था. वह एक बैल्डिंग की दुकान पर काम करता था. आदमी तो आम मिजाज का था लेकिन एक आदत उस में सबसे बुरी थी वो थी दारु पीने की, जिसे वो रोजाना को पीता था, ये पीना उसे उसके असली रूप में न आने देता था.

उसके साथ उसकी पत्नी और उसके चार बच्चे भी रहते थे, उनमे दो लडकी और दो लडके थे. सबसे बड़ी लडकी का नाम कजरी था, करीब के एक स्कूल में पढने जाती थी और पढाई में अच्छी भी थी. कालोनी में पांडे का घर सबसे अंत में था. कजरी की उम्र करीबन सत्रह से ऊपर की होने को आई, उसका रंग थोडा साफ़ था और दिखने में आम लडकियों जैसी थी.

कजरी को देख मोहल्ले के कुछ लडके उस पर फ़िदा हो बैठे लेकिन कजरी को इन सबसे कोई मतलब नही था, वो तो उन्हें एक कालोनी के आम लडको की तरह देखती थी. काफी बार ये हुआ कि उन लडकों ने कजरी से अपने इश्क का इजहार करना चाहा लेकिन कजरी ने इन सब बातों को इतनी तजरीह न दी, लडकों को ये बात बड़ी बुरी लगी.

और एक दिन वो हुआ जिसकी उम्मीद किसी ने नही की थी, पांडे रोजाना की तरह दारू पीकर आया और खाना खाकर सो गया, घर के अन्य लोग भी सो रहे थे. गर्मियों के दिन थे, कजरी और उसके भाई बहिन सब छत पर सो रहे थे. रात के कोई बारह बज रहे थे, तीन लोग अचानक कजरी की छत पर चढ़ आये. तीनों के मुंह पर नकाब था, उन्होंने आकर कजरी को सोते से ही उठा लिया और उसका मुंह बंद कर उसे ले जाने लगे.

कजरी को एकदम से समझ न आया कि ये हो क्या रहा है, फिर उसे उस भयानक परिणाम का आभास हुआ, उसने उन लडकों के चंगुल से निकलने के लिए अपने हाथ पैर मारने शुरू कर दिए, लेकिन कोमल कजरी उन राक्षसों से अपने को न छुड़ा सकी.

लेकिन उन लडकों की बदकिस्मती से उसका मुंह खुल गया, कजरी ने सीधे नीचे सो रही माँ को आवाज दी लेकिन उन लडकों ने कजरी का मुंह फिर से दबा लिया. परन्तु तब तक कजरी का माँ जाग चुकी थी, उसने जैसे ही छत पर नजर दौड़ाई तो उसके होश उड़ गये.

तीन लडके कजरी को दबोचे छत पर खड़े थे, कजरी की माँ ने घबराकर पांडे यानी कजरी के बाप को जगाया लेकिन पांडे तो दारु पीके मस्त पड़ा था, काफी जगाने के बाबजूद भी पांडे न जगा. कजरी की माँ ने हार न मानी, वह लकड़ी की सीढी के सहारे छत पर चढने लगी लेकिन उपर खड़े बदमाश लडको ने सीढी को पीछे धकेल दिया, कजरी की माँ सीढी के साथ उलटी गिर पड़ी.

कजरी ने माँ को गिरता देख अपनी सारी शक्ति इकट्ठी की और उन तीन में से एक लडके का मुंह अपने नाखूनों से खरोंच दिया, वो लड़का अपने मुंह को पकड़कर वहीं बैठ गया.

इधर नीचे से कजरी की माँ ने अपनी बेटी को घिरते देखा तो हल्ला करना शुरू कर दिया, वह जोर जोर से ‘बचाओ बचाओ’ की आवाजें लगाने लगी, उन लडकों में से एक बोला, “देख लेना इस लडकी को उठाकर ले जायेगे और हाँ अगर पुलिस में रिपोर्ट की तो पूरे घर को मार डालेंगे, आज तो जा रहे हैं लेकिन फिर जल्दी ही आयेगे.”

इतना कह वो लडके वहां से भाग गये, भयभीत कजरी और उसकी माँ एक दूसरे से लिपट खूब रोये, दोनों के दिल में आज हुई घटना से बहुत गहरा आघात पहुंचा था.

सुबह हुई, चारो तरफ लोगों ने सुना, लोगों ने उन्हें यह राय भी दी कि पुलिस में शिकायत दर्ज करा दो लेकिन कजरी और उसकी माँ इस के लिए तैयार न थी. सोचती थी कहीं उन लोनो ने दोबारा खिसिया कर हम पर हमला किया तो क्या करेंगे, पुलिस क्या हर समय हमारे पास बैठी रहेगी.

कजरी का पढने जाना बंद कर दिया गया, उसका प्राइवेट तौर पर एड्मिसन करा दिया गया था, माँ और कजरी काफी दिनों तक एक जगह सोये, काफी रातें डर के मरे जाग जाग कर काटी.

लेकिन उसके बाद कोई लड़का उनके यहाँ न आया, धीरे धीरे सब कुछ सामान्य होता चला गया, किन्तु अब कजरी की माँ को कजरी की शादी की बहुत जल्दी पड़ी है क्योंकि वो समझती है कि जितनी जल्दी बेटी ससुराल चली जाय उतना बढिया है. हजारों ऐसी ही कजरी रोजाना भय से युक्त हो जाती है लेकिन सब चुपचाप अपने जीवन को जीती चली जाती है, शायद कभी उनके लिए सब कुछ अच्छा हो जाय.

[समाप्त]